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देश में तैयार हुआ बम तलाशने वाला रोबोट, इसे रिमोट से ऑपरेट करने की जरूरत नहीं, सीढ़ियों पर भी चढ़ सकता है और ढाई किलो तक वजन भी उठाएगा



जालंधरजालंधर में गुरुवार से 106वीं इंडियन साइंस कांग्रेस शुरू हुई। 7 जनवरी तक चलने वाली कांग्रेस के पहले दिन बेंगलुरू के सेंटर फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड रोबोटिक्स (केयर) ने मिनी-यूजीवी रोबोट प्रस्तुत किया। ये रोबोट खतरे वाले स्थानों पर जाकर बम या संदिग्ध सामान को तलाशेगा। रोबोट को रिमोट से ऑपरेट करने की जरूरत नहीं होगी। अन्य रोबोट के साथ भी ये खुद-ब-खुद को-ऑर्डिनेट कर लेगा।

डेवलपर ने बताया कि- "रिमोट कंट्रोल वाले रोबोट में कैमरा, सेंसर, राडार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जोड़कर ये रोबोट तैयार किया गया है।'

डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (डीआरडीओ) ने चंडीगढ़ की टर्मिनल बैलेस्टिक रिसर्च लैैब (टीबीआरएल) में विकसित की गई प्लास्टिक बुलेट भी पेश की। इसकी खासियत यह है कि इसे हर सुरक्षाकर्मी के पास उपलब्ध एके-47 राइफल से ही फायर किया जा सकता है। प्लास्टिक बुलेट का वजन वास्तविक बुलेट से 10 गुना कम है। लगने पर प्लास्टिक बुलेट 10-12 मिमी गहराई तक घाव करती है, पर जानलेवा चोट नहीं लगती। टीबीआरएल निदेशक मंजीत सिंह ने बताया कि प्लास्टिक बुलेट जवान को उपलब्ध कराना आसान होगा। इसे विकसित करने वाले डॉ. प्रिंस शर्मा ने कहा कि गृह मंत्रालय ने एक लाख बुलेट की मांग की है। ये बुलेट महाराष्ट्र की वरणगांव की ऑर्डिनेंस फैक्ट्री में तैयार की जा रही हैं।

मिनी-यूजीवी रोबोट विस्फोटक पर पानी छिड़केगा, ढाई किलो तक वजन उठाएगा
ये रोबोट सीढ़ियों पर चढ़ सकता है, विस्फोटक पर पानी छिड़क सकता है, दो से ढाई किलो तक वजन वाले संदिग्ध सामान को उठाकर ला सकता है। डीआरडीओ के चेयरमैन सतीश रेड्डी ने बताया कि मिनी-यूजीवी का परीक्षण सफल रहा है और सुरक्षा एजेंसियों की जरूरत के हिसाब से इसके ऑर्डर तैयार किए जाएंगे।

एंटी-हाईजैकिंग ऑपरेशन के लिए भी बुलेट तैयार की गई
टर्मिनल बैलेस्टिक रिसर्च लैैब (टीबीआरएल) के निदेशक मंजीत सिंह ने बताया कि लैब में एयरक्राफ्ट मार्शल के लिए खास फ्रेंजिबिल बुलेट भी विकसित की गई है। इसका इस्तेमाल एंटी-हाईजैकिंग ऑपरेशन में किया जा सकता है। यह बुलेट आतंकी को मार सकती है या गंभीर रूप से घायल कर सकती है। लेकिन अगर गोली सीधे एयरक्राफ्ट की बॉडी में लगी तो केवल हल्का सा दाग आएगा। एयरक्राफ्ट में छेद नहीं होगा। एयरक्राफ्ट की बॉडी से टकराकर गोली पाउडर बनकर बिखर जाएगी। नाहन (हिमाचल प्रदेश) स्थित स्पेशल फोर्सेस ट्रेनिंग स्कूल ने डीबीआरएल से 50 हजार बुलेट उपलब्ध कराने के लिए कहा है।

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