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पिस्टल से राइफल बनने वाले असलहे की खेप देने आया सप्लायर अरेस्ट, 4 पिस्टल बरामद




सुक्खा काहलवां बनने की चाहत रखने वाले 18 साल के गैंगस्टर जसकरन सिंह कारी को असलहा की डिलीवरी देने आए 50 साल के सप्लायर इसरार अहमद को पुलिस ने कंगनीवाल से अरेस्ट किया है। यूपी के बिजनौर के गांव उमरी के रहने वाले अहमद से पुलिस ने 4 पिस्टल और 8 कारतूस बरामद किए हैं। इनमें से दो पिस्टल तो इस तरीके से बनाई गई थीं कि उन्हें खोल कर राइफल की तौर पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है। आरोपी खुद असलहा बनाने का कारीगर भी है। पहली बार इस तरीके की पिस्टल राज्य में पकड़ी गई हैं, जो राइफल बन सकती हैं। वह बिजनौर से ट्रेन के जनरल डिब्बे में ही आता था लेकिन कभी उसकी चेकिंग नहीं हुई। आरोपी को पूछताछ के लिए दो दिन के रिमांड पर लिया है। कारी ने माना था कि अहमद के पास राज्य के गैंगस्टर असलहा खरीद रहे हैं। वह सस्ते दाम पर अच्छे पिस्टल तैयार कर देता है।

18 साल के गैंगस्टर जसकरन सिंह कारी को देने थे हथियार

जानकारी देते हुए एसएसपी नवजोत सिंह माहल।

कारी ने किया खुलासा, राज्य में असलहा सप्लाई कर रहा अहमद

एसएसपी नवजोत सिंह माहल ने बताया कि सीआईए स्टाफ-2 की टीम ने 14 जनवरी को होशियारपुर के मोरांवाली के रहने वाले जसकरन सिंह, फगवाड़ा के हादियाबाद के 22 साल के तेजपाल सिंह तेजा, गांव सेलकियाना के 28 साल के सुनिंदर पाल उर्फ शिंदा, गांव रुड़की के 44 साल के सोमनाथ सोमा और मलसियां के 25 साल के विजय कुमार को अरेस्ट कर 9 पिस्टल और 76 जिंदा कारतूस बरामद किए थे। कारी से मिला असलहा बिजनौर का अहमद देकर गया था।

सप्लायर के बैंक अकाउंट में कारी ने की एडवांस पेमेंट

कारी की पूछताछ में यह बात सामने आई थी कि उसने 4 और पिस्टल खरीदने के लिए अहमद से बात की थी। कारी को यूपी में अहमद ने एक ऐसा पिस्टल दिखाया था, जो राइफल भी बन जाती है। कारी ने कहा कि आरोपी पहले भी कंगनीवाल एरिया में डिलीवरी देने आया था। डिलीवरी हफ्ते बाद मिलनी थी। एडवांस के तौर पर कारी ने अहमद के बैंक खाते में 20 हजार रुपए डाल दिए थे। बाकी की पेमेंट असलहा मिलने के बाद होनी थी।

26 जनवरी को लेकर ट्रेन में चेकिंग को लेकर उठे सवाल

50 साल के अहमद ने कहा कि उसके 6 बच्चे हैं और वह आठवीं पास है। वह खुद असलहा बनाता है तो कमीशन में बेचता भी है। वह 6 महीने से राज्य के गैंगस्टरों के टच में था। उसने शुरुआत का धंधा 10 हजार में पिस्टल बेचकर शुरू किया था। पिस्टल अच्छे थे तो उसका धंधा खूब चल पड़ा। वह बिजनौर से ट्रेन के जरनल डिब्बे में सवार होकर बोरी में कपड़े और पिस्टल रखकर आ जाता था। रास्ते में उसके सामान की कभी चेकिंग नहीं हुई। अहमद के इस खुलासे से 26 जनवरी को लेकर ट्रेन में चेकिंग पर सवाल उठाने लगे है।

कारी पकड़ा गया सप्लायर को भनक तक नहीं थी

एसएसपी ने सप्लायर को पकड़ने के लिए एसपी बलकार सिंह की सुपरविजन में इंचार्ज शिव कुमार और एएसआई मोहन सिंह को जिम्मेदारी सौंपी थी। सप्लायर का मोबाइल नंबर पुलिस को मिल चुका था। एक हफ्ता बीत गया था, मगर अहमद आया नहीं था। आठवें दिन अहमद का मोबाइल आदमपुर की लोकेशन में ऑन हो गया। पुलिस पार्टी एरिया में नाकाबंदी कर चेकिंग कर रही थी। पुलिस ने हाथ में बोरी लेकर आए संदिग्ध को देखकर उसे दौड़ कर पकड़ा तो 4 पिस्टल निकले। वह संदिग्ध और कोई नहीं अहमद ही था। अहमद को जब स्टाफ में लेकर आए, तब उसे पता चला कि कारी तो पकड़ा गया है। आरोपी कहता है कि अगर उसे भनक लग जाती तो वह नहीं आता।

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Jalandhar News – supplier arist 4 pistols recovered from the pistol for unscrupulous possession of rifle

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