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छोटे बच्चों के लिए लाभदायक हैं ईको फ्रेंडली वाइप्स, नहीं होते रेशेज और स्किन प्रॉब्लम्स

छोटे बच्चों के लिए लाभदायक हैं ईको फ्रेंडली वाइप्स, नहीं होते रेशेज और स्किन प्रॉब्लम्स

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वाइप्स से होने वाली दिक्कत सिर्फ बच्चों को ही नहीं बल्कि पर्यावरण के लिए भी एक खतरा है। प्लास्टिक के बने ये वाइप्स बायो-डिग्रेडेबल नहीं होते और उन्हें पूरी तरह नष्ट होने में लगभग 500 साल लग जाते हैं। वही ईको-फ्रेंडली वाइप्स पौधों के फाइबर से बने होते हैं और ये बहुत ही मुलायम होते हैं तथा पर्यावरण को हानि नहीं पहुंचाते। अगर यूरोपीय देशों की बात करें तो वहां प्लास्टिक वाइप्स को बैन करने की मुहिम छिड़ी हुई है क्योंकि वहां नाले जाम होने का मुख्य कारण ये वाइप्स हैं। आज के परिवेश में वाइप्स का इस्तेमाल जहां एक आम बात हो गई है वहीं वाइप्स से होने वाली परेशानियां भी बढ़ी हैं। डॉक्टरों के अनुसार ये परेशानियां बच्चे की देखभाल में कोई कमी रहने या बच्चे को साफ करने में उपयोग किए गए वाइप्स या कपड़े के उन्हें सूट नहीं करने पर होती हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार, बच्चों की त्वचा बहुत पतली और कोमल होती है और क
ब्रीथेलाइजर समय रहते बता देगा पार्किंसन होने का खतरा

ब्रीथेलाइजर समय रहते बता देगा पार्किंसन होने का खतरा

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ब्रीथेलाइजर का इस्‍तेमाल आमतौर पर पुलिस वाले स्‍ड़क पर गाड़ी चलाने वालों में शराब की मात्रा जांचने के लिए करते हैं। इस उपकरण को मुंह में लगाकर इसके भीतर सांस छोड़नी होती है। इसी से जांच लेता... Live Hindustan Rss feed
ब्रेन के दो हिस्से कर मिर्गी की सर्जरी

ब्रेन के दो हिस्से कर मिर्गी की सर्जरी

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मस्तिष्क के किसी एक हिस्से में मिर्गी के ज्यादा दौरे पडऩे पर उसे दूसरे हिस्से से सर्जरी की सहायता से अलग कर इसके इलाज की नई राह खोली है। एम्स ने इस सर्जरी को महज एक तिहाई समय और आधे रक्त क्षय (ब्लड लॉस) में कर मरीजों खासकर बच्चों को बड़ी राहत दी है। आइए जानते हैं दिमाग में मचती है उथल-पुथल मानव मस्तिष्क में दो हेमिस्फेयर (गोलार्ध) होते हैं जो एक फीते (कॉर्पस कैलोसम) से जुड़े होते हैं। मस्तिष्क का दाहिना हिस्सा शरीर के बाएं भाग को और बांया हिस्सा शरीर के दाहिने भाग को नियंत्रित करता है। शरीर के सभी अंगों की तरह मस्तिष्क में भी विद्युत प्रवाह होता है। जिन जगहों पर विद्युत प्रवाह असामान्य होता है वहां शॉट सर्किट जैसी स्थिति बनने लग जाती है जो मिर्गी के दौरे की वजह होती हैं। कई बार मस्तिष्क का एक हिस्सा (हेमिस्फेयर) सिकुड़ कर छोटा हो जाता है। इस स्थिति में व्यक्ति को दिन में १००-200 बार दौरे आ
आदतें बदलें, घुटने बदलवाने से बचेंगे

