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क्या पत्तागोभी के इन गुणों के बारे में जानते हैं आप

क्या पत्तागोभी के इन गुणों के बारे में जानते हैं आप

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पत्तागोभी का रोजाना रस पीने से पेट के घावों यानी पेप्टिक अल्सर में लाभ होता है और पेशाब संबंधी परेशानियां दूर होती हैं। पत्तागोभी सलाद के अलावा सब्जी के रूप में भी इस्तेमाल की जाती है। इसमें कई औषधीय गुण होते हैं जो हमें निरोगी बनाते हैं। जानते हैं इसके फायदों के बारे में। कब्ज से छुटकारा - पत्तागोभी में मौजूद कुछ सूक्ष्म तत्व शरीर में पाए जाने वाले विषैले पदार्थों को बाहर निकालकर शरीर की चयापचय क्रिया यानी मेटाबॉलिज्म को नियमित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ताजा पत्तागोभी को बारीक काटकर उसमें नमक, कालीमिर्च और नींबू का रस मिलाकर रोजाना सुबह के समय खाली पेट खाने से 2-4 सप्ताह में कब्ज की समस्या दूर हो जाती है। पेट के लिए उपयोगी - ताजा पत्तागोभी के रस में विटामिन यू नामक एक ऐसा दुर्लभ विटामिन पाया जाता है, जो काफी असरदार अल्सर प्रतिरोधी पदार्थ है। पत्तागोभी का रस पीने से पेप्टिक अल
Menopause – महिलाओं में मेनोपॉज से जुड़ी इन खास बातों को जरूर जानें

Menopause – महिलाओं में मेनोपॉज से जुड़ी इन खास बातों को जरूर जानें

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रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज) महिलाओं के जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा है, जिसका सामना हर किसी को करना ही पड़ता है। भारतीय महिलाओं में औसतन 46 साल की उम्र में रजोनिवृत्ति हो जाती है। यह प्रजनन क्षमता के अंत का समय है। जब सेक्स हार्मोन कम होने के कारण मासिक रक्तस्राव बंद हो जाता है। लेकिन कई बार अप्राकृतिक रजोनिवृत्ति कम उम्र में भी हो जाती है, जिसके प्रमुख कारण हैं- ऑपरेशन (गर्भाश्य/अंडाश्य निकालने), कैंसर का इलाज या कीमोथैरेपी। कुछ महिलाओं में इस दौरान अन्य प्रतिकूल लक्षण भी हो सकते हैं। मोटापे पर लगाम लगाएं - रजोनिवृत्त महिलाओं में पेट के मोटापे के अलावा बढ़ती उम्र की अन्य बीमारियां जैस हार्ट अटैक, याददाश्त में कमी और स्तन कैंसर आदि हो सकते हैं। मोटापा कम करने के लिए कार्यशैली में परिवर्तन, कम कैलोरी का आहार और बेरियाट्रिक सर्जरी आदि मुख्य विकल्प हैं। मेनोपॉज के दौरान व्यायाम काफी उपयोगी होता है। ए
इस वजह से भी बह सकता है आपके बच्चे का कान, जानिए क्या

इस वजह से भी बह सकता है आपके बच्चे का कान, जानिए क्या

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कान बहना एक आम समस्या है। किसी भी आयुवर्ग के लोग इससे पीड़ित हो सकते हैं। ज्यादातर मामलों में कान में संक्रमण, पर्दे में छेद या हड्डी में गलाव पाया जाता है। इसकी मुख्य वजह लंबे समय तक जुकाम बने रहना होता है। बच्चों में कई बार नाक के पीछे एडिनोइड्स के बढऩे से भी ऐसा होता है। नाक व कान के मध्य स्थित यूस्टेकियन ट्यूब के ठीक से काम न करने से भी कई समस्याएं होने लगती हैं। इसके उपचार के क्या तरीके हैं? इलाज रोग की दशा व कई बार मरीज की उम्र पर भी निर्भर करता है। शुरुआत में कुछ लोगों में सही इलाज से यह ठीक हो जाता है। लेकिन ज्यादातर में कान के पर्दे में छेद या हड्डी का गलाव ठीक करने के लिए सर्जरी करनी पड़ती है क्योंकि समय गुजरने पर पर्दे के छेद के सिरे स्थिर हो जाते हैं, जो दवाओं से नहीं भरते। दवा केवल कुछ समय के लिए मवाद बंद करती है। हड्डी में गलाव होने पर सर्जरी जरूरी हो जाती है। लंबे समय तक कान
क्या आवाजें सुनकर बेचैन हो जाते हैं आप ? कहीं आपको भी तो नहीं ये बीमारी

