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स्कूलों के अवकाश में बच्चों का यूं रखें ध्यान

बच्चों के साथ कम से कम एक वक्त का खाना जरूर खाए। उन्हें भोजन का मूल्य और किसान की कड़ी मेहनत के बारे में बताएं। भोजन व्यर्थ करने से रोकें।

उन्हें स्वयं अपनी थाली धोने दें। इससे बच्चे मेहनत का सम्मान करना सीखेंगे।
उन्हें भोजन बनाने में आपकी सहायता करने दें। उन्हें सब्जी व सलाद बनाने दें।

अंग्रेजी के कम से कम ५-५ शब्द रोज याद करवाएं एवं एक कॉपी में लिखवाएं।
कम से कम ३ पड़ोसियों से मिलिए एवं उनसे अच्छी पहचान बनाएं।

दादा-दादी या नाना-नानी से मिलने जाइए और बच्चों को उनसे खुलकर मिलने दीजिए। उनका प्यार और संवेदनात्मक सहारा आपके बच्चे के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनकी फोटो खींचिए।
अपने कार्य करने के स्थान पर बच्चों को ले जाइए और उसे समझने दीजिए कि आप अपने परिवार के लिए कितनी कड़ी मेहनत करते हैं।

त्योहार मनाना और बाजार जाना बिल्कूल नहीं भूलेंं।
बच्चों को सब्जी की बगीची लगाने की प्रेरणा दें, साथ ही पेड़ पौधों की जानकारी भी देेें।

आप अपने बचपन का और अपने परिवार का इतिहास अवश्य बताएं।
बच्चों को बाहर मैदानी खेल खेलने की अनुमति दें। चोट खाने दें, धूल में रंगने दें। उन्हें गिरने दें और चोट का अनुभव करने दें।

बच्चों को जीव (पक्षी-मछली) पालने दीजिए।
बच्चों को लोकगीत और आंचलिक गीत व नृत्य की जानकारी दें।

बच्चों के लिए कहानी की किताबें लाएं, जिसमेें रंग-बिरंगे चित्र हो।
बच्चों को चॉकलेट, चिप्स, बिस्किट्स, कोल्ड ड्रिंक्स आदि से बचाएं।

अपने बच्चों की आंखों में देखकर ईश्वर का धन्यवाद करें, इस प्यारे उपहार के लिए। कुछ ही वर्षों में वे नई ऊंचाई को छुएंगे।
बच्चों के साथ प्राकृतिक स्थल, पर्यटन, धार्मिक या ऐतिहासिक स्थल पर भ्रमण पर अवश्य जाएं। एक पालक होने के नाते अपने बच्चों के साथ समय बीताना आवश्यक है।

बच्चों को व्यायाम, मैदानी खेल एवं रूचि के अनुसार कोई नई गतिविधी (तैराकी, सुलेख, संगीत) के पाठ्यक्रम में भाग दिलाएं।

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