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अगर आप नहीं लेते छुट्टियां तो सेहत होगी खराब, जानें इसके बारे

अगर आप नहीं लेते छुट्टियां तो सेहत होगी खराब, जानें इसके बारे

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जब कोई व्यक्ति काम से कुछ दिनों के लिए अवकाश लेता है तो इसका उस पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। प्रोफेशनल लाइफ ही नहीं पर्सनल लाइफ के लिए भी अवकाश औषधि के समान है। कई शोधों में यह साबित हो चुका है कि जो लोग सप्ताह में एक दिन पूरी तरह कामकाज से खुद को मुक्त रखते हैं और जीवन का आनंद लेते हैं, उनमें बे्रन स्ट्रोक व हार्ट अटैक का खतरा कम हो जाता है व वे लंबी आयु जीते हैं। आजकल कई लोग ज्यादा पैसा कमाने, दूसरों से आगे बढ़ने, हमेशा व्यस्त रहने और कई बार घरेलू जिम्मेदारियों से बचने के नाम पर हमेशा दफ्तर के कामकाज में डूबे रहते हैं। लोगों की ऐसी ही सोच की वजह से आज कामयाबी या सफलता के ये निम्रलिखित मापदंड बन गए हैं। आप कितने व्यस्त हैं?आप कितने स्मार्ट हैं?स्मार्ट गैजेट्स को हैंडल करते हैं?आप कितने फोन कॉल्स रिसीव करते हैं?आप सोशल मीडिया पर कितने एक्टिव हैं?आपको कितने लोग जानते हैं? परस्पर जुड़ाव के
जानें अमरूद और करेले के फायदों के बारे में

जानें अमरूद और करेले के फायदों के बारे में

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अमरूद का फल ही नहीं पत्ते भी लाभकारी हैं। आइए जानते हैं इनके फायदों के बारे में। दांतदर्द और मसूढ़ों की सूजन में आराम के लिए इसके 15-20 ताजा पत्ते पानी में उबालें। जब पानी आधा रह जाए तो इसमें सेंधा नमक या फिटकरी मिलाएं और ठंडा होने पर कुल्ला करें।अमरूद के पत्तों पर कत्था लगाकर चबाने से मुंह के छाले ठीक होते हैं।माइग्रेन के दर्द में इसके पत्तों का लेप सूर्योदय से पहले माथे पर लगाने से आराम मिलता है।गठिया रोगी इसके कुछ पत्तों को पीसकर दर्द वाली जगह पर लेप लगाएं। अमरूद के कुछ पत्तों को पानी में उबालें व इन्हें पीस लें। इस लेप को फुंसियों पर लगाने से आराम मिलेगा।अमरूद के पत्तों से तैयार किए गए 10 ग्राम काढ़े को पीने से जी घबराने और उल्टी की समस्या नहीं रहती। विशेषज्ञ की सलाह से खाएं करेला - करेला प्रकृति का वरदान है जिसे डायबिटीज के मरीज को खाने की सलाह दी जाती है लेकिन इसे प्रयोग करने के संबं
अनियमित मासिक चक्र, बालों की मजबूत और दस्त के लिए फायदेमंद है तुलसी

अनियमित मासिक चक्र, बालों की मजबूत और दस्त के लिए फायदेमंद है तुलसी

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तुलसी की पत्तियां कई बीमारियों का इलाज करती हैं। कैंसर जैसे लाइलाज रोग में तुलसी असरकारक है। यह जुकाम, खांसी व सांस की तकलीफ में भी फायदेमंद होती है। तुलसी के तेल से सिर में मालिश करने से रक्त का संचार दुरुस्त होता है। महिलाओं में मासिक चक्र की अनियमितता को दूर करने के लिए तुलसी के पत्तों का रस लाभदायक होता है। बालों की मजबूती के लिए गर्म जैतून के तेल में तुलसी का तेल मिला लें और सिर में मालिश करें। तुलसी व आंवला पीसकर सिर पर लगाने से रूसी की समस्या भी खत्म होती है। मुंहासे होने पर तुलसी की पत्तियों को पीसकर लेप बना लें। 20-25 मिनट तक लगा रहने दें और बाद में चेहरा धो लें। सर्दी या फिर हल्का बुखार है तो मिश्री, काली मिर्च और तुलसी के पत्ते का काढ़ा पीना फायदेमंद होता है। तुलसी के पत्तों को जीरे के साथ मिलाकर पीसकर चटनी बनाकर दिन में 3-4 बार चाटने से दस्त रुक जाते हैं। Patrika : India's Lea
Baba Ramdev Yoga Tips : भुजंगासन से कम होगी बाहर निकली तोंद, Video में देखिए आसन करने का सही तरीका

Baba Ramdev Yoga Tips : भुजंगासन से कम होगी बाहर निकली तोंद, Video में देखिए आसन करने का सही तरीका

