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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पहली बार किसी महिला ने पंबा नदी पार की, लेकिन दर्शन नहीं कर पाई



नेशनल डेस्क, तिरुवनंतपुरम. सबरीमाला मंदिर में हर उम्र की महिला के प्रवेश की अनुमति के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सुहासिनी राज पंबा नदी तक पहुंचने वालीं पहली महिला बन गई हैं। हालांकि, वे मंदिर तक नहीं पहुंच पाईं। प्रदर्शनकारियों के भारी विरोध के चलते उन्हें यहीं से लौटना पड़ा। सुहासिनी न्यूयॉर्क टाइम्स की पत्रकार हैं और यहां मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर चल रहे विरोध-प्रदर्शन को कवर करने गई थीं।

– सुहासिनी राज न्यूयॉर्क टाइम्स के दिल्ली ब्यूरो में कार्यरत हैं। उन्हें बड़े पैमाने पर सुरक्षा मुहैया कराई गई थी। इनमें कमांडो भी शामिल थे। लेकिन, मंदिर के कुछ किलोमीटर पहले ही बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों ने उन्हें आगे जाने से रोक दिया। इसके बाद उन्हें पंबा बेस कैंप ले जाया गया।

अभी तक कोई भी महिला नहीं कर पाई दर्शन : सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पहली बार बुधवार शाम 5 बजे पट खोले गए थे। मंदिर 22 अक्टूबर तक खुला रहेगा। 12वीं सदी के भगवान अयप्पा के मंदिर में पहली बार महिलाओं के प्रवेश की अनुमति दी गई। लेकिन, हजारों श्रद्धालु महिलाओं के मंदिर में प्रवेश के आदेश के खिलाफ विरोध कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों में महिलाएं भी शामिल हैं। इसी के चलते यहां अभी तक कोई भी महिला मंदिर में प्रवेश नहीं पाई।

उम्र बताने के बाद भी नहीं जाने दिया गया : सुहासिनी ने प्रदर्शनकारियों से कहा कि उनकी उम्र 50 साल है। लेकिन उन्हें मंदिर में नहीं जाने दिया गया। प्रदर्शनकारी 10-50 साल की उम्र की महिला के मंदिर में प्रवेश के खिलाफ विरोध कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के पहले 10 साल की बच्चियों से लेकर 50 साल तक की महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी थी।

सुहासिनी ने कहा- श्रद्धालुओं की भावनाओं को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहतीं : पंडलम महल (राजपरिवार) की ओर से कहा गया है कि महिला पत्रकारों को पंबा तक जाने की अनुमति है। इसलिए सुहासिनी को वहां तक जाने दिया गया। पुलिस ने उन्हें पर्याप्त सुरक्षा का भरोसा दिलाया। लेकिन उन्होंने भारी विरोध को देखते हुए मंदिर में जाने से इनकार कर दिया। सुहासिनी ने पुलिस को बताया कि वह श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहतीं। पुलिस ने सुहासिनी का बयान दर्ज कर लिया।

800 साल से जारी प्रथा : सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश के फैसले के खिलाफ केरल के राजपरिवार और मंदिर के मुख्य पुजारियों समेत कई हिंदू संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की थी। अदालत ने सुनवाई से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर को सबरीमाला मंदिर में हर उम्र की महिलाओं को प्रवेश करने की इजाजत दी। यहां 10 साल की बच्चियों से लेकर 50 साल तक की महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी थी। प्रथा 800 साल से चली आ रही थी।

हर साल 5 करोड़ लोग करते हैं दर्शन : सबरीमाला मंदिर पत्तनमतिट्टा जिले के पेरियार टाइगर रिजर्वक्षेत्र में है। 12वीं सदी के इस मंदिर में भगवान अय्यप्पा की पूजा होती है। मान्यता है कि अय्यपा, भगवान शिव और विष्णु के स्त्री रूप अवतार मोहिनी के पुत्र हैं। दर्शन के लिए हर साल यहां साढ़े चार से पांच करोड़ लोग आते हैं।

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Sabarimala row Pilgrims stranded as temple row shuts down Kerala

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