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चोट लगने पर कैसे करें बर्फ का सेक,जानें इसके बारे में

चोट लगने पर कैसे करें बर्फ का सेक,जानें इसके बारे में

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बर्फ सिर्फ पानी ठंडा ही नहीं करती, बल्कि छोटी-मोटी चोटों में भी राहत पहुंचाती है। फिजियोथैरेपी विशेषज्ञों के अनुसार हल्की मोच, मांसपेशियों में खिंचाव और खरोंच लगने पर अगर बर्फ की सिकाई की जाए, तो फौरन आराम मिलता है। आइस ट्रीटमेंटमोच, मांसपेशियों में खिंचाव, खरोंच या कटने से ऊत्तकों को नुकसान पहुंचता है। इससे चोट लगने की जगह और उसके आसपास सूजन व दर्द की शिकायत हो सकती है। बर्फ से सिकाई करने पर ऊत्तकों से खून निकलना बंद हो जाता है और सूजन भी नहीं आती। मांसपेशियों में दर्द और ऐंठन में भी कमी आती है। इन सबका असर ये होता है कि चोट या सूजन की वजह से ऊत्तकों से निकलने वाला फ्लूइड ज्यादा दूर फैलता नहीं और चोट के आसपास की जगह में कड़ापन नहीं आता। ऐसे करें सिकाईशरीर में जिस जगह बर्फ से सिकाई करनी हो, वहां हल्का-सा तेल लगाना चाहिए। अगर त्वचा कट गई हो या टांके लगे हों, तो उस जगह को ढक देना चाहिए, ताकि
फूड एलर्जी में परहेज बेहतर इलाज

फूड एलर्जी में परहेज बेहतर इलाज

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फूड एलर्जी की समस्या यूं तो बच्चों में अधिक होती है लेकिन यह किसी भी उम्र में हो सकती है। यह समस्या 40 साल से कम उम्र के लोगों में ज्यादा देखी जाती है। कुछ सावधानियां बरतकर आप इस परेशानी से बच सकते हैं। क्यों होती है फूड एलर्जी किसी खाद्य पदार्थ के प्रति शरीर की प्रतिशोध प्रतिक्रिया है जो काफी गंभीर होती है और कभी-कभी जानलेवा भी। इसके लक्षणों में शरीर पर लाल चकत्ते, खुजली और उल्टी की समस्या प्रमुख हैं। कई बार उल्टी होने पर लोग इसे फूड पॉइजनिंग भी मान लेते हैं इसलिए हर बार किसी एक ही चीज को खाने से आपको उल्टी हो तो इसे हल्के में ना लें और फौरन अपने डॉक्टर से संपर्क करें। इन उत्पादों से एलर्जी ज्यादा एलर्जन खाने में मौजूद वे तत्व होते हैं जो एलर्जिक प्रतिक्रिया को बढ़ावा देते हैं। वैसे तो किसी भी चीज से एलर्जी हो सकती है लेकिन गेहूं, राई, बाजरा, मछली, अंडे, मूंगफली, सोयाबीन, दूध से बने उत्पा
दवाओं का हिट या मिस फॉर्मूला

