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बनानी है सेहत तो ट्रेडमिल छोड़ पेड़ों पर चढि़ए जनाब

बनानी है सेहत तो ट्रेडमिल छोड़ पेड़ों पर चढि़ए जनाब

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गांवों में आज भी बच्चे पेड़ों पर चढ़कर खूब खेलते हैं। शहरों की आधुनिक जिंदगी में यह खेल फिट नहीं बैठता है। मगर एक शोध में कहा गया है कि पेड़ों पर चढ़ने के खेल से शरीर की सभी मांसपेशियां टोन होती... Live Hindustan Rss feed
दिल की सेहत अच्छी रखने के लिए खाएं रसभरी

दिल की सेहत अच्छी रखने के लिए खाएं रसभरी

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यह छोटा सा, मुंह में रखते ही घुल जाने वाला फल दिल की सेहत के लिए काफी फायदेमंद है। इसे खाने से दिल तक खून पहुंचाने वाली नसें स्वस्थ रहती हैं। रसभरी पर ब्रिटेन में हुए शोध में कहा गया है इसे खाने से... Live Hindustan Rss feed
कम्प्यूटर व मोबाइल के प्रयोग में चक्कर आना

कम्प्यूटर व मोबाइल के प्रयोग में चक्कर आना

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लंबे समय तक कम्प्यूटर या मोबाइल स्क्रीन पर लगातार नजर टिकाए रखने से यदि आपकी मानसिक और शारीरिक स्थिति में अस्थिरता बनने लगे तो यह साइबरसिकनेस के लक्षण हो सकते हैं। इसे ‘वर्चुअल रियल्टी सिकनेस’ भी कहते हैं। ऐसे में व्यक्ति का शरीर तो स्थिर रहता है लेकिन दिमाग को कम्प्यूटर स्क्रीन पर सब चीजें तेजी से चलती महसूस होती हैं।   चक्कर आने जैसी दिक्कत होती है। हाल ही न्यूयॉर्क के कोवेंट्री यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर मोबिलिटी एंड ट्रांसपोर्ट में हुए एक शोध में पाया गया है कि हर वर्ग के लगभग ८० प्रतिशत लोगों को इस तरह की परेशानी का सामना करना पड़ता है। लक्षण व्यक्ति को सिरदर्द के अलावा चक्कर आना, आंखों में जलन, शरीर से अधिक पसीना निकलना, किसी भी काम या वस्तु पर फोकस न कर पाना, स्वभाव में चिड़चिड़ापन और नींद ना आने की समस्या रहती है। दिक्कतें कई विशेषज्ञों का मानना है कि पर्याप्त नींद व
बच्चों में बढ़ रही है कब्ज की परेशानी

बच्चों में बढ़ रही है कब्ज की परेशानी

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फास्ट-फूड से लगाव, शारीरिक गतिविधियों से दूरी और बढ़ता इनडोर गेम्स का क्रेज बच्चों को कई बीमारी दे रहा है। इसमें से एक है कब्ज की समस्या। एक अध्ययन के अनुसार डॉक्टर के पास आने वाले कुल बच्चों के मामलों में से २०-२५ प्रतिशत बच्चे कब्ज से पीडि़त होते हैं। लक्षण : पेट साफ न होना अगर कोई बच्चा दिनभर में एक बार भी स्टूल पास न करे या एक बार जाए लेकिन वो बहुत सख्त हो और बच्चे को स्टूल पास करने के दौरान काफी परेशानी हो तो उसे कब्ज की शिकायत हो सकती है। सामान्यत: इस रोग के दो कारण होते हैं- 1. नॉन ऑर्गेनिक : 90 प्रतिशत कब्ज से पीडि़त मरीजों में यह कारण होता है। इसमें बिगड़ी लाइफस्टाइल और खानपान में लापरवाही जैसी आदतें शामिल होती हैं। 2. ऑर्गेनिक : यह कारण 10 प्रतिशत मामलों में देखा जाता है। इसमें किसी शारीरिक या पैथोलॉजिकल परेशानी जैसे - सीलियक डिजीज, थायरॉइड हार्मोन की कमी आदि के कारण बनने वाला मल
हवाई यात्रा में शरीर का मूवमेंट है जरूरी

