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सतगुरु मुक्ति का दाता, उनकी कृपा से ही परमात्मा से मिलन हो सकता है: खुराना




गांव गधौली में विशेष संत समागम का आयोजन दिल्ली से आए महात्मा जोगेन्द्र सिंह खुराना की अध्यक्षता में किया गया। सत्संग की शुरूआत अवतार बाणी के शब्द गायन से हुई। संचालन महात्मा गुरनाम सिंह मान ने किया।

संगत को संबोधित करते हुए महात्मा जोगेन्द्र ने कहा कि सतगुरू की कृपा से ही परमात्मा का बोध हो सकता है। सतगुरू ही मुक्ति का दाता है। गुरू बिना गत नही, शाह बिना पत नहीं। उन्होंने समझाते हुए कहा कि जात न पूछो साध की, पूछ लीजिए ज्ञान, मोल करो तलवार का, पड़ी रहन दो म्यान। उन्होंने कहा कि राजा जनक ने बहुत तपस्या की, लेकिन परमात्मा की प्राप्ति नहीं हो पाई तो उन्होंने सभी महात्माओं को बुलाया और कहा कि मुझे परमात्मा के दर्शन करने हैं। मुझे परमात्मा के जानकारी घोड़े के रकाब में पैर रखने से पहले करवा सकता है वो इस सिंहासन पर बैठ जाए। तभी अष्टावक्र जो आठ जगह से टेढ़े थे वो आए और सिंहासन पर बैठ गए। सभी लोग उनके शरीर को देखकर उनकी मजाक बनाने लगे। अष्टावक्र ने राजा जनक से पूछा तू ज्ञान लेना चाहता है। राजा ने जवाब दिया-जी हां। अष्टावक्र ने कहा कि ज्ञान की कुछ दक्षिणा भी होती है, क्या तुम दक्षिणा दे सकते हो। राजा ने कहा मेरे पास जो कुछ भी है, आपको देने को तैयार हूं। अष्टावक्र ने कहा वे उनसे तीन चीजें मांगता हैं तन, मन और धन। राजा ने थोड़ी देर सोच कर कहा मैंने अपना तन, मन और धन आपको दिया। अष्टावक्र ने राजा से कहा देखो राजा, तुम मुझे अपना तन, मन और धन दे चुके हो इन सबका मालिक अब मैं हूं। मैं हुक्म देता हूं कि तुम नीचे जाकर बैठ जाओ। राजा ने जरा भी देर नहीं की और नीचे बैठ गए। अष्टावक्र ने ऐसा इसलिए किया था कि राजा की लोक लाज खत्म हो जाए, लोक-लाज बड़ी भारी रुकावट है। अष्टावक्र ने राजा को घोड़े पर बैठने को कहा और रकाब में पैर रखने से पहले ही इस परमात्मा के दर्शन करवा दिए। उन्होंने कहा कि फूल के मसलने में देरी हो सकती है परंतु परमात्मा के दर्शनों में इतनी भी देरी नहीं होती। केवल सतगुरू के चरणों में शीश रख कर अरदास करनी होती है। आज सतगुरू माता सुदीक्षा महाराज यही कार्य कर रहीं हैं। सत्संग में अनेक वक्ताओं ने गीतों, कविताओं और व्याख्यानों के माध्यम से मिशन का संदेश प्रस्तुत किया।

प्रवचन करते महात्मा जोगेन्द्र सिंह खुराना व उनसे आशीर्वाद लेती संगत।

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Yamunanagar News – haryana news the benefactor of satguru mukti can meet god with his grace khurana

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