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Tag: बीमारियां

मानसून: मौसम सुहाना पर साथ आई कई बीमारियां, बारिश के पानी से रहें सावधान

मानसून: मौसम सुहाना पर साथ आई कई बीमारियां, बारिश के पानी से रहें सावधान

Health
बरसात के मौसम में वायरल तेजी के साथ फैलता है। यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है इसलिए इससे बचने के लिए रोगी व्यक्ति से संपर्क नहीं रखना चाहिए। बरसात के मौसम में डेंगू फैलने की संभावना... Live Hindustan Rss feed
कई बीमारियां बताती एमआरआई

कई बीमारियां बताती एमआरआई

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एमआरआई स्कैन का इस्तेमाल मस्तिष्क, हड्डियों व मांसपेशियों, सॉफ्ट टिश्यू, चेस्ट, ट्यूमर-कैंसर, स्ट्रोक, डिमेंशिया, माइग्रेन, धम नियों के ब्लॉकेज और जेने टिक डिस्ऑर्डर का पता लगाने में होता है । बीमारी की सटीक जान कारी के लिए यह जांच होती है । पहली बार एम आर आई का प्रयोग वर्ष १९७७ में कैंस र की जांच में हुआ था । क्या है एम आर आई मैग्ने टिक रेजोनेंस इमेजिंग (एम आर आई) मशीन बॉडी को स्कैन कर अंग के किस हिस्से में दिक्कत है, की जान कारी देती है । इसमें मैग्ने टिक फील्ड व रेडियो तरंगों का इस्ते माल किया जाता है जो शरीर के अंदर के अंगों की विस्ता र से इमेज तैयार करती हैं । क्या है तकनीक शरीर में सबसे अधिक पानी होता है । पानी के हर मॉलिक्यूल में दो हाइ ड्रोजन प्रोटोन होते हैं । एम आर आई स्कैनिंग के दौरान पावर फुल मैग्ने टिक फील्ड बनता है । हाइड्रो जन के प्रोटोन मैग्ने टिक फील्ड से जुडक़र शरीर के अंग
बीमारियां जो बढ़ातीं एड़ी की परेशानी

बीमारियां जो बढ़ातीं एड़ी की परेशानी

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अक्सर हम पैरों में लगी हल्की-फुल्की चोट या दर्द को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। ऐसा करना कई बार गंभीर भी हो सकता है क्योंकि कुछ मामलों में पैरों का दर्द बढक़र घुटनों व कमर को भी प्रभावित कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि हड्डियों की परेशानियों में से २५-३० प्रतिशत समस्याएं केवल पैरों व एडिय़ों की होती हैं। आम तकलीफ पैर या एड़ी मेंं फे्रक्चर, दर्द, लिगामेंट इंजरी, पैरों की विकृति और फ्लैट फुट आदि। डायबिटीज, स्पोंडिलाइटिस, आर्थराइटिस, ओस्टियोपोरोसिस और पोलियो से पीडि़त मरीजों को पैर व एड़ी की समस्याएं अधिकहोती हैं।   चोट है बड़ी वजह पैरों और एडिय़ों की ज्यादातर समस्याएं चोट के कारण होती हंै। इन परेशानियों से जुड़े कुल मामलों में लगभग ५० प्रतिशत फे्रक्चर व लिगामेंट इंजरी के होते हैं। ५०त्न फे्रक्चर व लिगामेंट इंजरी के होते हैं। २५-३०त्न समस्याएं केवल पैरों व एडिय़ों की होती हैं। ड
बच्चों में होने वाली दुर्लभ बीमारियां

बच्चों में होने वाली दुर्लभ बीमारियां

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भारत में सात करोड़ से अधिक आबादी प्रोजेरिया और डिस्लेक्सिया जैसी दुर्लभ बीमारियों (रेयर डिजीज) से पीडि़त है। प्रोजेेरिया के बारे में फिल्म ‘पा’ और डिस्लेक्सिया पर ‘तारे जमीं पर’ फिल्म से लोगों में थोड़ी जागरुकता आई लेकिन ऐसी ६८०० से अधिक रेयर डिजीज और भी हैं जिनके बारे में हम जानते भी नहीं। दुनियाभर में लगभग ३५ करोड़ लोग इनसे पीडि़त हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों के जन्म के समय सचेत रहें तो कुछेक का इलाज संभव है। अल्ट्रा रेयर डिजीज अलग-अलग देशों में इसके अलग-अलग मानक हैं। भारत में दस हजार की आबादी में किसी एक को होने वाली बीमारी को रेयर जबकि एक लाख की आबादी में से दो लोगों को होने वाली बीमारी को अल्ट्रा रेयर डिजीज कहते हैं। ये हैं लक्षण दौरा या बेहोशी। शरीर में अकडऩ या शिथिलता। बार-बार बिना वजह उल्टी। शरीर या पेशाब से तेज दुर्गंध। त्वचा में बदलाव या दाने न
अधूरी नींद से बढ़ती हैं कई बीमारियां

