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रेडी टू फ्रूट मशरूम बैग 50 रुपए में लाएं घर, बस रोज पानी देकर दो महीने तक ऑर्गेनिक मशरूम का लें सकेंगे लुत्फ




पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ माइक्रोबायोलॉजी द्वारा समय और जगह की कमी और किचन गार्डनिंग के शौकीनों के लिए रेडी टू फ्रूट मशरूम बैग तैयार किया है। इसे यूनिवर्सिटी से घर लाकर उसे बस रोजाना पानी देने की जरूरत होगी और दो महीने तक ऑर्गेनिक मशरूम खाने का लुत्फ लिया जा सकता है। पीएयू के माइक्रोबायोलॉजी डिपार्टमेंट द्वारा तकरीबन डेढ़ महीने के प्रोसेस को खुद करके आम जनता के लिए ये बैग तैयार किया है, जिसकी कीमत 50 रुपए रखी गई है। डिपार्टमेंट ऑफ माइक्रोबायोलॉजी के हेड डॉ. शम्मी कपूर ने बताया कि मशरूम उगाने का प्रोसेस लंबा है। व्यस्त जीवन में शहरों के ही नहीं गांव के लोग भी इस प्रोसेस को करने में कतराते हैं। मगर मशरूम खाने से शरीर को कई तरह के फायदे होते हैं। इसे समझते हुए ही हमने ये रेडी टू फ्रूट मशरूम बैग तैयार किया है। जिसमें लगभग डेढ़ महीने का जो मशरूम उगने से पहले का प्रोसेस है वो करना न पड़े और घर पर ही आराम से ऑर्गेनिक मशरूम का लुत्फ भी लिया जा सके।

तूड़ी या पराली की कंपोस्ट तैयार करने में लगता है एक महीने का समय

मशरूम उगाने के लिए तूड़ी या पराली की कंपोस्ट तैयार की जाती है। इस कंपोस्ट को ही तैयार करने में एक महीने का समय लग जाता है। मशरूम का बीज मार्केट में नहीं मिलता। बल्कि इसे गेहूं के बीज से लैब में खास परिस्थितियों में तैयार किया जाता है। बीज के तैयार होने पर उसे कंपोस्ट में दो हफ्तों के लिए मिक्स होने के लिए रखा जाता है। इसके तैयार होने के बाद डेढ़ इंच मोटी परत कर केसिंग मिट्टी डाली जाती है। इसके बाद ये बैग तैयार होता है। इसे घर ले जाने के बाद बस रोज पानी डालने की जरूरत होती है।

मशरूम में लो कैलोरी, प्रोटीन, विटामिन, फाइबर भरपूर मात्रा में होते हैं। हेल्दी बेनिफिट्स के कारण युवाओं में इसकी खपत बढ़ रही है। अगर यही बिना किसी पेस्टिसाइड के मिल जाए तो फायदे और भी बढ़ जाते हैं। -डॉ. शम्मी कपूर, हेड, डिपार्टमेंट ऑफ माइक्रोबायोलॉजी

बटन, ऑइस्टर की किस्मों में उपलब्ध

डॉ. कपूर ने बताया कि यूनिवर्सिटी द्वारा बटन मशरूम जोकि मार्केट में आमतौर पर मिलता है उसका बैग तैयार करने के साथ ही ऑइस्टर मशरूम का बैग भी तैयार किया जाता है। ऑइस्टर मशरूम के बैग को तैयार करने का प्रोसेस अलग और थोड़ा कम समय लेने वाला है। एक बैग से 1 किलो से भी ज्यादा मशरूम निकलते हैं। जब बैग से मशरूम निकलने बंद हो जाएं तो इस ऑर्गेनिक खाद का इस्तेमाल पौधों की खाद के लिए किया जा सकता है।

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