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B Alert – धूम्रपान से आपके शरीर काे गिरफ्त में लेते हैं ये रसायन

B Alert – धूम्रपान से आपके शरीर काे गिरफ्त में लेते हैं ये रसायन

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निकोटियाना प्रजाति के पेड़ के पत्तों को सुखाकर बनाया जाने वाला तंबाकू खासतौर पर नशे के लिए प्रयोग किया जाता है। तंबाकू जब जलता है तो वह टार नामक एक विशिष्ट पदार्थ पैदा करता है जो धुएं के साथ फेफड़ों में जाता है। टार के प्रत्येक कण में नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, हाईड्रोजन कार्बन डाईऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड और कई उडऩशील व अर्ध उडऩशील कार्बनिक रसायन होते हैं। यह दांतों ही नहीं फेफड़ों पर भी असर छोड़ते हैं। फेफडों द्वारा अवशोषित टार वहां की कोशिकाओं के नष्ट होने का कारण बनता है। तंबाकू में 4000 से ज्यादा रसायन होते हैं जिनमें से 60 कैंसर का कारण बनते हैं। निकोटीन : यह लत लगाने वाला रसायन है जो काफी शक्तिशाली और तेजी से प्रतिक्रिया दिखाता है। सिगरेट की बुरी आदत और तलब इसी रसायन की वजह से लगती है। बेंजीन : इसमें कोयला व पेट्रोलियम जैसे ज्वलनशील पदार्थ होते हैं। यह सिगरेट को जले रहने में मदद करता है।
कोलेस्ट्रॉल और त्वचा संबंधी समस्याओं के लिए फायदेमंद है पिस्ता

कोलेस्ट्रॉल और त्वचा संबंधी समस्याओं के लिए फायदेमंद है पिस्ता

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पिस्ता इंसुलिन के लेवल और रक्त संचार को नियंत्रित करता है। ब्लड शुगर में बदलाव होने पर मुंहासे होते हैं जिसके लिए पिस्ता बेहद गुणकारी है। इसमें सेलेनियम तत्व प्रचुर मात्रा में होता है जो चमड़ी की जलन और दाग-धब्बों से बचाता है। पिस्ता में विटामिन-सी, ई होता है जो सूर्य की हानिकारक किरणों से बचाने में मददगार होता है।त्वचा की नमी बनाए रखने में यह उपयोगी होता है। पिस्ता में कारोटेनस अधिक मात्रा में होता है जो बॉडी को ऑक्सीडेटिव फ्री रेडिकल बदलाव होने से बचाता है।इसमें मौजूद फायटोस्ट्रॉल खाद्य पदार्थों से मिलने वाले कोलेस्ट्रॉल को घटाता है। यह ब्लड में बुरे कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को भी कम करता है।आंखों का भी दोस्त है पिस्ता। इसमें कारोटेनाइड्स होते हैं जो उम्र बढऩे से आंखों को होने वाली क्षति या मोतियाबिंद जैसे रोगों से बचाव करते हैं।पिस्ता में मौजूद विटामिन बी-6 इम्यून सिस्टम को स्वस्थ रखता है।
Baba Ramdev Yoga Tips : कमर दर्द करता है परेशान, तो इन 5 आसनों का करें नियमित अभ्यास और बेली फैट भी घटाएं ; देखें Video

Baba Ramdev Yoga Tips : कमर दर्द करता है परेशान, तो इन 5 आसनों का करें नियमित अभ्यास और बेली फैट भी घटाएं ; देखें Video

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मर्कट आसनमर्कट का अर्थ बंदर होता है, इसलिए इस आसन को बंदर आसन भी कहा जाता है। यह आसन करते समय शरीर का आकार बंदर जैसा हो जाता है। यह आसन कमर दर्द व पेट की चर्बी घटाने के लिए काफी लाभकारी होता है।... Live Hindustan Rss feed
नेचुरोपैथी से श्वास और अस्थमा में मिलेगा आराम, एेसे करें इलाज

नेचुरोपैथी से श्वास और अस्थमा में मिलेगा आराम, एेसे करें इलाज

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अस्थमा होने पर नेचुरोपैथी चिकित्सा में मरीज का तीन तरह से इलाज किया जाता है। जिसके लिए आहार चिकित्सा, शुद्धि क्रिया और नेचुरोपैथिक उपायों का सहारा लिया जाता है। कफ में मिलेगा आराम - सरसों या नीलगिरी का तेल छाती व पीठ पर लगा लें। अब हॉट वाटर बैग की सहायता से तीन-तीन मिनट छाती व पीठ की सिकाई करें।चेस्ट पैक : सूती कपड़े को गर्म पानी में भिगोकर निचोड़ लें। इसे छाती पर पूरी तरह लपेट लें और ऊपर से शॉल आदि डाल लें।प्याज व अदरक (दोनों 25 ग्राम) लेकर पेस्ट बना लें। इसे छाती व पीठ पर लेप की तरह लगा लें। इसके बाद चेस्ट पैक का प्रयोग करें।5-7 सफेदे के पत्तों को पानी में उबाल लें व इसकी भाप लें। ये सभी प्रयोग तीन-तीन मिनट के लिए करें। शुद्धि क्रियाएं - जलनेति और सूत्रनेति से अस्थमा का इलाज होता है जिसे विशेषज्ञ ही करवाते हैं। इसके अलावा कुंजल क्रिया से भी आराम मिलता है लेकिन जिन्हें ब्लड प्रेशर की समस्
हरा प्याज खाएं, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएं

