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प्रोबायोटिक का अत्याधिक इस्तेमाल मानसिक बीमारियों का बनता है कारण

प्रोबायोटिक का अत्याधिक इस्तेमाल मानसिक बीमारियों का बनता है कारण

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प्रोबायोटिक का अधिक इस्तेमाल अस्पष्टता और आत्मविस्मृति जैसी कई मानसिक बीमारियों का कारण बन सकता है। इसके साथ ही ये तेजी से पेट को फुला देता है। इसलिए भारतीय मूल के वैज्ञानिक सहित कुछ वैज्ञानिकों ने... Live Hindustan Rss feed
तुलसी के बीज के ये अनोखे फायदे, नहीं जानते होंगे आप

तुलसी के बीज के ये अनोखे फायदे, नहीं जानते होंगे आप

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तुलसी एक औषधीय पौधा है, जिसका हर हिस्सा कई दवाओं को बनाने के काम आता है। अधिकतर लोग इसके पत्तों के फायदों के बारे में ही जानते हैं, मगर आपको बता दें कि तुलसी के बीज भी कई शारीरिक समस्याओं का निदान कर... Live Hindustan Rss feed
इस हॉर्मोन से भरी एक बोतल भूख घटाकर आपको बनाएगी पतला

इस हॉर्मोन से भरी एक बोतल भूख घटाकर आपको बनाएगी पतला

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पतला होने के लिए लोग क्या-क्या नहीं करते, डाइटिंग, एक्सरसाइज, सप्लीमेंट्स कई चीजों की मदद लेते हैं। लेकिन बहुत कम लोगों को ही इस काम में सफलता मिल पाती है। कुछ लोग तो पतला होने के लिए सर्जरी तक का... Live Hindustan Rss feed
भारत में प्रत्येक 5 में 1 महिला PCOS से प्रभावित

भारत में प्रत्येक 5 में 1 महिला PCOS से प्रभावित

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पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) वाली महिलाओं से पैदा होने वाले बच्चों में ऑटिज्म होने की अधिक संभावना हो सकती है। एक अध्ययन से यह जानकारी सामने आई है। अध्ययन के मुताबिक, भारत में हर पांच में से एक महिला पीसीओएस से प्रभावित होती है। लड़कियों और महिलाओं के बीच पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) एक सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है, जिसके लिए सावधानीपूर्वक मूल्यांकन, समय पर हस्तक्षेप और उचित उपचार की आवश्यकता होती है। सही समय पर निदान न होने पर पीसीओएस महिलाओं को अन्य स्वास्थ्य जटिलताओं जैसे उच्च रक्तचाप, उच्च कोलेस्ट्रॉल, चिंता और अवसाद, स्लीप एप्निया, दिल का दौरा, मधुमेह और एंडोमेट्रियल, डिम्बग्रंथि व स्तन कैंसर के लिए कमजोर बना सकता है। आजकल, इस स्थिति के लिए एक अस्वास्थ्यकर आहार पैटर्न और बैठे रहने वाला जीवन प्रमुख जोखिम कारक बन गए हैं। पीसीओएस में इंसुलिन का स्तर भी सामान्य से अधिक स्तर
70 प्रतिशत माताओं के लिए स्तनपान रहा एक कठिन अनुभव : सर्वे

70 प्रतिशत माताओं के लिए स्तनपान रहा एक कठिन अनुभव : सर्वे

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देश में 70 प्रतिशत माताओं के लिए स्तनपान कराना एक कठिन अनुभव रहा। हाल ही में हुए एक सर्वे में इस बात का खुलासा हुआ है। मॉम्सप्रेसो और मेडेला द्वारा किए गए 'भारतीय माताओं के लिए स्तनपान चुनौतियां' शीर्षक वाले सर्वेक्षण के अनुसार, 78 प्रतिशत माताओं ने अपने बच्चों को एक वर्ष या उससे अधिक समय तक स्तनपान कराया है। स्तनपान कराने के लिए मुख्य उद्देश्य थे; स्तनपान के कारण बच्चे को स्वास्थ्य लाभ (98.6 फीसदी), माता और शिशु के बीच नजदीकी संबंध (73.4 फीसदी), स्तनपान कराने वाली मां का स्वास्थ्य लाभ (57.5 फीसदी) और स्तनपान के कारण वजन कम होना (39.7 फीसदी)। यह सर्वेक्षण महिलाओं के लिए भारत के सबसे बड़े यूजर जेनेरेटेड कंटेंट प्लेटफॉर्म मॉम्सप्रेसो और माताओं के दूध के बारे में शोधकर्ताओ के साथ काम करने वाली कंपनी मेडेला के सहयोग से किया गया। इस सर्वेक्षण में 510 भारतीय महिलाओं को शामिल किया गया। स्तनपान कर
सेहतमंद आदतों से हर दिन बनेगा गुड डे

