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आयुर्वेद का जादू : दवा डायबिटीज की, सुरक्षा हार्ट अटैक से भी

आयुर्वेद का जादू : दवा डायबिटीज की, सुरक्षा हार्ट अटैक से भी

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नई दिल्‍ली। मधुमेह के मरीजों के लिए आयुर्वेद के पुराने फार्मूलों से तैयार की गई दवा अब इन मरीजों में दिल के दौरे का खतरा भी कम कर रही है। वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की प्रयोगशालाओं ने हाल में बीजीआर 34 नाम की यह दवा तैयार की है। प्रतिष्ठित 'जर्नल ऑफ ट्रडिशनल एंड कंप्लीमेंट्री मेडिसिन' के ताजा अंक में इस शोध को प्रकाशित किया गया है। इस दवा के करीब 50 फीसदी सेवनकर्ताओं में ग्लाइकोसिलेटेड हीमोग्लोबिन का स्तर नियंत्रित पाया गया। इसी की वजह से मधुमेह के मरीजों में दिल के दौरे के मामले सामने आते हैं। एलोपैथी की दवाएं ग्लूकोज को नियंत्रित करने में तो कामयाब होती हैं, लेकिन इससे जुड़ी दूसरी समस्याओं को काबू नहीं कर पातीं। 8 0 फीसदी मरीजों में ग्लूकोज हुआ काबू शोध के दौरान 8 0 फीसदी तक मरीजों के ग्लूकोज के स्तर में कमी देखी गई। शोध के पहले ग्लूकोज का औसत स्तर 196 (खाली पेट)
शहर में रहने वालों से आठ गुना ज्यादा खुशहाल ग्रामीण

शहर में रहने वालों से आठ गुना ज्यादा खुशहाल ग्रामीण

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शहर में रहने वालों के पास सुख-सुविधाओं का अंबार हो सकता है, मगर वह खुशहाल नहीं हैं। यह बात एक अध्ययन में सामने आई है। कनाडा के मॉन्ट्रियल स्थितमैकगिल यूनिवर्सिटी और वैंकूवर स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के... Live Hindustan Rss feed
समयपूर्व जन्म के लिए गर्भनाल के जीवाणु जिम्मेदार

समयपूर्व जन्म के लिए गर्भनाल के जीवाणु जिम्मेदार

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समय पूर्व प्रसव वाली महिलाओं के गर्भनाल में वैज्ञानिकों ने अत्यधिक संख्या में रोगजनक जीवाणु पाए हैं। इससे माता में होने वाले संक्रमण के कारण समयपूर्व प्रसव --37 सप्ताह से कम गर्भावधि-- की परिकल्पना को बल मिलता है। सामान्य धारणा के विपरीत स्वस्थ गर्भनाल में भी जीवाणु के चिन्ह पाए गए हैं। ये जीवाणु अवसरवादी अंत:गर्भाशयी रोगजनक होते हैं और समय से पूर्व जन्म व गर्भपात की घटनाओं से जुड़े हुए हैंं। ब्रिटेन स्थित यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन से संबद्ध शोध के लेखक लिडिया जे लियोन ने कहा, हमने समयपूर्व बच्चे को जन्म देने वाली महिलाओं के गर्भनाल में माइकोप्लाज्मा और यूरियाप्लाज्मा जैसे अत्यधिक संख्या में रोगजनक बैक्टीरिया का निरीक्षण किया, जो मातृ संक्रमण और समय पूर्व बच्चे के जन्म के बीच संबंध का समर्थन करते हैं। इस शोध का प्रकाशन एप्लाएड व इनवायरमेंटल माइक्रोबॉयलॉजी में किया गया है। इसमें शोध दल ने स्
जानें क्या हैं जानलेवा Nipah वायरस के लक्षण और बचाव के उपाय

