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health tips: सेहत से जुड़े सवाल-जवाब

health tips: सेहत से जुड़े सवाल-जवाब

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मुझे पिछले चार सालों से चेहरे पर मुहांसे की समस्या है। इनसे कैसे राहत पाई जा सकती है?मनीष, सीकर आमतौर पर मुहांसे Acne युवावस्था यानी 14-15 साल की उम्र से शुरू होकर 25 साल तक निकलते हैं। इसका मुख्य कारण त्वचा का तैलीय होना है। ऐसे में इन तैलीय रोमछिद्रों में पी-एक्ने नामक किटाणु उत्पन्न होने लगते हैं। जिससे रोमछिद्र लाल पिंपल, ब्लैकहैड या कई बार गांठ के रूप में उभरता है। एक्सरसाइज के दौरान ज्यादा प्रोटीन डाइट Protein diet के साथ सामान्य से ज्यादा दूध पीना या किसी प्रकार की दवाएं लेने से भी मुहांसे निकलते हैं। तली-भुनी चीजों से जितना हो सके परहेज करें। डॉक्टर से इलाज लें। मेरे जननांग के आसपास पिछले एक माह से फंगल इंफेक्शन हुआ है। मुझे क्या करना चाहिए? एक दर्शकबिना विशेषज्ञ की सलाह के कोई भी क्रीम Cream या ट्यूब Tube प्रयोग में लेने से समस्या में कुछ देर के लिए तो आराम मिलता है लेकिन राहत नही
अगर जल्दी ठीक नहीं हो रही खांसी तो हो सकती है फेफड़ों के कैंसर की आशंका

अगर जल्दी ठीक नहीं हो रही खांसी तो हो सकती है फेफड़ों के कैंसर की आशंका

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फेफड़ों का कैंसर क्या है? भारत में कौन ज्यादा प्रभावित ? फेफड़ों के कैंसर की वजह एक या दोनों फेफड़ों में कोशिकाओं की अनियंत्रित बढ़ोतरी है जो गांठ का रूप ले लेती हैं। इलाज के अभाव में ये गाठें तेजी से विभाजित हो जाती हैं जिससे सांस लेने में तकलीफ होने लगती है। यह आमतौर पर होने वाला कैंसर है। फेफड़ों का कैंसर भारत में पुरुषों को ज्यादा होता है। इस रोग के लक्षण क्या हैं ?अधिकांश मामलों में शुरुआती स्तर पर खास लक्षण नहीं दिखते। लेकिन जल्दी ठीक न होने वाली खांसी आम है। इसके साथ खून या बलगम आना, गहरी सांस लेने पर सीने में दर्द जो खांसने या हंसने से बढ़ जाए, आवाज में घरघराहट, वजन और भूख कम होना, सांस फूलना या ब्रॉन्क्राइटिस व निमोनिया जैसे संक्रमण का लंबी अवधि तक बने रहना या बार-बार होना। किन कारणों से बढ़ता है रोग का खतरा ?किसी भी रूप में तंबाकू लेना नुकसानदायक है। धूम्रपान फेफड़ों के कैंसर की
न करें दांतों की अनदेखी, हो सकते हैं गंभीर रोग

न करें दांतों की अनदेखी, हो सकते हैं गंभीर रोग

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कई बार हम दांत दर्द को मामूली बीमारी मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन बाद में यही अन्य रोग जैसे पायरिया, कैविटी, मसूड़ों में दर्द के जरिए किसी बड़े रोग के रूप में सामने आता है। इसलिए दांतदर्द को कभी भी हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। दर्द नजरअंदाज न करें-दांतों की सफाई बाहरी व अंदरूनी दोनों रूप में होनी चाहिए। कई बार संक्रमण से दर्द लंबे समय तक रहता है। इसमें दर्दनिवारक व एंटीबायोटिक दवाएं असरहीन हो जाती हैं। हाइजीन को ध्यान में रखते हुए दांतदर्द को मामूली न समझें। यह अंदर ही अंदर किसी बीमारी का रूप ले सकता है। दो बार ब्रश की आदत-दांत संबंधी व मसूड़ों का आम रोग है पायरिया। यह दांतों के प्रति लापरवाही से होता है। ब्रश करते समय मसूड़ों से खून आना लक्षण है। इसमें दांतों के आसपास की मांसपेशियां संक्रमित हो जाती हैं। जिनमें बैक्टीरिया की संख्या बढ़ने से बदबू आने लगती है।   सफाई का दें पूर
abs workout: एब्स बनाने के लिए करें ये खास वर्कआउट

