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रात 8 बजे के बाद सिटी के मिड पॉइंट से लेकर चौकों पर अनकंट्रोल हो जाता ट्रैफिक, 2 घंटे जाम में खुद रास्ता बनाते हैं चालक




रात आठ बजे चौक-चौराहों से ट्रैफिक पुलिस का पहरा हटते ही ट्रैफिक लाइट्स सिर्फ जग-बुझ के काम आती है। भले बत्ती लाल हो या हरी, हर कोई पहले निकलने की फिराक में रहता है। नतीजा शहर के मिड पॉइंट से चौकों तक ट्रैफिक अनकंट्रोल हो जाता है। हालांकि यह तस्वीर वर्षों पुरानी है, लेकिन वाहनों की संख्या के साथ दिक्कत बढ़ती जा रही है और रात दस बजे तक दो घंटे जाम रहने लगा है। इसके बीच वाहन चालक खुद रास्ता बनाकर निकलते हैं। जाम में एंबुलेंस व वीआईपी गाड़ियां भी फंस जाती हैं और कई बार वाहन आपस में टकराने से चालकों में झड़प भी हो जाती है। सबकुछ जगजाहिर होने पर भी प्रशासन के पास ट्रैफिक जाम की समस्या के समाधान के लिए कोई प्लानिंग नहीं है।

ट्रैफिक पुलिस के पास एसएचओ इंस्पेक्टर यादवेंद्र सिंह समेत सिर्फ 39 लोगों का स्टाफ है। इन पर शहर में दर्जनों चौक-चौराहे और सड़कों पर एक लाख से ज्यादा वाहनों को नियंत्रण की जिम्मेदारी हैं। स्टाफ की कमी में ट्रैफिक पुलिस होमगार्ड के सहारे दिन में सुबह 8 से देर शाम 8 बजे तक मुख्य चौकों पर ट्रैफिक कंट्रोल करती है, लेकिन रात आठ बजे आखिरी शिफ्ट खत्म होती है व्यवस्था लडख़ड़ा जाती है। हालांकि इस दौरान ट्रैफिक कंट्रोल का जिम्मा पीसीआर व बाइक राइडर्स का है, लेकिन जाम वाले शहर के मिड पॉइंट से लेकर चौकों पर लगे जाम के दौरान न तो पीसीआर और न राइडर्स नजर आते हैं।

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