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योग न सिर्फ व्यायाम की प्राचीन पद्धति है बल्कि यह कई बीमारियों का समाधान भी है। इन्हें करने से हमारे शरीर को ऊर्जा मिलती है और लचीलापन भी बढ़ता है। कई प्रमुख योगासनों में से एक है भुजंगासन। इसे करने... Live Hindustan Rss feed
जानिए, सर्दी में कैंसर मरीजों के खानपान पर विशेष ध्यान रखना क्यों जरूरी है

जानिए, सर्दी में कैंसर मरीजों के खानपान पर विशेष ध्यान रखना क्यों जरूरी है

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सर्दी का मौसम कैंसर रोगियों के लिए खतरनाक हो सकता है। इसकी वजह इस मौसम में नमी अधिक होती है और कैंसर के मरीजों में कीमोथैरेपी या दूसरी दवाइयों के कारण इम्युनिटी घट जाती है। जिससे उनमें संक्रमण का खतरा अधिक हो जाता है। सावधानी बरतने की जरूरत अधिक रहती है। सामान्य लोगों की तुलना में कैंसर मरीजों के शरीर को अधिक गर्म रखने की जरूरत रहती है। इसके लिए ऊनी कपड़े पहनें। सिर, हाथ, पैरों को ढककर रखें। ठंडी हवाओं से खुद का बचाव करें। ठंडी चीजें जैसे आइसक्रीम, कुल्फी आदि से परहेज रखेंं। आप मरीज नहीं तो बरतें ये सावधानी भोजन को दोबारा गर्म करने और रेड मीट खाने से बचें। पोषण युक्त आहार से खतरा कम किया जा सकता है। सब्जियां, फल, फली, साबुत अनाज खानपान में शामिल करें। एंटीऑक्सीडेंट्स, विटामिन्स कैंसर कोशिकाओं को बढऩे से रोकते हैं। शक्कर कम लें। खानपान में हमेशा रखें : आहार में टमाटर, ब्रोकली, पत्तागोभी, लह
पान के पत्तों का सर्दी-जुकाम के इलाज में एेसे करें इस्तेमाल

पान के पत्तों का सर्दी-जुकाम के इलाज में एेसे करें इस्तेमाल

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पान के पत्ते प्रोटीन, कार्बाेहाइड्रेट, टैनिन, कैल्शियम, फॉस्फोरस, आयोडीन और पोटेशियम जैसे मिनरल्स से भरपूर होते हैं। आइए जानते हैं इनके फायदों के बारें में। हल्दी के टुकड़े को सेंककर पान के पत्ते में डालकर खाने से जुकाम और खांसी में आराम मिलता है।रात में तेज खांसी हो तो पान के पत्ते में अजवाइन व मुलैठी का टुकड़ा डालकर प्रयोग कर सकते हैं।बच्चे को सर्दी-जुकाम होने पर एक पत्ते पर हल्का गर्म सरसों का तेल लगाकर उसके सीने पर रख दें, आराम मिलेगा। वयस्क 2-3 पत्तों के रस में शहद मिलाकर दिन में दो बार लें। लेकिन बच्चों को इसका आधा चम्मच रस ही दें, लाभ होगा। सावधानी बरतें - चरक संहिता में मुखशुद्धि के लिए इलायची, लौंग व जावित्री को पान के पत्ते में डालकर खाने के लिए बताया गया है। लेकिन टीबी, पित्त संबंधी रोग, नकसीर, त्वचा व आंखों से जुड़ी समस्या या बेहोशी होने पर पान के पत्तों का उपयोग न करें। Patri
बवासीर के उपचार के लिए कारगर है ये दवा

बवासीर के उपचार के लिए कारगर है ये दवा

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अगर पाइल्स होने की वजह कब्ज है तो रोगी को उठने-बैठने में तकलीफ, दर्द और रक्तस्राव होता है। इसके लिए पेट साफ करने के लिए एस्क्यूलस दवा और ओइंटमेंट प्रयोग करने के लिए दिया जाता है। लगातार कब्ज रहने की वजह से पाइल्स (बवासीर) की समस्या होती है। इस रोग में मलद्वार के आंतरिक और बाहरी हिस्से पर सूजन व फुंसियां हो जाती हैं जो कई बार गंभीर रूप ले लेती हैं। आइए जानते हैं इसकी प्रमुख वजहों और होम्योपैथिक इलाज के बारे में। वजह : अनियमित दिनचर्या, लंबे समय से कब्ज रहना, दवाओं के दुष्प्रभाव, हाई ब्लड प्रेशर, तनाव और जंकफूड की अधिकता से पाइल्स की समस्या होती है। स्टेज : इस बीमारी की चार स्टेज होती हैं। पहली में इसका पता नहीं चलता। दूसरी स्टेज में थोड़ा रक्तस्राव होता है। इसकी पहली और दूसरी स्टेज का इलाज दवाओं से किया जाता है। तीसरी स्थिति में पाइल्स बढऩे लगती है और रक्तस्राव अधिक होता है। चौथी स्थिति मे
सेहतमंद रहने के लिए वसंत के मौसम में ऐसे बदलें अपना खानपान

