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विशेषज्ञों का कहना- इयरफोन का 2 घंटे लगातार इस्तेमाल बना सकता है आपको बहरा



नई दिल्ली (तरुण सिसोदिया).इन दिनों मेट्रो, बस, ट्रेन आदि में सफर करने के दौरान लोगों, खासकर युवाओं का कान में इयरफोन लगाकर म्यूजिक सुनना आम है। लेकिन उनकी यह आदत उन्हें बहरा बना सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इन जगहों पर पहले से तेज आवाज होती है। ऐसे में इयरफोन से म्यूजिक सुनने के लिए आवाज को बढ़ाना पड़ता है, जोकि सुनने की क्षमता पर प्रभाव डाल सकती है। यह इंसान को बहरा बनाने के लिए काफी है।

मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर डॉ. रवि मेहर के मुताबिक 100 डेसिबल पर रोज 2 घंटे म्यूजिक सुनने से बहरेपन का खतरा बढ़ जाता है। व्यक्ति की सेंस्टेविटी के अनुसार यह 1 माह से लेकर सालभर में किसी को बहरा करने के लिए काफी है। हमारे यहां सुनाई देने में परेशानी को लेकर आने वाले मरीजों में बड़ी तादाद में ऐसे लोग शामिल हैं जिन्हें यह परेशानी म्यूजिक सुनने के चलते हुई।

डब्ल्यूएचओ में सलाहकार डॉ. एके अग्रवाल का कहना है पब्लिक ट्रांसपोर्ट विशेषकर मेट्रो में पहले से आवाज 70-80 डेसिबल होती है। कम आवाज में म्यूजिक सुनाई नहीं देता। वॉल्यूम बढ़ाने पर आवाज 100-110 डेसिबल तक पहुंच जाती है। इतनी तेज आवाज में म्युजिक सुनने पर बहरा होने का खतरा बढ़ जाता है।दिल्ली सरकार ने स्कूलों को उनके यहां पढ़ने वाले बच्चों को ध्वनि प्रदूषण के बारे में जागरूक करने की सलाह दी है। स्कूलों को कहा गया है कि बच्चों को बताएं कि ध्वनि प्रदूषण से क्या हो सकता है और किस तरह से इससे बचा जा सकता है।

एक्यूआई की तरह एनक्यूआई बनाया जाए
सेंटर फॉर क्लाइमेट, एनवायरमेंट एंड हेल्थ के संयोजक डॉ. नीतीश डोगरा का कहना है कि ध्वनि प्रदूषण का कारण ट्रांसपोर्ट है। ड्राइविंग बिहेवियर में बदलाव लाकर इसे घटाया जा सकता है। डॉक्टरों का कहना है प्रदूषण को मापने वाले पैरामीटर एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) की तरह शोर मापने के लिए नॉइज क्वालिटी इंडेक्स (एनक्यूआई) बनाया जाना चाहिए। डॉक्टर्स का कहना है ध्वनि प्रदूषण फैलाने वालों को गुलाब देकर हतोत्साहित किया जाए।

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continuous use of Earphone can make you deaf

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