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फ्रांस ने जीता टूर्नामेंट, इंडिया का अरविंद बेस्ट राइडर




13वीं यूएसआईसी वर्ल्ड रेलवे साइकिलिंग प्रतियोगिता के तहत गुरुवार को 20 किमी रोड इंडिविजुअल टीम ट्रायल रेस में भारत के अरविंद पंवार ने बाजी मारी। उसे गोल्ड के साथ ऑल ओवर टूर्नामेंट का बेस्ट राइडर भी चुना गया। दूसरे स्थान पर इंडिया का महावीर बिश्नोई व तृतीय स्थान पर स्विटजरलैंड का मुल्लर बेर्जान रहा। ऑल ओवर टूर्नामेंट का खिताब फ्रांस की टीम ने जीता। दूसरे स्थान पर स्विटजरलैंड व तृतीय स्थान पर भारत रहा।

सिविल एयरपोर्ट के पास से हाइवे नंबर 11 पर बने ट्रैक पर सुबह साढ़े आठ बजे शुरू हुई 20 किमी इंडिविजुअल टाइम टायटल रेस को अरविंद ने 26 मिनट 32 सैकेंड में पूरा किया। रेस को डीआरएम व अन्य रेल अधिकारियों ने संयुक्त रूप से हरी झंडी दिखाई। वहीं मेडिकल सहायता के लिए रेलवे चिकित्सालय के मंडल चिकित्सा अधिकारी पूरी टीम और एंबुलेंस के साथ मौजूद रहे। सीनियर डीसीएम अभय शर्मा ने बताया कि शाम साढ़े सात बजे जयपुर रोड स्थित होटल वेस्टा में आयोजित समापन समारोह में विजेता टीम व खिलाड़ियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। इस बीच कलाकारों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी। कार्यक्रम में आरएसपीबी की सेक्रेटरी रेखा यादव, उपरे खेलकूद संघ के जनरल सेक्रेटरी सुधीर गुप्ता, मंडल खेलकूद अधिकारी सुनील महला आदि मौजूद थे।

ये रहा परिणाम

ऑल ओवर टूर्नामेंट का परिणाम कुछ इस प्रकार से रहा। इंडिया के अरविंद पंवार को बेस्ट राइड चुना गया। दूसरे नंबर पर फ्रांस का शोबस योहान रहा। बेस्ट टीम का खिताब फ्रांस ने जीता। स्विटजरलैंड की टीम दिवसीय व इंडिया की टीम तृतीय स्थान पर रही। 13 को हुई टीम ट्रायल प्रतियोगिता में फ्रांस प्रथम, भारत दिव्तीय व स्विटजरलैंड की टीम तृतीय रही। 14 नवंबर को दूसरे इवेंट में 100 किमी रोड रेस में फ्रांस का शोबस योहान प्रथम, स्विटजरलैंड का मुल्लर ब्रेजॉन दि्वतीय व चेक गणराज्य का पटाकी थामस तृतीय रहा। टूर्नामेंट में डेनमार्क, फ्रांस, चेक गणराज्य, स्विटजरलैंड, ग्रेट ब्रिटेन, नार्वे व भारत की रेलवे की टीमों के पांच-पांच सदस्यों ने भाग लिया। इंडिया की टीम के खिलाडि़य़ों को कोचिंग इंटरनेशनल प्लेयर फतेहसिंह गौड़, राजेंद्र बिश्नोई ने दी। मैकेनिक हरीराम चौधरी व ट्रेनर रामकरण चौधरी की भूमिका भी अहम रही।

विदेशी ट्रैक पर अभ्यास से मिला फायदा

यूरोप के बेल्जियम में सबसे ज्यादा साइकिलिंग रेस होती है। विदेशों में रेस की तकनीक भारत से काफी अलग है। यहां पर सीधा ट्रैक होता है साइकिलिंग के लिए। विदेशों में तकनीकी रूप से ट्रैक विकसित किया जाता है। उसमें ढलान, चढ़ाई, मोड समेत सभी तरह के रास्ते होते है। सभी तरह के ट्रैक पर अभ्यास के लिए हर साल यूरोप में दो महीने साइकिलिंग रेस में भाग लेकर अभ्यास करता हूं। इंडिया के कोच के साथ यूएसए के कोच आइजेया न्यूबर्क से ऑनलाइन कोचिंग लेता हूं ताकि बेहतर कर सके। इंडिविजुअल टाइम ट्रॉयल में स्पेशलिस्ट हूं। इसके लिए अभ्यास भी अकेले करता हूं। 2012 से अब तक तीन गोल्ड व दो सिल्वर मेडल जीत चुका हूं। यही वजह है बुधवार को हुई रेस में गोल्ड जीत पाया हूं। अरविंद पंवार, सीनियर क्लर्क, ईस्टन रेलवे

अभ्यास के साथ खानपान का ख्याल भी जरूरी

20 किलोमीटर इंडयुविजल रेस जीतने के लिए काफी समय तक मेहनत के साथ खान-पान का ख्याल रखा ताकि स्टैमिना बेहतर रहे। साइकिलिंग को चुनने की मुख्य वजह थी कोच राजेंद्र बिश्नोई, जिनसे वह प्रेरित हुआ। फिर नेशनल साइकिलिंग कोचिंग कैंप पटियाला में तीन-चार साल तक प्रेक्टिस की। साउथ एशियन गेम्स में गोल्ड के अलावा दिल्ली में वर्ष 2018 में हुए एशिया कप में गोल्ड जीता। छह साल से साइकिलिंग कर रहा हूं। एक घंटे में 46 किलोमीटर साइकिलिंग करता हूं। टूर्नामेंट के लिए प्रेक्टिस काफी समय से कर रहा हूं। हर सप्ताह चार सौ से साढ़े चार सौ किलोमीटर साइकिलिंग करनी पड़ती है। रेस में काफी एहतियात भी रखनी पड़ती है। खुद के साथ साइकिल का भी ख्याल रखना पड़ता है, क्योंकि काफी महंगी आती है। यह खेल बेहद महंगा है। मनोहर बिश्नोई, क्लर्क, लालगढ़ हॉस्पिटल।

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