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सेहतमंद रहने के लिए इस तरह राेज खाएं 10 बादाम

सेहतमंद रहने के लिए इस तरह राेज खाएं 10 बादाम

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जंकफूड, अधिक तलेभुने खाद्य पदार्थ व बाजार में बिकने वाले तरह-तरह के सॉफ्टड्रिंक्स के कारण आजकल कोलेस्ट्रॉल बढ़ने की समस्या हर आयुवर्ग के लोगों में आम है। कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढऩे से सबसे ज्यादा खतरा हृदय संबंधी रोगों का होता है। ऐसे में व्यायाम व संतुलित आहार के साथ यदि नियमित रूप से बादाम खाने की आदत डाली जाए तो सेहतमंद रहा जा सकता है।आइए जानते हैं बादाम के फायदाें के बारे में :- कई बीमारियों में लाभकारी :बादाम में प्रोटीन, हृदय के लिए जरूरी अच्छा वसा, विटामिन-ए, ई व डी, राइबोफ्लेविन, फाइबर, कैल्शियम आदि कई खनिज मौजूद होते हैं। रोजाना बादाम खाने से हृदय से जुड़ी परेशानियां, हाई बीपी, अधिक यूरिक एसिड बनने की समस्या व कई अन्य बीमारियों में फायदा होता है। कई शोधों के अनुसार हार्टअटैक, कोरोनरी हार्ट डिजीज, धमनियों में ब्लॉकेज जैसे हृदय संबंधी रोगों की आशंका को कम करने के लिए बादाम को सहायक मा
सेहत में खूबसूरत रंग भरती है आर्ट थैरेपी

सेहत में खूबसूरत रंग भरती है आर्ट थैरेपी

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अगर आप अपने जीवन से किसी भी तरह की मानसिक परेशानी को दूर करना चाहते हैं तो आर्ट थैरेपी अपना सकते हैं। शोध बताते हैं कि बच्चे, बुजुर्ग व महिलाओं के लिए यह थैरेपी काफी उपयोगी साबित हो रही है। आइए जानते हैं कैसे हाेता है फायदा :- भावनाओं का चित्रणआमतौर पर देखा गया है कि जो लोग डिप्रेशन या स्ट्रेस से घिरे रहते हैं वे आर्ट के माध्यम से अपनी भावनाओं को बेहतर तरीके से पेश कर पाते हैं। इससे मानसिक स्वास्थ्य में काफी सुधार होता है। आर्ट थैरेपी की जड़ें एंथ्रोपोसोफी में हैं। यह एक आध्यात्मिक अभ्यास है जिसे रुडोल्फ स्टीनर ने शुरू किया था। इसमें कई समूहों के बीच सत्रों का आयोजन किया जाता है, जिसमें थैरेपिस्ट स्ट्रक्चर्ड एक्सरसाइज करवाते हैं। मानसिक सेहत में सुधारयह इंसान की शारीरिक-मानसिक व इमोशनल वेल-बीइंग में सुधार के लिए रचनात्मक प्रक्रिया को महत्त्व देती है। इस प्रक्रिया में व्यक्ति की भावनाओं को
सूजी से बना हैल्दी ब्रेकफास्ट, आपकाे दिनभर रखेगा एनर्जेटिक

सूजी से बना हैल्दी ब्रेकफास्ट, आपकाे दिनभर रखेगा एनर्जेटिक

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हैल्दी ब्रेकफास्ट के लिए सूजी का प्रयोग हलवा, इडली या उपमा के तौर पर किया जाता है। खाने में हल्की व सुपाच्य सूजी गेहूं से बनी होती है। कई जगहों पर इसे रवा के नाम से भी जाना जाता है।आइए जानते हैं इसके फायदों के बारे में - ऊर्जा का स्रोत :सुबह इससे बना नाश्ता करने से पूरे दिन शरीर में ऊर्जा बनी रहती है। नाश्ते में इसके साथ यदि सब्जियों का भी प्रयोग किया जाए तो यह अधिक पौष्टिक हो जाती है। हृदय संबंधी रोगों में :सूजी दिल के लिए भी अच्छी है। हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा कम करने के साथ हार्टअटैक से भी बचाती है व रक्तसंचार को सही रखती है। पाचनतंत्र दुरुस्त : इसमें मौजूद फाइबर पाचनक्रिया को दुुरुस्त रखने में मददगार है। इसमें कैल्शियम, सेलेनियम, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, पोटेशियम जैसे कई मिनरल्स होते हैं जो पाचनतंत्र को सही रखने के लिए जरूरी हैं। इम्युनिटी बढ़ाने में सहायक :इसमें पाया जाने वाला सेलेनि
डायबिटीज का खतरा बढ़ा सकती है एंटीबायोटिक

