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शरद पाण्डेय | नई दिल्ली




शरद पाण्डेय | नई दिल्ली

जेट एयरवेज की उड़ानें बंद होने के बाद नई नौकरी तलाशने में सबसे अधिक परेशानी बोइंग 777 और एयरबस 330 के करीब 600 सीनियर पायलटों को हो सकती है। अगर एयर इंडिया इन विमानों को लीज पर नहीं लेती है या जेट की नीलामी में समय लगता है, तो इन पायलटों को नौकरी के लिए दूसरे देश भी जाना पड़ सकता है। हालांकि नागरिक उड्‌डयन राज्य मंत्री जयंत सिन्हा के अनुसार इंडस्ट्री में पायलटों की सख्त जरूरत है। इन्हें जॉब जरूर मिल जाएगी।

जेट के पास 10 बोइंग 777 और 8 एयरबस 330 विमान हैं। 280 से 350 सीटर ये विमान मुख्यत: इंटरनेशनल फ्लाइट में इस्तेमाल होते हैं। भारत में बोइंग 777 जेट के अलावा केवल एयर इंडिया के पास हैं, जबकि एयरबस 330 केवल जेट के पास हैं। इन्हें उड़ाने वाले सीनियर पायलट होते हैं, जो केवल बड़े विमान उड़ाते हैं। इनकी सैलरी 25-30% ज्यादा होती है। सोसाइटी फॉर वेलफेयर ऑफ इंडियन पायलट के सेक्रेटरी और जेट के सीनियर पायलट अश्वनी त्यागी ने कहा, अगर एयर इंडिया इन्हें लीज पर नहीं लेती है तो पालयटों के सामने दो ही विकल्प होंगे। पहला, कोरियन एयरलाइंस और गल्फ देशों की अमीरात और कतर जैसी एयरलाइंस में नौकरी तलाशें। दूसरा, कम सैलरी में छोटे विमान उड़ाएं। दूसरे विकल्प में एक तकनीकी समस्या है। पायलटों को नई कंपनी में ट्रेनिंग कराई जाती है। पायलट अगर वही मॉडल का विमान उड़ाता है तो एक माह की ट्रेनिंग होती है। विमान दूसरे मॉडल का है तो 6 माह की ट्रेनिंग होती है।

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