News That Matters

Tag: तनाव

बासी खाने और तनाव से बढ़ती है एसिडिटी

बासी खाने और तनाव से बढ़ती है एसिडिटी

Health
खानपान में लापरवाही और तनाव जैसे कई कारणों से एसिडिटी हो सकती है। एसिडिटी में व्यक्ति दिनभर असहज महसूस करता है, शरीर सुस्त रहता है और किसी काम में मन नहीं लगता इसलिए इसे खुद पर हावी ना होने दें । बासी खाना ना खाएं ब्रिटिश डाइटेटिक एसोसिएशन की पूर्व प्रमुख डाइटीशियन लुसी डेनियल के अनु सार जो लोग अक्सर बाहर भोजन करना पसंद करते हैं, उन्हें यह समस्या अधिक होती है । आमतौर पर रेस्तरां में पास्ता, चावल या आलू उबालकर रख लिया जाता है और ग्राहकों को बार-बार वही गर्म करके सर्व किया जाता है । स्टार्चयुक्त चीजों को अगर बार-बार गर्म किया जाए तो उसके अणुओं की संरचना बदलने लगती है । ऐसे में जब हम इन्हें खाते हैं तो गैस बनती है। घर में भी बासी खाने को बार-बार गर्म करके ना खाएं । तनाव भी है वजह बाउल मूवमेंट अनियमित होने से व्यक्ति का मिजाज पूरे दिन चिड़चिड़ा बना रहता है । वहीं, स्ट्रेस होने के कारण भी खानपा

अनुच्छेद 35ए पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज, इसको लेकर कश्मीर में तनाव का माहौल

India
पुलिस प्रशासन ने अलगाववादियों को नजरबंद कर दिया है। वहीं बनिहाल-बारामुला रेल सेवा को अगले आदेश तक बंद कर दिया गया है। Jagran Hindi News - news:national
तनाव की अति बन सकती है हिस्टीरिया रोग

तनाव की अति बन सकती है हिस्टीरिया रोग

Health
आज के दौर में इंसान, मशीन की तरह होता जा रहा है। गलत खानपान के कारण जहां उसे कई शारीरिक रोगों ने जकड़ लिया है, वहीं भागदौड़ वाली जीवनशैली की वजह से अपेक्षाओं और उपलब्धियों के बीच दूरी बढऩे से वह मानसिक तनाव के जाल में फंसता जा रहा है। यह तनाव विभिन्न शारीरिक विकारों के रूप में सामने आता है।   मानसिक कारणों की वजह से होने वाले शारीरिक विकार के लक्षण हिस्टीरिया रोग की ओर संकेत करते हैं। यह रोग स्त्री और पुरुष दोनों को होता है। लेकिन महिलाएं स्वभाव से अधिक संवेदनशील होती हैं और भावनाओं में बहकर अत्यधिक मानसिक तनाव लेती हैं। इसलिए वे इस रोग की चपेट में ज्यादा आती हैं। क्यों होता है हिस्टीरिया लड़कियों की शादी में देरी, पति-पत्नी के बीच लड़ाई-झगड़े, पति की अवहेलना या दुव्र्यवहार, तलाक, मृत्यु, गंभीर आघात, धन हानि, मासिक धर्म विकार, संतान न होना, गर्भाशय के रोग आदि ऐसे कई कारण हंै जो इस बीम
तनाव से मुक्ति के लिए बेहतर है स्ट्रेस बॉल!

तनाव से मुक्ति के लिए बेहतर है स्ट्रेस बॉल!

Health
कई बार आपने लोगों को स्ट्रेस बॉल से खेलते देखा होगा। जैसे ही कोई डेडलाइन करीब आती है या किसी मीटिंग से पहले जब टेंशन में होते हैं, ये लोग स्ट्रेस बॉल को दबाने लगते हैं। क्या ऐसा करने से आराम मिलता है या यह सिर्फ एक भ्रम है- इन सवालों का कोई सीधा जवाब नहीं, क्योंकि इस पर कोई रिसर्च नहीं हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार पूरी तरह से सुनिश्चित नहीं किया जा सकता कि तनाव दूर भगाने में स्ट्रेस बॉल मददगार है। लेकिन लोगों को इससे फायदा मिल रहा है तो इस्तेमाल करने में कहीं कोई बुराई नहीं है। ऐसे काम करती है स्टे्रस बॉलस्ट्रेस हमारे शरीर को कई तरीकों से प्रभावित करता है उनमें से एक है कॉर्टिसोल हार्मोन का स्राव जो हमारे रक्त नलिकाओं को सिकुड़ देता है जिससे उन्हें पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिलती है। बॉल को बार-बार दबाने और छोडऩे से मसल्स पर जोर पड़ता है जिससे ऑक्सीजन और ब्लड सर्कुलेशन बढ़ जाता है।
महज कुछ सेकेंड में पसीने से सेंसर बताएगा तनाव का स्तर

