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कांग्रेस के सामने विस चुनाव के मतों की जो खाई पाटने की चुनौती थी, वो अब चार गुना ज्यादा गहरी



जीत के बाद भाजपा प्रत्याशी भागीरथ चौधरी ने कहा कि वे 1980 से चुनाव लड़ते आ रहे हैं, लेकिन आज तक ऐसा चुनाव नहीं देखा। यह पहला चुनाव था जिसमें मैं जीत के लिए 100 फीसदी आश्वस्त था। आमजन, कार्यकर्ता, पार्टी के वरिष्ठ नेता और शीर्ष नेतृत्व सभी मोदीजी को पुन: प्रधानमंत्री बनाना चाहते थे, यह चुनाव राष्ट्रवाद पर था। उसी का परिणाम है कि रिकार्ड तोड़ जीत हासिल की है। देश को खुशहाल और समृद्ध बनाकर परम वैभव पर पहुंचाना है, यह मोदी ही कर सकते हैं। सबका साथ सबका विकास, से ही देश समृद्ध हो सकता है।
पेयजल समस्या से निजात दिलाना पहली प्राथमिकता | चौधरी ने शहर की पेयजल समस्या से जुड़े एक सवाल पर कहा कि राज्य में कांग्रेस राज में पेयजल की समस्या ही नहीं बल्कि बिजली सहित अन्य मूलभूत समस्याओं से भी आमजन आहत है। बिजली कब आती है और कब चली जाती है सबको पता चल चुका है। चौधरी ने कहा कि पेयजल समस्या से निजात दिलाना उनकी प्राथमिकताओं में से एक होगा। सभी को पीने का पानी मिलेगा, हर खेत को पानी मिलेगा।
स्मार्ट सिटी के कार्यों को मिलेगी रफ्तार | चौधरी ने कहा कि वे स्मार्ट सिटी के रुके हुए कार्यों को रफ्तार देने के साथ क्वालिटी एजुकेशन के लिए काम करेंगे। जिन गांवों में रेलवे लाइन नहीं है, उन्हें चिन्हित कर रेलवे लाइन से जोड़ने के प्रयास किए जाएंगे। अपने जिले में नए उद्योग लाने के लिए सदैव प्रयासरत रहेंगे, ताकि कोई भी युवा बेरोजगार नहीं रहे और रोजगार के लिए बाहर नहीं जाना पड़े।

‘यह चुनाव राष्ट्रवाद पर, मोदी सिद्ध पुरुष-इसीलिए रिकार्ड तोड़ जीत’

पहली बार चुनाव में उतरे कांग्रेस के प्रत्याशी रिजु झुनझुनवाला ने अपनी हार को सह्रदय स्वीकार किया है। मीडिया से बातचीत में रिजु झुनझुनवाला ने कहा कि जनता का फैसला उन्हें स्वीकार है। हालांकि हम जीतने के लिए चुनावी मैदान में उतरे थे, लेकिन इतने बड़े अंतर से हारेंगे, यह नहीं सोचा था।
झुनझुनवाला ने कहा कि हम चुनाव में रोजगार और पानी के मुद्दे को लेकर को जनता के बीच गए थे और आज भी इन दोनों मुद्दों पर कायम हैं। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि जनता को उनके इस मुद्दे से बेहतर बीजेपी का राष्ट्रवाद का मुद्दा लगा और जनता ने अपना निर्णय सुनाया। झुनझुनवाला ने कहा कि वह अजमेर को छोड़कर नहीं जाएंगे। अजमेर की जनता को मदद के लिए हमेशा तैयार रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि कारोबार करते रहेंगे, लेकिन अजमेर के विकास के लिए भी वह प्रयासरत रहेंगे। जब भी अजमेर के लोगों की मेरी जरूरत होगी मैं हाजिर रहूंगा। कांग्रेस प्रत्याशी ने कहा कि हम हार पर बहानेबाजी पर नहीं जाना चाहते । एक लहर चली थी, इसलिए देशभर में यह परिणाम आए हैं। उन्होंने कहा कि जातिवाद से ऊपर उठ कर नतीजे आए हैं।

सत्ता में रहते हुए कांग्रेस को जिस तरह की हार का सामना करना पड़ा है उससे एक बात तय हो गई है कि कांग्रेस लंबे समय तक अब राजनीतिक कोमा से बाहर नहीं निकल पाएगी। पांच महीने पहले हुए विधानसभा चुनाव में अजमेर संसदीय सीट पर कांग्रेस को भाजपा से करीब एक लाख वोट कम मिले थे। कांग्रेस के लिए लोकसभा चुनावों में इस अंतर को पाटना बड़ी चुनौती थी। अंतर पाटना तो दूर रहा कांग्रेस इस चुनाैती के सामने कहीं टिक नहीं पाई और लोक सभा चुनाव में यह

अंतर चार गुना हो गया है। भाजपा के भागीरथ चौधरी ने संसदीय सीट पर जीत का इतिहास रच दिया।

