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कमजोर इम्यूनिटी वाले बदलते मौसम में रहें सतर्क

कमजोर इम्यूनिटी वाले बदलते मौसम में रहें सतर्क

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मौसम में बदलाव सभी को सामान्य जुकाम-बुखार की गिरफ्त में ले लेता है। जिससे सिरदर्द, भूख न लगने, मांसपेशियों में दर्द, नाक बहने, बुखार, खांसी, गला बैठने जैसे दिक्कतें होती हैं। ये परेशानियां कुछ हफ्तों तक भी रह सकती हैं। क्याें हाेती है परेशानीशरीर का रोग प्रतिरोधी तंत्र बदलते मौसम के हिसाब से खुद को ढालने में थोड़ा समय लेता है। ऐसे में कमजोर इम्यूनिटी वाले अधिक प्रभावित होते हैं। इस कारण सबसे पहले गला खराब होता है जिसके बाद साइनस व नाक में रुकावट आना प्रमुख हैं। सर्दी-जुकाम से निपटने के लिए घरेलू उपाय अदरक की चाय या हल्दी मिला गुनगुना दूध पी सकते हैं। गुनगुना पानी पीने के अलावा इसमें शहद मिलाकर गरारे कर सकते हैं। अदरक-नमक या अदरक व तुलसी के पत्तों का मिश्रण फायदेमंद है। सर्दी-जुकाम संक्रामकपहले 24 घंटे मरीज में रोग की स्थिति संक्रामक होती है। छींकने या खांसने के दौरान फैलने वाले कीटाणु अन्य
इन आसनों को करने से हमेशा रहेंगे जवान, जानें इनके बारे में

इन आसनों को करने से हमेशा रहेंगे जवान, जानें इनके बारे में

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अधिक उम्र के लोगों को अक्सर जोड़ों में दर्द व अकड़न की समस्या होती है। ऐसा निष्क्रिय जीवनशैली से भी होता है। कुछ आसान योगासन व प्राणायाम से शरीर को लचीला व मजबूत बना सकते हैं। कटिचक्रासन - ऐसे करें: सीधे खड़े होकर पैरों के बीच डेढ़ फुट की दूरी बनाएं। कंधों की सीध में दोनों हाथों को सामानांतर फैलाएं। इसके बाद बाएं हाथ को दाएं हाथ के कंधे पर रखें और दाएं हाथ को पीछे से बाईं ओर ले जाकर शरीर से स्पर्श करें। सामान्य सांस लेते हुए मुंह घुमाकर बाएं कंधे के बराबर ले आएं। 10-15 सेकंड इस स्थिति में खड़े रहने के बाद दाईं ओर से भी इसे दोहराएं। इस क्रिया को दोनों हाथों से 5-5 बार कर सकते हैं। इस आसन को करते समय ध्यान रखें कि कमर से ऊपरी शरीर को पीछे की ओर घुमाते समय घुटने न मोड़ें। साथ ही पैरों को अपनी जगह से न हिलाएं।ध्यान रहे: जल्दबाजी में इस योगासन को न करेंवर्ना संतुलन बिगडऩे से चोट लग सकती है। चक्
cervical cancer: पीरियड बंद होने के बाद भी अगर हो दर्द तो हो सकता है ये गंभीर रोग

cervical cancer: पीरियड बंद होने के बाद भी अगर हो दर्द तो हो सकता है ये गंभीर रोग

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cervical cancer: भारत में सर्वाइकल यानी गर्भाशय के कैंसर के मामले बढ़े हैं जिसका कारण लोगों का इसके प्रति जागरूक न होना है। यदि समय रहते इसकी पहचान कर ली जाए तो इलाज संभव है। 10-40 साल की महिलाएं एचपीवी वैक्सीन लगवाकर इससे बच सकती हैं। एचपीवी वायरस है वजह - स्त्री रोग विशेषज्ञ व लैप्रोस्कोपिक सर्जन के अनुसार गर्भाशय में कोशिकाओं की अनियमित वृद्धि सर्वाइकल कैंसर है। गर्भाशय में ह्यूमन पेपीलोमा वायरस के कारण यह 40 या अधिक उम्र की महिलाओं में ज्यादा होता है। लक्षण - इस कैंसर की शुरुआती अवस्था को डिस्प्लेसिया कहते हैं जिसका इलाज संभव है। देरी होने पर यह पूरी तरह से कैंसर में बदलकर कार्सिनोमा कहलाता है। कुछ बदलावों से इसे पहचान सकते हैं जैसे पेट के निचले भाग व यूरिन करते समय तेज दर्द, पीरियड बंद होने के बाद भी दर्द, सफेद पानी निकलना, शारीरिक संबंध के बाद ब्लीडिंग व दर्द, भूख या वजन घटना आदि लक्
मैग्नेट थेरेपी से शरीर में होता है ऊर्जा का संतुलन