सेहतमंद आदतों से हर दिन बनेगा गुड डे

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‘आदतें अच्छी हों या बुरी बनते-बनते बन ही जाती हैं। अच्छी आदतों और बुरी आदतों में यही फर्क है कि अच्छी आदतें सीखनी पड़ती हैं और बुरी आदतों को भुलाना पड़ता है।’ अच्छी आदतों में ही सच्ची सेहत छिपी है। पूरे दिन के 24 घंटों में 15 से 16 घंटों की सक्रियता को हम कैसे जीते हैं, यह सिर्फ आदतों पर ही निर्भर करता है। सारांश रूप में एक दिन के लिए 0 से लेकर 9 अंकों के क्रम में ये दस आदतें लाभकारी हो सकती हैं। 0 घंटे टीवी के नाम सेहतमंद जीवन चाहते हैं तो टीवी देखने की आदत को न्यूनतम कर लें और एक घंटे से कम करके शून्य पर ले आएं। ऑस्ट्रेलिया में की गई एक रिसर्च के मुताबिक रोजाना छह घंटे टीवी देखने से जीवन के 5 साल कम हो जाते हैं। टीवी देखने से 6 साल से कम उम्र के बच्चों के दिमाग पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। 1 घंटा करें एक्सरसाइज यदि आपको फिट शरीर और तेज दिमाग चाहिए तो कम से कम एक घंटा शरीर को
ये डाइट हैबिट्स आपके बच्चे को रखेंगी हैल्दी

ये डाइट हैबिट्स आपके बच्चे को रखेंगी हैल्दी

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इन दिनों बच्चों में बढ़ती फास्टफूड की आदत उनकी सेहत बिगाड़ रही है। ऐसे में जरूरी है कि उनकी आदतों मेंंं बदलाव किया जाए। लेकिन बच्चों की आदतों को बदलना मुश्किल है। इसलिए इनके खाने में पौष्टिक चीजों को बढ़ाएं। खानपान में कुछ खास बदलाव लाकर इनकी आदत को बदला जा सकता है। बच्चों को हैल्दी फूड खाना ऐसे सिखाएंदूध को शाकाहारियों का रक्षक भी कहा जाता हैं। सादा दूध देना बंद करें उसमें कोई फ्लेवर डाल दें। अगर बच्चा छोटा हो तो दूध को दलिया, सूजी की खीर आदि में मिलाकर दें। जूस व कोल्ड ड्रिंक आदि न दें और अगर देना भी पड़े तो उसमें थोड़ा पानी मिलाकर दें। शेक, टॉफी व चॉकलेट दिन में एक बार से ज्यादा न दें और कोशिश करें कि एक दिन में तीनों मीठी चीजें एक साथ ना दें। बिस्कुट, बर्गर, पिज्जा व चिप्स आदि ठोस पदार्थ दे सकती हैं लेकिन हर रोज इन्हें खिलाने से बचें। बच्चों को पौष्टिक चीजों को नई तरह से बनाकर देंगी तो
नर्वस सिस्टम को दुरूस्त रखेंगे ये फूड