दवाओं का हिट या मिस फॉर्मूला

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आजकल डॉक्टर एकसाथ कई दवाओं का प्रयोग यह सोचकर कर रहे हैं कि एक नहीं तो दूसरी दवा तो काम करेगी ही। लेकिन ये दवाएं कई बार मरीजों के लिए खतरनाक साबित हो रही हैं। केस : १ नन्हा कार्तिक अभी साल भर का भी नहीं हुआ। वह बुखार और डायरिया से परेशान था। मम्मी उसे शिशु रोग विशेषज्ञ के पास ले गईं। डॉक्टर साहब ने नीमसुलाइड और पैरासिटामोल के कॉम्बिनेशन वाली दवा दी। (भारत के अलावा यह कॉम्बिनेशन दुनिया में कहीं स्वीकार्य नहीं)। इतना ही नहीं डॉक्टर ने नाइट्राजोक्सानाइड, ओफ्लॉक्सासिन और ओंडांसीटेरॉन के कॉम्बिनेशन वाली दवा भी दे दी। ओफ्लॉक्सासिन 6 साल से कम के मरीजों के लिए नहीं होती इससे शारीरिक ढांचा गड़बड़ा सकता है। ओंडांसीटेरॉन सिर्फ कैंसर के रोगियों को जी मिचलाने और उल्टी की स्थिति में दी जाती है। केस : २ न वीन कमर दर्द से परेशान था। अस्थि विशेषज्ञ को दिखाया। डॉक्टर ने पांच दवा लिख दीं। एक दवा में नीमसुला
कहीं आपको तो नहीं, 20 की उम्र में 40 की बीमारियां

कहीं आपको तो नहीं, 20 की उम्र में 40 की बीमारियां

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आज की युवा पीढ़ी हाइपर टेंशन, मानसिक तनाव, एसिडिटी आदि कई समस्याओं से परेशान है। पहले ये समस्याएं 40 साल की उम्र के बाद होती थीं लेकिन अब खराब जीवनशैली के कारण ये समस्याएं 20 वर्ष के युवाओं में भी नजर आने लगी है। क्या आपकी उम्र 20 वर्ष है? या बेटे या बेटी की उम्र 20 वर्ष के करीब है? ऐसे में आप सबसे ज्यादा टेंशन बच्चे के कॅरियर के बारे में करते हैं। हो सकता है कि आप सही हों लेकिन आपको अपने बच्चे के कॅरियर के साथ-साथ उसकी सेहत पर भी ध्यान देना चाहिए। अब 20 वर्ष की उम्र में कदम रखने वाले युवाओं को ऐसी बीमारियां और समस्याएं हो रही हैं जो पहले 40 वर्ष की उम्र के लोगों को हुआ करती थीं। अब डॉक्टरों के पास जाने वाले लोगों में युवाओं की संख्या बढ़ रही है। गलत खानपान का असर आज के युवा स्वाद के चक्कर में पोषक तत्वों से भरपूर खानपान की बजाय कुछ भी उल्टा-सीधा जैसे चिप्स, नूडल्स, मोमोज आदि खाना पसंद करत
शरीर से विषैले तत्वों को निकालकर लचीला बनाती आयुर्वेदिक थैरेपी

शरीर से विषैले तत्वों को निकालकर लचीला बनाती आयुर्वेदिक थैरेपी

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आयुर्वेद में तन और मन दोनों को स्वस्थ रखने के लिए कई तरह की थैरेपी के बारे में बताया गया है। ये थैरेपी बेहद कम समय में आपको फायदा पहुंचाती हैं। ज्यादातर लोग मानते हैं कि थैरेपी का इस्तेमाल किसी खास रोग में ही कराया जाता है जबकि ऐसा नहीं है। इसे आप बीमारियों से दूर और सेहतमंद रहने के लिए भी कर सकते हैं। आयुर्वेदिक थैरेपी तनाव को कम कर मन तो रिलैक्स करने के साथ ब्लड सर्कुलेशन बेहतर करती हैं। इसके अलावा ये शरीर को डिटॉक्स यानी विषैले तत्त्वों को बाहर निकलती है और शरीर को लचीला भी बनाती हैं। जानते हैं इनके बारे में... इन आयुर्वेदिक थैरेपी से मिलेगी राहत शिरोधारायह एक तरह की थैरेपी है जो खास तेल की मदद से की जाती है। इसे बनाने में महानारायण तेल, नीलभ्रंगादी, तिल का तेल आदि का प्रयोग किया जाता है। इससे व्यक्ति मानसिक तौर पर रिलैक्स महसूस करता है। इस दौरान कुछ सावधानियों का ध्यान रखना जरूरी है जै
लक्षण दिखने से पहले ही जानलेवा बीमारियों का पता लगा लेगा ये ब्लड टेस्ट

