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मोटापा घटाने के लिए कैसे-कैसे जतन

मोटापा पूरी दुनिया के लिए आफत की पुडिय़ा बन गया है। दुनियाभर में लोग मोटापे से निजात पाने के लिए खानपान के कुछ सामान्य नियमों और एक्सरसाइज के अलावा कुछ खास उपाय भी आजमाते हैं। डायटीशियन डॉ. प्रीति विजयवर्गीय के मुताबिक, भारत उसी सूची में शामिल है जहां अधिक वजन वाले स्लिम होने के लिए काफी प्रयास करते हैं। इसके लिए यहां के ज्यादातर लोग डाइटिंग को वजन घटाने का जरिया बनाते हैं। इससे उनका वजन तो नियंत्रित होता है लेकिन शरीर में पोषक तत्त्वों की कमी भी हो जाती है। जानते हैं अन्य देशों में किस तरह की गतिविधियों को अपनाया जाता है।

नीदरलैड्स

नीदरलैड्स के 54 फीसदी लोग अपने दैनिक कार्यों, शॉपिंग व ऑफिस जाने के लिए साइकिल का प्रयोग करते हैं। नीदरलैंडवासी हर साल औसत 866 किलोमीटर की दूरी साइकिल से तय करते हैं। यही मोटापे से लडऩे का इनका मूल मंत्र है। सही स्पीड में साइकिल चलाकर हम प्रति घंटे 550 कैलोरी आराम से बर्न कर सकते हैं। यहां के लोग ऑयल फिश को डाइट में शामिल करते हैं जो ओमेगा-3 फैटी एसिड का अच्छा स्त्रोत है।

इंडोनेशिया

य हां के बाशिंदे अक्सर उपवास पर रहते हैं या दिन में कुछ नहीं खाते हैं। एक अन्य परंपरा के अंतर्गत ये कुछ खास दिनों में सिर्फ सादा चावल और पानी लेते हैं। इससे खाने पर रह रहकर ब्रेक लगता रहता है। पाचनतंत्र को आराम मिलते रहने से भोजन का पाचन भी ठीक से हो जाता है।

थाइलैंड

थाई फूड दुनिया में सबसे ज्यादा मसालेदार माना गया है। ‘अमरीकन सोसायटी फॉर न्यूट्रीशन’ के पूर्व अध्यक्ष प्रो. जेम्स हिल बताते हैं, ‘तेज मिर्च वाला भोजन मेटाबॉलिज्म बढ़ाता है। साथ ही भोजन की गति नियंत्रित करता है, इससे आपको पेट भरने का अहसास समय से हो जाता है। जबकि जल्दी-जल्दी भोजन करने पर जब तक आपको पेट भर जाने का अहसास होता है तब तक आप ज्यादा खा चुके होते हैं। ऐेसे में थाइलैंडवासी ऐसा भोजन करके ज्यादा खाने से बच जाते हैं।

पोलैण्ड

पोलैण्डवासी अपने फूड बजट का मात्र 5 फीसदी घर से बाहर खाने पर खर्च करते हैं। इससे न सिर्फ वे पैसे की बचत करते हैं, बल्कि बाहर का तलाभुना और गरिष्ठ भोजन करने से भी बच जाते हैं। ‘दी ओम्नीवोरस डाइलेमा’ किताब के लेखक व सामाजिक कार्यकर्ता मिशेल पोलेन कहते हैं, जो लोग घर पर भोजन पकाते-खाते हैं वे दूसरों की तुलना में मोटे और ओवरवेट कम होते हैं। हमारे यहां बाहर भोजन करने की संस्कृति नहीं है।

मैक्सिको

यहां के लोगों ने अपने भोजन का समय दोपहर 2 से 4 बजे के बीच का तय कर रखा है। इससे रात को अधिक खाने से बच जाते हैं। रात को कम खाने से सुबह अच्छी भूख लगती है और पेट भी दुरुस्त रहता है। साथ ही आप हैवी नाश्ता लेने में सक्षम रहते हैं। सुबह का नाश्ता वेट कंट्रोल करने में मददगार होता है क्योंकि यह डायटीशियंस का माना हुआ फैट फाइटिंग रूल है।

रूस

य हां की 51 फीसदी शहरी आबादी अपनी छुट्टियां और वीकेंड ग्रामीण या कस्बाई घरों में बिताती हैं। प्राय: हर घर में एक गार्डन जरूर होता है, जहां रूसी लोग अपनी जरूरत और पसंद के मुताबिक फल और सब्जियां उगाते हैं। ताजा और ऑर्गेनिक फल-सब्जियों के कारण उनका भोजन पोषक तत्त्वों से भरपूर होता है। साथ ही गार्डन की देखभाल में भी शारीरिक व्यायाम अच्छा खासा हो जाता है।

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