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जानिए ख़राब होने से कैसे बचा सकते हैं अपने दांत

जानिए ख़राब होने से कैसे बचा सकते हैं अपने दांत

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जयपुर. नाखून और बाल काटने के बाद फिर से बड़े हो जाते हैं। टूटी हुई हड्डियां फिर से जुड़ सकती हैं लेकिन क्या जानते हैं कि टूथ इनेमल एक बार खराब होने के बाद फिर से नहीं आ सकते हैं। मीठा या एसिडिक पेय लेने के बाद पानी से कुल्ला जरूर करें। इनेमल दांत को कवर करने वाला पतला बाहरी आवरण है। यह शरीर में सबसे कठोर ऊतक है। यह दांतों को दैनिक उपयोग जैसे चबाने, काटने, क्रंच करने और पीसने से बचाने में मदद करता है। यह आपको खाने और पीने की गर्म और ठंडे चीजों से चरम सीमा तक तापमान को महसूस करने से रोकता है। इनेमल एसिड और रसायनों को भी रोकता है जो दांतों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। टूथ इनेमल हटने के बाद क्या होता है? दांतों में डेंटिन होता है। यह इनर ट्यूब्स का एक समूह होता है जो दांत की तंत्रिकाओं और अन्य कोशिकाओं को कवर करता है। जब इनेमल हट जाता है तो दांतों के डेंटिन और नसें दिखने लगती हैं। इनके एक्स्पोजर
हर तीन माह में मौसम परिवर्तन और शरीर की तासीर के अनुसार तेल

हर तीन माह में मौसम परिवर्तन और शरीर की तासीर के अनुसार तेल

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हैल्दी-ऑयलखाद्य पदार्थों को ज्यादा फ्राइ करने से बचें। ग्रिलिंग करें। मौसमी तेल का प्रयोग भी प्रभावी होता है। विशेषज्ञ के अनुसार हर तीन माह में मौसम, शरीर की प्रकृति और तासीर के अनुसार तेल बदलते रहना चाहिए। मूंगफली : सर्दियों में आयरन, जिंक, विटामिन-ई युक्त तेल को कफ व वात प्रकृति के लोग खा सकते हैं।फायदा : कोलेस्ट्रॉल, बीपी नियंत्रित करता है। त्वचा, अल्जाइमर में भी फायदेमंद है। तिल : बारिश में प्रोटीन, कैल्शियम, फास्फोरस, विटामिन ए,बी,सी से युक्त तेल दोनों तासीर के साथ वात, पित्त प्रकृति के लोग खा सकते हंै।फायदा : भूख की कमी, मेनोपॉज, कमजोरी, लकवा, डायबिटीज, बाल संबंधी समस्या में लाभकारी है। निमोनिया, अस्थमा रोगियों को तिल के तेल के साथ सेंधा नमक डालकर गुनगुना होने पर छानकर मालिश करें।सरसों : बारिश के मौसम में प्रोटीन, पोटेशियम, मैग्नीशियम, विटामिन ई और कैल्शियम से भरपूर इस तेल को गर्म ता
बीमारियों से इस तरह बचाता है ध्यान

