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कंस्ट्रक्शन साइट्स और कूड़ेदान के पास बच्चों को खाली घूमते देखा; तो वहीं शुरू कर दी पाठशाला, 455 से ज्यादा बच्चे हो चुके हैं साक्षर




कंस्ट्रक्शन साइट, कूड़ेदान, पार्क आदि में बच्चों का खाली घूमना साउथ दिल्ली के बदरपुर इलाके में रहने वाले अमित कुमार को पसंद नहीं आया तो उन्होंने बच्चों को साक्षर करने का फैसला कर लिया और शुरू कर दी पाठशाला। शुरुआत में 3 बच्चों को अपने घर पर ही पढ़ाना शुरू किया। बाद में ये 10 हो गए और कुछ समय बाद उन्होंने बाकायदा पाठशाला शुरू कर दी। धीरे-धीरे कारवां बनता गया और अब यह पाठशाला दिल्ली में 8 जगह चल रही है। यहां अब तक 455 बच्चों को साक्षर किया जा चुका है। 100 से ज्यादा बच्चों का एडमिशन रेगुलर स्कूलों में कराया गया। इस वक्त भी 250 बच्चों को अमित और उनके साथी साक्षर कर रहे हैं। बदरपुर स्थित गौतमपुरी में रहने वाले अमित कुमार मई, 2016 में एक शाम नौकरी से घर लौट रहे थे। रास्ते में बन रहे नाले के निर्माण कार्य के पास बच्चों को पत्थरों के बीच गंदी हालत में देखा। उनके मन में आया कि आखिर ये बच्चे ऐसे क्यों घूम रहे हैं, इन्हें तो पढ़ना चाहिए। अमित ने खुद इसका जिम्मा लिया और डेली रूटीन से समय निकालकर उन्हें पढ़ाना शुरू कर दिया। अपनी मुहिम को नाम दिया ‘जॉइन टुगेदर’। गौतमपुरी के अलावा इन दिनों एम्स, ट्रामा सेंटर (एम्स), सफदरजंग, हौज खास, सरिता विहार, मदनपुर खादर, आली गांव और किदवई नगर में पाठशाला चल रही है।

प्राइवेट फर्म में नौकरी करने वाले अमित ने शुरू की ‘जॉइन टुगेदर’ मुहिम, अब 8 जगह चल रही है पाठशाला

धीरे-धीरे बांट ली जिम्मेदारी| दोस्त और जानने वाले भी दे रहे साथ, एम्स की नर्सिंग स्टूडेंट भी रोज बच्चों को पढ़ाने पहुंच रहीं

गौतमपुरी के बाद एम्स में सितंबर, 2016 में पाठशाला शुरू हुई। यहां मजदूरों के बच्चों को अमित ने दोस्त आशीष के साथ मिल पढ़ाना शुरू किया। अब नर्सिंग स्टूडेंट्स थंसी, ममता, ज्योति, रुबि और उर्मिला भी पढ़ाती हैं। मुहिम में नर्सिंग स्टूडेंट के अलावा अब कई नौकरीपेशा युवक जुड़ गए हैं। इनमें आशीष, दीपक और मनीष शामिल हैं। आशीष मदनपुर खादर और सरिता विहार में कूड़ा चुनने वाले लोगों के बच्चों को पढ़ाते हैं तो मनीष आली गांव में रिक्शा चलाने वालों के बच्चों को पढ़ाते हैं। दीपक सफदरजंग अस्पताल के पास लेबर कैंप में बच्चों को साक्षर कर रहे हैं।

बेसिक एजुकेशन के साथ गुड-बैड टच का भी ज्ञान

कंस्ट्रक्शन साइट, पार्क, रोड साइड पर चलने वाली पाठशालाओं में बच्चों को बेसिक शिक्षा दी जाती है। इसमें बच्चों को अक्षर ज्ञान कराने के लिए कलरफुल बुक्स का सहारा लेने के साथ-साथ मोबाइल पर वीडियो के जरिए भी उन्हें ज्ञान दिया जाता है। इसके अलावा गुड-बैड टच के बारे में भी बताया जाता है।

सभी बच्चों को उनके पढ़ने का अधिकार मिलना चाहिए। फिर चाहे वह किसी भी वर्ग से हो। मन में था कि सोसायटी ने हमारे लिए बहुत किया है, हमें भी सोसायटी को कुछ देना चाहिए। इसी सोच के साथ बच्चों को साक्षर करना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे समाज का भी सहयोग मिलने लगा। -अमित कुमार

होली-दिवाली के साथ जन्मदिन भी मनाते हैं

पाठशालाओं में तमाम तरह के पर्व-त्योहार मनाए जाते हैं। इनमें होली-दिवाली, स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस हर त्योहार खासतौर से शामिल हैं। इसके अलावा यहां पढ़ने के लिए आने वाले बच्चों का जन्मदिन भी बढ़े उत्साह से मनाया जाता है। केक और मिठाई शामिल की जाती है।

100 से ज्यादा बच्चों का दाखिला रेगुलर स्कूलों में भी कराया गया

अमित और उसके साथी मिलकर उठाते हैं खर्च

बच्चों को पढ़ाने में जो खर्च होता है, उसे अमित और उसके साथी वहन करते हैं। कॉपी-किताब, स्लेट, ब्लैक बोर्ड, पैंसिल का मुख्य तौर पर इंतजाम किया जाता है। पर्व-त्योहार पर बच्चों के लिए खाने-पीने और स्कूल में एडमिशन के लिए एफिडेविट बनवाने की व्यवस्था करते हैं। इस तरह कुल 7000 हजार हर माह खर्च होते हैं।

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New Delhi News – the children near the construction sites and the trash were seen walking around empty so the school started there more than 455 children have been literate

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