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पिंजरेनुमा कोचिंग सेंटरों में दिखाए जा रहे अधिकारी बनने के सपने




सोनीपत मौजूदा समय में शिक्षा के एक बड़े बाजार के रूप में विकसित हो रहा है। यहां 50 से ज्यादा कोचिंग सेंटर, लाइब्रेरी में हर दिन 10 हजार से ज्यादा युवाओं को विभिन्न विभागों में अधिकारी बनने के सपने पूरे करने का दावा किया जाता है, इस दावे के पीछे की एक कड़वी हकीकत यह है कि ज्यादातर कोचिंग सेंटर सीधे तौर पर न केवल विद्यार्थियों काे बल्कि अपने स्टाफ सदस्यों के जीवन से भी खिलवाड़ कर रहे हैं। अधिकांश सेंटरों में फायर सेफ्टी उपकरण नहीं हैं। कई सेंटर संचालकों को तो इन उपकरण के बारे में जानकारी तक नहीं है, ऐसे में अगर सोनीपत में सूरत जैसा भयावह अग्निकांड होता है तो यह जनहानि वहां से भी ज्यादा होगी, क्योंकि यहां यहां बेसमेंट से लेकर चौथी पांचवीं मंजिल तक से सेंटर चलाए जा रहे हैं तो दूसरा हमारा अग्निशमन विभाग की लाचारी की भूमिका में हैं। उनके पास सीढ़ी भी महज दो मंजिल तक है, ऐसे में आग ऊपर लगी स्थिति क्या होगी समझा जा सकता है। छात्रों से कोचिंग के नाम पर फीस के रूप में लाखों रुपए वसूलने के बाद भी इन कोचिंग सेंटरों में छात्रों की सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं नजर आए। कोचिंग सेंटर यहां रेजिडेंशियल इलाके में मकानों के भीतर भी चलाए जा रहे हैं।

हालात फायर ब्रिगेड के भी ठीक नहीं, महज दाे मंजिल तक ही सीढ़ी

हालात ए बानगी के जानिए चंद उदाहरण

कंप्यूटर सेंटर: एटलस रोड पर सरकार की ओर से मान्यता प्राप्त सेंटर पर जब फायर सेफ्टी उपकरण बारे पूछा गया तो संचालक ने कहा कि एक है जोकि स्टोर रूम में है। यहां कक्षाओं का हाल ऐसा है जो ऊपरी तल में भी बेसमेंट बने हैं। यहां पांच सौ से ज्यादा विद्यार्थी कंप्यूटर शिक्षा के लिए पहुंचते हैं।

लाइब्रेरी: सुभाष चौक पर बनी लाइब्रेरी के संचालक को फायर सेफ्टी के उपकरण के बारे में ही जानकारी नहीं थी। ऐसे में जब उनसे पूछा गया कि अगर आग गई तो तो क्या करेंगे, बोले जवान बालक हैं, बुझा लेंगे।

काेचिंग इंस्टीट्यूट : मॉडल टाउन स्थित एक विख्यात कोचिंग सेंटर की प्रबंधन समिति में शामिल अधिकारी पूरी तरह से ही भगवान भरोसे हैं, बोले भगवान ऐसा क्यों करेगा कि हमारे यहां आग लगे, सवाल अगर आग लगने की नौबत आई तो क्या उन्हें बुझाने के संसाधन है, बोले नहीं है।

इंग्लिश स्पीकिंग कोर्स: सुभाष चौक पर स्थित यह कार्यालय भी बेसमेंट में था, जहां जब फायर सेफ्टी के बारे में जानकारी ली गई तो बताया गया कि वह उपकरण तो हैं, लेकिन जिस कमरे में हैं वह तालाबंद है और उनकी चाबी उनके पास नहीं हैं।

सोनीपत . शहर के एक कोचिंग सेंटर से निकलते हुए विद्यार्थी।

सेकेंड एग्जिट गेट के नाम पर भी खानापूर्ति

सेकेंड एग्जिट गेट के नाम पर भी यहां खानापूर्ति दिखी। आग से बचने के लिए सेकेंड एग्जिट गेट और सेकेंड स्टेयर्स की बात पर कुछ कोचिंग सेंटर चलाने वालों ने माना कि उनके यहां पीछे की ओर गेट है, जब हमारी टीम ने पिछली गली में जाकर उनके द्वारा कही गई सेकेंड गेट की बात की पड़ताल की। कुछ जहां मिले ही नहीं तो कुछ पर तो बाहर की ओर से ताले लटके हुए मिले।

सेंटर ही नहीं फायर ब्रिगेड भी नहीं सक्षम

यहां सेंटर तो जहां भगवान भरोसे बैठे हैं, वहीं फायर ब्रिगेड की हालत भी नाजुक है। जहां उनकी ज्यादातर गाड़ी इस समय कंडम एवं जली हुई हैं तो वहीं संसाधनों का भी घोर अभाव है। कर्मचारी अक्सर बिना सुरक्षा उपकरण के आग बुझाने जाते हैं, ज्यादातर के पास ड्रेस नहीं है। सबसे बड़ी दिक्कत सीढ़ी की हैं।

निगम भी जांचेगी हालात

काेचिंग सेंटर के भवन नियमानुसार है या नहीं इसके लिए औचक निरीक्षण किया जाएगा। जहां खामियां मिलेगी वहां नियमानुसार कार्रवाई भी की जाएगी। -देवेन्द्र कुमार, बिल्डिंग इंस्पेक्टर, नगर निगम साेनीपत

जहां नियमाें की अनदेखी हाेगी वहां नाेटिस देंगे

विभाग की संज्ञान में आया है कि कोचिंग सेंटरों में फायर सिस्टम को लेकर कमियां हैं। इसलिए तय किया गया है कि विभाग की ओर से इस बाबत टीमें बनाकर सभी सेंटरों का निरीक्षण किया जाएगा, जहां नियमों की अवहेलना मिलेगी, वहीं नोटिस दिया जाएगा। आरडी भारद्वाज, डीएफओ, सोनीपत।

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