बीमारियों से इस तरह बचाता है ध्यान

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कई शोधों में स्पष्ट हो चुका है कि विद्युत और ध्वनि तरंगों से मस्तिष्क के अंदर प्लेक्स बनते है जिनके कारण अल्जाइमर और दिमाग से संबंधी दूसरी बीमारियां होती हैं। अगर कोई नियमित ध्यान लगता है तो कई बीमारियों से बचाव हो सकता है। ध्यान लगाने से मस्तिष्क में गामा तरंगे उठती हैं. ये किरणें और प्लेक्स को घटाने काम करती हैं। दिमाग में प्रोटीन के छोटे-छोटे टुकड़े होते हैं जिन्हें एमिलॉइड कहते हैं। इनसे ही प्लेक्स बनते हैं जो न्यूरोन्स को प्रभावित कर याद्दाश्त घटते हैं। मस्तिष्क में स्मरण वाले हिस्से को हिप्पोकैम्पस कहते हैं। यहीं से सकारात्मक और नकारात्मक भाव उत्पन्न होते हैं। अगर कोई नियमित ऊं शब्द का उच्चारण करें तो इसका लाभ मिलता है। आयुर्वेद के अनुसार अगर अच्छी जीवन शैली को अपनाया जाए तो तन-मन दोनों ही स्वस्थ रहता है। इनमें रात्रि भोजन निषेध, व्रत, उपवास, सामायिक (एक घंटे का मौन), प्रतिक्रमण (आत्
डेंगू के बाद अपनाएं ये तरीका, कुछ ही दिनाें में बनेगी सेहत, दूर हाेगी कमजाेरी

डेंगू के बाद अपनाएं ये तरीका, कुछ ही दिनाें में बनेगी सेहत, दूर हाेगी कमजाेरी

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आज कल पूरे भारत में डेंगू का बुखार बड़ी तेजी से फैल रहा है। यदि समय रहते इसका इलाज नहीं लिया जाए तो ये बुखार जान लेवा साबित हाे सकता हैं। अगर किसी व्यक्ति का डेंगू का टेस्‍ट पॉजिटिव आता है तो उसे तुरंत डाॅक्टर से इलाज शुरू करा देना चाहिए। आमतौर पर देखा गया है कि डेंगू के रोगी को हॉस्‍पिटल से निकलने के बाद भी कमजोरी बनी रहती है। इसलिए जरूरी है की मरीज अपने आप को मजबूत बनाए रखने के लिए अपनी दिनचर्या में परिवर्तन करें आैर अपने खानपान का खास ध्यान रखें। यह बहुत जरुरी है कि आप अच्‍छा खाएं और समय-समय पर दवाइयां लें, जिससे डेंगू के वायरस आप पर फिर से हमला ना पाएं। अगर आपको पानी पीने की ज्‍यादा आदत नहीं है तो, उसे अब अपनी आदत में शामिल कर लें क्‍योंकि इससे शरीर की गंदगी बाहर निकलेगी। तो आइये अब जानते हैं डेंगू के रोगी को क्‍या-क्‍या उपाय आजमाने की जरुरत है:- फलाें से कर
पेट की महाधमनी में रुकावट से लकवे की स्थिति, सर्जरी से ठीक

पेट की महाधमनी में रुकावट से लकवे की स्थिति, सर्जरी से ठीक

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दातारामगढ़ (सीकर) के 56 वर्षीय मरीज को कई वर्षों से हार्ट की समस्या थी। करीब छह माह पहले हृदय में तेज दर्द होने पर परिजनों ने सीकर में डॉक्टर को दिखाया। जांच के बाद चिकित्सकों ने इनकी एंजियोप्लास्टी की। इसके बाद वे स्वस्थ हो गए, लेकिन एक दिन उनके दोनों पैर ने काम करना बंद कर दिया। जांच में पाया कि पैरों में लकवे की स्थिति है और हार्ट से खून निकल रहा है। खून पेट में भर रहा है। यह स्थिति महाधमनी यानी डिस्टल एब्डोमिनल एओर्टा में क्लॉटिंग के कारण हुई थी। इसको लेकर मरीज को काफी परेशानी हो रही थी. कई डॉक्टर्स ने कह दिया था कि इस स्थिति में मरीज का बचना मुश्किल है. इसके बाद परिजन जयपुर लेकर आये और डॉ. समीर को दिखाया जांच के तुरंत बाद मरीज की दो सर्जरी की गई। पैरों में खून की सप्लाई शुरू करने के लिए पैरों की धमनियों की सर्जरी हुई। फिर फटे हार्ट को ठीक करने के लिए रिपेयर ऑफ स्यूडोएन्यूरिज्म सर्जरी
इस जूस में छिपा है डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया का सटीक इलाज, काम में लेनी होगी सिर्फ ये विधि