हवाई यात्रा में शरीर का मूवमेंट है जरूरी

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हवाई यात्रा करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। खासकर ऐसे लोगों को जो किसी न किसी रोग से पीडि़त हैं। इन्हें लंबी यात्रा यानी 3-4 घंटे के अधिक सफर करने के दौरान कुछ दिक्कतें हो सकती हैं। जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। आइए जानते हैं कि हवाई यात्रा करते समय किन खास बातों को ध्यान में रखना जरूरी है। डीप वेन थ्रॉम्बोसिस (डीवीटी) लंबी हवाई यात्रा करते समय पैरों में भारीपन की शिकायत आम है। लगातार एक ही पोजिशन में बैठे रहने से पैरों में रक्तसंचार काफी धीमा हो जाता है। इसे डीवीटी कहते हैं। दिक्कत : दूषित रक्तको हार्ट और फेफड़ों को पहुंचाने वाली डीप वेन में थक्का बनने से ये अपना कार्य नहीं कर पाती हंै। इससे पैरों में दर्द और सूजन आ सकती है। सावधानी : संभव हो तो पैरों में मूवमेंट करते रहें, शरीर में पानी की कमी न होने दें। लंबी यात्रा में चहलकदमी जरूर करें। हार्ट और बीपी पेशेंट्स लंबे
ओमेगा 3 फैटी एसिड कैंसर से भी करता है रखवाली

ओमेगा 3 फैटी एसिड कैंसर से भी करता है रखवाली

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अभी तक यही माना जाता था कि ओमेगा 3 फैटी एसिड दिल की सेहत दुरुस्त रखने में अहम भूमिका निभाता है। मगर एक शोध में पता चला है कि मछलियों, नट्स और कुछ बीजों में पाया जाने वाले यह बेहद अहम तत्व कैंसर से... Live Hindustan Rss feed
शहरी आबादी को 3 गुना ज्यादा पड़ता है दिल का दौरा

शहरी आबादी को 3 गुना ज्यादा पड़ता है दिल का दौरा

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देश में हृदयरोगों की वजह से मौतें बढ़ रही हैं। तनाव, मनमर्जी वाली जीवनशैली और व्यस्त दिनचर्या के कारण शहरी आबादी को ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वालों की तुलना में तीन गुना ज्यादा दिल का दौरा पड़ता है। चिंता की बात तो यह है कि ज्यादातर मौतें उन लोगों की हो रही हैं, जिन्हें पहले से ही पता रहता है कि उन्हें हृदयरोग है। दवाएं लेने में लापरवाही कर वे न चाहते हुए भी मौत को बुला लेते हैं। दिल की बीमारियों में कोरोनरी धमनी रोग, दिल का दौरा, एरिदमियास, दिल की विफलता, हृदय के वॉल्व में खराबी, जन्मजात हृदय रोग और कार्डियोमायोपैथी शामिल हैं, जो सबसे आम हैं। शहरी आबादी को ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वालों की तुलना में तीन गुना ज्यादा दिल का दौरा पड़ता है। इसका कारण है तनाव, अपनी मर्जी की जीवनशैली और व्यस्त कार्यक्रम, जो शारीरिक गतिविधि के लिए बहुत कम या बिल्कुल भी समय नहीं छोड़ते हैं। हाल के दिनों में ऐस
वर्कप्लेस पर आप ऐसे रह सकते हैं हैल्दी