महज कुछ सेकेंड में पसीने से सेंसर बताएगा तनाव का स्तर

Health
यह तो सभी जानते हैं कि तनाव का सेहत पर काफी बुरा असर होता है। मगर यह पता लगाना मुश्किल है कि कौन व्यक्ति किस समय कितने तनाव में है। इस समस्या से निजात दिलाने के लिए वैज्ञानिकों ने एक ऐसा पैच बनाने का... Live Hindustan Rss feed

कितने तनाव में हैं आप, आपके पसीने से बताएगी यह डिवाइस

Indian Technology
कोर्टिसोल की मदद से ही डॉक्टर पता लगा पाते हैं कि एक मरीज का एड्रेनल या पिट्यूटरी ग्रंथि ठीक से काम कर रहा है या नहीं। Latest And Breaking Hindi News Headlines, News In Hindi | अमर उजाला हिंदी न्यूज़ | - Amar Ujala
इन आसान 5 तरीकों से कम करें तनाव, जियें जिंदगी जी भर के

इन आसान 5 तरीकों से कम करें तनाव, जियें जिंदगी जी भर के

Health
रोजमर्रा की भागदौड़ भरी जिंदगी में कोई बड़ी परेशानी न हो तब भी बेवजह का तनाव काफी हो जाता है। तनाव के कारण अक्‍सर सिरदर्द, थकान और चिड़चिड़ापन हो जाता है। इससे निपटने के लिए हम यहां 5 ऐसे तरीके... Live Hindustan Rss feed
सावधान! तनाव का असर आपकी नाजुक आंखों पर

सावधान! तनाव का असर आपकी नाजुक आंखों पर

Health
जर्मनी में मैग्डेबर्ग की ओटो वॉन गुरिके यूनिवर्सिटी में हुए एक ताजा अध्ययन में पता चला है कि निरंतर तनाव और कोर्टिसोल के बढ़े हुए स्तर से ऑटोनोमिक नर्वस सिस्टम में असंतुलन और वास्कुलर डिरेगुलेशन के कारण आंखों और दिमाग पर खराब असर पड़ता है। रिसर्च में सामने आया कि इंट्राओकुलर प्रेशर में वृद्धि, एंडोथेलियल डिसफंक्शन (फ्लैमर सिंड्रोम) और सूजन तनाव के कुछ ऐसे नतीजे हैं जिससे और नुकसान होता है। दरअसल पुराने तनाव से एक लंबे समय तक भावनात्मक दबाव का सामना करना पड़ता है, जिसमें व्यक्ति को लगता है कि उसके पास बहुत कम या कोई नियंत्रण नहीं है। हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष पद्मश्री डॉ. केके अग्रवाल कहते हैं, ‘शरीर की तनाव-प्रतिक्रिया प्रणाली आमतौर पर आत्म-सीमित होती है। खतरे या तनाव के तहत माना जाता है कि शरीर के हार्मोन का स्तर बढ़ता है और अनुमानित खतरा बीत जाने के बाद सामान्य हो जा
कहीं तनाव न छीन लें आपकी आंखों की रौशनी: रिसर्च

कहीं तनाव न छीन लें आपकी आंखों की रौशनी: रिसर्च

Health
भागदौड़ की जिंदगी में बढ़ता तनाव आपकी आंखों की रौशनी छीन सकता है। एक अध्ययन में इसका खुलासा हुआ है। अध्ययन की मानें तो मनोवैज्ञानिक तनाव अपने साथ ग्लूकोमा, डायबिटिक विजन लॉस और भी कई तरह की आंखों की... Live Hindustan Rss feed
भारत, चीन रिश्ते एक और डोकाला का तनाव नहीं ले सकते : चीनी राजदूत

भारत, चीन रिश्ते एक और डोकाला का तनाव नहीं ले सकते : चीनी राजदूत

India
भारत में नियुक्त चीनी राजदूत ने सोमवार को कहा कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंध एक और डोकाला का तनाव नहीं ले सकते हैं। उन्होंने विशेष प्रतिनिधियों की एक बैठक के जरिए सीमा विवाद का एक परस्पर... Live Hindustan Rss feed