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अधिकतर मधुमेह रोगी अपनी हालत से हैं अनजान, ऐसे रखें ख्याल

अधिकतर मधुमेह रोगी अपनी हालत से हैं अनजान, ऐसे रखें ख्याल

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विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, भारत में लगभग 6.2 करोड़ लोगों को मधुमेह की समस्या है। यह संख्या वर्ष 2025 तक बढ़कर 7 करोड़ होने का अनुमान है। हालांकि, (15-49 वर्ष) आयु वर्ग के अधिकतर लोग इस बात से... Live Hindustan Rss feed
गर्भस्थ शिशु पर भारी पड़ती हैं मां की ये बुरी आदतें

गर्भस्थ शिशु पर भारी पड़ती हैं मां की ये बुरी आदतें

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अगर मां प्रेग्नेंसी के दौरान भी शराब, चाय और कोल्डड्रिंक लेती हैं तो बच्चे में ऑक्सीजन की कमी, हार्ट रेट का बढ़ना, कम वजन के साथ प्रीमैच्योर डिलीवरी, फेफड़ों की कार्यप्रणाली में गड़बड़ी के अलावा गर्भपात की आशंका भी बढ़ जाती है। कनाडा की टोरंटो यूनिवर्सिटी के शोध के मुताबिक प्रेग्नेंसी में शराब पीना शिशु में फीटल अल्कोहोल स्पेक्ट्रम डिस्ऑर्डर (एफएएसडी) के खतरे को बढ़ाता है। इसको आधार मानकर किए गए 127 शोधों के मुताबिक यह दिक्कत बच्चों में मानसिक व देखने-सुनने की क्षमता, रक्तप्रवाह, पाचन संबंधी गड़बड़ी, श्वसन प्रक्रिया में बाधा, मांसपेशियों और हड्डियों से जुड़े लगभग 428 रोगों के खतरे को बढ़ाती है। जानते हैं मां की कौनसी आदतें बच्चे पर बुरा असर डालती हैं। अधिक चाय-कॉफी - इन्हें अधिक मात्रा में पीने से कई बार आंवलनाल कमजोर हो जाती है।असर : इनमें मौजूद कैफीन प्लेसेंटा के जरिए बच्चे के शरीर में प
शरीर के विषैले तत्त्व बाहर निकालता है ये अंग, एेसे रखें इसका ध्यान

शरीर के विषैले तत्त्व बाहर निकालता है ये अंग, एेसे रखें इसका ध्यान

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किडनी और हार्ट शरीर के महत्त्वपूर्ण अंग हैं। हार्ट रक्त को पंप कर शरीर को ऑक्सीजन उपलब्ध कराता है। किडनी रक्त को शुद्ध करने के साथ विषैले पदार्थों को शरीर से बाहर निकालती है। यह पसली के ढांचे के नीचे रीढ़ की हड्डी के दोनों तरफ स्थित सेम (बीन) के आकार की होती है। एक किडनी का वजन लगभग 150 ग्राम होता है। ब्लड व बॉडी फ्लूइड्स को करती नियंत्रित-किडनी की कामकाजी इकाई को चिकित्सा विज्ञान में नेफ्रॉन कहते हैं। प्रत्येक किडनी में असंख्य नेफ्रॉन होते हैं। किडनी का प्रमुख काम है शरीर में ब्लड व बॉडी फ्लूइड्स का स्तर नियंत्रित करना। यह रक्त साफ करने के साथ उसमें रसायन का स्तर संतुलित रखती है। स्वस्थ किडनी से हर एक घंटे में 12 बार शुद्ध रक्त शरीर को मिलता है। एक दिन में किडनी 1 से 2 लीटर अपशिष्ट पदार्थ पेशाब के जरिए बाहर निकालती है। स्वस्थ किडनी शरीर में पानी की मात्रा भी नियंत्रित करती है। किडनी का एक
ल्यूकोरिया की वजह से महिलाओं में हो सकती है ये गंभीर बीमारी

ल्यूकोरिया की वजह से महिलाओं में हो सकती है ये गंभीर बीमारी

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खराब जीवनशैली, खानपान व शरीर की सफाई न रखने से महिलाओं को होने वाली श्वेतप्रदर (ल्यूकोरिया) की समस्या आम है। 70% महिलाओं को 25-30 वर्ष की उम्र के बाद जबकि 30% मामलों में यह दिक्कत कम उम्र की लड़कियों में होती है। लंबे समय तक ल्यूरकोरिया गर्भाशय कैंसर का खतरा बढ़ाती है। ल्यूकोरिया में वजाइना से सफेद पदार्थ निकलता है। गर्भाशय की अंदरूनी झिल्ली में सूजन आ जाती है। इसकी तीन अवस्थाएं हैं। 1. प्रसव के बाद श्वेतस्त्राव होना, ऑव्युलेशन क्रिया है। 2. गर्भावस्था के पहले माह में श्वेतस्त्राव गर्भावस्था की पहचान है। 3. प्रोजेस्ट्रोन हार्मोन रिलीज होने पर माहवारी के 14 दिन बाद श्वेतस्त्राव।   परेशानी - एनीमिया, कमजोर याद्दाश्त, बेचैनी, घबराहट, जोड़दर्द, चेहरे पर पीलापन, अपच व पीठदर्द होता है।   सतर्कता -कभी-कभार श्वेतस्त्राव के साथ खुजली सामान्य है। लेकिन यदि साथ में दुर्गन्ध, प्रभावित हिस्
आयुर्वेद से पा सकते हैं दीर्घायु होने का मंत्र

