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बाजार का दूषित चटपटा खाने से अटक सकती है सांस

बाजार का दूषित चटपटा खाने से अटक सकती है सांस

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गर्मियों के मौसम में बाहर का चटपटा खाना दिमाग को नुकसान पहुंचा सकता है। खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों से वायरल गैस्ट्रोइंट्राटाइटिस की तकलीफ होती है। इसमें खाने का दूषित प्रोटीन शरीर में मौजूद स्वस्थ प्रोटीन के साथ मिल जाता है। इसके मिलने पर व्यक्ति को पहले तो उल्टी दस्त होती है। इसके बाद शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता शरीर के खिलाफ ही काम करने लगती है। मेडिकली इस बीमारी को ग्युलेन बार सिंड्रोम कहा जाता है। इसका सबसे बुरा असर सांस नली की मांसपेशियों पर पड़ता है और वे कमजोर होने लगती हैं। ऐसा होने पर व्यक्ति को सांस लेने में तकलीफ, बोलने में दिक्कत, निगलने में दिक्कत शुरू हो जाती है। कुछ गंभीर मामलों में सांस अचानक से अटक जाती है जिससे रोगी की मौत भी हो सकती है। इसे मेडिकली रेसपिरेटरी डिप्रेशन कहते हैं। इस तरह की परेशानी को ठीक करने के लिए इंट्रावीनस इम्यूनो ग्लोब्युलिन प्रक्रिया के तहत
गर्मी में अर्धबल के सिद्दांत से करनी चाहिए एक्सरसाइज, नहीं होंगे बीमार

गर्मी में अर्धबल के सिद्दांत से करनी चाहिए एक्सरसाइज, नहीं होंगे बीमार

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आयुर्वेद में ऋृतचर्या के हिसाब से रहने की सलाह दी जाती है। गर्मियों के लिए कहा गया है कि व्यक्ति को ताकत से कम एक्सरसाइज करना चाहिए जिसे अर्धबल के रूप में दर्शाया गया है। अगर आप रोजाना एक घंटे एक्सरसाइज करते हैं तो इसे आधे घंटे करना होगा। बहुत अधिक एक्सरसाइज करने से शरीर से पसीना अधिक निकलेगा तो शरीर में जरूरी तत्वों की कमी होगी जिससे व्यक्ति को चक्कर आना, कमजोरी महसूस होना, उल्टी दस्त, पेट में मरोड़ के साथ दर्द जैसी तकलीफें हो सकती हैं। ऐसे में जितनी शारीरिक क्षमता है उससे कम ही वर्कआउट करना चाहिए जिससे शरीर में ताकत बनी रहे और तापमान बढऩे पर शरीर में अचानक से कोई परेशानी शुरू न हो। गर्मियों में दिन में सोना पूरी तरह से मना है गर्मियों में दिन में सोने की सलाह नहीं दी जाती है। सोने से कफ बढ़ता है। शरीर में कफ की मात्रा बढऩे से मधुमेह, मोटापा और शरीर में सूजन जैसी तकलीफ होती है। शरीर में
मधुमेह रोगियों में हार्ट अटैक का खतरा कम करता है आयुर्वेद

मधुमेह रोगियों में हार्ट अटैक का खतरा कम करता है आयुर्वेद

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वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) द्वारा विकसित आयुर्वेदिक दवा बीजीआर-34 मधुमेह रोगियों में हार्ट अटैक के खतरे को पचास फीसदी तक कम कर देती है। इस दवा के करीब 50 फीसदी सेवनकर्ताओं में ग्लाइकोसिलेटेड हीमोग्लोबिन का स्तर नियंत्रित पाया गया। शोध में यह बात सामने आई है। जर्नल ऑफ ट्रडिशनल एंड कंप्लीमेंट्री मेडिसिन के ताजा अंक में इससे जुड़े शोध को प्रकाशित किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार बीजीआर-34 मधुमेह रोगियों के लिए एक कारगर दवा के रूप में पहले से ही स्थापित है। मौजूदा एलोपैथी दवाएं शर्करा का स्तर तो कम करती हैं लेकिन इससे जुड़ी अन्य दिक्कतों को ठीक नहीं कर पाती हैं। बीजीआर में इन दिक्कतों को भी दूर करने के गुण देखे गए हैं। जर्नल के अनुसार भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के दिशा-निर्देशों के तहत एक अस्पताल में 64 मरीजों पर चार महीने तक इस दवा का परीक्षण किया गया है। इस
हेयर कलर और धूप, दोनों बढा़ते हैं एलर्जी का खतरा

