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Health Special: कल सुबह से चाय की जगह लीजिए इसकी चुस्की, 50 की उम्र में मिलेगी 20 की चुस्ती

Health Special: कल सुबह से चाय की जगह लीजिए इसकी चुस्की, 50 की उम्र में मिलेगी 20 की चुस्ती

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अच्छी सेहत की चाह हर किसी को होती है, लेकिन आजकल की भाग दौड भरी जिंदगी सेहत को मेंटेन रख पाना एक मुश्किल टाॅस्क से कम नहीं है। अाैर जब उम्र 40 के पार हो चुकी हो तो सेहत खराब रहने के चांस ज्यादा बढ जाते हैं। आज हम आपको बताने जा रहे हैं एक खास पेय के बारे में जिसकी एक - एक चुस्की आपको 50 की उम्र में भी 20 की उम्र की चुस्ती देगी। आज हम आपको बताने जा रहे हैं अश्वगंधा क्वाथ के बारे में। अश्वगंधा क्वाथ एक सर्वोत्तम टॉनिक है। यह शक्ति वर्द्धक है, साथ−ही−साथ सभी प्रकार की शारीरिक−मानसिक कमजोरियों को दूर कर आपको को हमेशा तरोताजा बनाए रखता है। अश्वगंधा क्वाथ के फायदे अश्वगंधा क्वाथ का सेवन हर उम्र के लाेगाें काे शारीरिक व मानसिक लाभ पहुंचाता हैं। इसके नियमित सेवन से मधुमेह, क्षय, गठिया, दमा, स्वेत प्रदर समेत सभी शारीरिक व मानसिक कमजाेरी दूर हाेती हैं। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ता है औ
भारत में कई डॉक्टर टीबी के लक्षणों को पहचान नहीं पाते

भारत में कई डॉक्टर टीबी के लक्षणों को पहचान नहीं पाते

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एक नए अध्ययन में पता चला है कि भारत में निजी क्षेत्र के अनेक डॉक्टर टीबी के लक्षणों की पहचान नहीं पाते जिससे मरीजों को उचित उपचार नहीं मिल पाता। टीबी हवा के जरिए फैलने वाला संक्रमण है जो भारत के... Live Hindustan Rss feed
New Trend:: जानलेवा है ब्रॉड बट सर्जरी, सोचें-समझे, फिर लें फैसला

New Trend:: जानलेवा है ब्रॉड बट सर्जरी, सोचें-समझे, फिर लें फैसला

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इसमें कोई दोराय नहीं कि महिलाओं की कर्वी फिगर हर किसी को आकर्षित करता है। ग्लैमर वल्र्ड में अभिनेत्रयां व मॉडल्स अपने आकर्षक फिगर को भरपूर कैश कराती हैं। इनके प्रति इनके फैंस की दिवानगी की मुख्य वजह इनका कर्वी फिगर ही है। इसी का असर है कि हॉलीवुड से लेकर बॉलीवुड तक की अभिनेत्रियां सोशल नेटवर्किंग साइट पर अपने कर्वी बॉडी को शो ऑफ करने से चूकती नहीं हंै। इनकी इन तस्वीरों को देखकर महिलाएं प्रेरित होती हैं। इस मामले में चाहे किम कार्दाशियां हों या काइली जेनर या कार्डी बी या फिर सनी लियोनी हों या मलाइका अरोड़ा हों या दिशा पाटनी हों...ये सबकी सब सीलेब्रिटीज गाहे-बगाहे सोशल मीडिया पर अपनी आकर्षक तस्वीरों में अपने बट को शो ऑफ करती रहती हैं। इनकी ये तस्‍वीरें उनके फैन्‍स को बहुत उकसाती हैं, प्रेरित करती हैं। कर्वी फिगर में ब्रॉट बट फैशन में है और मानो हर महिला का ब्रॉड बट पाने का पैशन सवार
Weight loss: वजन कम करने में मददगार हैं सीताफल के बीज, जानें इसके फायदे

Weight loss: वजन कम करने में मददगार हैं सीताफल के बीज, जानें इसके फायदे

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वजन कम करने के लिए ऐसे खाने की चीजें जरूरी हैं जो वजन तो कम करे हीं साथ ही उनमें प्रोटीन और फाइबर भी भरपूर मात्रा में हो। एक स्टडी की मानें तो सब्जी, फल, नट्स, अनाज और योगर्ट वजन कम करने में मददगार... Live Hindustan Rss feed
तेजी से फैल रहा मलेरिया, कैसे पहचाने इसके लक्षण, जानें कारण और घरेलू उपचार