क्या आवाजें सुनकर बेचैन हो जाते हैं आप ? कहीं आपको भी तो नहीं ये बीमारी

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कुछ लोगों को किसी भी तरह के शोर से अक्सर चिढ़ होती है। शोर हुआ नहीं कि उन्हें गुस्सा आने लगता है। अपना आपा खोकर वे कई बार आसपास के किसी व्यक्ति या लोगों के साथ मारपीट भी कर बैठते हैं। दरअसल यह एक प्रकार की मानसिक बीमारी है, जिसे मीजोफोनिया कहते हैं। आइए जानते हैं इसके बारे में। यह है मीजोफोनिया - यह एक साउंड डिसऑर्डर है। जिसमें मरीज किसी भी प्रकार की आवाज से बेचैन हो उठता है। जरूरी नहीं कि तेज आवाज से ही ऐसा होता हो। इस परेशानी में रोगी को खाना खाते समय आने वाली 'चप-चप' या पानी पीने की 'गट-गट' की आवाज से भी चिढ़ होती है। बर्तन गिरने, बढ़ई या मिस्त्री की ठक-ठक, जमीन पर कुछ रगड़ने और ट्रैफिक की आवाज भी परेशान करती है। ऐसे होती है बेचैनी -ट्रिगर अर्थात् जिस आवाज से समस्या होती है, उसे सुनते ही व्यक्ति काफी अलग तरह का व्यवहार करता है। उसकी सांसें तेज हो जाती हैं, चेहरा गुस्से से लाल हो जाता है
दांतों में इन तीन जगह पर लगते हैं कीड़े, एेसे करें इलाज

दांतों में इन तीन जगह पर लगते हैं कीड़े, एेसे करें इलाज

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दांतों में कीड़े लगने की समस्या तब होती है जब जड़ों में लंबे समय तक खाने के अवशेष जमा रहते हैं। ये कीड़े दो दांतों के बीच, मसूड़ों के पास और उनकी जड़ों में लगते हैं। इस समस्या को दूर करने के लिए होम्योपैथी में कारगर दवाएं उपलब्ध हैं। दांत की जड़ों में कीड़ा लगने पर होम्योपैथी दवा थूजा 30 पोटेंसी में दिन में 3 बार दी जाती है।दो दांतों के बीच या किनारों में कीड़े लगना, दांत दर्द और गैप का कारण बन सकता है। इसके लिए स्टेफिसेग्रिया दवा 30 पोटेंसी में दिन में 3 बार लेनी होती है।मसूड़ों के किनारों में कीड़े लगने पर थूजा व सिफीलिनम 30 पोटेंसी में दिन में 3 बार देते हैं। कुल्ला करना जरूरी -खाना खाने के बाद दांतों के बीच प्लाक 16 घंटे में बनता है इसलिए 12 घंटे के अंतराल में ब्रश कर लें। कुछ भी खाने के बाद कुल्ला करना न भूलें। यहां बताई गई दवाओं के प्रयोग से 5 मिनट पहले और बाद में कुछ न खाएं। Patrik
कब्ज के लिए फायदेमंद है इस तरह की ‘रोटी’

कब्ज के लिए फायदेमंद है इस तरह की ‘रोटी’

