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Baba Ramdev Yoga Tips : इन 3 योगासनों और आयुर्वेद टिप्स से घटाएं पेट की चर्बी, देखें Video

Baba Ramdev Yoga Tips : इन 3 योगासनों और आयुर्वेद टिप्स से घटाएं पेट की चर्बी, देखें Video

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कई बीमारियों की जड़ मोटापा कम करने के लिए लोग न जाने कितने जतन करते हैं। मोटापा घटाने की कोशिशों में लगे लोगों को सबसे ज्यादा पेट, कमर और जांघों पर जमा फैट परेशान करती है। इसे कम करने में ये 3 योगासन... Live Hindustan Rss feed
खाएं ये 7 सुपर फूड, शरीर में नहीं रहेगी पाेषक तत्वाें की कमी

खाएं ये 7 सुपर फूड, शरीर में नहीं रहेगी पाेषक तत्वाें की कमी

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सुपर फूड उन खाद्य पदार्थों को कहा जाता है, जिनमें पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। ये चीजें प्राकृतिक होती हैं जिनसे शरीर पर किसी भी प्रकार का दुष्प्रभाव नहीं पड़ता। आइए जानते हैं इनके बारे में :- बादामबादाम में मैगनीशियम, पोटेशियम और विटामिन-ई भरपूर मात्रा में होते हैं। कम कैलोरी होने की वजह से यह दिल को सेहतमंद रखते हैं। रोजाना 3-5 बादाम खा सकते हैं। बादाम शेक बनाने के लिए 5-10 बादाम को पीसकर एक कप दूध में मिला लें और स्वादानुसार चीनी प्रयोग करें। पालकनियासिन, जिंक और फाइबर से भरपूर पालक में कैलोरी काफी कम और पोषक तत्व अधिक मात्रा में होते हैं। पालक बढ़ती उम्र में हड्डियों की क्षति, मोतियाबिंद, कैंसर और हृदय संबंधी रोगों से बचाता है। रोजाना एक कटोरी पालक की सब्जी खा सकते हैं। शहदइसमें मौजूद नियासिन, अमीनो एसिड, थायमीन और विटामिन बी-6 कोशिकाओं की क्षति को रोकता है। इसमें एक विशेष
पानी पीने में इन नियमाें का करें पालन, हमेशा रहेंगे सेहतमंद

पानी पीने में इन नियमाें का करें पालन, हमेशा रहेंगे सेहतमंद

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पानी हमारे जीवन के लिए बेहद जरूरी है इसके बिना हम जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते। पानी जहां हमारी प्यास बुझाता वहीं हमारे आैर प्रकृति के जीवन की रक्षा करता है।इसका हमेशा सदुपयोग करना चाहिए, लेकिन बहुत कम लोग ही एेसे है जाे जानते हैं कि पानी पीने के भी कुछ खास नियम होते हैं। आज हम आपकाे बताते हैं उन नियमाें के बारे में :- - पानी कभी भी अधिक मात्रा में एकसाथ न पीकर घूंट-घूंट करके पिएं। इससे जीभ की ग्रंथियों से स्रावित रस पानी के साथ शरीर में पहुंचता है। - बुखार, लू लगना, मूत्ररोग, ब्लड प्रेशर, कब्ज, पेट में जलन आदि रोगों में सामान्य से अधिक मात्रा में पानी पीना लाभकारी होता है। - भोजन के फौरन बाद पानी पीने से पाचन तंत्र में गड़बड़ी हो सकती है। क्योंकि इस दौरान शरीर में गैस्ट्रिक जूस बनते हैं जो भोजन को पचाने का काम करते हैं लेकिन जब हम पानी पी लेते हैं तो ये जूस पानी में ही घुल जाते हैं। खान
जंकफूड के जहर से सेहत खराब न करें