आदतें बदलें, घुटने बदलवाने से बचेंगे

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वर्ष 2014 में देश में लगभग 70 हजार लोगों ने घुटने और 6 हजार लोगों ने हिप रिप्लेसमेंट करवाए। इन अंगों का रिप्लेसमेंट उन लोगों के लिए फैशन बनने लगा है जिन्हें दर्द बिल्कुल सहन नहीं होता और वे दर्द का फौरन इलाज चाहते हैं। ऐसे लोगों को सर्जन रिप्लेसमेंट सर्जरी की सलाह देते हैं जिन्हें वे मान भी लेते हैं। चिंता की बात यह है कि 30-40 वर्ष के युवा घुटने और हिप रिप्लेसमेंट करवा रहे हैं जबकि वे इस समस्या से जीवनशैली और खानपान में बदलाव कर निजात पा सकते हैं। जितना हो सर्जरी टालें ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ कहते हैं कि यदि किसी को आर्थराइटिस की गंभीर समस्या है तो घुटने रिप्लेसमेंट करवाना सही विकल्प है, लेकिन प्रारंभिक अवस्था में इसे कसरत और डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाओं से आराम पाया जा सकता है। घुटनों व कूल्हों के दर्द का सबसे पहला उपचार है पेन किलर जो पूरी तरह से सही नहीं है क्योंकि ये घुटने का दर्द कम तो कर
कई रोगों का अलार्म हो सकती है खांसी

कई रोगों का अलार्म हो सकती है खांसी

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चिकित्सकों का मानना है कि खांसी अपने आप में कोई रोग नहीं होता, बल्कि यह शरीर की सामान्य प्रतिक्रिया अथवा किसी बीमारी का संकेत होती है। लेकिन ऐसा समझकर खांसी को मामूली रोग नहीं समझना चाहिए। आमतौर पर खांसी का कारण इंसान के फेफड़ों, सांस नली या गले में इंफेक्शन होता है। दरअसल, यह एक ऐसा मैकेनिज्म है, जो शरीर में होने वाली किसी खराबी के बारे में इशारा करता है और स्वास्थ्य-रक्षा के लिए पहले से ही संकेत दे देता है। कुछ विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि खांसी आने का मतलब है कि हमारा शरीर बीमारियों के बैक्टीरिया से लड़ रहा है। खांसी की वजह कई डॉक्टरों के मुताबिक फेफड़ों की नसों पर अधिक दबाव होने या दिल का एक हिस्सा बड़ा हो जाने पर भी खांसी हो जाती है। डॉक्टर इसे दिल का अस्थमा कहते हैं। लगातार और लम्बे समय तक चलने वाली खांसी किसी बड़ी बीमारी का कारण या संकेत हो सकती है। आम तौर पर दमा, गले में इंफेक्श
नजरअंदाज ना करें बच्चों के खर्राटे

नजरअंदाज ना करें बच्चों के खर्राटे

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क्या आपका बच्चा किसी भी बात को सीखने या नई चीज को पहचानने में देर लगाता है या एकाग्रचित अथवा शांत न रहकर इधर-उधर ध्यान ज्यादा भटकाता है? सुबह-सुबह सिरदर्द या थकान की शिकायत करता है? उसे ठीक से नींद नहीं आती या फिर खाना निगलने में दिक्कत महसूस करता है। अगर ऐसी समस्याएं आपके बच्चे में नजर आ रही हों, तो सतर्क हो जाएं। ये लक्षण बच्चों में ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्नीया या ओएसए के हो सकते हैं। स्लीप एप्नीया बच्चों में खर्राटों की एक वजह है जिसमें गले या सांस की नली में रुकावट आने से फेफड़ों तक ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। इसके अलावा भी कई कारण हैं जिनकी वजह से बच्चे खर्राटे लेते हैं। 2-8 साल के बच्चों में समस्या ज्यादाकोलकाता के बेलव्यू अस्पताल के ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. उत्तम अग्रवाल के अनुसार दो से आठ साल की उम्र के लगभग 10 फीसदी बच्चे खर्राटे लेते हैं, इनमें से करीब 3-4 फीसदी स्लीप एप्नीया के शिकार होते
जब भी तेज भूख लगे ‘कुछ भी’ खाने से बचें