abs workout: एब्स बनाने के लिए करें ये खास वर्कआउट

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क्रंचेस: यह वर्कआउट अपर एब्स के लिए खास माना जाता है। इसे करने के लिए सबसे पहले पीठ के बल लेट जाएं। फिर घुटनों को मोड़ें और तलवों को जमीन पर लगाएं। अब दोनों हाथों को घुटनों की ओर लाकर सिर के पीछे की ओर ले जाएं। पीठ को ऊपर की ओर उठाएं। ऐसा 10-15 बार करें। इसके 2-3 सेट शरीर की क्षमतानुसार कर सकते हैं। धीरे-धीरे इसके सेट्स बढ़ाएं। इसे करने के बाद स्ट्रेचिंग जरूर करें। अगर शरीर के ऊपरी भाग में कोई इंजरी हैं तो एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें। लेग-रेज: यह वर्कआउट लोअर एब्स के लिए किया जाता है। इसे करने के लिए कमर के बल सीधे लेट जाएं। हाथों को शरीर के बगल में सटा कर रखें। अब पैरों को शरीर के 90 डिग्री एंगल पर ऊपर उठाएं। इस अवस्था में 30-40 सेकंड तक रुके रहें। एक समय में इसके दो से तीन सेट कर सकते हैं। ध्यान रखें कि इसे ट्रेनर की देखरेख में ही करें। इन बातों का रखें ध्यान वर्कआउट से पहले ट्रेनर की देखर
लंबे समय तक आए डकार तो हो जाएं सावधान, पेट में हो सकती है ये गंभीर समस्या

लंबे समय तक आए डकार तो हो जाएं सावधान, पेट में हो सकती है ये गंभीर समस्या

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शरीर में होने वाले किसी भी तरह के दर्द से आराम के लिए अक्सर जो लोग बिना डॉक्टरी सलाह के पेनकिलर लेते हैं उनमें ये दवाएं पेट में जाकर यहां के म्यूकस व लाइनिंग पर असर डालती हैं। जिससे पेट में जलन, भारीपन, गैस, अपच, पेट के ऊपरी भाग में सूजन व दर्द, कुछ भी खाते ही पेट भरने, सीने में जलन जैसी तकलीफें होती हैं। इसे डिसपैप्सिया कहते हैं। आंतों की कार्यशीलता कम होने से ऐसा होता है जिससे भोजन करते ही वह मुंह में आने लगता है। यह स्थिति एसिड रिफ्लक्स की है। म्यूकस में खराबी एक वजह -पेट में अल्सर, लंबे समय से चल रही अपच की दिक्कत से होता है जिसका सही इलाज न हुआ हो। पेट में हेलिकोबैक्टर पाइलोरी बैक्टीरिया का संक्रमण भी वजह है। इसमें पेट की म्यूकस मेम्ब्रेन में खराबी आने पर घाव हो जाता है। जल्दबाजी, तनाव, दूषित खानपान से पाचनतंत्र की कोशिकाओं को नुकसान होने और पेट में एसिड की मात्रा बढ़ने से अल्सर हो सक
जानें ब्रुगाडा सिंड्रोम के बारे में, इससे हृदय की कार्यक्षमता पर पड़ता है बुरा असर

जानें ब्रुगाडा सिंड्रोम के बारे में, इससे हृदय की कार्यक्षमता पर पड़ता है बुरा असर

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ब्रुगाडा सिंड्रोम दिल की एक गंभीर स्थिति है। इसमें अक्सर मरीज को बेहोशी छाने या दिल की धड़कनें असामान्य रूप से तेज होने की शिकायत होती है। ऐसा तब होता है जब हृदय की विद्युतीय गतिविधि बाधित होती है। यह सिंड्रोम आमतौर पर वंशानुगत होता है। हर किसी को इस कारण हृदय की मांसपेशी में एकसमान संकुचन महसूस नहीं होता। लेकिन जब यह होता है तो बहुत घातक हो सकता है। कारण-हृदय की हर मांसपेशी की कोशिका की सतह पर छोटे खुले-बंद छिद्र या आयन चैनल होते हैं। जो कैल्शियम और पोटेशियम परमाणु कोशिकाओं को अंदर व बाहर विद्युत चार्ज करने देते हैं। परमाणु का यह मार्ग हृदय की विद्युत गतिविधि को उत्पन्न करता है। यह विद्युत संकेत हृदय के चारों ओर फैलकर हृदय को रक्त की पंपिंग में मदद करता है। विद्युतीय तंरग में गड़बड़ी से दिक्कत होती है। लक्षण पहचानें -ब्रूगाडा सिंड्रोम में लक्षण 30-40की उम्र में शुरू होते हैं। लेकिन ये बचप
Reverse Baldness: अब एक छाेटी सी डिवाइस दूर करेगी अापका गंजापन