तेजी से फैल रहा मलेरिया, कैसे पहचाने इसके लक्षण, जानें कारण और घरेलू उपचार

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देशभर में मलेरिया का प्रकोप जारी है। बारिश के बाद तेज धूप। नाली-नालों में भरा पानी, कचरा...तेज धूप की वजह सडऩ। मच्छरों का पनपना। ये मच्छर ही हैं मलेरिया की असली वजह। मच्छरों से खुद बचाएं। घरों के जाली दरवाजे बंद रखें। मच्छर मारने वाली दवाइयों का छिड़काव करें। घर के आस-पास सफाई रखें, ताकि मच्छर न पनप पाएं। खान-पान का ध्यान रखें। ज्यादा से ज्यादा पानी पीएं। जागरूकता ही मलेरिया का एकमात्र उपाय है। इन सबके बावजूद यदि मलेरिया के लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टरी सलाह लें। उत्तर प्रदेश में मलेरिया का प्रकोप सबसे ज्यादा देखने में आ रहा है। अस्पतालों में लगातार मलेरिया के मरीजों की संख्या में इजाफा होता जा रहा है। राजधानी लखनऊ के साथ ही बरेली, बदायूं, शाहजहांपुर, पीलीभीत, खीरी, बहराइच और सीतापुर में तेजी से फैल रहे मलेरिया एवं बुखार को लेकर स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने कड़े दिशा निर्देश ज
गांवों की स्वास्थ्य सुविधा इससे होगी बेहतर

गांवों की स्वास्थ्य सुविधा इससे होगी बेहतर

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तमाम प्रयासों और दावों के बावजूद देश के ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर नहीं हो सकी हैं। डॉक्टर, नर्स सहित आधारभूत संसाधन की कमी का रोना जारी है। ऐसे में अपने स्वास्थ्य की डोर अपने हाथों में थामने की मुहिम लेकर अपने -अपने क्षेत्र में मुकाम हासिल कर चुके कुछ युवा सामने आए हैं। क्लिनीवेंटेज हेल्थ केयर स्टार्टअप और इसके सूत्रधार नीलेश जैन, डॉ. अभय चोपड़ा और दिनेश सामुद्र का दावा है कि मौजूदा संसाधन में ही देश के ग्रामीण क्षेत्र की स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बना देंगे। यह एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिससे न केवल डॉक्टर, बल्कि मेडिकल इंश्योरेंस कंपनियों की टीपीए, सर्विस प्रोवाइडर और मरीज भी जुड़े हैं। भारत और यूएस समेत छह देशों में यह काम कर रहा है। क्लिनीवेंटेज का ‘माई लाइफ’ नाम का ऐप भी है। नीलेश कहते हैं, महाराष्ट्र के सुदूर ग्रामीण इलाकों में मौजूदा संसाधनों से ही आशा वर
गर्मी में तंदुरुस्ती की रक्षा करता है प्याज

गर्मी में तंदुरुस्ती की रक्षा करता है प्याज

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गर्मी के दिनों में चिलचिलाती धूप से शरीर में कई प्रकार की समस्याएं होने लगती हैं। ऐसे में प्याज का प्रयोग लू लगने और शरीर में पानी की कमी होने से बचाता है। माना जाता है कि प्याज की उत्पत्ति ईरान, पश्चिमी पाकिस्तान और उत्तर के पहाड़ी क्षेत्रों में हुई थी। इतिहास से पता चलता है कि पिरामिडों के निर्माता भी प्याज खाते थे। यह प्राचीन मिस्र्र में प्रिय भोजन सामग्री था। वहां के मकबरों पर भी इसे उकेरा गया है। प्याज का जिक्र बाइबल और कुरान में भी आया है। मेडिसिनल वैल्यू प्याज में केलिसिन और रायबोफ्लेविन (विटामिन-बी) पर्याप्त मात्रा में होते हैं। इसमें 11 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट होता है व एलिल-प्रोपाइल-डाय-सल्फाइड के कारण इसमें गंध आती है। प्याज में अमीनो एसिड सल्फॉक्साइड होता है जो इसमें सल्फीनिक एसिड को बनाता है। इसी वजह से इसे काटते समय आंसू आते हैं। * नेचुरल एंटीबायोटिक* इम्यून सिस्टम को मजबूत बन
बेवजह न बनाएं मिर्च-मसालों से दूरी