नर्वस सिस्टम को दुरूस्त रखेंगे ये फूड

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नर्वस सिस्टम पर हमारे शरीर के कंट्रोल और विभिन्न आंतरिक अंगों के परस्पर कम्यूनिकेशन का दारोमदार होता है। इसलिए शरीर की कार्यप्रणाली को दुरूस्त रखने के लिए इसका मजबूत होना बेहद जरूरी है। कई बार इंज्यूरी, बीमारी या शरीर में पौष्टिक तत्वों की कमी की वजह से यह कमजोर या क्षतिग्रस्त हो जाता है। ऐसे में दवाओं के साथ-साथ इसे सपोर्ट देने वाला फूड लेना भी जरूरी है। ये फूड नव्र्स की कार्यप्रणाली को चुस्त दुरूस्त करने में मददगार होते हैं- दालचीनीयह नर्वस सिस्टम को रिजुवनेट करती रहती है और न्यूरोलॉजिकल्स डिसऑर्डर्स को दूर रखती है। क्रूसीफेरस वेजीटेबल्स ब्रोकोली, फूलगोभी और ब्रुसेल्स स्प्राउट में विटामिन बी-6 प्रचुर मात्रा में होता है। यह नर्व फंक्शन के लिए फायदेमंद होता है। हरी पत्तेदार सब्जियां पत्तेवाली हरी सब्जियां (पालक, मेथी अन्य साग) पोषक तत्वों व विटामिन बी कॉम्प्लेक्स, विटामिन सी, विटामिन ई, मै
‘ठीक है’ कहकर ना बढ़ाएं मर्ज

‘ठीक है’ कहकर ना बढ़ाएं मर्ज

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अक्सर महिलाएं अपनी सेहत को लेकर ठीक है कहकर लापरवाही बरतती हैं। उनका तर्क होता है कि घरेलू इलाज से आराम मिल जाता है तो दवाइयों का बिल क्यों बढ़ाएं। लेकिन सामान्य दिखने वाली ये परेशानियां किसी गंभीर रोग के लक्षण भी हो सकते हैं। इसलिए इन लक्षणों की समय पर जांच और जल्द इलाज करा लेना चाहिए। सिरदर्द : हर 2-4 दिन में सिर में भारीपन लगना, दर्द रहना, कभी आधे तो कभी पूरे सिर में दर्द। आशंका : पाचन तंत्र की गड़बड़ी, आंखों की कमजोरी, माइग्रेन, ट्यूमर या न्यूरोलॉजिकल समस्या। किसे दिखाएं : फिजिशियन को दिखाएं। अगर बीमारी न्यूरो की होगी तो वे आपको रैफर कर देंगे। बदनदर्द : शरीर टूटना, थकान। आशंका : आयरन, कैल्शियम, विटामिन की कमी या किसी रोग के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं। किसे दिखाएं :स्त्री रोग विशेषज्ञ या फिजिशियन के पास जाएं। पेटदर्द : पेट के किसी खास हिस्से में लगातार हल्का दर्द रहना, पेट खराब रहना, माह
बासी खाने और तनाव से बढ़ती है एसिडिटी

बासी खाने और तनाव से बढ़ती है एसिडिटी

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खानपान में लापरवाही और तनाव जैसे कई कारणों से एसिडिटी हो सकती है। एसिडिटी में व्यक्ति दिनभर असहज महसूस करता है, शरीर सुस्त रहता है और किसी काम में मन नहीं लगता इसलिए इसे खुद पर हावी ना होने दें । बासी खाना ना खाएं ब्रिटिश डाइटेटिक एसोसिएशन की पूर्व प्रमुख डाइटीशियन लुसी डेनियल के अनु सार जो लोग अक्सर बाहर भोजन करना पसंद करते हैं, उन्हें यह समस्या अधिक होती है । आमतौर पर रेस्तरां में पास्ता, चावल या आलू उबालकर रख लिया जाता है और ग्राहकों को बार-बार वही गर्म करके सर्व किया जाता है । स्टार्चयुक्त चीजों को अगर बार-बार गर्म किया जाए तो उसके अणुओं की संरचना बदलने लगती है । ऐसे में जब हम इन्हें खाते हैं तो गैस बनती है। घर में भी बासी खाने को बार-बार गर्म करके ना खाएं । तनाव भी है वजह बाउल मूवमेंट अनियमित होने से व्यक्ति का मिजाज पूरे दिन चिड़चिड़ा बना रहता है । वहीं, स्ट्रेस होने के कारण भी खानपा