वर्कप्लेस पर आप ऐसे रह सकते हैं हैल्दी

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आज की व्यस्त जिंदगी में ज्यादातर कामकाजी लोग अपना जितना वक्त घर में बिताते हैं, लगभग उतना ही वक्त वर्कप्लेस पर भी बिताते हैं। इसलिए खुद को हैल्दी रखने के उपाय सिर्फ घर में ही नहीं बल्कि कुछ उपाय वर्कप्प्लेस पर भी अपनाने जरूरी हैं- हाथ धोते रहें बहुत से लोग ऑफिस में कम्प्यूटर पर काम करते करते ही खा लेते हैं। की बोर्ड कीटाणुओं का अड्डा है, यह बात कई बार सिद्ध हो चुकी है। इसी प्रकार कई लोग वाशरूम के उपयोग या छींकने के बाद भी साबुन से हाथ धोए बिना खा लेते हैं। ये आदतें बीमारियों का घर है। बेहतर होगा कि कुछ भी खाने से पहले आप अपने हाथ साबुन से जरूर धो लें। वर्कस्पेस साफ रखेंहैल्थ एक्सपट्र्स का मानना है कि किसी डेस्क में टॉयलेट सीट से भी ज्यादा बैक्टीरिया होते हैं इसलिए बेहतर होगा कि आप हर रोज सबसे पहले अपने वर्कस्पेस को साफ करें। सैनीटाइजिंग वाइप्स से इन्हें पोंछें और कम्प्यूटर का की बोर्ड भी स
सावधानी के साथ संवारें अपनी सेहत को

सावधानी के साथ संवारें अपनी सेहत को

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सामाजिक, मानसिक और शारीरिक रूप के अलावा हर स्तर पर व्यक्ति का स्वस्थ और सेहतमंद होना बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए डब्ल्यूएचओ हर वर्ष वल्र्ड हैल्थ डे 07 अप्रेल को सेलिबे्रट करता है ताकि लोगों को सेहत के लिए सकारात्मक कदम उठाने के प्रेरित कर सके। इन आदतों को अपनाएंफिजिकल फिटनेसआधुनिकता और व्यस्त दिनचर्या के कारण लोगों में बीमारियों की बढ़ती संख्या का एक प्रमुख कारण है शारीरिक रूप से सक्रिय न होना। ऐसे में जब भी किसी बीमारी के इलाज के लिए जाते हैं तो विशेषज्ञ दिनभर में कम से कम ३० मिनट शारीरिक रूप से सक्रिय रहने की सलाह देते हैं। इसके लिए आप वर्कआउट के अलावा योग, प्राणायाम या वॉक आदि करके भी फिट रहकर बीमारियों से बचे रह सकते हैं। अच्छा खानपानबच्चे हों या बड़े सभी को अक्सर खाने में किसी न किसी चीज को लेकर न नुकुर करते देखा जाता है। कई आहार विशेषज्ञों की मानें तो संतुलित भोजन मे
सावधान! दूषित खाद्य पदार्थ के खाने से बढ़ जाते हैं फूड पॉइजनिंग के मामले

सावधान! दूषित खाद्य पदार्थ के खाने से बढ़ जाते हैं फूड पॉइजनिंग के मामले

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गर्मियों में फूड प्वॉइजनिंग के मामले काफी बढ़ जाते हैं। इसे खाद्य जनित बीमारी यानी ‘फूड बोर्न इलनेस’ के नाम से भी जाना जाता है। इसमें दूषित खाद्य पदार्थों के खाने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होने लगती हैं। संक्रमित जीव जैसे बैक्टीरिया, वायरस तथा परजीवी आदि से दूषित किए गए भोजन का सेवन करना फूड पॉइजनिंग का प्रमुख कारण है। संक्रामक जीव या उनके विषाक्त पदार्थ खाद्य सामग्री को उत्पादन करने से बनाने तक किसी भी समय दूषित कर सकते हंैं। कमजोर इम्यूनिटी के कारण इन्हें खतरा फूड पॉइजनिंग की समस्या में दूषित खाने का असर व्यक्ति की उम्र, सेहत और संक्रामक जीवों के प्रकार व संक्रमण की मात्रा पर निर्भर करता है। इनमें रोग का खतरा अधिक हो जाता है। छोटे बच्चेरोग प्रतिरोधक क्षमता पूर्ण रूप से विकसित न होने से इनमें किसी भी प्रकार के संक्रमण की आशंका दोगुनी हो जाती है। इसलिए इनमें रोग का खतरा रहता