लक्षण दिखने से पहले ही जानलेवा बीमारियों का पता लगा लेगा ये ब्लड टेस्ट

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अमेरिका के हार्वर्ड मेडिकल स्कूल ने एक ऐसी तकनीक ईजाद की है जिसकी मदद से पांच जानलेवा बीमारियां का उनके लक्षण दिखने से पहले ही पता लगाया जा सकेगा। शोधकर्ताओं का कहना है कि इस तकनीक से जन्म के समय ही... Live Hindustan Rss feed
नींद की शक्तिशाली गोलियां खाने से बढ़ता अल्जाइमर का खतरा : शोध

नींद की शक्तिशाली गोलियां खाने से बढ़ता अल्जाइमर का खतरा : शोध

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नींद की शक्तिशाली गोलिया खाने वालों को अब सतर्क होने की जरूरत है। एक ताजा शोध में कहा गया है कि जो लोग नींद के लिए पॉवरफुल गोलियां लेते हैं उन्हें अल्जाइमर होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।... Live Hindustan Rss feed
कैंब्रिज विश्वविद्यालय ने किया शोध, अच्छे शौक पालिए, नहीं बनेंगे भुलक्कड़

कैंब्रिज विश्वविद्यालय ने किया शोध, अच्छे शौक पालिए, नहीं बनेंगे भुलक्कड़

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अगर आप बुढ़ापे में भूलने की बीमारी से परेशान होना नहीं चाहते तो अभी से ही कुछ अच्छे शौक पालना शुरू कर दीजिए। वैज्ञानिकों ने एक शोध में पाया है कि जवानी में किताबें पढ़ना, खेलना और आपसी मेलजोल की... Live Hindustan Rss feed
देश में 75 फीसदी आबादी न्यू वर्ल्ड सिंड्रोम से प्रभावित

देश में 75 फीसदी आबादी न्यू वर्ल्ड सिंड्रोम से प्रभावित

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देश में बहुत बड़ी आबादी न्यू वर्ल्ड सिंड्रोम से प्रभावित है। न्यू वर्ल्ड सिंड्रोम कीटाणु या संक्रमण द्वारा होने वाली बीमारी नहीं बल्कि जीवनशैली व आहार संबंधी आदतों के कारण होने वाली बीमारियों का एक... Live Hindustan Rss feed
जूते-चप्पल बिना भी चलकर देखें

जूते-चप्पल बिना भी चलकर देखें

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आधुनिक होने की होड़ में हम नंगे पांव चलना भले ही शर्म की बात समझते हों लेकिन विदेशों में बेयरफुट वॉक इन दिनों खासा चलन में है। सप्ताह में कुछ घंटे नंगे पाव चलकर कई बीमारियों से बचा जा सकता है । सुकून के लिए चलें घास पर पड़ी ओस की बूंदें और ठंडी रेत पैरों के जरिए सीधे मन को ठंडक देती हैं। नंगे पैर चलने से घुटनों और कूल्हे की हड्डियां मजबूत होती हैं । रोग दूर होते हैं शरीर के ज्यादातर रिफ्लेक्स पॉइंट्स तलवों में होते हैं। नंगे पांव चलने पर ये सक्रिय हो जाते हैं जिनसे बीमारियां दूर होती हैं। बालों के लिए फायदेमंद सिर में लंबे समय तक खून जमा रहने सेे बाल सफेद या झडऩे लगते हैं । जब हम नंगे पांव चलते हैं तो रक्त सिर से पैरों की ओर आने लगता है जिससे बालों से जुड़ी दिक्कतों में लाभ होता है । रक्त प्रवाह होता है बेहतर नंगे पैर चलने से पंजों और पैरों में रक्त प्रवाह अच्छा होता है । जितना ज्यादा बेहत