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नशा, आतंकवाद, भ्रष्टाचार, अज्ञानता व आलस्य की होलिका जलाएं : स्वामी विज्ञानानंद




दिव्य ज्योति जागृति संस्थान द्वारा अपने स्थानीय आश्रम सुनाम में होली के पावन पर्व के उपलक्ष्य में धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें श्री आशुतोष महाराज जी के शिष्य स्वामी विज्ञानानंद ने बताया कि आर्यावर्त जगद्गुरु भारत दिव्य पर्वों दिव्य भूमि है। यहां मनाया जाने वाला प्रत्येक पर्व आध्यात्मिक एवं आत्मिक स्तर की उपज है, परन्तु आधुनिक वैज्ञानिक युग में जहां भौतिक विज्ञान द्वारा भौतिक सुख सुविधाओं का विकास हुआ है, वहीं मनुष्य की आंतरिक एवं आत्मिक क्षमताओं का हनन हो रहा है। आज भारत वासी प्रत्येक पर्व को भौतिक और बौद्धिक स्तर पर मनाते हैं। आज होली, विजयदशमी, दीपावली, लोहड़ी जैसे प्रत्येक पर्व अपनी गरिमा खोते हुए प्रतीत हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि युग युगांत से होली का पर्व अज्ञान, असत्य और अंधकार स्वरूप होलिका पर ज्ञान, सत्य, शील, भक्ति और प्रकाश स्वरूप प्रहलाद की विजय का प्रतीक है। आज भारत देश में होली के पावन पर्व पर युवा वर्ग नशा करता है व रसायनयुक्त अबीर व गुलाल का प्रयोग कर व जल की बर्बादी कर इस पर्व को विकृत रूप प्रदान कर रहा है। आज आवश्यकता है कि इस पर्व पर नशे की, आतंकवाद की, भ्रष्टाचार की, अज्ञानता की, आलस्य की होलिका जलाएं व जल बचाकर वंदे मातरम के स्वप्न को साकार करते हुए अपनी भारतीय संस्कृति का संरक्षण करें, जिससे सुदृढ़ राष्ट्र का निर्माण हो सके।

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