लोक सभा सीट को उप चुनाव में जीतकर कब्जे में करने वाली कांग्रेस को जिस तरह की करारी शिकस्त झेलनी पड़ी है उसे देखते हुए संसदीय क्षेत्र के आठों विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस की हार यह दर्शा रही है कि संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस की हालत बेहद लचर है और विधानसभा चुनाव में दो सीटों पर जो जीत हासिल हुई थी वह भाजपा की तत्कालीन भाजपा सरकार के विरूद्ध नाराजगी का नतीजा थी उसमें कांग्रेस की धरातल पर किसी तरह की मेहनत नहीं रही थी। संसदीय सीट पर कांग्रेस के सभी समीकरण फेल हो गए। कांग्रेस के प्रत्याशी रिजु झुनझुनवाला ने पानी की तरह पैसा बहाया और उनकी कोशिश पूरी तरह सकारात्मक प्रचार की थी लेकिन यह भी कांग्रेस को बड़ी हार से बचा नहीं पाया। वहीं भाजपा प्रत्याशी भागीरथ चौधरी की बात करें तो किशनगढ़ विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधायक चुने गए चौधरी ने शुरू से ही पूरे चुनाव प्रचार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की योजनाओं और प्रदेश कांग्रेस सरकार की विफलताओं पर फोकस रखा। जितने बड़े अंतर की हार हुई उसका कांग्रेस को कतई भान नहीं था और भाजपा भी इतनी बड़ी जीत की उम्मीद नहीं रख रही थी। पूर्व में सांसद रहे सांवरलाल जाट ने 2014 में मोदी लहर पर सवार हो जब कांग्रेस के दिग्गज सचिन पायलट को 1 लाख 76 हजार वोटों से शिकस्त दी थी तो यह रिकार्ड बन गया था और भागीरथ चौधरी इसके आस-पास ही जीत की उम्मीद कर रहे थे।

इन वजहों से हार-जीत का बढ़ा अंतर
मोदी लहर के सामने सभी समीकरण धराशायी हो गए लेकिन जीत-हार के अंतर के कुछ स्थानीय कारक प्रभावी साबित हुए।
कांग्रेस ने रिजु झुनझुनवाला के रूप में बिल्कुल नए चेहरे को मैदान में उतारा जिन्हें ज्यादा राजनीतिक अनुभव नहीं था और उन पर बाहरी होने का भी ठप्पा लगा था ऐसे में उनका सहज व सकारात्मक होना भी काम नहीं आया।
भाजपा ने लोक सभा सीट पर जातिगत समीकरण को साधते हुए बहुसंख्यक जाति वर्ग के भागीरथ चौधरी को टिकट दिया और उन्हें राजनीतिक अनुभव का भी लाभ मिला।
संसदीय सीट पर जाटों के बाद गुर्जर बड़ा वोट बैंक है जो परंपरागत रूप से कांग्रेस का माना जाता है लेकिन पायलट को मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया तो गुर्जरों में नाराजगी पनपी।
कांग्रेस ने झुनझुनवाला को बहुत देरी से मैदान में उतारा। क्षेत्र का दौरा करने के लिए बहुत कम समय मिला जबकि भाजपा प्रत्याशी तब तक लोक सभा क्षेत्र को एक बार नाप चुके थे।
रिजु झुनझुनवाला को स्थानीय कांग्रेस नेताओं ने बिल्कुल सहयोग नहीं किया केवल दिखावे के लिए साथ रहे लेकिन फील्ड में जो मेहनत की जानी थी वह कहीं दिखाई नहीं दी।
भाजपा की जीत के बाद माखुपुरा चौराहे पर समर्थकों ने भागीरथ चौधरी को कंधे पर उठाकर जीत का जश्न मनाया।

सत्ता का संग्राम

सांवरलाल जाट के नाम था जीत का पिछला रिकॉर्ड
2004 में भाजपा के रासा रावत ने 59.44% वोट ले कांग्रेस के हबीबुर्रहमान को 1,27,976 वोटों से हराया।
2009 में कांग्रेस के सचिन पायलट ने 52.59 प्रतिशत वोट लेकर भाजपा की किरण माहेश्वरी को 76 हजार 135 वोटों से हराया था।
2014 में भाजपा के सांवरलाल जाट ने 55.14 प्रतिशत वोट लेकर कांग्रेस के सचिन पायलट को 1 लाख 71 हजार 983 वोटों से हराया था।

2018 के उप चुनाव में कांग्रेस के रघु शर्मा ने 50.64 प्रतिशत वोट लेकर भाजपा के रामस्वरूप लांबा को 84 हजार 419 वोटों से हराया था।
2019 अब भागीरथ चौधरी ने पुराने सभी रिकार्ड ध्वस्त करते हुए 4 लाख

13 हजार वोट से जीत हासिल की है और उनका वोट प्रतिशत 64.52, रिजु का वोट प्रतिशत 31.55 और अन्य का वोट प्रतिशत 3.93 रहा।

सांवरलाल जाट के निधन के बाद हुए उप चुनाव में कांग्रेस के डॉ रघु शर्मा को 84 हजार से कुछ ज्यादा वोटों से जीत हासिल हुई थी लेकिन तब प्रदेश की तत्कालीन भाजपा सरकार की नीतियों के खिलाफ गुस्से को लेकर मतदाताओं ने कांग्रेस के पक्ष में वोट दिया था। दूसरी वजह कांग्रेसियों की एकजुटता और चुनाव को जाट बनाम गैर जाट में तब्दील करना प्रमुख रहा था।

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Lok Sabha elections Ajmer 2019

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