बेवजह न बनाएं मिर्च-मसालों से दूरी

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तीखा खाएंगे तो दीर्घायु पाएंगे। जी हां, चीन में हुए एक शोध के अनुसार खाने में मिर्च-मसालों को शामिल कर लंबा जीवन पाया जा सकता है। इसके लिए विशेषज्ञों ने 30-79 साल के पांच लाख चीनी लोगों पर अध्ययन किया। उन्होंने पाया कि मिर्च-मसाले वाला भोजन शरीर में वसा को कम करने का काम करता है जिससे मोटापा, डायबिटीज व हार्ट अटैक के खतरे में कमी आती है। जानते हैं इस पर एलोपैथिक व आयुर्वेदिक विशेषज्ञ की राय। पित्त होता है नियंत्रितवैद्य भानु प्रकाश शर्मा के अनुसार खाने में मिर्च का प्रयोग शरीर में गर्मी बढ़ाने व पित्त को संतुलित करने के लिए किया जाता है। लेकिन इसकी मात्रा व्यक्ति की रोज की आदत व शारीरिक प्रकृति पर निर्भर करती है। जो लोग रोजाना मिर्च खाते हंै, उन्हें यह जल्दी नुकसान नहीं करती। लेकिन जो लोग इसे नियमित रूप से खाने के आदी नहीं होते उनके लिए ये पेट में अल्सर, दस्त, बवासीर, लिवर में खराबी व आंतो
डिप्रेशन से लडऩे का ‘ईजी’ तरीका

डिप्रेशन से लडऩे का ‘ईजी’ तरीका

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ये कोई फिल्मी सीन नहीं था बल्कि रीयल लाइफ स्टोरी है। वे रोईं, घबराईं भी लेकिन हार नहीं मानी। एक साल तक बुरे समय से जूझीं और फिर बे-हिचक सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि- हां, मैं डिप्रेशन की शिकार थी। लेकिन सही इलाज व सकारात्मक नजरिए की बदौलत अब मैं पहले वाली दीपिका हूं। किसी को यकीन ही नहीं हुआ कि हंसी-मजाक से भरपूर फिल्म ‘हैप्पी न्यू ईयर’ की शूटिंग के दौरान उन्होंने तनावग्रस्त होते हुए भी इतनी उम्दा एक्टिंग की। ये सिर्फ दीपिका ही नहीं डिप्रेशन के अधिकतर मरीजों के साथ होता है। उनके चेहरे से यकायक पता नहीं चलता कि उनके भीतर कितना कुछ टूट रहा है। जानते हैं कि दीपिका किस तरह इन सबसे लड़ीं और उबरीं ताकि तनाव झेल रहे दूसरे मरीजों को भी प्रेरणा और नई ऊर्जा मिल सके। दीपिका की बीमारी बात पिछले साल 15 फरवरी की है। मैं सुबह उठी तो काफी कमजोर महसूस कर रही थी। साल 2013 की तरक्की, अवॉर्ड औ
ताकि दूसरे देख सकें आपकी आंखों से

ताकि दूसरे देख सकें आपकी आंखों से

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देशभर में ऐसे कई लोग हैं जो आंख में चोट, फूले व धब्बे की समस्या की वजह से अंधता के शिकार हैं। इन परेशानियों के उपचार में नेत्रदान एक असरदार उपाय साबित हो सकता है। नेत्रदान के लिए लोग जागरूक होकर कई लोगों की जिंदगी में रोशनी ला सकते हैं। आइए जानते हैं इसके बारे में। कॉर्निया प्रत्यारोपण क्या है? ने त्रदान के लिए पहले पूरी आंख को निकाला जाता था लेकिन अब केवल आंख के पारदर्शी हिस्से यानी कॉर्निया को ही निकालते हैं। इस प्रत्यारोपण को किरेटोप्लास्टी कहते हैं जो वास्तव में कॉर्निया (पारदर्शी पुतली) का प्रत्यारोपण है। इस सर्जरी में दान की हुई आंख से पारदर्शक कॉर्निया को निकालकर खास किस्म के सॉल्यूशन में सुरक्षित रखकर आई बैंक ले जाते हैं। जहां कॉर्निया की टेस्टिंग कर उसकी गुणवत्ता का पता लगाकर कोरिसिनोल सॉल्यूशन में दो हफ्ते तक सुरक्षित रखा जा सकता है। प्रत्यारोपण के दौरान मरीज के खराब कॉर्निया को