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एक दशक में पचास से अधिक मिग गंवा चुकी है इंडियन एयर फोर्स, समस्या बने बुढ़ाते फाइटर जेट



जोधपुर. इंडियन एयरफोर्स ने मंगलवार को बहादुर के नाम से प्रसिद्ध अपना एक मिग-27 फाइटर जेट गंवा दिया। वायुसेना के बुढ़े होते विमान अब उसके लिए समस्या बनते जा रहे हैं। विशेष रूप से मिग श्रेणी के विमानों के हादसे लगातार बढ़ रहे हैं।

बीते एक दशक में वायुसेना मिग श्रेणी के पचास से अधिक विमान गंवा चुकी है। वर्ष 2015 के बाद एयरफोर्स 22 विमान गंवा चुकी है। इन 22 हादसों में चालीस जवान व पायलट्स भी अपनी जान गंवा चुके है। वहीं, नए विमान नहीं मिलने के कारण पायलट्स के पास अपनी जान जोखिम में डाल इन विमानों को उड़ाने के सिवाए कोई विकल्प नहीं है।

वायुसेना को नए लड़ाकू विमान मिलने में काफी विलम्ब हो रहा है। ऐसे में उसका हवाई बेड़ा दिनों दिन सिकुड़ता जा रहा है। उसके पास 42 के स्थान पर अब महज 32 स्कवाड्रन का बेड़ा ही रह गया। ऐसे में हादसों के बावजूद मिग श्रेणी के विमानों को मजबूरी में रिटायर्ड नहीं किया जा रहा।

बढ़ते जा रहे है हादसे
वायुसेना के पास अभी भी 40 से 50 साल पुराने मिग विमानों का बेड़ा है। एक दशक में पचास से अधिक मिग विमान क्रैश हो चुके हैं। इनमें एक तिहाई मिग-27 विमान है। लगातार बढ़ते हादसों के कारण इन विमानों को फ्लाइंग कॉफिन यानि मौत का ताबूत कहा जाने लगा है। मिग श्रेणी के सभी विमानों को वर्ष 2015 में रिटायर्ड करने की योजना थी। फिर इस डेड लाइन को बढ़ाकर वर्ष 2017 किया गया, लेकिन अभी तक नए विमान मिलते नजर नहीं आ रहे हैं। ऐसे में बुढ़े हो चुके इन विमानों को अगले कुछ बरस तक काम में लेना पड़ेगा। सभी विमान हादसों की जांच रिपोर्ट से भी स्पष्ट है कि अधिकांश हादसे तकनीकी खामी के कारण हुए।

42 के स्थान पर महज 32 स्कवाड्रन
पाकिस्तान और चीन सीमा पर वायुसेना की कुल 42 स्कवाड्रन होनी चाहिए, लेकिन वर्तमान में उसके पास महज 32 स्कवाड्रन ही है। एक स्कवाड्रन में 16 से 18 फाइटर जेट होते है। वायुसेना के पास चौदह स्कवाड्रन मिग श्रेणी के विमानों की है। यदि अपने मिग श्रेणी के सभी विमानों को रिटायर्ड कर दे तो उसकी क्षमता बहुत घट जाएगी। वर्तमान में वायुसेना पूरी तरह से सुखोई, मिराज और जगुआर विमानों पर निर्भर है। देश में विकसित तेजस की आपूर्ति में बहुत विलम्ब हो रहा है। साथ ही फ्रांस से हाल ही खरीदे गए 36 राफेल विमान मिलने में अभी समय लगेगा। इनकी दो स्कवाड्रन मिलने से वायुसेना को कुछ राहत मिलने संभावना है। वहीं मल्टीरोल 126 विमान खरीदने का सौदा बरसों से लम्बित चल रहा है।

ऐसा है बहादुर
रूस में निर्मित मिग-27 को वायुसेना में बहादुर के नाम से बुलाया जाता है। करीब 45 वर्ष पुराने सिंगल इंजन इन विमानों के इंजन अब जवाब देने लगे है। अब वायुसेना के पास इसकी दो स्कवाड्रन ही बची है। दोनों जोधपुर में ही तैनात है। अन्य सभी एयर बेस से इसे विदा किया जा चुका है। वायुसेना का प्रमुख लड़ाकू विमान रह चुके इस फाइटर जेट का हवा से जमीन पर हमला करने का बेहतरीन ट्रैक रिकॉर्ड रहा है। इस विमान के पायलट्स गर्व के साथ खुद को स्विंग विंगर्स कहते है। लेकिन अब बढ़ते हादसों के कारण इसे उड़ाना बहुत जोखिमपूर्ण हो चुका है।

सिर्फ जोधपुर में मिग 27 की दो स्क्वाड्रन
भारतीय वायुसेना का 45 साल पुराना रूस निर्मित मिग 27 की देश भर में तीन साल पहले तक सिर्फ तीन ही स्क्वाड्रन बची हुई थी। इनमें दो जोधपुर तथा एक हाशीमारा एयरबेस पर तैनात थी। साल भर पहले हाशीमारा से मिग 27 की स्क्वाड्रन फेज आउट यानी रिटायर्ड हो चुकी है। वहां से बचे हुए विमान भी जोधपुर में भेजे गए थे। अब सिर्फ जोधपुर में ही करीब 35 विमान बचे हुए हैं। जोधपुर से मिग 27 की दोनों स्क्वाड्रन को अगले साल फेज आउट करने की योजना है। इनके स्थान पर जोधपुर में कौन से विमान तैनात किए जाएंगे। फिलहाल एयरफोर्स के पास नए विमान नहीं आने तक सुखोई और अन्य लड़ाकू विमानों से काम चलना पड़ेगा। संभवत: जोधपुर में सुखोई 30 एमकेआई की एक और स्क्वाड्रन या स्वदेशी तेजस विमान को तैनात किया जा सकता हैं।

45 साल पुराना हवाई रक्षक बहादुर
वर्ष 1975 में वायुसेना में शामिल किए गए मिग 27 श्रेणी कम ही । तकनीकी जानकारी: लैंथ 17.8 मीटर, विंग स्पेन 13.97 मीटर, ऊंचाई 5 मीटर, खाली वजन 11,908 किलो, लोडेड वजन 20,300 किलो, स्पीड अवाज से 1.10 गुना ज्यादा यानी 1350 किमी प्रति घंटा अधिकतम, अधिकतम ऊंचाई पर उड़ान 14,000 मीटर तक, रेंज 2500 किमी तक है। इसमें चार साल पहले अपग्रेडेशन किया गया था।

ऐसे होगी हादसे की जांच
जांच टीम हादसा स्थल से लेकर विमान के उड़ने और उसकी तकनीकी जांच करने वाली पूरी टीम और पायलट से विस्तृत पूछताछ कर ब्यौरा तैयार करेगी। विमान का फ्लाइट डाटा रिकार्ड (एफडीआर) को मिग27 की लेब भेजा जाएगा। उसमें विमान के तकनीकी खामी या मानवीय गलती रही हो, उसका खुलासा होगा। हादसे की रिपोर्ट वायुसेना मुख्यालय में डीजी इंस्पेक्शन व सेफ्टी को सौंपी जाएगी। वहां से इसे वायुसेना प्रमुख को भेजा जाएगा।

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मिग-27 फाइटर जेट।

Dainik Bhaskar

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