आयुर्वेद से पा सकते हैं दीर्घायु होने का मंत्र

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लंबी उम्र देने वाली दिनचर्याआयुर्वेद के ग्रंथों में दीर्घायु पाने के कई साधन बताए गए हैं। संतुलित नींद लेने वाला, दयाभाव रखने वाला, इंद्रियों पर संयम रखने वाला, नित्य क्रियाओं को न रोकने वाला व्यक्ति स्वस्थ रहता है। दिनचर्या व ऋतु के अनुसार नियमों का पालन करने वाला व्यक्ति सेहत और लंबी उम्र पाता है। सुबह उठकर पानी पीने के साथ बाईं करवट सोने वाला, दिन में दो बार भोजन करने वाला, दिन-रात में छह बार मूत्र त्याग करने के साथ दो बार मल त्याग करने वाला व संयमित जीवन व्यतीत करने वाला व्यक्ति ही लंबी उम्र पाता है। बहुत कम लोगों को पता होगा कि गीले पैर भोजन करने से आयु बढ़ती है व गीले पैर सोने से आयु कम होती है। सूर्योदय से पहले उठना व स्नान करना भी लाभ पहुंचाता है।पानी, मट्ठा व दूध जरूरीमहर्षि चरक ने कहा है कि पौष्टिक आहार करने वाला व्यक्ति बिना किसी रोग के छत्तीस हजार रात्रि अर्थात सौ वर्ष तक जीता
थायरॉयड हार्मोन से मेटाबॉलिज्म कंट्रोल लेते हैं ब्लड सैंपल

थायरॉयड हार्मोन से मेटाबॉलिज्म कंट्रोल लेते हैं ब्लड सैंपल

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अनियमितता पता लगाने के लिए एक स्क्रीनिंग टैस्ट किया जाता है शरीर में हार्मोन के स्तर को जानने के लिए ब्लड सैंपल लिया जाता है। इसे खाली पेट या भोजन के बाद डॉक्टर के निर्देशानुसार करवाया जा सकता है। हमारी गर्दन में थायरॉयड नाम की ग्रंथि होती है जो शरीर के मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित कर थायरॉयड हार्मोंस स्त्रावित करती है। इस ग्रंथि के ज्यादा सक्रिय होने पर जब हार्मोन्स अधिक स्त्रावित होते हैं तो उस स्थिति को हायपर थायरॉडिज्म कहते हैं और कम होने पर हायपो थायरॉडिज्म की शिकायत होती है। थायरॉयड ग्रंथि से स्त्रावित होने वाले थायरॉयड हार्मोन को पिट्यूट्री ग्रन्थि से स्त्रावित होने वाला थायरॉयड स्टीमुलेटिंग हार्मोन (टीएसएच) प्रभावित करता है। टीएसएच टैस्ट थायरॉयड हार्मोंस की अनियमितता पता लगाने के लिए एक स्क्रीनिंग टैस्ट के रूप में किया जाता है। ये है मानक: सामान्य व्यक्ति के ब्लड में थायरॉयड स्टीमुलेटि
ये सूट पहनने से प्रसव के दौरान नहीं होगी ब्लीडिंग, जानें इसके बारे में

ये सूट पहनने से प्रसव के दौरान नहीं होगी ब्लीडिंग, जानें इसके बारे में

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दुनियाभर में हर साल साढ़े तीन लाख महिलाओं को प्रसव के बाद जान गंवानी पड़ती है। इस आंकड़े को कम करने के लिए लाइफरैप सूट उपयोगी साबित हो सकता है जो पोस्ट पार्टम हेमरेज यानी प्रसव के बाद रक्तस्त्राव को रोककर मां की जान बचाता है। यह मेट्रो सिटीज में उपलब्ध है। शरीर के चार हिस्सों में प्रेशर के साथ बांधते हैं - स्पेशल स्ट्रेचेबल फाइबर से बना नॉन न्युमेटिक एंटी शॉक गारमेंट को स्पेस सूट या लाइफरैप सूट के नाम से भी जाना जाता है। इसके चार सेग्मेंट होते हैं। पेट, जांघ, घुटना और पिंडली वाले हिस्से पर इसे निश्चित प्रेशर के साथ बांधा जाता है। यह दिमाग और हृदय तक रक्तसंचार को सामान्य करता है। साथ ही इलाज मिलने तक के लिए 4-5 घंटे की समयावधि को बढ़ा भी देता है। इससे यदि कोई महिला इमरजेंसी में एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचे या उसे लेबर रूम से ऑपरेशन थियेटर भी ले जाना पड़े तो उसकी जान बचाने में मदद मिलती है। प्
सही तरीके से करेंगे व्यायाम तो नहीं होगी दर्द की समस्या