जानें क्या हैं जानलेवा Nipah वायरस के लक्षण और बचाव के उपाय

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निपाह वायरस (NiV) के इंसानों में संक्रमण का पता चिकित्सीय जांचों द्वारा लगाया जा सकता है। निपाह के संक्रमण की जांच शुरुआती दौर से लेकर श्वसनतंत्र के गंभीर रूप से प्रभावित होने और जानलेवा... Live Hindustan Rss feed
निरंतर शोर से बच्चों में व्यवहार संबंधी समस्याएं

निरंतर शोर से बच्चों में व्यवहार संबंधी समस्याएं

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शोर की वजह से होने वाले हृदय रोग की प्रक्रिया के विश्लेषण के अनुसार, यातायात और विमानों से उत्पन्न पर्यावरणीय शोर हृदय रोग के जोखिम कारकों को बढ़ाने के लिए, कोशिका स्तर पर शरीर को बाधित करता है। ध्वनि प्रदूषण मैटाबोलिक कठिनाइयों और ऑटोनोमिक असंतुलन का कारण बन सकता है, जिसमें चक्कर आने लगते हैं और व्यायाम करने में परेशानी होती है। शोर के एक्सपोजर से बच्चों में व्यवहार संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं। वाहनों ने निकलने वाले जहरीले धुएं के साथ मिश्रित धूल, फेफड़ों और हृदय रोगों को बढ़ा सकती है और दिल के दौरे, स्ट्रोक, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी बीमारी, फेफड़ों के संक्रमण और फेफड़ों व सांस की नली के कैंसर का खतरा रहता है। अनचाही आवाजों को शोर कहा जाता है। जोर का शोर 85 डीबी या उससे अधिक होता है यानी आवाज का वह स्तर जो तीन फीट दूर खड़े किसी व्यक्ति से बात करने के लिए उठाना पड़ता है। शोर एक जान
सावधान: एक ही मच्छर डेंगू, चिकनगुनिया-जीका फैला रहा!

सावधान: एक ही मच्छर डेंगू, चिकनगुनिया-जीका फैला रहा!

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सावधान! एक ही मच्छर आपको एक साथ तीन जानलेवा बीमारियों का शिकार बना सकता है। राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (एनआईवी) पुणे के शोध में इस बात की पुष्टि हुई है कि डेंगू फैलाने वाला मच्छर ही चिकनगुनिया... Live Hindustan Rss feed
कंधे के दर्द को असहनीय न बनाएं

कंधे के दर्द को असहनीय न बनाएं

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आज की व्यस्त जीवनशैली में छोटे-मोटे दर्द को नजरअंदाज करना हमारी आदत बनती जा रही है। कई बार यह आदत बीमारियों का कारण भी बन जाती है। उन्हीं में से एक है कंधे में दर्द (शोल्डर पेन)। गठिया, दुर्घटना होने या मांसपेशियों के फटने के कारण कंधे के इलाज व गंभीर समस्या होने पर सर्जरी की जरूरत पड़ती है। कंधे की समस्या में शुरुआती लक्षण हल्का दर्द होता है।   धीरे-धीरे मूवमेंट कम होना (फ्रोजन शोल्डर), मांसपेशियों के फटने से हाथ ठीक से न उठ पाना (रोटेटर कफ टियर), कंधा बार-बार उतरना (रिकरेंट डिसलोकेशन शोल्डर) जैसी परेशानियां भी होने लगती हैं। कंधे, कूल्हे व घुटने को पूरी तरह से प्रत्यारोपित किया जा सकता है। इसलिए ऐसा होने पर तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क कर सलाह लें। कंधे में दर्द दर्द का कारण पता लगाए बिना वजह नहीं बतायी जा सकती। कई बार दुर्घटना होने पर कंधा फ्रेक्चर हो जाता है। ऐसे में ठीक से देखभाल न म
एडीज मच्छर से होती है डेंगू बीमारी