इस जूस में छिपा है डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया का सटीक इलाज, काम में लेनी होगी सिर्फ ये विधि

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गिलोय बेहद गुणकारी है। यह हेल्थ के लिए अमृत के समान है। आयुर्वेद में गिलोय को बुखार की एक महान औषधि के रूप में माना गया है। कोई सा, कैसा भी बुखार हो, गिलोय का रस उसे जड़ से खत्म कर देता है। असल में गिलोय की पत्तियों व टहनियों में कैल्शियम, प्रोटीन तथा फास्फोरस पाया जाता है। यह हमारे शरीर की रोगप्रतिरोधक शक्ति को बढ़ाने में सहायता करती है। इसमें विभिन्न प्रकार के महत्वपूर्ण एंटीबायोटिक तथा एंटीवायरल तत्व पाए जाते हंै, जिनसे शारीरिक स्वास्थ्य को तुरंत लाभ पहुंचता है। यह घर-घर की डॉक्टर है। यह गांवों में सहजता से मिल जाती है, लेकिन अब शहरों में लोग अपने घरों में इसे लगाने लगे हैं। गिलोय में प्राकृतिक रूप से शरीर के दोषों को संतुलित करने की क्षमता पाई जाती है। गिलोय एक बहुत ही महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है। गिलोय की टहनियों को भी औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। किसी भी तरह के बुखार
डेंगू से घबराए नहीं, ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत कराएं ये टेस्ट और उपचार

डेंगू से घबराए नहीं, ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत कराएं ये टेस्ट और उपचार

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भारत के कई प्रदेशों में डेंगू ( dengue Fever ) की दहशत हमेशा ही बनी रहती है। कभी-कभार मादा एनाफ्लिज मच्छरों की संख्या बढ़ने और उनके द्वारा काटे जाने पर डेंगू वायरल के तौर पर फैलता है जिसको रोक पाना मुश्किल हो जाता है। लेकिन समय रहते डेंगू के कारण, उसकी पहचान और उचित उपचार करके इस खरतनाक बीमारी से निजात पा सकते हैं जो इस प्रकार है— डेंगू को ऐसे पहचानें ( dengue fever Symptoms ) -मांसपेशियों एवं जोड़ों में दर्द, सिर दर्द व बुखार, कमजोरी, स्किन में रेशे का आना तथा उल्टी होना डेंगू के लक्षण हैं। डेंगू होने के कारण ( dengue fever causes ) -डेंगू एक तरह का बुखार है जो मच्छर के काटने से ही होता है। डेंगू सामान्य मच्छरों के नहीं बल्कि मादा एनाफ्लिज मच्छर के काटने से ही होता है। यह मच्छर अक्सर दिन के समय ही काटता है जिसके बाद बुखार आता है। डेंगू से बचने के लिए करें ये उपाय ( dengue fev
बड़ा खुलासा: इस ड्रिंक के पीने से पागल हो सकता आपका बच्चा

बड़ा खुलासा: इस ड्रिंक के पीने से पागल हो सकता आपका बच्चा

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लंदन। बच्चों और युवाओं को कैफीनयुक्त एनर्जी ड्रिंक्स बेचने पर प्रतिबंध लगाने की जरूरत है, ताकि लोगों को मोटापे और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से बचाया जा सके। विशेषज्ञों का यह कहना है। कैफीन संभवत: दुनिया भर में सबसे ज्यादा प्रयोग किए जाने वाला साइकोएक्टिव ड्रग है, क्योंकि यह ध्यान और जागरूकता में इजाफा कर शारीरिक सक्रियता को बढ़ा देता है। ब्रिटेन के रॉयल कॉलेज ऑफ पेडियाट्रिक्स एंड चाइल्ड हेल्थ (आरसीपीसीएच) के प्रोफेसर रसेल वाइनर का कहना है, "लेकिन इसके साथ ही कैफीन व्यग्रता को बढ़ाता है और नींद में रुकावट पैदा करता है, तथा यह बच्चों में व्यवहार संबंधी समस्याओं से जुड़ा हुआ है।" हाल के अध्ययनों से यह जानकारी भी मिली है कि यह विकास कर रहे दिमागों पर चिंताजनक प्रभाव डालता है। वाइनर ने कहा कि यह चिंताजनक है, क्योंकि मनोवैज्ञानिक तनाव से जोखिम भरे व्यवहार का खतरा पैदा हो सकता है, जिसमें ड्रग का
सावधान! आपके तन-मन और दिमाग के लिए जहर है सफेद चीनी