जब भी तेज भूख लगे ‘कुछ भी’ खाने से बचें

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आपने गौर किया होगा कभी-कभी तेज भूख लगने पर कुछ भी खाने का मन करता है लेकिन ऐसे में कुछ भी खाना कई बार मोटापे, बदहजमी, अपच जैसे रोगों का कारण बनता है। इसलिए जब भी भूख लगे तो कुछ ऐसा आहार खाएं कि यह एहसास थोड़ी देर के लिए थम जाए और कोई नुकसान भी न हो।   भूख का एहसास मस्तिष्क के हाइपोथैलेमस नामक हिस्से में तब शुरू होता है जब यह विशेष प्रकार के हार्माेन छोड़ता है। भूख का एक आवेग करीब 30 सेकंड तक रहता है और यह लगातार 30-45 मिनटों तक होता रहता है। इसके बाद भूख 30-150 मिनटों तक कम हो जाती है। भूख की तीव्रता जितनी अधिक होगी, पाचन-क्रिया भी उतनी ही मजबूत होगी। पाचन-क्रिया ठीक होगी तो रक्त भी सही मात्रा में बनेगा। यह संतुलन बना रहे इसके लिए पाचन क्षमता को मजबूत बनाने का प्रयास करना चाहिए। पानी में कटौती न करें पानी शरीर को अंदर से साफ कर अधिक खाने से रोकता है। कई बार तो लोग भूलवश प्यास को भूख स
टायफॉइड में ना करें लापरवाही

टायफॉइड में ना करें लापरवाही

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दूषित पानी और खानपान की वजह से होने वाली बीमारी टायफॉइड साल्मोनेला टाइफी नामक बैक्टीरिया से होती है। तेज बुखार से शुरू होने वाली यह बीमारी अल्सर या आंतों के फटने की वजह भी बन सकती है, इसलिए सही समय पर टायफॉइड का इलाज होना जरूरी है। यह बीमारी संक्रामक भी है, जो रोगग्रसित व्यक्ति के जूठे भोजन या पानी पीने से भी हो सकती है। कई मरीजों में यह बीमारी ड्रग रेसिस्टेंड (रोगी पर दवाइयों का असर नहीं होता) भी होने लगी है, जिसकी वजह से डॉक्टर ओरल दवाइयों की जगह इंजेक्शन देते हैं। १०-१५ मरीजों में से एक में इस तरह की समस्या सामने आ रही हैं। लक्षण100 डिग्री सेल्सियस से ऊपर लगातार बुखार बने रहना, पेट दर्द, भूख ना लगना, सिर दर्द व गले में खराश, सुस्ती या कमजोरी लगना और शरीर पर चकत्ते दिखाई देना। ऐसे होगा बचावटायफॉइड होने पर दूषित खानपान से बचें। जहां तक हो पानी उबालकर पीएं। सब्जियों को अच्छे से पकाएं और फल
लंबी उम्र पाने के खास फॉर्मूले

लंबी उम्र पाने के खास फॉर्मूले

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अगर महिलाएं और पुरुष अपनी सेहत के प्रति सजग रहें और कुछ सावधानियां बरतें तो लंबी उम्र पा सकते हैं। आइए जानते हैं उपायों के बारे में। खुद पर नियंत्रण रखेंडायबिटीज, किडनी की समस्या, ब्लड प्रेशर या किसी अन्य बीमारी से पीडि़त हैं, तो खानपान का ध्यान रखें, दवा लेने में किसी प्रकार की लापर वाही ना करें, डॉक्टर से नियमित चेकअप कराएं और जरूरत के हिसाब से ब्लड टेस्ट भी। व्यायाम, मेडिटेशन या योगा करें। तंबाकू और एल्कोहल का सेवन ना करें। रेगुलर चेक अप कराएंहर साल दिल की धडक़न, हृदय, फेफड़े और पेट की स्थिति, आंखों एवं दांतों आदि का चेक अप करवाएं। डॉक्टरी सलाह से ब्लड व यूरिन टेस्ट भी कराएं। बीएमआई रखें सही ३० से अधिक बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई)होना मोटापे का संकेत है, जो आर्थ राइटिस, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और कैंसर जैसी बीमारियों का सबब बन सकता है। २० से कम बीएम आई यानी ‘साइज जीरो’ का अर्थ है