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भारत में हर वर्ष होती है दो लाख किडनी, 50 हजार हृदय और इतने ही लीवर की दरकार!

India
अंगदान की पूर्वघोषणा के बावजूद मृत व्यक्ति के निकटतम संबंधी की पुन: अनुमति अनिवार्य है। अंगदान की आयुसीमा नहीं है। Jagran Hindi News - news:national
कब्ज से बचने के लिए सुबह खाली पेट एक लीटर पानी पिएं, 70 फीसदी बीमारी होती हैं खाने-पीने में गड़बड़ी के कारण

कब्ज से बचने के लिए सुबह खाली पेट एक लीटर पानी पिएं, 70 फीसदी बीमारी होती हैं खाने-पीने में गड़बड़ी के कारण

Health
शरीर में 70 फीसदी बीमारी खाने-पीने में गड़बड़ी के कारण होती है। इनको ठीक करने का सबसे अधिक कारगर पंचकर्म विधि है। पंचकर्म में दो तरीका है। एक संसमन चिकित्सा और दूसरा संशोधन चिकित्सा। संसमन चिकित्सा... Live Hindustan Rss feed
डॉक्टरों ने मरीज के पेट से टेनिस बॉल से बड़ी रसौली निकाली, चलने में होती थी दिक्कत

डॉक्टरों ने मरीज के पेट से टेनिस बॉल से बड़ी रसौली निकाली, चलने में होती थी दिक्कत

Health
दिल्ली के एक अस्पताल में डॉक्टरों ने एक 28 वर्षीय व्यक्ति के पेट से टेनिस बॉल से करीब डेढ़ गुना बड़े आकार की रसौली को बाहर निकाल दिया है। डॉक्टरों ने उसके पैर को बचाने के लिए ऐसा किया।शालीमार बाग... Live Hindustan Rss feed
कुर्सी पर L शेप में बैठें, C शेप में बैठने से होती है दिक्कत

कुर्सी पर L शेप में बैठें, C शेप में बैठने से होती है दिक्कत

Health
कुर्सी पर बैठकर देर तक काम करने से गर्दन, कमर, हाथों, जांघों की मांसपेशियों में जकडऩ होती है। इससे शरीर का रक्तसंचार प्रभावित होता है। पैरों की धमनियों में तनाव भी बढ़ता है, जिससे रक्तसंचार प्रभावित होता है। इससे कभी-कभी पैर के जोड़ों में दर्द होता है। अ क्सर घंटों कुर्सी पर बैठकर हम काम करते हैं या कुर्सी मिलते ही आराम के लिए बैठते हैं। पैर पसारकर बैठने या सही मुद्रा में न बैठने की आदत भी पड़ जाती है। कुर्सी पर L (एल) शेप में बैठना चाहिए। आराम के लिए पीछे कुशन रख सकते हैं। कुर्सी पर आगे की तरफ न बैठें। सी (C) शेप में नहीं बैठना चाहिए। बढ़ सकता है ब्लड प्रेशर घंटों एक ही जगह एक ही कुर्सी पर बिना ब्रेक के बैठना धूम्रपान से भी अधिक नुकसानदेय है। कंप्यूटर से निकलने वाली हानिकारक किरणें आंखों को नुकसान पहुंचाती हैं। गलत तरीके से बैठने से शरीर में दर्द, मोटापा, कोलेस्ट्रॉल बढऩा, आंखों की रोशनी
आध्यात्मिक संत से मिली कंगना रनौत, कहा- लिंचिंग होती है तो बुरा लगता है-VIDEO

आध्यात्मिक संत से मिली कंगना रनौत, कहा- लिंचिंग होती है तो बुरा लगता है-VIDEO

Entertainment
पूरा देश लगभग दो साल से गाय रक्षकों द्वारा की जा रही मॉब लिचिंग के बारे में बात कर रहा है। बुधवार शाम को आध्यात्मिक संत सदगुरू से मिलने पहुंची कंगना इस दौरान उन्होंने दिन-प्रतिदिन लिंचिंग पर बढ़ रही... Live Hindustan Rss feed
ब्रेस्ट कैंसर पीड़ित 70 फीसदी महिलाओं को नहीं होती कीमोथेरेपी की जरूरत

ब्रेस्ट कैंसर पीड़ित 70 फीसदी महिलाओं को नहीं होती कीमोथेरेपी की जरूरत

Health
भारत की महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर सबसे आम कैंसर है और महिलाओं में सभी प्रकार के कैंसर का 27 प्रतिशत हिस्सा है। हालांकि इन रोगियों में से लगभग 70 प्रतिशत को कीमोथेरेपी से कोई लाभ नहीं पहुंचा है। जिन... Live Hindustan Rss feed
world breastfeeding week 2018 : मां के दूध से कम होती है एलर्जी की आशंका