मैग्नेट थेरेपी से शरीर में होता है ऊर्जा का संतुलन

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अनियमित दिनचर्या, बढ़ता तनाव, खानपान में गड़़बड़ी और लंबे समय तक एक ही जगह गलत पॉश्चर में बैठना कई रोगों का कारण बनता है। इसमें विशेषकर कमर, कंधे और हाथ-पैरों का दर्द खास है। ऐसे में व्यक्ति के इन्हें नजरअंदाज करने या फिर अनियमित रूप से एंटीबायोटिक, दर्दनिवारक लेने से स्थिति ज्यादा बिगड़ जाती है। आयुर्वेद में सुजोक, चाइनीज एक्यूप्रेशर और रिफ्लैक्सोलॉजी तकनीकों के अलावा इन दिनों मैग्नेट थैरेपी को खासतौर पर प्रयोग किया जा रहा है। इसमें बिना दर्द व तकलीफ के चिकित्सा होती है। साथ ही इससे कोई दुष्प्रभाव भी नहीं होता। असर10 प्रतिशत रोगियों में इस चिकित्सा से रोग की गंभीरता कम हो जाती है। 12 फीसदी मामलों में मैग्नेट थैरेपी से सर्जरी की आशंका तक घट जाती है। जीभ की जांच जरूरीमैग्नेट थैरेपी में रोगी की जीभ देखकर इलाज का स्तर तय होता है। जीभ का आगे वाला हिस्सा हृदय, बायां हिस्सा लीवर, दायां भाग गॉलब्
Twins pregnancy: गर्भ में जुड़वां शिशु होने पर गर्भवती को होती हैं ये समस्याएं, रखें इन बातों का ध्यान

Twins pregnancy: गर्भ में जुड़वां शिशु होने पर गर्भवती को होती हैं ये समस्याएं, रखें इन बातों का ध्यान

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Twins Pregnancy: गर्भावस्था में पेट के निचले भाग व पीठ के आसपास दर्द होना सामान्य है लेकिन यदि गर्भस्थ शिशु जुड़वां हों तो यह दर्द सामान्य की तुलना में अधिक हो सकता है। ऐसे में महिला को डाइट से लेकर हर गतिविधि व सभी जरूरी जांचों के दौरान खास देखभाल बरतनी चाहिए। इन पर ध्यान दें -गर्भधारण से पहले, इसके दौरान और प्रसव के बाद, इन तीन स्थितियों में विशेषज्ञ चार खास बातों का ध्यान रखने की सलाह देते हैं। जैसे जरूरी जांचें, जटिलताओं- लक्षणों की जानकारी, डाइट व पूरा आराम। तिगुनी डाइट -महिला को तिगुनी डाइट लेनी होती है ताकि मां के शरीर के जरिए गर्भस्थ शिशु को पोषक तत्त्वों की पूर्ति होती रहे। डाइट में आयरन, प्रोटीन, फॉलिक एसिड, विटामिनयुक्त चीजें जैसे मौसमी फल, सब्जियां और दूध आदि लें। जरूरी जांचें -सोनोग्राफी से गर्भ में जुड़वां शिशु का पता चलने के आधार पर महिला की दिनचर्या तय होती है। इसमें आराम,
अखरोट खाएं तेज दिमाग आैर अच्छी सेहत पाएं

अखरोट खाएं तेज दिमाग आैर अच्छी सेहत पाएं

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सुपरफूड कहलाने वाला अखरोट न केवल दिमाग को मजबूत करता है बल्कि शारीरिक रूप से भी ताकत देता है। जानें अन्य फायदे: सेहतमंद दिल : खराब कोलेस्ट्रॉल को खत्म कर यह ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने और खून को गाढ़ा होने से रोकता है।ऐसे में यह दिल के रोगों का जोखिम घटाता है। तेज दिमाग : अखरोट खाने से दिमाग को ताकत मिलती है। इसमें मौजूद ओमेगा-3 फेटी एसिड दिमाग को स्वस्थ बनाए रखता है। इससे याददाश्त मजबूत होती है। बेहतर रक्तसंचार : अखरोट डायबिटीज रोगियों के अलावा एनीमिया से पीडि़त मरीजों के लिए भी अच्छा होता है। दो अखरोट रोजाना खाने से शुगर लेवल सही रहता है और रक्तसंचार बेहतर होता है। नियंत्रित वजन : विटामिन, फाइबर व मिनरल्स से युक्त अखरोट वजन घटाता है। रोज एक अखरोट खाने से अनिद्रा की शिकायत नहीं होती। कब्ज और पाचन : अखरोट फाइबर से भरपूर होता है, जो आपकी पाचन प्रणाली को दुरुस्त रखता है। पेट सही रखने और कब
पैरों में दर्दरहित सूजन के हो सकते हैं कई कारण, जानिए यहां

