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अधूरी नींद से बढ़ती हैं कई बीमारियां

अधूरी नींद से बढ़ती हैं कई बीमारियां

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यूं तो नींद न आने के कई कारण हो सकते हैं। लेकिन नींद न आने से शरीर में कई दिक्कतें बढ़ सकती हैं। कैफीन या एल्कोहल लेना, धूम्रपान करना, सोने का समय निर्धारित न होना, देर रात तक इलेक्ट्रॉनिक गैजेट का इस्तेमाल भी नींद को प्रभावित करते हैं। ऐसे में इनमें बचें ताकि अन्य बीमारियों का खतरा कम किया जा सके। ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया के दौरान रक्त के ऑक्सीजन स्तर में अचानक कमी आना और ब्लड प्रेशर बढऩा सरीखी समस्याएं पैदा हो जाती हैं। इससे ग्रस्त लोगों में उच्च रक्तचाप की समस्या होती है, जिससे हृदय संबंधी रोग होने की आशंका बढ़ जाती है। यह रोग जितना गंभीर होगा, दिल का दौरा पडऩा, हृदय की धडक़न रुक जाना और स्ट्रोक होने का जोखिम उतना ही बढ़़ जाता है। अवसादअवसाद या डिप्रेशन का एक बड़ा कारण अधूरी नींद या अनिद्रा भी है। सही समय पर ध्यान ना देने के कारण उनमें चिड़चिड़ाहट, भूख ना लगन
कंधे के दर्द को न बनाएं असहनीय

कंधे के दर्द को न बनाएं असहनीय

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आज की व्यस्त जीवनशैली में छोटे-मोटे दर्द को नजरअंदाज करना हमारी आदत बनती जा रही है। कई बार यह आदत बीमारियों का कारण भी बन जाती है। उन्हीं में से एक है कंधे में दर्द (शोल्डर पेन)। गठिया, दुर्घटना होने या मांसपेशियों के फटने के कारण कंधे के इलाज व गंभीर समस्या होने पर सर्जरी की जरूरत पड़ती है। कंधे की समस्या में शुरुआती लक्षण हल्का दर्द होता है। धीरे-धीरे मूवमेंट कम होना (फ्रोजन शोल्डर), मांसपेशियों के फटने से हाथ ठीक से न उठ पाना (रोटेटर कफ टियर), कंधा बार-बार उतरना (रिकरेंट डिसलोकेशन शोल्डर) जैसी परेशानियां भी होने लगती हैं। कंधे, कूल्हे व घुटने को पूरी तरह से प्रत्यारोपित किया जा सकता है। इसलिए ऐसा होने पर तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क कर सलाह लें। कंधे में दर्ददर्द का कारण पता लगाए बिना वजह नहीं बतायी जा सकती। कई बार दुर्घटना होने पर कंधा फ्रेक्चर हो जाता है। ऐसे में ठीक से देखभाल न मिलने या
वृद्धावस्था को कैसे बनाएं वरदान, जानें इसके बारे में

वृद्धावस्था को कैसे बनाएं वरदान, जानें इसके बारे में

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वृद्धावस्था का भय केवल आज की समस्या नहीं है बल्कि हजारों वर्ष पहले रचित आयुर्वेद ग्रंथ चरक संहिता में भी इसके संकेत मिलते हैं। चरक संहिता के रसायन प्रकरण में वर्णित ‘पंचमहरीतक्यादि’ योग का एक प्रयोजन वृद्धावस्था के भय से मुक्ति भी है। च्यवन ऋषि की वृद्धावस्था दूर करने के कारण ही च्यवनप्राश एक श्रेष्ठ रसायन के रूप में प्रसिद्ध हुआ। आयुर्वेद के आठ अंगों में से एक शाखा रसायन, वृद्धावस्था को दूर करने पर ही केंद्रित है। शांर्गधर संहिता के अनुसार सौ वर्ष की जिंदगी के अंतिम ३ दशक में क्रमश: विक्रम, ज्ञानेन्द्रिय के कर्मों का क्षय व कर्मेन्द्रियों के कार्य का ह्रास होता है। चरक के अनुसार वृद्धावस्था में इन्द्रिय, बल, पौरुष, पराक्रम, ग्रहण, धारण व स्मरणशक्ति प्रभावित होते हंै। नींद कम आती है। शुक्रक्षय के ८ कारणों में वृद्धावस्था भी शामिल है। जठराग्नि कम होने से भोजन कम मात्रा में खाया
सावधान रहिए सर्वाइकल कैंसर से