अधूरी नींद से बढ़ती हैं कई बीमारियां

Health
यूं तो नींद न आने के कई कारण हो सकते हैं। लेकिन नींद न आने से शरीर में कई दिक्कतें बढ़ सकती हैं। कैफीन या एल्कोहल लेना, धूम्रपान करना, सोने का समय निर्धारित न होना, देर रात तक इलेक्ट्रॉनिक गैजेट का इस्तेमाल भी नींद को प्रभावित करते हैं। ऐसे में इनमें बचें ताकि अन्य बीमारियों का खतरा कम किया जा सके। ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया के दौरान रक्त के ऑक्सीजन स्तर में अचानक कमी आना और ब्लड प्रेशर बढऩा सरीखी समस्याएं पैदा हो जाती हैं। इससे ग्रस्त लोगों में उच्च रक्तचाप की समस्या होती है, जिससे हृदय संबंधी रोग होने की आशंका बढ़ जाती है। यह रोग जितना गंभीर होगा, दिल का दौरा पडऩा, हृदय की धडक़न रुक जाना और स्ट्रोक होने का जोखिम उतना ही बढ़़ जाता है। अवसादअवसाद या डिप्रेशन का एक बड़ा कारण अधूरी नींद या अनिद्रा भी है। सही समय पर ध्यान ना देने के कारण उनमें चिड़चिड़ाहट, भूख ना लगन
नींद पूरी लें क्योंकि अनिद्रा लाती है बीमारियां

नींद पूरी लें क्योंकि अनिद्रा लाती है बीमारियां

Health
भागदौड़ भरी जीवनशैली और काम के बोझ का असर नींद पर पड़ रहा है। दिनभर की थकान के बावजूद तनाव का बढ़ता स्तर स्लीपिंग पैटर्न यानी सोने के समय और उसकी अवधि पर असर डाल रहा है। कई शोध मेंं भी सामने आ चुका है कि अनिद्रा की समस्या वजन बढऩे और हार्ट डिजीज का कारण बन सकती है। ऐसे में जरूरी है इसके कारणों को जाना जाए ताकि लाइफस्टाइल में बदलाव किया जा सके। एक व्यक्ति को औसतन ८ घंटे की नींद जरूरी है ताकि वह स्वस्थ रह सके। जानते अनिद्रा से जुड़ी कुछ खास बातें... क्यों जरूरी है नींदजिस तरह मशीन लंबे समय तक चलते-चलते अपना संतुलन खो देती है, उसी तरह हमारा शरीर भी एक समय के बाद आराम चाहता है। दिनभर में हुई थकान को दूर कर तन-मन को तरोताजा करती है नींद। अगर शरीर को आराम न मिले तो शारीरिक और मानसिक सिस्टम पर असर पडऩे लगता है। इम्यून और नर्वस सिस्टम को नॉर्मल रखने, बीमारियों से लडऩे के लिए नींद जरूरी है। नींद से
सावधान! डिप्रेशन से होती हैं कई बीमारियां

सावधान! डिप्रेशन से होती हैं कई बीमारियां

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लगातार मानसिक दबाव या तनाव अनेक मानसिक विकारों को जन्म देता है, अनेक शारीरिक समस्याओं का शिकार बनता है। लगातार मानसिक दबाव या तनाव कई तरह के मानसिक विकारों को जन्म देता है, अनेक शारीरिक समस्याओं का कारण बनता है, जैसे उच्च रक्तचाप, मधुमेह, हृदय रोग, थायराइड आदि। जानते हैं इनके बारे में... कैंसरकैंसर के लगभग 60 प्रतिशत रोगी डिप्रेशन से भी ग्रस्त होते हैं क्योंकि अवसाद के कारण इम्यून सिस्टम बदल जाता है। किसी के अवसाद ग्रस्त होने के पीछे मनोवैज्ञानिक, सामाजिक, आनुवांशिक तथा जैव वैज्ञानिक कारण हो सकते हैं। अवसाद से पीडि़त रोगी का उपचार आमतौर पर सायकोथैरेपी के द्वारा किया जाता है। हृदय रोगएक अध्ययन में पाया गया है कि बचपन के अवसाद का अगर जल्द इलाज और रोकथाम कर लिया जाए, तो वयस्क होने पर दिल की बीमारी का खतरा कम हो सकता है। अवसादग्रस्त बच्चों के मोटे, निष्क्रिय होने और धूम्रपान करने की संभावना हो
अधूरी नींद से बढ़ती हैं कई बीमारियां