डायबिटीज का खतरा बढ़ा सकती है एंटीबायोटिक

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कोपेनहेगन यूनिवर्सिटी में हुए शोध के अनुसार अधिक एंटीबायोटिक दवाओं के सेवन से टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है। इस शोध में जिन लोगों को 15 वर्षों या उससे अधिक समय तक एंटीबायोटिक दवाएं लेने की सलाह दी गई उन्हें अन्य लोगों की तुलना में टाइप-2 डायबिटीज होने का खतरा 53 प्रतिशत अधिक था। अध्ययन के लिए लगभग दो लाख एेसे मरीजों को शामिल किया गया जो 15 सालों से भी अधिक समय से एंटीबायोटिक ले रहे थे और 13 लाख एेसे लोगों को भी इसका आधार बनाया गया जिन्हें डायबिटीज नहीं थी। स्टडी में डायबिटीज होने का रिस्क उन लोगों में अधिक पाया गया जिन्हें एंटीबायोटिक दवाएं दी गई थीं। यह शोध भारत के लिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि यहां डायबिटीज के मरीज अधिक हैं। बुखार, खांसी या जुकाम होने पर एंटीबायोटिक्स से परहेज करना चाहिए। इनका बार-बार इस्तेमाल करने से डायबिटीज का खतरा 53 फीसदी तक बढ़ जाता है।दुनियाभर में सबसे ज्यादा
तेजी से नहीं, धीरे-धीरे घटाएं वजन, तभी रहेंगे सेहतमंद

तेजी से नहीं, धीरे-धीरे घटाएं वजन, तभी रहेंगे सेहतमंद

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अगर आपका वजन बढ़ा हुआ आैर आप इस कम करना चाहते हैं। ताे आप चाहेंगे की जल्द से जल्द वजन कम हाे जाए, पर क्या आप जानते हैं कि वजन कम करने की जल्दबाजी आपकी सेहत के लिए नुकसानदायक हाे सकती है।आपने वाे कहावत ताे सुनी हाेगी जिसमें कहा गया है कि "जाे धीमे और स्थिर दौड़ता है वाे जीतता है", जी हां वजन कम करने काे लेकर ये बात सटीक बैठती है। अगर आप काे वजन कम करना ही है ताे थाेड़ें धैर्य के साथ काम लेना हाेगा। आइए जानते क्याें तेजी से नहीं घटाना चाहिए वजन :- आदर्श रूप से, एक व्यक्ति अपने शरीर के वजन के आधार पर एक सप्ताह में 500 ग्राम से 1 किलो तक का वजन कम कर सकता है। इसलिए, अगर आप 50 किलो वजन कम करना चाहते हैं, तो इसमें लगभग 50 सप्ताह लगेंगे। जबकि तेजी से वजन करने का मतलब है एक हफ्ते में 2 से 3 किलो वजन कम करना। जाे कि मुश्किल काम है। लेकिन अनुशासित खानपान और वजन घटाने की गोलियाँ तेजी से वजन घटाने के
जानें मानसिक रोगों से जुड़े भ्रम और सच्चाई

जानें मानसिक रोगों से जुड़े भ्रम और सच्चाई

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शराब या अफीम जैसे पदार्थों के नशे से रोगी कुछ समय के लिए रोग के लक्षणों को भूल अवश्य जाता है लेकिन भविष्य में उसकी बीमारी के लक्षण अधिक तीव्र होकर सामने आते हैं। भ्रांति : मानसिक रोगों का उपचार केवल बाबाओं व तांत्रिकों द्वारा ही संभव है।तथ्य : मानसिक रोगों का उपचार तांत्रिकों, बाबाओं आदि के पास नहीं होता, बल्कि वे महज हमारी भावनाओं व आस्था का अनावश्यक फायदा उठाते हैं। सही पहचान और उचित मार्गदर्शन से मनोचिकित्सक मनोरोगों का उपचार करने में सक्षम होता है। भ्रांति : सभी मानसिक रोगों में उम्रभर दवा लेनी पड़ती है।तथ्य : बहुत कम रोगियों को लंबे समय तक उपचार लेना पड़ता है। लेकिन मानसिक परेशानी के अलावा ऐसे कई शारीरिक रोग जैसे उच्च रक्तचाप, मधुमेह, अस्थमा भी हैं जिनमें लंबे समय तक या ताउम्र दवा लेनी पड़ सकती है। रोगी इन बीमारियों की चिकित्सा में खुद को प्रताडि़त महसूस नहीं करता। भ्रांति : इलेक्ट्रि
जानिए महिलाओं में अनिद्रा से जुड़ी इन खास बातों के बारे में