हेयर कलर और धूप, दोनों बढा़ते हैं एलर्जी का खतरा

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बढ़ती गर्मी, प्रदूषण और रहन सहन के तौर तरीकों में आए बदलाव के कारण स्किन रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। एक अध्ययन के मुताबिक आज शहरी और ग्रामीण इलाकों में 10 में से 7 लोग चर्म (स्किन) रोगों से परेशान हैं। इसमें अधिकतर बीमारियां जानकारी के अभाव में होती हैं। पसीने से बढ़ती है समस्या स्किन के अधिकतर रोग पसीने से होते हैं। चिपकी हुए जगह (जांघ और बगल आदि) में पसीने के एकत्र होने और गंदगी जमा होने से वहां फफूंद पनपने लगते हैं। शुरुआत में वहां कालापन, लालपन, फुंसियां या फिर चकत्ते बन सकते हैं। ध्यान न देने पर खुजली, एलर्जी या फिर जलन हो सकती है। छोटे बच्चों , दूध पीते नवजात शिशुओं में पसीने से घमोरियां या फोड़े-फुंसी भी हो सकते हैं। सूखा रखें और वहां बार-बार पाउडर लगाते रहें। इनको स्किन डिजीज की आशंका अधिकगर्मी में हाइपोथायरॉयड के मरीज और हेयर कलर कराने वाले लोगों को स्किन डिजीज और सन ए
प्रसव के बाद सोने से दो घंटे पहले लें खाना, फिर टहलना चाहिए

प्रसव के बाद सोने से दो घंटे पहले लें खाना, फिर टहलना चाहिए

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गर्भावस्था की तरह प्रसव के बाद भी महिला को अपनी व शिशु की सेहत का काफी ध्यान रखना होता है। मानसिक कमजोरी के साथ बाल झडऩा, पीठ दर्द, डिहाइड्रेशन, कब्ज , तनाव, वजन बढऩे जैसी समस्याएं हो सकती हैं। प्रसव के दौरान बढ़ी कैलोरी को बर्न करने के लिए रात के खाने के बाद टहलना चाहिए। सफाई पर दें पूरा ध्यानप्रसव के बाद इंफेक्शन का खतरा अधिक रहता है। संक्रमण से बचाव के लिए पूरे शरीर की सफाई रखने के साथ-साथ, जननांगों और स्तन की सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए। स्तनपान के बाद ब्रेस्ट को साफ करना चाहिए क्योंकि शिशु की लार से इंफेक्शन हो सकता हैं। चिकनाई लगाने से स्तन ड्राई नहीं होगा और फीडिंग के दौरान दर्द नहीं होगा। प्रसव ऑपरेशन से हुआ है तो उस हिस्से की हल्के गुनगुने पानी से सिकाई करनी चाहिए। इससे भी दर्द की समस्या नहीं होगी। पानी खूब पीना चाहिएप्रसव के बाद पानी खूब पीना चाहिए। पानी नहीं पीने से डिहा
डॉक्टर से जान लें दवा खाने का सही तरीका व समय