अधूरी नींद से बढ़ती हैं कई बीमारियां

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यूं तो नींद न आने के कई कारण हो सकते हैं। लेकिन नींद न आने से शरीर में कई दिक्कतें बढ़ सकती हैं। कैफीन या एल्कोहल लेना, धूम्रपान करना, सोने का समय निर्धारित न होना, देर रात तक इलेक्ट्रॉनिक गैजेट का इस्तेमाल भी नींद को प्रभावित करते हैं। ऐसे में इनमें बचें ताकि अन्य बीमारियों का खतरा कम किया जा सके। ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया के दौरान रक्त के ऑक्सीजन स्तर में अचानक कमी आना और ब्लड प्रेशर बढऩा सरीखी समस्याएं पैदा हो जाती हैं। इससे ग्रस्त लोगों में उच्च रक्तचाप की समस्या होती है, जिससे हृदय संबंधी रोग होने की आशंका बढ़ जाती है। यह रोग जितना गंभीर होगा, दिल का दौरा पडऩा, हृदय की धडक़न रुक जाना और स्ट्रोक होने का जोखिम उतना ही बढ़़ जाता है। अवसादअवसाद या डिप्रेशन का एक बड़ा कारण अधूरी नींद या अनिद्रा भी है। सही समय पर ध्यान ना देने के कारण उनमें चिड़चिड़ाहट, भूख ना ल
कहीं आपको तो नहीं,20 की उम्र में 40 की बीमारियां

कहीं आपको तो नहीं,20 की उम्र में 40 की बीमारियां

Health
क्या आपकी उम्र 20 वर्ष है? या बेटे या बेटी की उम्र 20 वर्ष के करीब है? ऐसे में आप सबसे ज्यादा टेंशन बच्चे के कॅरियर के बारे में करते हैं। हो सकता है कि आप सही हों लेकिन आपको अपने बच्चे के कॅरियर के साथ-साथ उसकी सेहत पर भी ध्यान देना चाहिए। अब 20 वर्ष की उम्र में कदम रखने वाले युवाओं को ऐसी बीमारियां और समस्याएं हो रही हैं जो पहले 40 वर्ष की उम्र के लोगों को हुआ करती थीं। अब डॉक्टरों के पास जाने वाले लोगों में युवाओं की संख्या बढ़ रही है। गलत खानपान का असर आज के युवा स्वाद के चक्कर में पोषक तत्वों से भरपूर खानपान की बजाय कुछ भी उल्टा-सीधा जैसे चिप्स, नूडल्स, मोमोज आदि खाना पसंद करते हैं जो फैट बढ़ाने के साथ-साथ आंतों पर भी भारी पड़ते हैं। इससे पाचनक्रिया गड़बड़ाती है और एसिडिटी, अपच व कब्ज जैसी दिक्कतें होती हैं। अधिक वसायुक्त भोजन से हृदय रोगों का खतरा बढ़ता है। अब भारत में 30 साल से क
नेत्रहीनता के लिए रेटिनल बीमारियां अधिक परेशानी का कारण : विशेषज्ञ

नेत्रहीनता के लिए रेटिनल बीमारियां अधिक परेशानी का कारण : विशेषज्ञ

Health
क्रोनिया (आंख के अगले हिस्से) सेे जुड़ी बीमारियां के बारे में लोग आमतौर पर जानते है जबकि रेटिना (आंख के पिछले हिस्से) से जुड़ी बीमारियों के बारे में लोगों को आसानी से पता नहीं चलता। विशेषज्ञों का कहना है कि अंधापन होने के कारणों की वजहों में आंखों से जुड़ी अन्य बीमारियों की तुलना में रेटिनल बीमारियां ज्यादा परेशानी का सबब बनती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, विभिन्न रेटिनल विकारों में उम्र से जुड़ी मैक्यूलर डिजनरेशन (एएमडी) और डायबिटिक मैक्यूलर इडिमा (डीएमई) दो ऐसी बीमारियां हैं, जिससे हमेशा के लिए आंखों की रोशनी खोने का डर रहता है। एएमडी और डीएमई को आसानी से मैनेज किया जा सकता है, अगर समय पर बीमारी की पहचान हो जाए। रेटिनल बीमारियों जैसे कि एएमडी में धुंधला या विकृत या देखते समय आंखों में गहरे रंग के धब्बे दिखना, सीधी दिखने वाली रेखाएं लहराती या तिरछी दिखना लक्षण है। आमतौर पर रेटिनल बीमारियों क