एडीज मच्छर से होती है डेंगू बीमारी

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डेंगू एडीज इजिप्टी नामक मच्छर के कारण होने वाला रक्तस्रावी बुखार है। 1950 के दशक में सबसे पहले फिलीपींस और थाईलैंड में डेंगू संक्रमण का पहला मामला दर्ज किया गया। अब भारत सहित कई एशियाई और लैटिन अमरीकी देशों में डेंगू एक महामारी की तरह फैल रहा है। डेंगू को ‘ब्रेक बोन’ बुखार के नाम से भी जाना जाता है। तेज सिरदर्द, जोड़ों में दर्द, जी घबराना, उल्टी आदि लक्षणों के साथ तेज बुखार डेंगू का संकेत हो सकते हंै। संक्रमित मच्छर के काटे जाने के चार से दस दिन के भीतर ये लक्षण पैदा हो सकते हैं। डेंगू को लेकर कई तरह के मिथक प्रचलित हैं, लेकिन उनमें सच्चाई कम और हमेशा की तरह बीमारी को भयावह बनाने के तथ्य ज्यादा शामिल हैं। ऐसे ही १० मिथकों और उनकी सच्चाई पर डालें एक नजर और रहें सतर्क। मिथक डेंगू एक संक्रामक बीमारी है और संपर्क से फैलती है। डेंगू केवल बारिश के मौसम में फैलता है डेंगू के उपचार के
क्या आपने आज ली लेमन डाइट?

क्या आपने आज ली लेमन डाइट?

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डायटीशियन और फूड एक्सपर्ट के अनुसार यह डाइट प्लान अपनाने में बेहद आसान है और दिनचर्या के हिसाब से अपनाया जा सकता है। इसमें नींबू की शक्ति को दिनभर के क्रिया-कलापों के साथ जोड़ दिया जाता है। खास बात है कि इस डाइट प्लान को शुरू करने के साथ ही आपको पूरे दिन भरपूर पानी पीना होता है। आप जितना पानी पिएंगे शरीर से विकार उतनी जल्दी दूर होंगे। ठंडे पानी की जगह गुनगुना पानी पिएं तो नतीजे ज्यादा अच्छे मिलेंगे। सुबह-शाम अपनाएंसुबह उठते ही नित्य कर्म से पहले एक गिलास गुनगुने पानी में एक नींबू का रस मिलाकर पीना होता है। स्वाद और गुण बढ़ाने के लिए दो चम्म्च शहद भी मिलाया जा सकता है लेकिन चीनी मिलाने से बचें तो अच्छा होगा इसी तरह दिन का समापन भी नींबू के साथ करें तो अच्छा होगा। फूड हैबिट्ïस को इस डाइट के साथ खाने में फल और सब्जियों की मात्रा बढ़ानी होगी। दिन भर में कम से कम कुल आहार के चार से पांच
वजन उठाना, साइटिका का कारण बन सकता है

वजन उठाना, साइटिका का कारण बन सकता है

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कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के कुछ वेटलिफ्टरों को साइटिका दर्द के कारण उच्च पदक से वांछित रहना पड़ा। वाकई साइटिका का दर्द असहनीय होता है और अधिक भार उठाने वालों में इसका जोखिम बढ़ जाता है। युवा जिम जाकर अपनी बॉडी बनाना चाहते है और इस चक्कर में वह अधिक वजन उठाते हैं। इससे युवाओं को साइटिका का दर्द होने की आशंका बढ़ जाती है। ज्यादा वजन उठाने से साइटिका दर्द क्यों? साइटिक नर्व निचले हिस्से में शुरू होती है और निचले अंग के माध्यम से चलती है। यह मानव शरीर में सबसे लंबी और व्यापक एकल तंत्रिका होती है जिससे इसको नुकसान पहुंचने की आशंका अधिक होती है। वेटलिफ्टर के शरीर के ऊपर अधिक भार पड़ता है तो साइटिका नर्व अकेली होने के कारण दबाव में आ जाती है जिससे उसके चोटिल होने की संभावना बढ़ जाती है। साइटिका का दर्द गंभीर चोट या डिजेनरेटिव ***** से भी हो सकता है। क्या है साइटिका का दर्दसाइटिका पैर दर्द का एक ल