सही तरीके से करेंगे व्यायाम तो नहीं होगी दर्द की समस्या

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घुटनों और जोड़ों में दर्द से राहत पाने के लिए अक्सर लोग मॉर्निंग वॉक के साथ एक्सरसाइज करते हैं लेकिन सही तरीका मालूम न होने के कारण उन्हें इसका लाभ नहीं मिल पाता। ऐसे में दर्द और बढ़ जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इंटरप्टेड ब्रिस्क वॉकिंग ही मॉर्निंग वॉक का सही तरीका है। इसमें व्यक्ति तेज चलता है। आधा किमी तक चलने के बाद दो से तीन मिनट बे्रक लेकर फिर वॉक जारी की जाती है। करें गलतफहमियां दूर-अक्सर घुटनों में दर्द या फिर गठिया की शुरुआत में व्यक्ति पालथी मारकर बैठना बंद कर देता है, जो कि गलत है। क्योंकि पालथी मारकर बैठने से पैरों की मांसपेशियों में लचीलापन बना रहता है जिससे ये अंग एक्टिव रहता है। ऐसे में यदि घुटना प्रत्यारोपित करना भी पड़े तो उसके मुडऩे की क्षमता प्रभावित नहीं होती। गठिया के इलाज और घुटना प्रत्यारोपण के बाद भी अक्सर लोग पालथी मारकर बैठना बंद कर देते हैं, जबकि ऐसा नहीं कर
प्रेग्नेंसी में ऐसे फूड से रहें दूर

प्रेग्नेंसी में ऐसे फूड से रहें दूर

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गर्भवती को अपने लाइफस्टाइल से जुड़ी हर बात का ख्याल रखना चाहिएआमतौर पर प्रेग्नेंसी के दौरान उन चीजों को खाने पर ज्यादा फोकस रहता है जो हेल्दी होती हैं। लेकिन कोई चीज सिर्फ हेल्दी है इसलिए खाना लेना सही नहीं है क्योंकि कई हैल्दी चीजें मसलन, पपीता, अनानास जैसे फल गर्भवती महिला को नुकसान पहुंचा सकते हैं। लिहाजा अपने शिशु के बेहतर स्वास्थ्य के लिए गर्भवती महिला को अपने लाइफस्टाइल से जुड़ी हर बात का ख्याल रखना चाहिए, खासतौर पर खान-पान का। अधपके भोजन से बचें। पैकेज्ड फूड की एक्सपायरी डेट जरूर चेक कर लें।डेयरी प्रॉडक्ट अच्छी तरह उबाले हुए और पॉश्चराइज किए हुए ही लें।सी-फूड जैसे शैलफिश, रॉ मीट फिश से दूर रहें। इनमें कुछ खास जीवाणु, परजीवी होते हैं जो नुकसान पहुंचाते हैं। कच्चे पपीते में लेटेक्स मौजूद होता है, जो गर्भावस्था के शुरूआती दिनों में गर्भपात के खतरे को बढ़ा देता है। पपीते में पपैन भी शामि
कैंसर की आशंका कम करता विटामिन-सी युक्त तरबूज

कैंसर की आशंका कम करता विटामिन-सी युक्त तरबूज

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स्लाइस में 86 कैलोरी ऊर्जा होती हैतरबूज की एक स्लाइस में 86 कैलोरी ऊर्जा होती है। जिसमें 4 प्रतिशत फैट, 89 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट और 7 प्रतिशत प्रोटीन होता है। विटामिन, मिनिरल्स और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर तरबूज शरीर में पानी की कमी पूरी करने के साथ ठंडक पहुंचाता है। इसमें मौजूद विटामिन-सी कैंसर का कारण बनने वाले फ्री-रेडिकल्स से लड़ता है। खाने से पहले इसे सलाद के रूप में लिया जा सकता हैडाइटिंग कर रहे हैं तो खाने से पहले इसे सलाद के रूप में लिया जा सकता है। इससे भूख कम लगेगी और जरूरी तत्त्वों की कमी भी नहीं होगी। तरबूज का जूस पीने की बजाय इसे छोटे-छोटे टुकड़े करके खाएं। यह शरीर में फाइबर की पूर्ति करता है।खाली पेट खाने से शरीर से विषैले पदार्थ बाहर निकल जाते हैंतरबूज को सुबह खाली पेट खाने से शरीर से विषैले पदार्थ बाहर निकल जाते हैं। इसे खाने के तुरंत बाद पानी न पीएं क्योंकि इसमें पहले ही पान