world breastfeeding week 2018 : मां के दूध से कम होती है एलर्जी की आशंका

Health
अमरीकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के अनुसार, मां को कम से कम छह माह तक स्तनपान अवश्य कराना चाहिए। नवजात शिशु को शुरुआती छह माह मां का दूध मिले तो उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है। उन्हें कई स्वास्थ्य रक्षक विटामिन व पोषक तत्त्व मिल जाते हैं। नवजात शिशु को स्तनपान करवाने से मां भी स्वस्थ रहती है। रोगों से बचाव चिकित्सकीय अनुसंधान का निष्कर्ष है कि जिन बच्चों को मां का दूध मिलता है, उनके आमाशय में वायरस, श्वसन संबंधी रोग, कान के इंफेक्शन और मेनिनजाइटिस जैसे रोगों का खतरा घट जाता है। वयस्क होने पर ऐसे बच्चे डायबिटीज, उच्च कोलेस्ट्रॉल स्तर और पेट के रोगों से भी बचते हैं। एलर्जी से बचाव नवजात शिशु के लिए वरदान है मां का दूध। जिन बच्चों को जन्म के बाद बाहर का दूध मिलता है, उनके एलर्जिक होने का खतरा ज्यादा रहता है। मां के दूध से शिशु के इंटेस्टाइन का बचाव होता है और वे कई किस्म की एलर्जी से बच
मानसून में घातक बीमारियों के मामलों में होती है वृद्धि

मानसून में घातक बीमारियों के मामलों में होती है वृद्धि

Health
देश में मानसून के दौरान बुखार और अन्य संबंधित रोगों के मामले बढ़ जाते हैं। इनमें वायरल, मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया जैसी घातक बीमारियां शामिल हैं। मानसून के दौरान लगातार बुखार रहे तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अपने आप दवा लेकर इलाज करना भी घातक हो सकता है। बुखार विभिन्न स्थितियों का संकेत हो सकता है और मानसून फीवर विशेष रूप से भ्रामक हो सकता है। वायरल बुखार खांसी, आंखों की लाली या नाक बहने से जुड़ा हुआ है। डेंगू के साथ बुखार और आंखों में दर्द होता है। चिकनगुनिया बुखार, दांत और जोड़ों के दर्द का मिश्रण है। आम तौर पर जोड़ों का दर्द बढ़ता जाता है। मलेरिया बुखार ठंड और जकडऩ के साथ आता है और बुखार के दो एपिसोड के बीच एक सामान्य चरण होगा। स्थिति की शुरुआत के बाद पीलिया में बुखार गायब हो जाता है। अंत में टाइफाइड बुखार अक्सर अपेक्षाकृत नाड़ी और विषाक्त भावना के साथ लगातार बना रहता है। इस मौसम मे
मानसून में घातक बीमारियों के मामलों में होती है वृद्धि

मानसून में घातक बीमारियों के मामलों में होती है वृद्धि

Health
देश में मानसून के दौरान बुखार और अन्य संबंधित रोगों के मामले बढ़ जाते हैं। इनमें वायरल, मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया जैसी घातक बीमारियां शामिल हैं। मानसून के दौरान लगातार बुखार रहे तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अपने आप दवा लेकर इलाज करना भी घातक हो सकता है। बुखार विभिन्न स्थितियों का संकेत हो सकता है और मानसून फीवर विशेष रूप से भ्रामक हो सकता है। वायरल बुखार खांसी, आंखों की लाली या नाक बहने से जुड़ा हुआ है। डेंगू के साथ बुखार और आंखों में दर्द होता है। चिकनगुनिया बुखार, दांत और जोड़ों के दर्द का मिश्रण है। आम तौर पर जोड़ों का दर्द बढ़ता जाता है। मलेरिया बुखार ठंड और जकडऩ के साथ आता है और बुखार के दो एपिसोड के बीच एक सामान्य चरण होगा। स्थिति की शुरुआत के बाद पीलिया में बुखार गायब हो जाता है। अंत में टाइफाइड बुखार अक्सर अपेक्षाकृत नाड़ी और विषाक्त भावना के साथ लगातार बना रहता है। इस मौसम मे
गंभीर रोगों में सर्जरी की मदद से होती कम समय में रिकवरी

गंभीर रोगों में सर्जरी की मदद से होती कम समय में रिकवरी

Health
आमतौर पर चेहरे के दाग-धब्बे और अनचाहे बालों को हटाने के लिए जानी जाने वाली लेजर थैरेपी का इस्तेमाल अब गंभीर बीमारियों के इलाज में भी हो रहा है। इनमें कैंसर, किडनी स्टोन, प्रोस्टेट गं्रथि बढऩे की समस्या, आंखों की रोशनी बढ़ाना आदि है। अन्य थैरेपी के मुकाबले इसमें दर्द, सूजन और धब्बे पडऩे की आशंका कम रहती है। यह है थैरेपी लेजर का पूरा नाम लाइट एम्प्लिफिकेशन बाय स्टिमुलेटेड एमिशन ऑफ रेडिएशन है। ये विशेष प्रकार की किरणें हैं जो सिलेक्टिव फोटोथर्मोलिसिस सिद्धांत पर काम करती हैं। इसमें प्रभावित हिस्से पर एक प्रोब (उपकरण) के माध्यम से तय फ्रीक्वेंसी की किरणें डालते हैं। फ्रीक्वेंसी कितनी हो, यह मर्ज पर निर्भर करता है। ये किरणें गरम होकर प्रभावित हिस्से को जला देती हैं। इससे न तो आसपास की कोशिकाओं को नुकसान होता है व न ही मरीज को जलन होती है। मरीज की किडनी में स्टोन होने पर लेजर प्रोब से स्टोन को ज