हरा प्याज खाएं, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएं

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सब्जियाें का स्वाद बढ़ाने वाला आैर सलाद के ताैर पर खाया जाना वाला प्याज आैषधीय गुणाें से भी भरपूर हाेता है। पुराने समय से ही प्याज का प्रयाेग सब्जी बनाने के अलावा कर्इ तरह के राेग दूर करने के लिए किया जाता रहा है। आइए जानते हैं प्याज के फायदाें के बारे में :- मेडिसिनल वैल्यू प्याज में केलिसिन और रायबोफ्लेविन (विटामिन-बी) पर्याप्त मात्रा में होते हैं। इसमें 11 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट होता है व एलिल-प्रोपाइल-डाय-सल्फाइड के कारण इसमें गंध आती है। प्याज में अमीनो एसिड सल्फॉक्साइड होता है जो इसमें सल्फीनिक एसिड को बनाता है। इसी वजह से इसे काटते समय आंसू आते हैं। न्यूट्रीशनल वैल्यू - सल्फ्यूरिक कंपाउंड, फॉस्फोरस, सल्फर और मैगनीज, विटामिन। फायदे- नेचुरल एंटीबायोटिक।- इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है।- गंभीर बीमारियों के संक्रमण से बचाता है।- कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित रखता है।- ब्लड प्रेशर को
तनाव की अधिकता से लड़कियों को हो जाती है ये बीमारी

तनाव की अधिकता से लड़कियों को हो जाती है ये बीमारी

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आज के दौर में इंसान, मशीन की तरह होता जा रहा है। गलत खानपान के कारण जहां उसे कई शारीरिक रोगों ने जकड़ लिया है, वहीं भागदौड़ वाली जीवनशैली की वजह से अपेक्षाओं और उपलब्धियों के बीच दूरी बढ़ने से वह मानसिक तनाव के जाल में फंसता जा रहा है। यह तनाव विभिन्न शारीरिक विकारों के रूप में सामने आता है। मानसिक कारणों की वजह से होने वाले शारीरिक विकार के लक्षण हिस्टीरिया रोग की ओर संकेत करते हैं। यह रोग स्त्री और पुरुष दोनों को होता है। लेकिन महिलाएं स्वभाव से अधिक संवेदनशील होती हैं और भावनाओं में बहकर अत्यधिक मानसिक तनाव लेती हैं। इसलिए वे इस रोग की चपेट में ज्यादा आती हैं। क्यों होता है हिस्टीरिया - लड़कियों की शादी में देरी, पति-पत्नी के बीच लड़ाई-झगड़े, पति की अवहेलना या दुव्र्यवहार, तलाक, मृत्यु, गंभीर आघात, धन हानि, मासिक धर्म विकार, संतान न होना, गर्भाशय के रोग आदि ऐसे कई कारण हैं जो इस बीमारी
थकान मिटाने, चोट का खून रोकने और पेट की समस्या में मददगार है "मटके का पानी"

थकान मिटाने, चोट का खून रोकने और पेट की समस्या में मददगार है "मटके का पानी"

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आयुर्वेद में मटके के पानी को शीतल, हल्का, स्वच्छ और अमृत के समान माना गया है। यह प्राकृतिक जल का स्रोत है जो ऊष्मा से भरपूर होता है और शरीर की गतिशीलता को बनाए रखता है। मटके की मिट्टी कीटाणुनाशक होती है जो पानी में से दूषित पदार्थों को साफ करने का काम करती है।इस पानी को पीने से थकान दूर होती है। इसे पीने से पेट में भारीपन की समस्या भी नहीं होती।रक्त बहने की स्थिति में मटके के पानी को चोट या घाव पर डालने से खून बहना बंद हो जाता है। सुबह के समय इस पानी के प्रयोग से हृदय व आंखों की सेहत दुरुस्त रहती है।गला, भोजननली और पेट की जलन को दूर करने में मटके का पानी काफी उपयोगी होता है।जिन लोगों को अस्थमा की समस्या हो वे इस पानी का प्रयोग न करें क्योंकि इसकी तासीर काफी ठंडी होती है जिससे कफ या खांसी बढ़ती है। जुकाम, पसलियों में दर्द, पेट में आफरा बनने की स्थिति व शुरुआती बुखार के लक्षण होने पर मटके का
हरी सब्जियां, दाल खाने से बढ़ते ब्लड प्रेशर से मिलती है राहत

