News That Matters

Health

कई गंभीर बीमारियों का खत्‍मा भी करता है मशरूम

कई गंभीर बीमारियों का खत्‍मा भी करता है मशरूम

Health
मशरूम की सब्‍जी की बात जब भी होती है, तो इसे सबसे महंगी सब्जियों में गिना जाता है। खाने में इसका स्‍वाद तो अच्‍छा होता है ही, यह सेहत के लिए भी काफी अच्‍छा होता है। मशरूम को देश के कई... Live Hindustan Rss feed
शराब छुड़ाने और डिप्रेशन दूर करने में मदद करेगी नई दवा : शोध

शराब छुड़ाने और डिप्रेशन दूर करने में मदद करेगी नई दवा : शोध

Health
वैज्ञानिकों ने कहा है कि उन्होंने एक ऐसी अनोखी दवा विकसित की है, जिससे शराब की लत छुड़ाई जा सकती है और अवसाद में भी कमी लाई जा सकती है।अध्ययन के मुताबिक, 2000 के दशक में शराब की लत में काफी बढ़ोतरी... Live Hindustan Rss feed
बॉडी को डिटॉक्स करना है एक मिथ्य, यहां जानें क्या है सच्चाई

बॉडी को डिटॉक्स करना है एक मिथ्य, यहां जानें क्या है सच्चाई

Health
इन दिनों हैल्थी लिविंग की जब बात आती है तो डिटॉक्स नाम का एक नया टर्म सुनने को मिलता है। इसके लिए कई नुस्खे बताए जाते हैं, तो कभी इसके फायदे गिनाए जाते हैं। अपने भी सोशल मीडिया या एडवर्टीजमेंट में देखा होगा जिसमें कभी आपको खीरे का रस पीने की सलाह दी जाती है, तो कभी पानी में नींबू, टमाटर और खीरा आदि डाल कर पीने को कहा जाता है। असल में यह आज के समय का सबसे बड़ा मिथ्य है। डिटॉक्सिंग जैसा कुछ नहीं होता, मेडिकल में ऐसी कोई टर्म नहीं है। हैल्दी रहने के लिए केवल प्रॉपर डाइट और एक्सरसाइज ही काम आएगी। ट्रेंड के अनुसार यह होता है डिटॉक्सिंग आपको पहले बताते हैं कि डिटॉक्सिंग का अर्थ क्या है। डिटॉक्सिंग का अर्थ बताया जाता है कि आप अपने सिस्टम से सारी इम्प्योरिटीज को फ्लश करें और अपने ऑर्गेंस को नेचुरल इंग्रीडिएंट्स से साफ करें। इसके जरिए शरीर से तमाम टॉक्सिंस को बाहर निकालने का दावा किया जाता है। यह ह
Weight loss: वजन कम करने के लिए अच्छे हैं ये 4 नेगेटिव कैलोरी फूड

Weight loss: वजन कम करने के लिए अच्छे हैं ये 4 नेगेटिव कैलोरी फूड

Health
अगर आप वजन कम करने की लगातार कोशिश कर रहे हैं और वजन कम करने के लिए डाइट से लेकर एक्सरसाइज तक सब कर रहे हैं तो नेगेटिव कैलोरी फूड के बारे में भी जान लें। खाने की इन चीजों को आप अपनी डाइट में शामिल कर... Live Hindustan Rss feed
इस बीमारी को जड़ से उखाड़ फेंकने में कई देश अभी भी गंभीर नहीं

इस बीमारी को जड़ से उखाड़ फेंकने में कई देश अभी भी गंभीर नहीं

Health
WHO ने वैश्विक तपेदिक (TB) पर अपनी नवीनतम रिपोर्ट में संकेत दिया है कि कई देश 2030 तक टीबी के उन्मूलन के लिए अभी भी पर्याप्त प्रयास नहीं कर रहे हैं। पिछले वर्ष टीबी से होने वाली मौतों की संख्या में कमी आने के बावजूद, इसका उन्मूलन एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। वैश्विक निकाय ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अभूतपूर्व आंदोलन की वकालत करते हुए लगभग 50 राष्ट्राध्यक्षों से निर्णायक कार्रवाई का आग्रह किया है। पहचान, निदान और उपचार दरों में तत्काल सुधार करने के लिए, डब्ल्यूएचओ और भागीदारों ने 2022 तक टीबी वाले 4 करोड़ लोगों को गुणवत्ता वाली देखभाल प्रदान करने के लक्ष्य को निर्धारित करने के लिए एक नई पहल शुरू की है। यह अनुमान लगाया गया है कि कम से कम 3 करोड़ लोगों को इस अवधि के दौरान टीबी निवारक उपचार तक पहुंचने में सक्षम होना चाहिए। टीबी एक रोकथाम योग्य और इलाज योग्य बीमारी है। हालांकि, टीबी
अब सिर्फ 60 सेकंड में कैंसर का भी पता लगाएगा बायोसेंसर रूम