पैरों में दर्दरहित सूजन के हो सकते हैं कई कारण, जानिए यहां

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अक्सर पैरों के टखनों और इसके आसपास होने वाली दर्दरहित सूजन ज्यादातर 50 वर्ष या इससे अधिक उम्र वालों की समस्या मानी जाती है लेकिन ऐसा नहीं है। मेडिकली यह पेनलेस स्वैलिंग है जो किसी भी उम्र व वर्ग के लोगों को प्रभावित कर सकती है। ज्यादातर मामलों में पैरों के निचले हिस्से में अतिरिक्त तरल के भरने से ऐसी स्थिति बनती है। कई अन्य कारणों से भी इस दर्दरहित सूजन की स्थिति बनती हैं, जानें इसके बारे में- कारणलगातार बैठे रहनाफिजिकल एक्टिविटी या मूवमेंट रक्तसंचार दुरुस्त करता है खासकर पैरों के निचले हिस्से में। लेकिन लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहने से पैरों तक रक्तसंचार न होने से सूजन आती है। यात्रा करने वालों में ऐसा ज्यादा होता है।ध्यान रखें : एक ही स्थिति में लंबे समय तक बैठने से बचें। संभव हो तो बीच-बीच में 2-4 कदम चलें। गर्भावस्थाइस दौरान पैरों के टखनों में दर्दरहित सूजन देखने को मिलती है। जो कि ख
गर्मी के मौसम में ये घरेलू नुस्खे अपनाकर रहें फिट

गर्मी के मौसम में ये घरेलू नुस्खे अपनाकर रहें फिट

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बढ़ती उम्र, शारीरिक सक्रियता के कम होने के साथ कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता और मांसपेशियों की ताकत कम होने से बुजुर्गों में कई तरह के छोटे-मोटे रोगों की आशंका बढ़ती है। कुछ घरेलू नुस्खे अपना सकते हें।आइए जानें उनके बारे में :- दुरुस्त पेट गर्मियों में भोजन का पाचन सही से नहीं हो पाता। ऐसे में व्यक्ति को कब्ज, दस्त व बार-बार उल्टी की शिकायत होती है।इलाज के रूप में दालचीनी बेहतरीन विकल्प है। ये करें: आधा कप गुनगुने पानी में एक चौथाई चम्मच दालचीनी का चूर्ण मिलाकर पीएं। साथ ही भोजन में इसका प्रयोग करें। अधिक पसीना आना जरूरत से ज्यादा पसीना और इससे आने वाली बदबू दिनभर परेशान करती है। ये करें: नहाने से पहले सिरके की कुछ बूंदों से शरीर की मसाज कर सकते हैं। लू की समस्या तापमान के बढ़ने से अचानक शरीर में नमक और पानी की कमी हो जाती है। जिस कारण चक्कर, उल्टी और कमजोरी आने लगती है। इसके लिए तरल पदार्थ ज
ESIC के कर्मचारियों को अब पहले दिन से ही मिलेगी यह खास सुविधा

ESIC के कर्मचारियों को अब पहले दिन से ही मिलेगी यह खास सुविधा

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ईएसआईसी की सुविधा पाने वाले कर्मचारियों को अब सुपर स्पेशिलिटी अस्पतालों में इलाज के लिए छह माह का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। कर्मचारी व उनके आश्रित ईएसआईसी सदस्य बनने वाले दिन से ही सुपर स्पेशिलिटी... Live Hindustan Rss feed
Eye Care – आंखों की सेहत के लिए कभी भी अपनाएं ये टिप्स

Eye Care – आंखों की सेहत के लिए कभी भी अपनाएं ये टिप्स

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आंखों में तनाव, खिंचाव और थकान का कारण लगातार या लंबे समय तक काम करते रहना हो सकता है। इसके अलावा पर्याप्त नींद न लेने से भी आंखों में दर्द और असहजता महसूस होने लगती है। इसके लिए आंखों पर पानी के छींटें देने के अलावा कुछ क्रियाएं ऐसी हैं जिन्हें दिनभर में कभी भी किया जा सकता है। त्राटकऐसे करें: इस क्रिया में आंखों को किसी निश्चित बिंदु पर एकाग्र करना होता है। इसके लिए मोमबत्ती की लॉ, दीवार पर बना कोई विशेष बिंदु, क्रिस्टल बॉल आदि पर आंखों को कुछ देर टिकाए रखना जरूरी है। इसके अभ्यास की शुरुआत शरीर को तनावमुक्त और कमर को सीधा कर बैठकर व खड़े होकर करनी होती है। इसके बाद पलकों को झपकाए बिना विशेष बिंदु पर क्षमतानुसार देखते रहें। इसके बाद आंखों को कुछ समय के लिए बंद करें ताकि आंखें रिलैक्स हो सकें। कुछ समय इसका अभ्यास करते रहें। इससे एकाग्रक्षमता बढ़ती है। ध्यान रखें: नेत्र संबंधी यदि कोई सर्जर