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जयसूर्या ने शुरुआती 15 ओवर में तेजी से रन बनाने का ट्रेंड शुरू किया, श्रीलंका चैम्पियन बनी



खेल डेस्क. 1996 का वर्ल्ड कप भारत, पाकिस्तान और श्रीलंका की मेजबानी में खेला गया था। इस वर्ल्ड कप से पहले तक श्रीलंकाई टीम को क्रिकेट जगत में बहुत गंभीरता से नहीं लिया जाता था, क्योंकि तब तक उसका सक्सेस रेट 29.05% ही था। हालांकि, उस वर्ल्ड कप में श्रीलंका ने कोई भी मैच नहीं गंवाया और चैम्पियन बनी। वर्ल्ड कप में पहली बार मेजबान टीम चैम्पियन बनी थी। यह सब मुमकिन हुआ श्रीलंका के तत्कालीन कप्तान अर्जुन रणतुंगा के शुरुआती 15 ओवर में तेजी से रन बनाने की रणनीति के चलते।

रणतुंगा की रणनीति को सबसे ज्यादा अमली जामा सनथ जयसूर्या ने पहनाया। उन्होंने पहले 15 ओवरों में फील्डिंग रिस्ट्रिक्शंस का भरपूर फायदा उठाया। फील्डर्स के सिर के ऊपर से शॉट खेलनेका तरीका निकालकर तेजी से रन बटोरे। विपक्षी टीम जब तक उनके इस तरीके को नाकाम करने की योजना बना पाती तब तकश्रीलंका वर्ल्ड कप जीत चुका था और वे प्लेयर ऑफ द सीरीज बन चुके थे।

श्रीलंका ने केन्या के खिलाफ शुरुआती 15 ओवरों में 123 रन बना डाले थे

1996 वर्ल्ड कप से पहले सभी टीमों की रणनीति नई गेंद को सावधानी से खेलकर विकेट बचाने और बाद के ओवर्स में तेजी से रन बटोर कर बड़ा स्कोर खड़ा करने की होती थी। लेकिन श्रीलंका ने 1996 में इस खेल की दशा और दिशा दोनों ही बदल दी। उस वर्ल्ड कप से पहले तक शुरुआती 15 ओवरों में 50 से 60 रन पर्याप्त माने जाते थे। वहीं, श्रीलंका ने उस वर्ल्ड कप में शुरुआती 15 ओवरों में 110 से ज्यादा के औसत से रन बनाए। उसनेभारत के खिलाफ लीग मैच में शुरुआती 15 ओवर में 117, केन्या के खिलाफ 123 रन बनाए। क्वार्टर फाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ शुरुआती 15 ओवर में 121 और सेमीफाइनल में भारत के खिलाफ 86 रन बनाए थे।

टूर्नामेंट में130 से ज्यादा के स्ट्राइक रेट से बनाए रन

जयसूर्या ने उस वर्ल्ड कप में 6 मैच खेले। इस दौरान उन्होंने 36.83 के औसत और 131.54 के स्ट्राइक रेट से 221 रन बनाए और 7 विकेट भी लिए। उन्होंने वर्ल्ड कप में अपना दूसरा वनडे भारत के खिलाफ खेला। उसमें उन्होंने 76 गेंद पर 79 रन बनाए। इसमें 9 चौके और 2 छक्के शामिल थे। केन्या के खिलाफ अगले मैच में उन्होंने 5 चौके और 3 छक्के की मदद से 27 गेंद पर 44 रन बना डाले। इंग्लैंड के खिलाफ क्वार्टर फाइनल मैच में उन्होंने 13 चौके और 3 छक्के की मदद से 44 गेंद पर 82 रन की पारी खेली थी।

करियर के शुरुआती दिनों में गेंदबाज के तौर पर ही थी जयसूर्या की पहचान

जयसूर्या को उनके करियर के शुरुआती 5-6 साल तक ऐसा गेंदबाज माना जाता था, जो थोड़ी बहुत बल्लेबाजी भी कर लेता हो। लेकिन रणतुंगा ने उनके भीतर के स्ट्रोक प्लेयर को बाहर निकाला। उनका हैंड-आई कोऑर्डिनेशन देखने लायक होता था। उनमें खड़े-खड़े, बिना फुटवर्क के गेंद को बाउंड्री के पार पहुंचाने की क्षमता थी।जयसूर्या ने अपना पहला वनडे 26 दिसंबर 1989 को खेला था। तब से 1996 वर्ल्ड कप शुरू होने तक उन्होंने 99 वनडे में 19.73 के औसत से 1776 रन ही बनाए थे और 71 विकेट लिए थे। हालांकि, 1996 वर्ल्ड कप के बाद से जयसूर्या स्थापित ओपनर हो गए। बाद में उन्होंने 336 वनडे और खेले 1367 रन बनाए। इसमें उनके 27 शतक भी शामिल थे। इस दौरान उनका औसत 36.08 और स्ट्राइक रेट 93.97 रहा। उन्होंने 245 विकेट भी लिए।

वर्ल्ड चैम्पियन बनने के बाद सेश्रीलंका का सक्सेस रेट20% बढ़ा

श्रीलंका ने पहला वनडे 05 जनवरी 1971 को खेला था। तब से 1996 वर्ल्ड कप शुरू होने तक उसने 210 वनडे खेले थे। इसमें उसे सिर्फ 61 में जीत हासिल हुई थी और 139 मैच में हार का सामना करना पड़ा था। 10 मैच बेनतीजा रहे थे। उसका सक्सेस रेट महज 29.05% था। 1996 वर्ल्ड कप बाद से उसने अब तक 621 वनडे खेले हैं। इसमें से उसे 313 में जीत हासिल हुई है। 276 वनडे में उसे हार का सामना करना पड़ा है। 5 मैच टाई रहे, जबकि 27 का नतीजा नहीं निकला। उसका सक्सेस रेट 50.40% पहुंच गया।

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सनथ जयसूर्या 445 वनडे में 13430 रन और 323 विकेट ले चुके हैं। – फाइल


सनथ जयसूर्या 1996 वर्ल्ड कप में प्लेयर ऑफ द सीरीज चुने गए थे। – फाइल

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