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नाक बंद रहने की वजह नेजल ड्रॉप तो नहीं!

नाक बंद रहने की वजह नेजल ड्रॉप तो नहीं!

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नाक बंद रहने के कई कारण हो सकते हैं। कई लोग फौरन नाक को खोलने के लिए नेजल ड्रॉप्स का इस्तेमाल करते हैं। कई बार जरूरत होने पर विशेषज्ञ भी 7-8 दिन तक इसके प्रयोग की सलाह देते हैं। लेकिन अक्सर देखने में आता है कि मरीज इसके बाद भी बिना विशेषज्ञ की सलाह से इसका इस्तेमाल करते रहते हैं। लंबे समय तक इन ड्रॉप्स के प्रयोग से नाक बंद रहने लगती है। इस प्रकार हुए दुष्प्रभाव को राइनाइटिस मेडिकामेन्टोसा कहते हैं। तकलीफ बढ़ती है ऐसे इन ड्रॉप्स में ऑक्सीमेटाजोलीन या जाइलोमेटाजोलीन तत्त्व होते हैं जो शुरू में नाक के भीतर के ऊत्तकों की सूजन को कम करते हैं जिससे नाक तुरंत खुल जाती है और मरीज को आराम मिलता है। लेकिन लंबे समय तक इन ड्रॉप्स के इस्तेमाल से ऊत्तकों का लचीलापन कम हो जाता है और रक्त का प्रवाह बढऩे से नाक में स्थित टरबीनेट्स ऊत्तक आकार में बढऩे लगते हैं जिससे नाक बंद रहने लगती है। इस समस्या को रिबाउं
मोबाइल एप करेगा सेहतमंद खाना चुनने में मदद

मोबाइल एप करेगा सेहतमंद खाना चुनने में मदद

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वैज्ञानिकों ने एक ऐसे मोबाइल एप का विकास किया है जो स्वास्थ्यवर्धक भोज्य पदार्थ चुनने में आपकी मदद कर सकता है। फूडस्विच नामक यह एप ऑस्ट्रेलिया के जॉर्ज इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल हेल्थ और अमेरिका के... Live Hindustan Rss feed
बीमारियां जो बढ़ातीं एड़ी की परेशानी

बीमारियां जो बढ़ातीं एड़ी की परेशानी

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अक्सर हम पैरों में लगी हल्की-फुल्की चोट या दर्द को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। ऐसा करना कई बार गंभीर भी हो सकता है क्योंकि कुछ मामलों में पैरों का दर्द बढक़र घुटनों व कमर को भी प्रभावित कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि हड्डियों की परेशानियों में से २५-३० प्रतिशत समस्याएं केवल पैरों व एडिय़ों की होती हैं। आम तकलीफ पैर या एड़ी मेंं फे्रक्चर, दर्द, लिगामेंट इंजरी, पैरों की विकृति और फ्लैट फुट आदि। डायबिटीज, स्पोंडिलाइटिस, आर्थराइटिस, ओस्टियोपोरोसिस और पोलियो से पीडि़त मरीजों को पैर व एड़ी की समस्याएं अधिकहोती हैं।   चोट है बड़ी वजह पैरों और एडिय़ों की ज्यादातर समस्याएं चोट के कारण होती हंै। इन परेशानियों से जुड़े कुल मामलों में लगभग ५० प्रतिशत फे्रक्चर व लिगामेंट इंजरी के होते हैं। ५०त्न फे्रक्चर व लिगामेंट इंजरी के होते हैं। २५-३०त्न समस्याएं केवल पैरों व एडिय़ों की होती हैं। ड
जब निकलने वाले हों बच्चे के दांत तो रखें इन बातों का ख्याल

जब निकलने वाले हों बच्चे के दांत तो रखें इन बातों का ख्याल

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अगर आपके बच्चे के दांत निकल रहे हैं तो जरूरी है कि आप अलर्ट हो जाएं। ये दांत छह महीने से लेकर दो साल तक पूरी तरह से आ जाते हैं। इस समय उनके मसूड़े फूल जाते हैं और उनमें खुजली होती है जिससे वे अपना हाथ या कोई भी चीज मुंह में डालते हैं। ऐसे में परिवार वाले समझते हैं कि दांत निकलने की वजह से उसे दस्त लगे हैं जबकि ऐसा गंदे हाथ या दूषित वस्तु को मुंह में डालने से होता है। ऐसे में आप इन उपायों से अपने बच्चे की देखभाल कर सकते हैं। चीजें दूर रखें : माता-पिता बच्चे के आसपास रखी चीजों को व्यवस्थित रखें क्योंकि कई बार बच्चे किसी भी चीज को उठाकर खुद को या मसूड़ों को नुकसान पहुंचा लेते हैं। मसूड़े : ब्रेस्ट फीडिंग या बॉटल से दूध पिलाने के बाद एक अंगुली में साफ, मुलायम और गीला कपड़ा लपेटें और उसके मसूड़े पर हल्का सा रगड़ें। दिन में ऐसा एक बार करें। इससे उसके मुंह से किसी तरह की दुर्गंध नहीं आएगी। होम्यो
नीम यौगिक से स्तन कैंसर का इलाज संभव

नीम यौगिक से स्तन कैंसर का इलाज संभव

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हैदराबाद स्थित एनआईपीईआर के वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि नीम के पत्तों और फूलों से प्राप्त एक रासायनिक यौगिक निंबोलाइड स्तन कैंसर के इलाज में कुशलतापूर्वक काम कर सकता है। वैज्ञानिक चंद्रयाह गोडुगु... Live Hindustan Rss feed
अपनी आदतें बदलकर कैंसर को दें मात