Reverse Baldness: अब एक छाेटी सी डिवाइस दूर करेगी अापका गंजापन

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Reverse Baldness: आप अगर बाल झड़ने ( Hair Fall ) की समस्या से परेशान हैं ताे आपके लिए एक अच्छी खबर है, वैज्ञानिकाें ने एक एेसा उपकरण तैयार किया है। जाे आपकाे गंजेपन से छुटकारा दिला सकता है।नेनाे जनरेटर ( Nano generators ) नाम के इस उपकरण काे किसी भी साधरण टाेपी के नीचे रखकर पहना जा ( New Wearable Device For Baldness ) सकता है। सबसे दिलचस्प बात ये है कि इसे काम करने के लिए किसी तरह की बाहरी ऊर्जा यानि बैटरी आदि जरूरी नहीं है, यह उपयाेकर्ता के शरीर की गतिविधियाें से बनने वाली ऊर्जा से अपना संचालन करता है। अमेरिका के विस्कॉन्सिन- मैडिसन विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जूडोंग वांग ने कहा, "मेरा मानना है कि यह बाल को फिर से उगाने के लिए बहुत ही व्यावहारिक समाधान है। हांलाकि ये तकनीक उन लाेग के लिए ज्यादा कारगर नहीं है, जाे लम्बे समय से गंजेपन का शिकार हैं " भेजता है इलेक्ट्रिक पल्सेजवांग ने कहा कि यह
World Alzheimer’s Day Special : घबराए नहीं, समाधान ढूंढें

World Alzheimer’s Day Special : घबराए नहीं, समाधान ढूंढें

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यदि आपकी उम्र 60-65 से ज्यादा है तो आपने भी याद्दाश्त में कमी या सोचने समझने की क्षमता में कमजोरी पाई होगी। ऐसे में आप दवाओं के बजाय प्राकृतिक तरीकों को अपनाएंगे तो इन परेशानियों में आपको सुधार मिलेगा। हर वर्ष 21 सितम्बर को वर्ल्ड अल्जाइमर डे मनाया जाता है। इस वर्ष की थीम लेट्स टॉक अबाउट डिमेंशिया रखी गई है। अल्जाइमर डिमेंशिया का एक रूप है जिसमें याद्दाश्त में कमी और सोचने-समझने की क्षमता पर गलत असर पड़ता है। समय रहते इसके प्रति सजग रहकर बीमारी से बचा जा सकता है। जरूरी नहीं कि समस्या होने के बाद उसका इलाज लिया जाए। बुढ़ापे में अल्जाइमर न करे परेशान इसके लिए अपनाएं आसान तरीके- सबसे जरूरी है कि तनाव न लें। सोने से पहले गुनगुने पानी में पैरों को १०-१५ मिनट के लिए डुबोकर बैठें। इससे ऊर्जा बरकरार रहती है। नाक में बादाम रोगन तेल, गाय का घी या षड्बिंदु तेल की १-२ बूंद डालकर लंबी गहरी सांस लें और
Expert interview: ब्रेन ट्यूमर हटाने में मददगार है ये सर्जरी

Expert interview: ब्रेन ट्यूमर हटाने में मददगार है ये सर्जरी

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क्या ब्रेन ट्यूमर Brain tumor के इलाज में साइबर नाइफ तकनीक कितनी कारगर है?साइबर नाइफ रेडियो सर्जरी सिस्टम को सर्जरी के विकल्प के रूप में प्रयोग करते हैं। यह भारत में पिछले 3-4 वर्षों से प्रयोग की जा रही है। खासकर दिमाग और स्पाइन के अलावा यह प्रोस्टेट, फेफड़े, लिवर आदि के कैंसर युक्त व कैंसर रहित ट्यूमर के प्रबंधन में दूसरे इलाज के साथ भी अहम भूमिका निभाता है। यह थैरेपी कैसे काम करती है?आधारभूत रूप से साइबर नाइफ रेडिएशन सर्जरी विकसित, नॉन-इनवेसिव रेडिएशन थैरेपी टूल हैै। इसमें रेडिएशन की हाई डोज किरणें सीधे टयूमर पर दी जाती हैं। जिसके लिए इमेज गाइडेंस सिस्टम का भी प्रयोग होता है। इसमें कोई खतरा व दर्द नहीं होता। इसकी सफलता दर क्या है?इस थैरेपी की सफलता दर अधिक है। हालांकि, जिन ट्यूमर का आकार लगभग 2-2.5 से.मी. होता है, उनके लिए खासकर उपयुक्त है। ब्रेन ट्यूमर के कुछ दुर्लभ मामले जैसे जिनमें ट्