जंकफूड के जहर से सेहत खराब न करें

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जंकफूड का चलन तेजी से बढ़ रहा है लेकिन स्वाद के चक्कर में लोग सेहत को भूल रहे हैं, नतीजतन 50 साल की उम्र के बाद होने वाले रोग अब बच्चों और युवाओं में भी होने लगे हैं। जानते हैं इसके बारे में। जंकफूड है जहर -बर्गर, नूडल्स और पिज्जा आदि को बनाने के लिए मैदा, अधिक मात्रा में नमक, तेल व मसालों का प्रयोग होता है, साथ ही साफ-सफाई भी संदिग्ध रहती है। ऐसा जंकफूड पेट तो भरता है लेकिन इससे पोषक तत्व नहीं मिल पाते। रोगों का खतरा -विभिन्न स्टडी बताती हैं कि लगातार ऐसा भोजन करते रहने से मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं जिससे मोटापा, डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल व ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं होने लगती हैं। जो बच्चे ऐसी चीजें खाते हैं उनका दिमागी और शारीरिक विकास भी प्रभावित होता है, एकाग्रता में कमी, तनाव व पेट संबंधी तकलीफ होने लगती हैं। घर का बना - जब घर पर इन्हें बनाएं तो मैदे की जगह आटा या रागी के आटे का प्रयोग
व्यायाम से रोकें साइलेंट किलर की चाल

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हृदय रोग मुख्य रूप से कई रोगों का समूह है। ब्लड प्रेशर, मोटापा, हाई कोलेस्ट्रॉल और तनाव के कारण हृदय को रक्त की आपूर्ति करने वाली वाहिकाओं (वेसल्स) का क्षतिग्रस्त होना इसके सामान्य कारण हैं। हृदय रोग 60 तरह के होते हैं, पर इनमें से प्रमुख हैं-हृदय धमनी रोग : दिल को रक्त उपलब्ध कराने वाली धमनियों का क्षतिग्रस्त होना। एंजाइना पेक्टोरिस : हृदय को रक्त की आपूर्ति न होने से सीने में दर्द, दबाव, कड़ापन व बेचैनी होना। कार्डियोमायोपैथी : ब्लड को पंप करने वाली हृदय की मांसपेशियों का कमजोर होना। जन्मजात हृदय रोग : हृदय की बनावट और कार्य करने की प्रणाली में जन्म से ही समस्या होना। कार्डियक अतालता : अनियमित इलेक्ट्रिक सिग्नल मिलने से दिल तेजी (टेकीकार्डिया) या धीरे-धीरे (बे्रडिकार्डिया) धड़कने लगता है। कंजेस्टिव व हार्ट फेल्योर : जब हृदय क्षमता के साथ ब्लड पंप नहीं करता तो हृदयाघात हो जाता है। एट्रियल
जानिए किस बीमारी के रोगी को क्या खाना चाहिए क्या नहीं

जानिए किस बीमारी के रोगी को क्या खाना चाहिए क्या नहीं

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खानपान हमारे जीवन का ऐसा हिस्सा है जो हमें एनर्जी देने के साथ-साथ रोगों से भी बचाता है। लेकिन ऐसा तभी संभव है जब हमें यह पता हो कि किस बीमारी में कौन से फल या सब्जियां ज्यादा फायदेमंद हो सकती हैं। जानते हैं उनके बारे में। हृदय व बीपी के मरीज -क्या खाएं : मौसमी फल व हरी पत्तेदार सब्जियां खाएं। फलों में सेब, अमरूद, पपीता बेहतर विकल्प हैं। फाइबर युक्तहरी पत्तेदार व विभिन्न रंगों की सब्जियां जैसे कद्दू, शिमला मिर्च, प्रयोग करें। बाजरा, आटा व रागी जैसे साबुत अनाज व अंकुरित चीजें खाएं और छेना से बनी मिठाई लें। न खाएं : गरिष्ठ व तली-भुनी चीजें न खाएं। ट्रांस फैट, पैक्ड फूड, सूजी और मैदे से बने खाद्य पदार्थों से परहेज करें। बेकरी प्रोडक्ट्स प्रयोग में न लें क्योंकि इनमें नमक की मात्रा ज्यादा होती है। नमक का अधिक मात्रा में सेवन करने से बचें। क्या करें : सोने से 3-4 घंटे पहले भोजन करें वर्ना पेट व
खांसी से परेशान हैं तो आजमाएं ये घरेलू नुस्खे