अपनी आदतें बदलकर कैंसर को दें मात

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यदि कैंसर का शुरुआती स्टेज में ही पता चल जाए तो इसका उपचार संभव है। आइए जानते हैं कैंसर के प्रमुख लक्षणों और उपचार के बारे में। क्या है कैंसर?हमारा शरीर कोशिकाओं से बना है। कई बार ये कोशिकाएं अनियमित रूप से बढऩे व फैलने लगती हैं जिससे उस अंग में गांठ या ट्यूमर बनने लगता है जिसे कैंसर कहते हैं। प्रमुख लक्षणगांठ बनना, असामान्य रक्त स्राव होना, लंबे समय से खांसी, किसी मस्से के रंग व आकार में बदलाव या उसमें खून आना, घाव का ठीक न होना, वजन कम होना और मल-मूत्र की आदतों में बदलाव होने पर कैंसर की आशंका बढ़ जाती है। प्रभावित लोगभारत में पुरुष सबसे ज्यादा फेफड़े, मुंह, गले, आंत व आमाशय के कैंसर से प्रभावित होते हैं। महिलाएं बच्चेदानी के मुंह का कैंसर, ब्रेस्ट, गॉल ब्लैडर व भोजननली के कैंसर से ग्रसित होती हैं। नींद पूरी लेंये मरीज इलाज के दौरान और उसके बाद भी थकान महसूस करते हैं इसलिए उन्हें पर्याप्
हैल्दी रहने के लिए बनें इमोशनली स्ट्रॉन्ग

हैल्दी रहने के लिए बनें इमोशनली स्ट्रॉन्ग

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यदि आप इमोशनली फिट नहीं हैं तो पूर्ण रूप से स्वस्थ नहीं माने जाएंगे। शोध बताते हैं कि इंसान को ज्यादातर बीमारियां शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक गड़बड़ी से होती हैं। अगर आप रोजमर्रा के जीवन में कुछ आदतों को अपना लेंगे तो इमोशनली काफी मजबूत बन सकते हैं। आत्मसम्मान का महत्वआपको खुद का और दूसरों का सम्मान करना चाहिए। अगर आप खुद को कमजोर और सताया हुआ इंसान समझते हैं तो आप डिप्रेशन के शिकार हो सकते हैं। ऐसे दोस्त बनाएं जो आपकी तरक्की में मदद करें और आत्मसम्मान को बढ़ाने में मदद करें। बहस से बचेंबहस के दौरान व्यक्ति खुद को समझदार साबित करने की कोशिश करता है और भूल जाता है कि इससे पछतावे के सिवाय कुछ हासिल नहीं होता। जिस व्यक्ति में बहस करने की आदत होती है उसका दिमाग शांत नहीं रहता। बहस से बचने के लिए जरूरी है कि आप पूरी बात सुनें और शब्दों पर काबू रखें। खूबियों पर करें गौरखुद को पॉजिटिव इंसान बनाएं।
महिलाएं जो फिटनेस के बूते बनीं चैंपियन

महिलाएं जो फिटनेस के बूते बनीं चैंपियन

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अपनी फिटनेस व पैशन की ताकत से राष्ट्रीय स्तर पर अलग पहचान बनाने वाली महिलाएं अपने-अपने क्षेत्र में पूरी लगन व अनुशासन के साथ सक्रिय हैं। जानते हैं कुछ चैंपियंस की सेहत को दमखम देने वाली बातों के बारे में- कुश्ती में शाकाहार की ताकत भारत की पहली महिला सूमो पहलवान मुंबई की हेतल ने छह साल की उम्र से जूडो की प्रेक्टिस शुरू कर दी थी। अब वे एक प्रोफेशनल कुश्ती चैंपियन हैं। विश्व स्तरीय सूमो प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व कर वर्ष २००९ में ताइवान में हुई वल्र्ड सूमो रेसलिंग चैंपियनशिप में महिला मिडलवेट वर्ग (८० किलो) में पांचवा स्थान हासिल किया। एक्सरसाइज टाइम : मांसपेशियों की मजबूती के लिए एक्सरसाइज व खानपान का खयाल रखती हैं। रोजाना चार घंटे कार्डियो और स्नैप व रिस्ट टाईअप आदि रेसलिंग तकनीकों से दिन की शुरुआत करती हैं। स्कूल में बतौर जूडो टीचर ट्रेनिंग देती हैं। फिर शाम को इन दोनों (सुबह की
नशे की लत से निपटने में मदद करेगी नई थेरेपी

नशे की लत से निपटने में मदद करेगी नई थेरेपी

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शोधकतार्ओं ने एक थेरेपी विकसित की है, जो मादक पदाथोर्ं के सेवन से दिमाग को होने वाले रासायनिक असंतुलन को दूर करने में मदद कर सकती है और भविष्य में मादक पदार्थोंं के आदी लोगों को ठीक करने व इसके... Live Hindustan Rss feed
ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में मददगार हो सकता है नीम

ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में मददगार हो सकता है नीम

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हैदराबाद स्थित राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (एनआईपीईआर) के वैज्ञानिकों ने यह पता लगाने का दावा किया है कि नीम की पत्तियों और फूल से प्राप्त होने वाले रासायनिक यौगिक निमबोलिड स्तन कैंसर... Live Hindustan Rss feed