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अफ्रीकी देशों से व्यापार के मामले में भारत दूसरे नंबर पर पहुंचा, कारोबार 292% बढ़ा




दुनियाभर के प्रमुख देशों और बड़ी कंपनियों की निगाह अफ्रीका पर है। मैनेजमेंट कंसल्टेंसी मेकिन्से के अनुसार अफ्रीका महाद्वीप में 10 हजार से अधिक चीनी कंपनियां कारोबार कर रही हैं। चीन के भारी इन्वेस्टमेंट ने अन्य देशों, खासकर भारत की दिलचस्पी भी बढ़ा दी है। 2006 में व्यापार में अफ्रीका के तीन बड़े पार्टनर-अमेरिका, चीन और फ्रांस थे। 2018 में चीन पहले, भारत दूसरे और अमेरिका तीसरे पायदान पर पहुंच गए। इस अवधि में भारत का व्यापार 292% और चीन का 226% बढ़ा। वैसे, अब भी अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस की कंपनियां सबसे ज्यादा पूंजी लगा रही हैं, लेकिन चीन की सरकारी कंपनियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं। उसके साथ भारत और सिंगापुर के इन्वेस्टर भी होड़ में हैं।

दुनियाभर की सरकारें और कारोबारी कूटनीतिक, सामरिक और व्यावसायिक संबंध मजूबत बनाने के लिए अफ्रीकी महाद्वीप की ओर दौड़ रहे हैं। 2010 से 2016 के बीच यहां 320 दूतावास खोले गए। अकेले तुर्की ने 26 खोले और पिछले साल भारत ने भी 18 दूतावास खोलने की घोषणा कर दी। यहां के देशों से सैनिक संबंध भी मजबूत किए जा रहे हैं। अमेरिका और फ्रांस पश्चिम अफ्रीकी देशों- बुर्किना फासो, चाड, माली, मारीटानिया और नाइजर में जेहादी आतंकवादियों से लड़ाई में सरकारों की मदद कर रह हैं।

इसके साथ ही अफ्रीकी देशों में विदेशी नेताओं की आवाजाही बढ़ी है। पिछले 10 वर्षों में चीन के बड़े नेताओं और अफसरों ने अफ्रीका की 79 यात्राएं की हैं। तुर्की के नेता रेसेप तैयिप एर्दोगन ने 2008 के बाद 30 बार अफ्रीकी देशों के दौरे किए। पिछले 5 साल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अफ्रीका के 8 देशों की यात्रा कर चुके हैं। रूसी राष्ट्रपति पुतिन पहले रूस-अफ्रीका शिखर सम्मेलन का आयोजन कर रहे हैं। वहीं चीन तीन वर्ष में एक बार अफ्रीका-चीन सहयोग सम्मेलन आयोजित करता है। जापान और ब्रिटेन भी ऐसा करने वाले हैं। यह सब 54 अफ्रीकी देशों के कूटनीतिक प्रभाव का फायदा उठाने की कोशिशें हैं।

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इस साल जनवरी में भारत आए दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा 70वें गणतंत्र दिवस में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए थे। इससे अफ्रीका का महत्व साबित हो रहा।

चीन के भारी निवेश के कारण भारत सहित दूसरे देशों की दिलचस्पी बढ़ाई

नई दिल्ली ने अफ्रीकी महाद्वीप में 18 दूतावास खोलने का एलान किया

फौजी अड्डों का तेजी से विस्तार

जिबूती के समुद्र तट के पास फ्रांस, इटली और जापान के फौजी अड्डे हैं। अफ्रीका में अमेरिका का एकमात्र स्थायी सैनिक अड्डा भी यहां है। उत्तर पश्चिम में चीन का फौजी अड्डा है। भारत हिंद महासागर के आसपास राडार नेटवर्क और दूसरे संदेश पकड़ने के लिए इलेक्ट्रॉनिक पोस्ट तैयार कर रहा है। अफ्रीका के मुहाने पर सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और दूसरी तरफ इरान, कतर और तुर्की के बीच होड़ है।

कर्ज में फंसाने की कूटनीति?

चीन पर अफ्रीकी देशों से कर्ज के बदले अन्य रियायतें लेने के आरोप हैं। वैसे, अफ्रीका पर कुल कर्ज में उसकी हिस्सेदारी 20% है। केन्या के मीडिया ने नैरोबी-मोम्बासा के बीच 3.2 अरब डॉलर से बन रही रेलवे लाइन की शर्तों पर सवाल उठाए हैं। चिंता है कि बदले में मोम्बासा बंदरगाह गिरवी रख सकते हैं। केन्या के अर्थशास्त्री अंजेत्से वेरे कहते हैं, चीन की पहल के बिना पश्चिमी देशों हमारी तरफ ध्यान ही नहीं देते।

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New Delhi News – india ranks 2nd in terms of business from african countries business up 292

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