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समिति की रिपोर्ट- 56% शहर खुले में शौच से मुक्त नहीं, 39% घरों में टायलेट भी नहीं




स्वच्छ भारत मिशन को लेकर तमाम दावों के बीच एक संसदीय समिति ने चौंकाने वाली रिपोर्ट सौंपी है। इसके अनुसार ओडीएफ यानी खुले में शौच से मुक्ति का लक्ष्य 56% पीछे है, जबकि 39% घरों में शौचालय भी नहीं हैं। मोदी सरकार ने 2 अक्टूबर 2014 को ठाना था कि 2019 में महात्मा गांधी की 150वीं जयंती तक पूरा भारत स्वच्छ बना दिया जाएगा। यानी शहर और गांव 100% ओडीएफ होंगे और चार हजार से अधिक शहरों और कस्बों के 81 हजार से अधिक वार्डों में घरों से ही कचरा उठाने की व्यवस्था होगी।

सोमवार को संसद में पेश स्वच्छ भारत पर संसदीय समिति की रिपोर्ट के अनुसार 4041 शहरी निकायों में से सिर्फ 1789 ही ओडीएफ हैं। यानी 44% लक्ष्य पूरा हुआ। 66 लाख से अधिक शहरी घरों में शौचालय बनाने थे, लेकिन अभी 41 लाख घरों को ही यह सुविधा मिली है। यानी अभी 39% घरों में शौचालय नहीं हैं। 81 हजार से अधिक शहरी वार्डों में से करीब 45 हजार में ही घर-घर से कूड़ा उठाने की व्यवस्था हुई है। 36 हजार वार्डों में निगम की कचरा गाड़ियां नहीं जा रहीं। 5 लाख से अधिक पब्लिक टाॅयलेट सीट बनाने का लक्ष्य भी अभी 54% बाकी है। 155 नेशनल हाईवे के कुल 647 टोल प्लाजा पर ही टॉयलेट बने हैं। जबकि कुल मिलाकर 373 नेशनल हाईवे के हर टोल प्लाजा पर अप और डाउन साइड पर पुरुषों और महिलाओं के लिए चार टॉयलेट बनाने की योजना थी। वहीं अहमदनगर से भाजपा सांसद दिलीप कुमार मनसुखलाल गांधी की अध्यक्षता वाली समिति ने स्वच्छ भारत के ऐसे हालात पर चिंता जताई है। वहीं समिति ने सिफारिश की है कि सफाई के प्रति जागरूकता के लिए आठवीं कक्षा तक के कोर्स में स्वच्छ भारत मिशन का अलग से चैप्टर होना चाहिए। गांवों में सिर्फ टॉयलेट बनाने पर ही ध्यान न दिया जाए, बल्कि उनका इस्तेमाल भी सुनिश्चित किया जाए।

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