हरी सब्जियां, दाल खाने से बढ़ते ब्लड प्रेशर से मिलती है राहत

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140/90 से ऊपर का रक्तचाप, उच्च रक्तचाप या हाइपरटेंशन कहलाता है। इसका अर्थ है कि धमनियों में उच्च चाप (तनाव) है। उच्च रक्तचाप का अर्थ यह नहीं है कि अत्यधिक भावनात्मक तनाव हो। भावनात्मक तनाव व दबाव अस्थायी तौर पर रक्त के दाब को बढ़ा देते हैं।हाई ब्लड प्रेशर यानी उच्च रक्त चाप को दिल की बीमारी के लिहाज से खतरनाक बताया जाता है। इसलिए जरूरी की आप ब्लड प्रेशर काे कंट्राेल रखें। आज हम आपकाे बता रहे हैं एेसे खानपान के बारे में जिन्हें अपनाकर आप ब्लड प्रेशर काे कंट्राेल में रख सकते हैं। इनको दें प्राथमिकता- ब्लड प्रेशर बढ़ने पर कैल्शियम, मैगनीशियम और पोटेशियम आदि प्रचुर मात्रा में खाएं। ये तत्व दूध, हरी सब्जियां, दालों, संतरा, बादाम व सीताफल में मिलते हैं। - सूप, सलाद, खट्टे फल, नींबू पानी, नारियल पानी, काले चने, लोबिया, अलसी, सोया आदि खाना फायदेमंद है। दिनभर में 10 गिलास पानी पिएं। ओमेगा थ्री वाली
शरीर की इन तकलीफों के लिए जान लें ये घरेलू उपाय

शरीर की इन तकलीफों के लिए जान लें ये घरेलू उपाय

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गुलाब के फूलों की पत्तियों से तैयार गुलकंद शरीर में ठंडक और ऊर्जा बनाए रखता है। डिहाइड्रेशन, सिरदर्द, लू लगना और मसूड़ों की तकलीफ ऐसी समस्याएं हैं जो आए दिन हर किसी को परेशान करती हैं। घरेलू उपायों के सुरक्षा कवच से इन रोगों से आसानी से लड़ा जा सकता है। तेज धूप की वजह से सिरदर्द हो तो लौकी का गूदा निकालकर पीस लें और माथे पर लेप करें, तुरंत आराम मिलेगा।एक चम्मच सौंफ रात को एक गिलास पानी में भिगो दें। सुबह इसी पानी में सौंफ को मसलने के बाद छानकर थोड़ी चीनी मिलाकर पिएं, शरीर को ठंडक मिलेगी। 25 ग्राम गुलाब के फूल, मिश्री, सौंफ और वंशलोचन (तीनों 10 ग्राम) को पीसकर पाउडर बना लें। सुबह और शाम पानी के साथ आधा चम्मच पाउडर लेने से फोड़े, फुंसी, दाद और खुजली में लाभ होगा। गुलकंद को एक चम्मच की मात्रा में रात को गुनगुने पानी या दूध के साथ खाने से कब्ज, गर्मी, मुंह के छाले और रक्तसंचार दुरुस्त होता है।
जानिए, कड़वे करेले के मीठे-मीठे फायदे

जानिए, कड़वे करेले के मीठे-मीठे फायदे

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करेले के कड़वेपन की वजह से भले ही ज्यादा लोग इसे नापसंद करते हों लेकिन इसमें कई एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन होते हैं जो हमें निरोगी बनाए रखने में खासे मददगार साबित हो सकते हैं। आइए जानते हैं क्या हैं कड़वे करेले के मीठे-मीठे फायदे:- - करेले में अधिक मात्रा में विटामिन-ए, बी और सी होते हैं। यह कैरोटीन, बीटाकैरोटीन, लूटीन, आयरन, जिंक और मैगनीशियम से भरपूर होता है। इससे चेहरे के दाग-धब्बे, मुंहासे व त्वचा रोगों में लाभ होता है। - रोजाना खाली पेट करेले के जूस में नींबू का रस मिलाकर छह महीने तक पिएं, त्वचा पर असर दिखेगा। - बवासीर होने पर एक चम्मच करेले के रस में शक्कर मिलाकर लगातार एक महीने तक पीने से राहत मिलती है। - करेला मुंह के छालों के लिए अचूक दवा है। करेले की पत्तियों का रस निकालकर उसमें थोड़ मुलतानी मिट्टी मिलाकर पेस्ट बना लें और मुंह के छालों पर लगाएं। मुलतानी मिट्टी ना मिले तो करेले के र