News That Matters

Tag: ठीक

तीसरे वनडे से ठीक पहले कोहली ने पूरी की इस फैन की खास मुराद, वो भी इस तरह, Video

Indian Sports
तीसरे और आखिरी वनडे मैच से पहले कोहली ने टीम इंडिया की एक खास फैन की मुराद पूरी की। Jagran Hindi News - cricket:headlines

अब कैंसर से नहींं होगी किसी की मौत, इस दवा से ठीक होगा ये असाध्य रोग!

India
ऐसा कम्पाउंड तैयार किया गया है जो पीड़ित के शरीर में दवा का फार्मूला लंबी अवधि तक रख कर कंपन के साथ किमोथेरेपी करेगा। Jagran Hindi News - news:national
बस एक इंजेक्शन से ठीक होगा मोटापा और डायबिटीज

बस एक इंजेक्शन से ठीक होगा मोटापा और डायबिटीज

Health
डायबिटीज और मोटापा एक दूसरे से काफी हद तक जुड़े हुए हैं। मोटापे को कई समस्याओं की जड़ माना जाता है। इसे ध्यान में रखते हुए विशेषज्ञों ने एक ऐसा इंजेक्शन बनाने का दावा किया है, जिससे मोटापे और... Live Hindustan Rss feed
सेहत के लिए ठीक नहीं ज्यादा केला खाना

सेहत के लिए ठीक नहीं ज्यादा केला खाना

Health
एनर्जी और वजन कम करने के लिए अगर आप दिन भर की जरूरी डाइट को केला खाकर रिप्लेस कर रहे हैं, तो यह गलत है। फाइबर और अन्य पोषक तत्वों से भरपूर केला का ज्यादा सेवन कई समस्याएं भी खड़ी कर सकता है। सिर्फ केला खाने का मतलब होता है प्रोटीन और फैट की कमी होना। इसलिए करता है नुकसानकेला में अमीनो एसिड टायरोसिन होता है जिसे हमारा शरीर टायरामाइन में बदल देता है। टायरामाइन माइग्रेन की समस्या को बढ़ाता है। इसके अलावा केला में स्टार्च होता है जो दांतों को नुकसान पहुंचाता है। इसमें विटामिन बी6 भी होता है, जिसकी ज्यादा मात्रा तंत्रिका तंत्र के लिए हानिकारक होती है। अस्थमा के मरीजों को केला का सेवन नहीं करना चाहिए। इससे सूजन, जलन और एलर्जी के साथ ही सांस लेने में परेशानी भी हो सकती है। यह भी हो सकती हैं समस्याएंपोषण का असंतुलनहमारे शरीर को संतुलित मात्रा में पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। डाइट में ज्यादा के
कई बीमारियों को ठीक करती हैं ग्रीन-टी व रेड वाइन, जानें इनके फायदे

कई बीमारियों को ठीक करती हैं ग्रीन-टी व रेड वाइन, जानें इनके फायदे

Health
ग्रीन-टी और रेडवाइन का सेवन सेहत के लिए बरदान साबित हो सकता है। एक ताजा अध्ययन के अनुसार, ग्रीन-टी और रेड वाइन के सेवन से हृदयघात और हाई ब्लड पेसर समेत कुछ खास किस्म में कैंसर तक का खतरा कम हो जाता... Live Hindustan Rss feed

अगर आपका मेमोरी कार्ड हो गया है खराब, तो सिर्फ एक मिनट में ऐसे करें ठीक

Indian Education
अगर आपका मेमोरी कार्ड भी खराब हो गया है तो ऐसे करें ठीक... Latest And Breaking Hindi News Headlines, News In Hindi | अमर उजाला हिंदी न्यूज़ | - Amar Ujala
अब बीमार व्यक्ति के ठीक होने की संभावना भी बताएगा Google

अब बीमार व्यक्ति के ठीक होने की संभावना भी बताएगा Google

Indian Technology
वैसे तो अभी तक आपने फेसबुक पर तरह-तरह के एप पर यह जानकारी जरूर ली होगी कि कौन कितने साल तक जिंदा रहेगा। अब गूगल एक ऐसी तकनीक लाने जा रहा है जिसकी मदद से यह पता चल सकेगा कि किसी बीमार व्यक्ति के ठीक... Live Hindustan Rss feed

WhatsApp में आ रही है कोई दिक्कत तो ऐसे करें ठीक

Indian Technology
उदाहरण के तौर पर कई बार व्हाट्सऐप में स्टोरेज की समस्या होती है तो कई बार मैसेज भेजने में दिक्कत आती है। खैर, चलिए आज हम आपको व्हाट्सऐप में आने वाली कुछ दिक्कतों और उनके समाधान के बारे मेंं बताते हैं। Latest And Breaking Hindi News Headlines, News In Hindi | अमर उजाला हिंदी न्यूज़ | - Amar Ujala
जैकलीन फर्नांडिस की आंख में लगी ऐसी चोट, कभी नहीं हो सकती ठीक

जैकलीन फर्नांडिस की आंख में लगी ऐसी चोट, कभी नहीं हो सकती ठीक

Entertainment
सलमान खान और जैकलीन फर्नांडिस की फिल्म 'रेस 3' को लेकर फैन्स में काफी एक्साइटमेंट है। लेकिन इस फिल्म की शूटिंग के दौरान जैकलीन के साथ एक हादसा हुआ जिसकी जानकारी जैकलीन ने सोशल मीडिया पर दी।... Live Hindustan Rss feed
सावधान! बार-बार आंखें मलना सेहत के लिए ठीक नहीं

सावधान! बार-बार आंखें मलना सेहत के लिए ठीक नहीं

Health
किरेटोकोनस आंख की पारदर्शी पुतली (कॉर्निया) में होने वाला रोग है। इसमें कॉर्निया के आकार में उभार (कॉनिकल शेप) आ जाता है। आइए जानते हैं इस समस्या के बारे में। प्रमुख वजहेंकिरेटोकोनस की समस्या दो हजार लोगों में से किसी एक को होती है। ज्यादातर मामलों में इसकी वजह का पता नहीं चलता। आंखों की एलर्जी व धूल-मिट्टी के कारण आंखों को बार-बार मलने से यह रोग हो सकता है। इसके अलावा फैमिली हिस्ट्री या डाउन सिंड्रोम होने की स्थिति में किरेटोकोनस होने की आशंका अधिक रहती है। रोग के लक्षणकिरेटोकोनस के मरीजों को देखने में परेशानी होती है। चश्मे का तिरछा नम्बर धीरे-धीरे बढ़ता जाता है और चश्मा लगाने के बाद भी व्यक्ति को स्पष्ट दिखाई नहीं देता। इस वजह से मरीज को पढऩे-लिखने, रोजमर्रा के काम करने और वाहन चलाने में दिक्कत होती है। इस समस्या में रोगी में प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता बढ़ जाती है और उसे पढऩे-लिखने के