सेहतमंद रहने के लिए वसंत के मौसम में ऐसे बदलें अपना खानपान

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वसंत ऋतु के आगमन पर सर्दी का मौसम जाने काे हाेता है और तापमान में परिवर्तन होने लगता है इसलिए हमें अपने खानपान में भी बदलाव कर लेना चाहिए। नेचुरोपैथी के अनुसार मौसम बदलते ही हमें बाजरा और तिल जैसी गर्म तासीर वाली चीजों का उपयोग बंद कर देना चाहिए। वसंत ऋतु में गरिष्ठ भोजन करते रहने से हमारे शरीर में वात, पित्त और कफ का संतुलन बिगड़ जाता हैै। वसंत ऋतु में सूरज की रोशनी पपीता, सरसों, बेर, अमरूद और कद्दू जैसी पीली चीजों पर पड़ने से इनके पोषक तत्वों में इजाफा हो जाता है। वैसे क्रोमोथैरेपी में पीले रंग को आशावादी माना गया है। आइए जानते हैं पीले रंगों से युक्त फल और सब्जियों की उपयोगिता के बारे में। पपीता : इसे खाने से पेट की सफाई होती है। यह शरीर में विटामिन ए की कमी को पूरा कर त्वचा व आंखों के रोगों को दूर करता है। कद्दू : यह डायबिटीज और मोटापा कम करने के लिए फायदेमंद होता है। विटामिन ए से भरपू
इस अनोखे पेड़ के 5 तत्व बुखार, कफ, सूजन, पेटदर्द व कब्ज के लिए फायदेमंद, जानें इसके बारे में

इस अनोखे पेड़ के 5 तत्व बुखार, कफ, सूजन, पेटदर्द व कब्ज के लिए फायदेमंद, जानें इसके बारे में

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इस अनोखे पेड़ के 5 तत्व बुखार,कफ,सूजन,पेटदर्द व कब्ज के लिए फायदेमंद, जानें इसके बारे में आयुर्वेद के अनुसार अगस्त्य पेड़ शरीर से विषैले तत्वों को निकालने का काम करता है। इसके पंचांग (फूल, फल, पत्ते, जड़ व छाल) रस और सब्जी के रूप में प्रयोग होते हैं। इस पेड़ में आयरन, विटामिन, प्रोटीन, कैल्शियम व कार्बोहाईड्रेट पर्याप्त मात्रा में होते हैं। जानते हैं इसके फायदों के बारे में। पत्ते : बुखार, कफ, सूजन, फुंसियां, संक्रमण, पेटदर्द, कीड़े व कब्ज जैसे रोगों में इसके पत्तों का 1-2 चम्मच रस एक चम्मच शहद से लेने से लाभ होता है। फूल : इसके फूलों के एक गिलास रस को 1/4 होने तक गर्म करें। ठंडा होने पर प्रयोग करने से ऊपर दिए रोगों में फायदा होगा। फल, छाल और जड़ - 5-8 ग्राम गीली छाल को कूटकर 1-3 चम्मच शहद में मिलाकर सुबह-शाम लेने से भूख बढ़ती है और जुकाम-खांसी दूर होते हैं। इसके फलों का 4-5 चम्मच रस गर्म
अापका वजन तेजी से घट रहा है तो हो सकती है गंभीर बीमारी

अापका वजन तेजी से घट रहा है तो हो सकती है गंभीर बीमारी

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आमतौर पर फेफड़ों की बीमारी के रूप में चर्चित ट्यूबरक्लोसिस ऐसी बीमारी है जो संक्रमण से होती है। जब यह इंफेक्शन फैलोपियन ट्यूब से यूट्रस की लाइनिंग में फैल जाता है तो जननांगों की टीबी हो सकती है इसे पेल्विक टीबी कहते हैं। इस रोग से महिला की ओवरी, जननांग और सर्विक्स भी प्रभावित हो सकते हैं। लक्षण : इसके लक्षणों में इनफर्टिलिटी के अलावा अचानक वजन घटना, हल्का या तेज बुखार, पेल्विक(पेडू) में दर्द और हल्का पीला बदबूदार डिस्चार्ज होना शामिल हैं। जांच : विवाहित महिलाओं में सबसे जरूरी टेस्ट प्रीमेन्स्ट्रल बायोप्सी है जबकि अविवाहित युवतियों में मासिक रक्तस्राव से इसकी जांच होती है। इसके अलावा चेस्ट एक्सरे, यूरिन टेस्ट, लेप्रोस्कोपी और हिस्ट्रोस्कोपी (एंडोस्कोपिक प्रक्रिया) आदि टेस्ट किए जाते हैं। सावधानी : इस समस्या से पीड़ित महिला मां बन सकती है लेकिन गर्भावस्था के दौरान भी महिला को टीबी का इलाज कर