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जिन लोगों को कब्ज की समस्या रहती है, उन्हें गेहूं की चोकर युक्त रोटी खानी चाहिए। चोकर की रोटी पानी ज्यादा सोखती है और पेट में मल को सूखने नहीं देती। दरअसल गेहूं के चोकर में अघुलनशील फाइबर होता है, जिसे सैल्यूलोज कहते हैं। इसमें कैल्शियम, सिलीनियम, मैगनीशियम, पोटेशियम, फॉस्फोरस जैसे खनिजों के साथ-साथ विटामिन ई और बी कॉम्प्लेक्स भी पाए जाते हैं। चोकर आंतों को सुरक्षित रखने के साथ-साथ कैंसर से भी रक्षा करता है। यह अमाशय के घाव को ठीककर टीबी से भी रक्षा करता है। चोकर हृदय रोग से बचाने के साथ-साथ कोलेस्ट्रोल की समस्या नहीं होने देता। नहाने के पानी में आधा कटोरी चोकर मिलाकर स्नान करने से चर्मरोग में भी राहत मिलती है। ऐसे करें प्रयोग - गेहूं के एक किलो आटे में 100 ग्राम चोकर मिला लें और इस आटे की रोटी बनाकर खाएं। इससे खाना न पचने की समस्या दूर होगी और आपको कब्ज से छुटकारा मिलेगा। 5 कप पानी में 25
वजन घटाने के लिए जानें ‘GI’ के बारे में

वजन घटाने के लिए जानें ‘GI’ के बारे में

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मोटापे की समस्या को लेकर आजकल हर उम्र का इंसान परेशान है और इसे नियंत्रित करने के लिए न्यूट्रिशनिस्ट ग्लाइसेमिक इंडेक्स (जी आई ) कम करने पर जोर दे रहे हैं। ये जानना जरूरी है कि जी आई होता क्या है? हमारे भोजन में कार्बोहाइड्रेट्स होते हैं। कार्बोहाइड्रेट शरीर को ऊर्जा देने का सबसे बढ़िया स्रोत है। ये दिमाग, मांसपेशियों और दूसरे जरूरी अंगों के लिए बहुत फायदेमंद है। जब खाना पाचनतंत्र में जाता है तो कार्बोहाइड्रेट शुगर में टूट जाता है और रक्त में शर्करा का स्तर बढ़ जाता है। ये गतिविधियां कितनी तेजी से होती हैं, इसकी माप जी आई के माध्यम से की जाती है। जीआई वाला खाना - अगर कार्बाेहाइड्रेट युक्त खाना बहुत जल्दी टूटकर ग्लूकोज बन जाए और तेजी से रक्त में मिल जाए तो वह ज्यादा जीआई वाला खाना है। वहीं, अगर खाना धीरे-धीरे टूटकर ग्लूकोज में परिवर्तित होता है और धीमी गति से रक्त में मिलता है तो वह कम जीआई
व्यायाम करने से दूर होगी भूलने की बीमारी, जानें कैसे

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अगर आप अक्सर चीजें रखकर भूल जाते हैं या कोई बात याद नहीं रहती तो हो सकता है कि आपमें भूलने की बीमारी के लक्षण दिखने लगे हों लेकिन नियमित व्यायाम करके या घर के रोजाना के काम करके स्मरण शक्ति बरकरार... Live Hindustan Rss feed
शिशुओं की सही देखभाल ही जानलेवा संक्रमणों से बचाव : डब्लूएचओ स्टडी

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नवजात शिशुओं को जल्द से जल्द प्रारंभिक अनिवार्य नवजात देखभाल (ईईएनसी) मुहैया कराकर दो तिहाई जानलेवा संक्रमणों से उनकी रक्षा की जा सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अध्ययन में यह जानकारी दी गई... Live Hindustan Rss feed
बिजी शेड्यूल में अपनाएं ये टिप्स, मिलेंगे अनेक स्वास्थ्य लाभ

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डेस्क जॉब या समय की कमी के चलते लोगों को व्यायाम करने का समय नहीं मिलता और अधिकतर समय बैठे हुए बिताते हैं। लेकिन इसमें से अगर 30 मिनट भी शारीरिक गतिविधि कर ली जाए तो आपको अनेक स्वास्थ्य फायदे प्राप्त... Live Hindustan Rss feed