डॉक्टर से जान लें दवा खाने का सही तरीका व समय

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बुखार और सर्दी जुकाम में लोग अकसर दवा खुद लेते हैं जिससे सेहत को नुकसान होता है। किसी को बार-बार बुखार हो रहा है तो बिना डॉक्टरी सलाह के दवा नहीं लेनी चाहिए। बुखार की दवा गर्मी पैदा करती है। पेट में बार-बार दवा के जाने से पेट में छाले पडऩे और घाव बनने का खतरा रहता है। बच्चों और बुजुर्गों को बिना डॉक्टरी सलाह के बुखार की दवा नहीं देनी चाहिए। जो शराब पीते हैं उन्हें बुखार की दवा बार-बार लेने से बचना चाहिए। इनका लिवर नाजुक होता है जो खराब हो सकता है। गैस की तकलीफ से गुजर रहे हैं और दवा ले रहे हैं तो हमेशा खाली पेट दवा लेनी चाहिए। ऐसा करने से खाना खाने के बाद एसिडिटी नहीं होती है। शुगर की कुछ दवाएं हमेशा खाना खाने के तुरंत पहले खाई जाती हैं। इससे जब खाना खाएंगे तो शरीर में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ेगी तो दवा इंसुलिन की मात्रा को आसानी से संतुलित कर लेगी। ब्लड प्रेशर की कुछ दवाएं खाना खाने के एक घं
क्यों आते हैं चक्कर, जानें इसकी असली वजह

क्यों आते हैं चक्कर, जानें इसकी असली वजह

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अपने आसपास की चीजों को घूमता हुआ महसूस करने या चक्कर आने पर हम अपना संतुलन खो बैठते हैं. और बेहोश हो जाते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक दिमाग के पिछले हिस्से, कान के बीच या पैरों से मिलने वाले संवेदीतंत्र में खराबी होने से चक्कर आते हैं। दिमाग को ऑक्सीजन व ग्लूकोज की जरूरत होती है और जब शरीर में इनकी कमी होने लगती है तो हमें चक्कर आते हैं। शरीर में पानी की कमीजब शरीर में पानी की कमी हो जाती है तो व्यक्ति बेहोश हो सकता है। इसमें उल्टी, दस्त होना या लू लगना भी शामिल है। तेज धूप में अधिक देर तक खड़े रहने से भी व्यक्ति बेहोश हो सकता है। ऐसा शरीर से पसीना निकलने और पानी की कमी से होता है। ये करें : रोजाना कम से कम 8 गिलास पानी पिएं। घर से बाहर जाएं तो पानी की बोतल और सिर कवर करने के लिए स्कार्फ या कैप जरूर साथ लेकर जाएं। ऐसी सब्जियां खाएं जो प्राकृतिक रूप से पानी से समृद्ध हों जैसे पालक, मटर, मैथी आ
माइग्रेन का दर्द अब नहीं कर पाएगा परेशान

माइग्रेन का दर्द अब नहीं कर पाएगा परेशान

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इस खबर से माइग्रेन का दर्द झेल रहे तमाम लोगों को थोड़ी राहत मिल सकती है। अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने माइग्रेन के दर्द से राहत दिलाने वाली नई दवा को मंजूरी दे दी है। विशेषज्ञों का कहना... Live Hindustan Rss feed
सिजोफ्रेनिया के शीघ्र उपचार से आत्महत्या की दर में गिरावट संभव

सिजोफ्रेनिया के शीघ्र उपचार से आत्महत्या की दर में गिरावट संभव

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सिजोफ्रेनिया ऐसी मानसिक समस्या है, जो आत्महत्या का कारण बनती है। एक अध्ययन के मुताबिक सिजोफ्रेनिया से ग्रस्त लोगों में मौत का जोखिम तीन गुना बढ़ जाता है और कम उम्र में ही उनकी जान जाने की संभावना बढ़ जाती है। सिजोफे्रनिया मानसिक बीमारी का गंभीर रूप है, जिससे देश के शहरी क्षेत्रों में प्रति हजार लोगों में लगभग 10 लोग ग्रस्त होते हैं और इसके मरीजों में ज्यादातर 16 से 45 वर्ष उम्र के लोग होते हैं। भारत में सिजोफ्रेनिया के करीब 90 प्रतिशत लोगों का इलाज नहीं हो पाता है। यह बीमारी 16 से 45 वर्ष आयु वर्ग में सर्वाधिक पाई जाती है। इसमें मरीज को ऐसी चीजें दिखाई व सुनाई देने लगती हैं, जो वास्तविकता में हैं ही नहीं। जिस कारण वे बेतुकी बातें करते हैं और समाज से कटने का प्रयास करते हैं। ऐसे में मरीज का सामाजिक व्यक्तित्व पूरी तरह खत्म हो जाता है। इस बीमारी के काफी मरीजों में आत्महत्या की भावना भी पैदा