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शरीर की जैविक घड़ी बिगडऩे से अवसाद का खतरा

यदि आप अवसाद, चित्त की अस्थिरता या अकेलेपन से जूझ रहे हैं तो यह समस्या आपके शरीर की जैविक घड़ी के जुड़ी हो सकती है। ‘द लैंसेट साइकेट्री’ नामक पत्रिका में प्रकाशित एक शोध में कहा गया है कि शरीर की आंतरिक घड़ी की लय में गड़बड़ी खुशी की कमी व स्वास्थ्य संतुष्टि व खराब संज्ञानात्मक कार्य से जुड़ी हुई है।

हमारी 24 घंटे की जैविक घड़ी मूल शारीरिक और व्यावहारिक कार्यों को नियंत्रित करती है, जिसमें लगभग सभी जीवों में शरीर के तापमान के साथ खाने की आदतें शामिल होती हैं। यह व्यवधान या बाधाएं आराम की अवधि के दौरान ज्यादा सक्रियता या दिन के दौरान असक्रियता से जुड़ी होती हैं।

ग्लासगो विश्वविद्यालय के शोध के लेखक लौरा लाइल ने कहा, हमारे निष्कर्ष बदलते दैनिक शारीरिक जैविक घड़ी की लय और मनोदशा विकारों और अच्छी अवस्था के बीच संबंध दिखाते हैं।

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