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Rs.10 हजार वेतन कटने पर 1200 रेजीडेंट डॉक्टर हड़ताल पर गए, सीनियर व नर्सों के भरोसे व्यवस्था




वेतन से 10 हजार रुपए काटे जाने के विरोध में पीजीआईएमएस के रेजीडेंट डॉक्टर बुधवार सायं साढ़े 6 बजे हड़ताल पर चले गए। रेजीडेंट डॉक्टरों ने चेतावनी दी कि जब तक 7वें वेतन आयोग के हिसाब से उनका वेतन नहीं आता और सैलरी काटने की समस्या का स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक हड़ताल करेंगे।

डॉक्टरों के बुधवार शाम साढ़े 6 बजे अचानक हड़ताल पर जाने से पीजीआईएमएस में स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गईं। ऐसे में कंसलटेंट और नर्सों को हालात संभालने के लिए काम में जुटना पड़ा। रात 10 बजे इमरजेंसी में ज्यादा गंभीर मरीजों के ही कार्ड बनाए गए। इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। रात साढ़े 10 बजे रेजीडेंट डॉक्टर हॉस्टल लौट गए हैं और अब गुरुवार सुबह विजय पार्क में एकत्र होकर धरना शुरू किया जाएगा। अप्रैल में पीजीआई के इंटर्न डॉक्टरों ने स्टाइपेंड बढ़ाने को लेकर हड़ताल की थी। लगातार इस तरह के मुद्दे पीजीआई में बने हुए हैं, लेकिन समय रहते समाधान नहीं हो रहा है। इस वजह से मरीजों को दिक्कत आ रही है।

एक वर्ष पहले भी हड़ताल पर गए थे रेजीडेंट,

अक्टूबर 2017 में बच्चा चोरी मामले में रेजीडेंट डॉक्टरों ने हड़ताल की थी। उस समय एचसीएमएस डॉक्टरों ने पीजीआई को संभाला था। 3 दिन डॉक्टर हड़ताल पर गए थे।

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17 विभागों में मरीजाें को आई दिक्कत, आज भी हड़ताल पर रहने की दी चेतावनी

रोहतक पीजीआई के इमरजेंसी वार्ड में स्ट्रेचर पर लेटे मरीज डॉक्टर का इंतजार करते हुए।

वीसी व एमएस से मुलाकात की

रेजीडेंट डॉक्टर शाम 6:30 बजे कुलपति से मिलने रेजीडेंट डॉक्टर एसोसिएशन के प्रधान डॉ. जंगवीर ग्रेवाल की अध्यक्षता में कुलपति कार्यालय पहुंचे। डॉ. गौरव, डॉ. राहुल डॉ. सतीश, डॉ. रजनी और डॉ. सुलोचना का कहना था कि सातवां वेतन आयोग जनवरी 2016 में लागू हुआ था जो हमें 2018 में दिया गया है। अब मूल वेतन भी ठीक तरीके से फिक्स नहीं किया गया है। मूल वेतन ठीक फिक्स किया जाए और एरियर दिया जाए। रेजीडेंट डॉक्टरों के 63 हजार वेतन में से 10 हजार काट लिए गए हैं। कुलपति ने आश्वस्त किया कि वेतन चंडीगढ़ से फिक्स हुआ है, यह हमारे स्तर का काम नहीं है। डॉक्टर संतुष्ट नहीं हुए तो हड़ताल पर चले गए।

वेतन को लेकर सरकार को लिखा पत्र : कुलपति

पीजीआईएमएस के रेजीडेंट डॉक्टरों के वेतन का मुद्दा संज्ञान में है। इस पर विश्वविद्यालय प्रशासन की आेर से तुरंत कार्रवाई करते हुए डॉक्टरों के हक में पत्र सरकार के पास भेज दिया गया। मरीजों के हितों को ध्यान में रखते हुए सभी रेजीडेंट चिकित्सकों से अपील करते हैं कि वे जल्द से जल्द हड़ताल खत्म कर अपनी ड्यूटी पर वापिस लौटें। -डॉ. ओपी कालरा, कुलपति, हेल्थ विवि।

पीजीआई में वीसी ऑफिस के बाहर जुटे रेजीडेंट डॉक्टर।

गंभीर मरीजों को परिजन ले गए निजी अस्पताल, कार्ड बनाने भी किए कम

पीजीआई के ट्रामा सेंटर और इमरजेंसी में भीड़ ज्यादा होने के कारण मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। गंभीर मरीजों को परिजन इलाज में देरी होती देख निजी अस्पताल ले गए। हालांकि इमरजेंसी में मरीजों की संख्या एकदम से ज्यादा होने के चलते एक बेड पर दो मरीज को लेटाना पड़ा। कई मरीजों का स्ट्रेचर पर ही इलाज चल रहा था। इमरजेंसी में कार्ड बनाए जाने भी रात सवा 10 बजे से ही बंद कर दिए गए। मरीजों को पहले डॉक्टर से लिखवाकर लाने के आदेश दिए जाने लगे। अल्ट्रासाउंड की सेवाएं भी बाधित रही। जांच के लिए मरीजों को पुरानी इमरजेंसी से ट्रामा रेफर कर दिया गया।

फैकल्टी ने संभाला काम : एमएस

रेजीडेंट डॉक्टरों की हड़ताल को देखते हुए फैकल्टी ने इमरजेंसी व ओटी का चार्ज संभाल लिया है ताकि मरीजों को कोई परेशानी न आए। वेतन का कार्य निर्धारित समय पर पूरा होगा। ऐसे में हड़ताल पर जाना पूर्ण रूप से अवैध है। -डॉ. एमजी वशिष्ठ, एमएस, पीजीआईएमएस।

2 माह से डायरेक्टर नहीं दे रहे मिलने का समय : प्रधान

आरडीए प्रधान जंगवीर ग्रेवाल ने कहा कि करीब 2 महीने से डायरेक्टर से मिलने का समय मांग रहे हैं। वे मिलते ही नहीं हैं। जब भी कार्यालय में जाओ तो कभी कुलपति के पास जाने की बात होती है या फिर अकाउंट आॅफिसर से मिलने को कह दिया जाता है। अब तक 3 से 4 बार मिलने के लिए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि जब तक हमारा वेतन सही फिक्स नहीं होता और सातवें वेतन आयोग का पूरा लाभ नहीं मिलता हड़ताल जारी रहेगी। वहीं नॉन प्रैक्टिशनर अलाउंस यानी एनपीए भी 9 फीसदी नहीं दिया जा रहा है।

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हड़ताल पर गए, सीनियर व नर्सों के भरोसे व्यवस्था

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