सावधान! आपके तन-मन और दिमाग के लिए जहर है सफेद चीनी

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सफेद चीनी की मिठास से कोई भी अछूता नहीं है, लेकिन जो लोग चीनी के साइड इफेक्ट से वाकिफ हैं, वो इसका सेवन नहीं करते हैं। दरअसल, इसे बनाने का जो प्रोसेस है, वह हेल्थ के लिए बेहद खतरनाक है,क्योंकि चीनी बनाने में जरूरी तत्व नष्ट हो जाते हैं। बाजार में दो तरह की चीनी मिलती है। एक पूरी तरह से सफेद होती है, जबकि दूसरी चीनी थोड़ी-सी मटमैली होती है। इसके रंग से इसे लोग अवॉइड करते हैं, जबकि इस चीनी हेल्थ के हिसाब से उपयुक्त होती है। जहां तक सफेद चीनी की बात है, तो इसे रिफाइंड शुगर भी कहा जाता है। इसे रिफाइन करने के लिए सल्फर डाई ऑक्साइड, फास्फोरिक एसिड, कैल्शियम हाई-ऑक्साइड का उपयोग किया जाता है, जो हेल्थ के लिए बेहद हानिकारक होते हैं। इतना ही नहीं, रिफाइनिंग के बाद चीनी में मौजूद विटामिन्स, मिनरल्स, प्रोटीन, एंजाइम्स जैसे पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। रिफाइन चीनी के नुकसान...रिफाइन चीनी के खाने से मस्
हाइपोथैलमस से प्रेग्नेंसी पर असर, तनाव, अत्यधिक व्यायाम भी कारण

हाइपोथैलमस से प्रेग्नेंसी पर असर, तनाव, अत्यधिक व्यायाम भी कारण

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जयपुर. प्रेग्नेन्सी के काल मे आपकी मानसिक तथा इमोशनल गतिविधियों मे बदलाव आते रहते हैं इस तरह से गतिविधियों के घटने तथा बढ़ने के पीछे हॉर्मोनल फ्लक्चुएशन होता है। हाइपोथैलमस मस्तिष्क से जुड़ी परेशानी है जो पिट्यूटरी ग्लैंड (पीयूष ग्रंथि) को नियंत्रित करती है। यह पिट्यूटरी ग्लैंड को नियंत्रित करती है, खासकर तनाव की स्थिति में। तनाव, अत्यधिक व्यायाम और अपर्याप्त पोषण मस्तिष्क तक संकेत पहुंचने में बाधा पहुंचाते हैं। मस्तिष्क को पूरा पोषण नहीं मिलता है। एथलीट, डांसर्स और जिन महिलाओं का फैट का स्तर काफी कम है उन्हें भी यह दिक्कत आती है। यह अनुवांशिक, असामान्य पीरियड्स और अंडाशय के सही काम नहीं करने से होता है। इस से स्वाद, स्पर्श, दबाव, गर्मी, ठंड और दर्द जैसे संवेदी जानकारी से जुड़े उदर नाभिक नाभिक होते हैं। आयरन की अधिकता भी कारण खाने से अरुचि होना या एनोरेक्सिया, रक्तस्राव, बूलीमिया, अनुवांशि