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आर्बिट्रेटर के फैसले अनुसार मुआवजा पाने के लिए हाइवे पर 27 को महापंचायत, जाम लगा सकते हैं किसान




कैल से कलानौर तक बने बाइपास हाइवे में अधिग्रहित जमीन का आर्बिट्रेटर द्वारा तय किए मुआवजे को लेकर किसानों ने गांव सुढल में मीटिंग की। अध्यक्षता सरदार गुरविंदर सिंह ने की। फैसला हुआ कि 27 मई को हाइवे पर किसानों की महापंचायत होगी। इसमें दर्जनों गांव के किसान व भाकियू प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी भी आएंगे। किसान हरपाल सिंह ने बताया कि वहां किसान रोड जाम करने या फिर प्रदर्शन करने का फैसला ले सकते हैं। उनका कहना है कि सरकार के पास अभी भी समय है कि किसानों का मुआवजा जारी किया जाए। अगर ऐसा नहीं होता तो किसान आरपार की लड़ाई लडेंगे। मौके पर महिपाल सिंह, राजेश कुमार, घनश्याम धीमान, उधम सिंह, बलदेव सिंह, रणजीत सिंह, ओमबीर, शेर सिंह, बलवंत सिंह, हुकमचंद, मुकेश कुमार, गुरनाम सिंह, राजवीर, संदीप, दलबीर सिंह, बलदेव सिंह समेत अन्य मौजूद रहे।

आर्बिट्रेटर ने 17.50 लाख रुपए मुआवजा बढ़ाया: कैल से कलानौर तक बने 23 किलोमीटर लंबे बाइपास हाइवे में 425 एकड़ जमीन एक्वायर की थी। जून 2018 में इस पर हाइवे बना। किसानों ने मुआवजा बढ़ाने के लिए आर्बिट्रेटर के पास केस किए थे। छह माह पहले आर्बिट्रेटर ने किसानों की एक्वायर जमीन का प्रति एकड़ 17.50 लाख रुपए मुआवजा बढ़ाया है। जिसे देने काे एनएचएआई तैयार नहीं है अाैर वह इस फैसले के खिलाफ कोर्ट गया है। वहीं किसानों ने नलवी नहर में अधिग्रहित जमीन के मामले में हाईकोर्ट के आदेश और अन्य एरिया में अधिग्रहित जमीन के मुआवजे को आधार बनाकर कोर्ट में याचिका दायर की है। एनएचएआई के अधिकारियों ने किसानों के सामने शर्त रखी थी कि अगर किसान कोर्ट केस वापस लेकर यह लिखकर दें कि वे कोर्ट में मुआवजा बढ़ाने की मांग को लेकर नहीं आएंगे तो उन्हें आर्बिट्रेटर के फैसले अनुसार मुआवजा दिया जाएगा। इस शर्त को किसानों ने ठुकरा कर आंदोलन का फैसला लिया था। पांच मई को स्पीकर ने किसानों को बुलाकर कहा था कि चुनाव के बाद उनकी सीएम से मुलाकात कराकर मुआवजा दिलाया जाएगा।

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