अब सिर्फ 60 सेकंड में कैंसर का भी पता लगाएगा बायोसेंसर रूम

Health
चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में जल्द क्रांतिकारी बदलाव संभव है। मरीज की नब्ज पकडऩे से पहले ही डॉक्टरों को शरीर की समस्त बीमारियों के बारे में मालूम होगा। यानी खून की जांच, सैंपल देने और पैथोलॉजी रिपोर्ट का इंतजार करने का झंझट खत्म होगा। ऐसा मुमकिन हुआ है आइआइटी और डिफेंस रिसर्च एंड डवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (डीआरडीओ) के संयुक्त आविष्कार के कारण। नई तकनीक को नाम दिया गया है ऑप्टिकल टेक्सिस माइक्रोस्कोप (ओटीएम)। इस माइक्रोस्कोप से शरीर के हर अंग की पूरी जानकारी 60 सेकंड में मिल जाएगी। डॉक्टरों से पहली मुलाकात के दौरान ही मरीज के सभी अंगों की रिपोर्ट सामने होगी। अलबत्ता अभी इस तकनीक का प्रयोग इंसानों पर नहीं किया गया है, लेकिन दावा है कि अगले चंद वर्षों में देश के बड़े अस्पतालों में यह सुविधा मुहैया होगी। हाईटेक सेंसर से स्कैन ऑप्टिक्स एंड डवलपमेंट विषय पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में आइआइटी-दिल्ली
वजन घटाने के लिए जी आई को जानें

वजन घटाने के लिए जी आई को जानें

Health
मोटापे की समस्या को लेकर आजकल हर उम्र का इंसान परेशान है और इसे नियंत्रित करने के लिए न्यूट्रिशनिस्ट ग्लाइसेमिक इंडेक्स (जी आई ) कम करने पर जोर दे रहे हैं। ये जानना जरूरी है कि जी आई होता क्या है? हमारे भोजन में कार्बोहाइड्रेट्स होते हैं। कार्बोहाइड्रेट शरीर को ऊर्जा देने का सबसे बढिय़ा स्रोत है। ये दिमाग, मांसपेशियों और दूसरे जरूरी अंगों के लिए बहुत फायदेमंद है। जब खाना पाचनतंत्र में जाता है तो कार्बोहाइड्रेट शुगर में टूट जाता है और रक्त में शर्करा का स्तर बढ़ जाता है। ये गतिविधियां कितनी तेजी से होती हैं, इसकी माप जी आई के माध्यम से की जाती है। जीआई वाला खानाअगर कार्बाेहाइड्रेट युक्त खाना बहुत जल्दी टूटकर ग्लूकोज बन जाए और तेजी से रक्त में मिल जाए तो वह ज्यादा जीआई वाला खाना है। वहीं, अगर खाना धीरे-धीरे टूटकर ग्लूकोज में परिवर्तित होता है और धीमी गति से रक्त में मिलता है तो वह कम जीआई वाल
हाथों में झनझनाहट या सूनापन तो हो सकता है कार्पल टनल सिंड्रोम!

हाथों में झनझनाहट या सूनापन तो हो सकता है कार्पल टनल सिंड्रोम!

Health
आजकल लोगों में हाथ व कलाई का दर्द एक आम बीमारी बनता जा रहा है। मेडिकल की भाषा में इसे कार्पल टनल सिंड्रोम कहते हैं। इस रोग में जब अन्य कोशिकाएं जैसे कि लिगामेंट्स और टेंडन सूज या फूल जाते हैं तो इसका प्रभाव मध्य कोशिकाओं पर पड़ता है। इस दबाव से हाथ घायल या सुन्न महसूस करता है। कार्पल टनल हड्डियों और कलाई की अन्य कोशिकाओं द्वारा बनाई गई एक संकरी नली होती है। यह नली हमारी मध्य नाड़ी की सुरक्षा करती है। मध्य नाड़ी हमारे अंगूठे, मध्य और रिंग अंगुलियों से जुड़ी होती है। साधारणतया कार्पल टनल सिंड्रोम ज्यादा गंभीर बीमारी नहीं है। इलाज से यह रोग दूर हो जाता है। ये हैं कारणएक ही हाथ से लगातार काम करने से कार्पल टनल सिंड्रोम की परेशानी हो सकती है। यह सामान्यतया उन लोगों में अधिकतर पाया जाता है जिनके पेशे में कलाई को मोडऩे के साथ पिंचिंग या ग्रीपिंग करने की जरूरत होती है। पुरुषों की तुलना में औरतों क
रोजाना 5 ग्राम से ज्यादा नमक खाना हो सकता है नुकसानदायक

रोजाना 5 ग्राम से ज्यादा नमक खाना हो सकता है नुकसानदायक

Health
पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया (पीएचएफआई) द्वारा कराए गए अध्ययन में पाया गया है कि वयस्क भारतीयों में ज्यादा नमक खाने की आदत है, जो डब्ल्यूएचओ द्वारा निर्धारित मात्रा से ज्यादा है।  अध्ययन में... Live Hindustan Rss feed
कई घातक बीमारियों की जड़ है नमक, यहां जानें रोजाना कितना खाएं

कई घातक बीमारियों की जड़ है नमक, यहां जानें रोजाना कितना खाएं

Health
नई दिल्ली. पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया (पीएचएफआई) द्वारा कराए गए अध्ययन में पाया गया है कि वयस्क भारतीयों में ज्यादा नमक खाने की आदत है, जो डब्ल्यूएचओ द्वारा निर्धारित मात्रा से ज्यादा है। अध्ययन में पाया गया कि दिल्ली और हरियाणा में नमक का सेवन प्रतिदिन 9.5 ग्राम और आंध्र प्रदेश में प्रतिदिन 10.4 ग्राम था।चिकित्सकों का कहना है कि आहार में नमक ज्यादा लेने से रक्तचाप पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है और समय के साथ यह कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों का कारण बन सकता है। आहार में नमक को सीमित करने से हृदयरोग में 25 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है और दिल की जटिलताओं से मरने का खतरा 20 प्रतिशत तक कम हो सकता है। हल्थकेयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष पद्मश्री डॉ. के.के. अग्रवाल ने कहा, "भारतीय आहार सोडियम से भरपूर होता है और नमक की अधिक खपत गैर-संक्रमणीय बीमारियों के लिए सबसे बड़ा योगदान कारक है। समय के साथ