जानिए महिलाओं में अनिद्रा से जुड़ी इन खास बातों के बारे में

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नींद न आना, बार-बार टूटना, गहरी नींद की कमी आदि अनिद्रा के लक्षण हैं। अनिद्रा किसी भी आयुवर्ग के लोगों में हो सकती है लेकिन महिलाओं में यह समस्या पुरुषों के मुकाबले ज्यादा देखी गई है। कई बार उम्र के साथ भी यह परेशानी बढ़ जाती है। ऐसे में थकान व व्याकुलता महसूस होती है जिसका सीधा असर न केवल दिनभर के कामकाज पर पड़ता है बल्कि कई अन्य तरह की परेशानियां भी घेर सकती हैं। कारण : तनाव, शारीरिक व मानसिक रोग, अनियमित जीवनशैली और डर आदि। गर्भावस्था व मासिक धर्म में : इस दौरान हार्मोन में बदलाव होता है, ऐसे में नींद न आने की समस्या ज्यादातर महिलाओं के सामने आती है। कई बार मासिक धर्म से पहले भी महिलाओं में नींद न आने, नींद के बार-बार टूटने, डर लगने, उठने-बैठने में तकलीफ व दिन में नींद की झपकी आने की शिकायत देखी जाती है। इसी तरह गर्भावस्था के पहले तीन माह के दौरान महिलाएं जहां अधिक नींद की जरूरत महसूस क
आईसीयू के संक्रमण से एेसे करें अपना बचाव

आईसीयू के संक्रमण से एेसे करें अपना बचाव

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आमतौर पर लोग किसी रिश्तेदार या मित्र के आईसीयू (इंटेन्सिव केयर यूनिट) में होने की खबर सुनकर खुद को रोक नहीं पाते और उसे देखने के लिए अस्पताल पहुंच जाते हैं। लेकिन ऐसा करना न सिर्फ मरीज के लिए मुश्किलें बढ़ा सकता है बल्कि वहां मौजूद अन्य लोगों के लिए भी खतरनाक हो सकता है। आईसीयू में संक्रमण का खतरा ज्यादा होता है।आइए जानते हैं इसके बारे में - मरीज के लिए परेशानीयह एक एेसी इकाई है जहांं गंभीर मरीजों को रखा जाता है। एेसे लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। कई बार बाहर से आए लोगों के हाथ संक्रमित होने, साफ-सफाई की कमी या परिजन के किसी रोग से ग्रसित होने के कारण बैक्टीरिया मरीज तक पहुंच जाते हैं। इससे उनके लिए परेशानी बढ़ सकती है। इन बातों का रहे खयाल- ऐसे रोगियों के संपर्क में कम से कम रहें।- आईसीयू में जाते समय हाथ स्वच्छ रखें व मास्क का प्रयोग करें।- छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं, बुज
मां बनने के बाद की कमजाेरी जड़ से दूर करता है ये पौष्टिक आहार

मां बनने के बाद की कमजाेरी जड़ से दूर करता है ये पौष्टिक आहार

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डिलीवरी के बाद मांओं को कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कब्ज, कमजोरी, शरीर में दर्द आदि से बचने और सेहत को बेहतर बनाने के लिए दादी-नानी प्रसूता को कई तरह की पोषक चीजें खिलाती हैं।आइए जानते हैं इनके बारे में - खजूर के लड्डू :खजूर में फाइबर प्रचुर मात्रा में पाया जाता है जो कब्ज को दूर करता है। इसमें मौजूद आयरन खून बढ़ाने में मददगार है। इसे खाने से थकान व कमजोरी कम होती है। सौंफ का पानी :प्रसव के बाद पाचन प्रक्रिया सही रखने के लिए सौंफ का पानी फायदेमंद है। गोंद के लड्डू :खाने वाली गोंद, मूंग की दाल, सोयाबीन का आटा और ड्राईफ्रूट्स को मिलाकर लड्डू बनाएं। इनसे मां के शरीर को प्रोटीन व अन्य पोषक तत्त्व मिलेंगे। अजवाइन का परांठा : गेहूं से बना अजवाइन का परांठा फाइबर का अच्छा स्रोत है। इससे गर्भाशय की समस्याएं ठीक होती हैं साथ ही पाचनक्रिया दुरुस्त रहती है। व्यायाम जरूर
होली में कैसी हो डाइट, जानें डाइटीशियन से

होली में कैसी हो डाइट, जानें डाइटीशियन से

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त्योहार के मौसम में सेहत पर असर पडऩा स्वाभाविक है। इसकी वजह त्योहारों में न चाहते भी लोग ज्यादा मिठाइयां खा लेते हैं। होली में ज्यादा मिठाइयां खाना सेहत के लिए ठीक नहीं होता है। ऐसे में सबको विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है। अगर मिठाइयां खाते हैं तो ध्यान रखें, घर बनी ही मिठाइयां खाएं। बाहर बाजार में मिलावटी मिठाइयां मिलने की आशंका रहती है। मिलावट वाली मिठाइयों से कई प्रकार की बीमारी की आशंका रहती है। जिनको पहले से कोई समस्या है, उन्हें तो विशेष सावधानी बरतने की जरूरत रहती है। जानते हैं कि किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। खुले फूड प्रोडक्ट न लेंबाजार में मिलने वाले खुले फूड प्रोडक्ट नहीं लेने चाहिए। बाजार में बिक रहे खुले फूड प्रोडक्ट में मिलावट की आशंका रहती है। इनमें भी पनीर, दूध, मावा इत्यादि खरीदते समय खास सावधानी बरतें। खानपान की चीजें ऐसी दुकान से लें जिसका फूड लाइसेंस हो। पैकेट वा