खांसी से परेशान हैं तो आजमाएं ये घरेलू नुस्खे

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वसंत ऋतु के बीच शीत से ग्रीष्म का थोड़ा-थोड़ा असर होता है। कफ की समस्या अधिक होती है। जठराग्रि कमजोर होने से पाचन सही नहीं रहता है। इसलिए भोजन में परिवर्तन जरूरी है। ऋतु अनुसार आहार लेने वाले लोग स्वस्थ व प्रसन्नचित रहते हैं। नीम की कोंपलें कारगर इस ऋतु में कड़वे नीम की कोंपलें (नई पत्तियां) भी प्रयोग में लें। 2-3 काली मिर्च के साथ 10-15 कोंपलें पंद्रह से बीस दिन नियमित चबाकर खाएं। इससे लंबे समय तक चर्म रोग, रक्त विकार, ज्वर आदि बीमारियां नहीं होंगी। रोग प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत होगी। कड़वे नीम के फूलों का रस 15 दिन तक पीने से त्वचा रोग व मलेरिया से बचाव होता है। शरीर को रोगों से लडऩे की ताकत देती है हल्दी शीत व वसंत ऋतु में श्वांस, जुकाम, खांसी जैसे कफजन्य रोग ज्यादा होते हैं। दही का प्रयोग नहीं करना चाहिए। यह कफवर्धक माना जाता है। हल्दी का प्रयोग भी ज्यादा करना चाहिए। इससे शरीर रोगों से
जानिए, क्यों जरूरी हाे जाती है सिजेरियन डिलीवरी?

जानिए, क्यों जरूरी हाे जाती है सिजेरियन डिलीवरी?

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प्रेग्नेंसी के दौरान हर महिला यह चाहती है कि उसकी डिलीवरी सामान्य हो। लेकिन कई बार मां या बच्चे की सेहत को खतरा देखकर ऑपरेशन करना पड़ता है। इस संबंध में जानिए स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ की राय :- इसलिए जरूरी - गर्भवती महिला का ब्लड प्रेशर बढ़ने या दौरा पड़ने की स्थिति में सिजेरियन ऑपरेशन किया जाता है वर्ना दिमाग की नसें फट सकती हैं और लिवर व किडनी खराब हो सकती है। - छोटे कद वाली महिलाओं की कूल्हे की हड्डी छोटी होने के कारण बच्चा सामान्य तरीके से नहीं हो पाता। - कई बार दवाओं से बच्चेदानी का मुंह नहीं खुल पाता, ऐसे में सर्जरी करनी पड़ती है। ज्यादा खून बहने पर भी सिजेरियन ऑपरेशन किया जाता है। - बच्चे की धड़कन कम होने या गले में गर्भनाल लिपटी होने, बच्चे का आड़ा या उल्टा होना, कमजोरी या खून का दौरा कम होने पर भी ऑपरेशन होता है। - बच्चा जब पेट में ही गंदा पानी (मल, मूत्र) छोड़ देता है जिसे
भूलकर भी ना लगवाएं ये इंजेक्शन, नहीं ताे खराब हाे जाएंगी आंखें

भूलकर भी ना लगवाएं ये इंजेक्शन, नहीं ताे खराब हाे जाएंगी आंखें

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विट्रीओ रेटिना सोसाइटी ऑफ इंडिया (वीआरएसआई) ने रैजुमैब इंजेक्शन लगाने से देखने की शक्ति प्रभावित होने सहित अन्य दुष्प्रभावों के मद्देनजर एडवाइजरी जारी की है और रोगियों की सुरक्षा पर ध्यान देने का आह्वान किया है। वीआरएसआई द्वारा जारी एडवाइजरी में कहा गया है कि रैजुमैब इंजेक्शन लगाने से मरीजों की आंखों की मध्यम पुतली को नुकसान पहुंचने और उनके देखने की शक्ति प्रभावित होने की शिकायत सामने आई है। इसलिए इंटास से रैजुमैब इंजेक्शन (बैच नंबर-18020052) का इस्तेमाल नहीं करने की सलाह दी गई है। वीआरएसआई के मानद सचिव डॉ. राज नारायणन ने कहा, ''दवा कंपनियों और नियामकों को रोगी की सुरक्षा के प्रति अधिक जिम्मेदार बनने की आवश्यकता है। इंटास के उत्पाद गुणवत्ता के लिए यह चिंतनीय बात है कि इसके उत्पाद को वापस लिए जाने के मामले बार-बार सामने आ रहे हैं। 2015 में एक मामले में, इसके जारी करने के दो महीने बाद ही रैज