सावधान रहिए सर्वाइकल कैंसर से

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कैंसर के प्रकारों में पांचवा सबसे सामान्य कैंसर सर्वाइकल कैंसर है। ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) की वजह से यह कैंसर होता है। सर्वाइकल कैंसर महिला के जीवन में उत्पादक अवधि के दौरान जोर पकड़ता है। ऐसे मामले 30-34 साल की उम्र में होते हैं और 55-65 साल की उम्र में सबसे अधिक देखने को मिलते हैं। यौन संबंधों को लेकर सक्रिय महिलाएं 50 वर्ष की उम्र तक आते-आते आनुवांशिक एचपीवी का शिकार हो जाती हैं। कम उम्र में खतराग्रामीण भारत में सर्वाइकल कैंसर की जांच पर केंद्रित एक आईएआरसी परियोजना के प्रमुख जांचकर्ता डॉ. रंगास्वामी शकरनारायणन बताते हैं, ‘सर्वाइकल कैंसर महिलाओं को बहुत कम उम्र में प्रभावित कर रहा है। विकासशील देशों में ऐसी तकनीकें व सस्ते परीक्षण उपकरण मौजूद हैं जिनसे सर्वाइकल कैंसर से होने वाली मौतों की संख्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है। समय रहते हो बचावनियमित परीक्षण से महिलाएं आसा
सुबह खाली पेट लहसुन खाने के होते हैं ये 5 फायदे

सुबह खाली पेट लहसुन खाने के होते हैं ये 5 फायदे

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लहसुन खाने के अनेक फायदे है। आयुर्वेद में तो लहसुन को औषधि माना गया है। कहा जाता है कि किसी न किसी रूप में लहसुन को अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए। लेकिन सुबह-सवेरे खाली पेट लहसुन खाने के बहुत... Live Hindustan Rss feed
सावधान: सार्वजनिक शौचालय का प्रयोग करते हैं तो हो सकते हैं बीमार

सावधान: सार्वजनिक शौचालय का प्रयोग करते हैं तो हो सकते हैं बीमार

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हम जब भी घर से बाहर जाते हैं और सार्वजनिक शौचालय इस्तेमाल करना पड़ता है तो हमेशा संक्रमण का खतरा बना रहता है। क्योंकि शौचालय में मौजूद कम्मोड (टॉयलेट सीट) पर कई तरह के कीटाणु होते हैं। बता दें कि... Live Hindustan Rss feed
बच्चों को स्वीमिंग सिखाते समय इन बातों का रखें ध्यान

बच्चों को स्वीमिंग सिखाते समय इन बातों का रखें ध्यान

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गर्मियों की छुट्टियों के दौरान सभी अभिभावक अपने बच्चों को कुछ नया सिखाना चाहते हैं और उन्हें कुछ अच्छी एक्टिविटीज में व्यस्त रखना चाहते हैं। उनमें से एक तैराकी यानी स्वीमिंग को हमेशा से अच्छा व्यायाम माना जाता रहा है। इस तरह की एक्टिविटीज न केवल बच्चों को शारीरिक रूप से फिट रखती हैं, बल्कि उनकी मानसिक क्षमता के विकास में भी मदद करती हैं। वास्तव में स्वीमिंग स्पोट्र्स से कहीं बढ़ कर है, यह न केवल जीवन का एक कौशल है बल्कि ऐसा व्यायाम है जो हमें कई तरह की बीमारियों से बचा कर रखता है। जहां एक ओर तैराकी सेहत के लिए बेहद फायदेमंद हैं, वहीं दूसरी ओर अगर इसे सही तरीके से न किया जाए तो यह नुकसानदायक भी साबित हो सकती है। तैराकी करते समय कुछ विशेष नियमों को हमेशा ध्यान में रखना चाहिए, खासतौर पर तब जब आप अपने छोटे बच्चों को तैराकी सिखाने जा रहे हैं। पूल के बाहर और भीतर हमेशा कुछ निर्देशों का पालन करें
ज्यादा नमक खाने से हो सकती है मृत्यु, जानें कैसे

ज्यादा नमक खाने से हो सकती है मृत्यु, जानें कैसे

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ब्रिघम और महिला अस्पताल द्वारा प्रकाशित किए गए एक शोध में खुलासा हुआ है कि आहार में नमक (सोडियम) का ज्यादा सेवन करने से मृत्यु का खतरा बढ़ सकता है। शोधकर्ता नैंसी कुक ने कहा कि शरीर में सोडियम की... Live Hindustan Rss feed