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खुशखबरी! डीयू प्रोफेशनल कोर्स में एडमिशन के लिए हिंदी में भी एंट्रेंस एक्जाम की तैयारी, इस साल से ही लागू हो सकते हैं प्रावधान




दिल्ली यूनिवर्सिटी प्रोफेशनल कोर्स में एडमिशन के लिए होने वाली प्रवेश परीक्षा को इंग्लिश के साथ ही हिंदी माध्यम में आयोजित करने की योजना बना रही है। साथ ही गांव के सरकारी स्कूलों के स्टूडेंट्स को एक प्रतिशत छूट देने पर भी विचार किया जा रहा है। दिल्ली यूनिवर्सिटी की स्टैंडिंग कमेटी ने एडमिशन प्रवेश परीक्षा को इंग्लिश के साथ हिंदी माध्यम में करवाने और गर्ल्स स्टूडेंट्स को दी जा रही एक प्रतिशत की छूट गांव के सरकारी स्कूलों के स्टूडेंट्स को देने सहित नॉन टीचिंग का वॉर्ड कोटा बढ़ाने का निर्णय लेने के लिए दिल्ली यूनिवर्सिटी अकैडमिक काउंसिल के पास भेज दिया है। अगर एडमिशन से पहले दिल्ली यूनिवर्सिटी की अकैडमिक काउंसिल की मीटिंग आयाेजित होती है तो उम्मीद है कि इसी साल से ये प्रावधान लागू हो जाएंगे। कोई अड़चन होने पर व्यवस्था अगले सत्र से लागू होगी।

गांव के सरकारी स्कूलों के स्टूडेंट्स को एक प्रतिशत छूट देने पर भी विचार

कुछ कोर्स की प्रवेश परीक्षा के दौरान इंग्लिश में पूछे जाते हैं प्रश्न

दिल्ली यूनिविर्सटी में बहुसंख्यक कोर्सों में एडमिशन मेरिट लिस्ट के आधार पर होता है। लेकिन बीएलएड, बीबीए, बीसीए, बैचलर इन हेल्थ एजुकेशन, हिंदी पत्रकारिता, इंग्लिश पत्रकारिता, पोस्ट ग्रेजुएट, एमफिल, पीएचडी कोर्स में एडमिशन के लिए प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाती है। अभी तक इन कोर्सों में एडमिशन के लिए आयेाजित होने वाली प्रवेश परीक्षा केवल इंग्लिश मीडियम में ही आयोजित की जाती है। इससे देश के विभिन्न राज्यों खास तौर से हिंदी क्षेत्र के राज्यों यूपी, एमपी, बिहार, झारखंड, हरियाणा, उत्तराखंड आदि राज्यों से आने वाले स्टूडेंट्स को केवल इंग्लिश माध्यम में प्रश्नपत्र होने से दिक्कत हाेती है। चूंकि यहां के राज्यों के ज्यादात्तर छात्र हिंदी माध्यम से होते हैं। ऐसे में उन्हें परेशानी होती है। हिंदी माध्यम में भी प्रश्नपत्र आने से यहां के स्टूडेंट्स को फायदा होगा।

ओवर एडमिशन, बार-बार कैंसलेशन और दूर-दराज के और अन्य बोर्डों के छात्रों की समस्याओं से निपटने के लिए कई प्रावधान किए जा रहे हैं ताकि समयबद्ध , सुगम और सुविधाजनक तरीके से प्रवेश प्रक्रिया पूरी की जा सके। यूजी पाठ्यक्रमों में टीचिंग और नॉन टीचिंग के वॉर्ड कोटा को बढ़ाने और पीजी पाठ्यक्रम में लागू के प्रस्ताव भी विचारधीन हैं। छात्रहित विश्वविद्यालय के लिए सर्वोपरि है। -डॉ. रसाल सिंह, सदस्य, अकैडमिक काउंसिल

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