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Tag: उपचार

चिकनपॉक्स का उपचार करें, झाड़-फूंक के चक्कर में न पड़ें, जानें ये खास बातें

चिकनपॉक्स का उपचार करें, झाड़-फूंक के चक्कर में न पड़ें, जानें ये खास बातें

Health
चिकनपॉक्स वेरीसेला जोस्टर नामक वायरस से होने वाली समस्या है। यह एक प्रकार का संक्रामक रोग है जो खांसने, छींकने, छूने या रोगी के सीधे संपर्क में आने से फैलता है। अधिकतर पीड़ित बच्चे - नवजात से लेकर 10-12 साल की उम्र के बच्चों को चिकनपॉक्स की समस्या ज्यादा होती है लेकिन कई मामलों में ये इससे अधिक उम्र के लोगों को भी हो सकती है। एक बार यह रोग होने और इसका पूरा इलाज लेने के बाद इसके दोबारा होने की आशंका कम हो जाती है लेकिन 50 वर्ष से अधिक आयु वाले लोगों को कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता के कारण यह बीमारी फिर से हो सकती है। इसके अलावा गर्भवती महिलाएं, कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग, लंबे समय से किसी बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति और चिकनपॉक्स से पीडि़त मरीज के सीधे संपर्क में आने से भी यह रोग हो सकता है।   डॉक्टरी सलाह जरूरी - मरीज को यदि चिकनपॉक्स के साथ बैक्टीरिया का संक्रमण, मेनिनजाइटिस (दिम
नियमित जांच व उपचार से रोकें अंधापन

नियमित जांच व उपचार से रोकें अंधापन

Health
ग्लूकोमा को कालापानी भी कहते हैं जो अंधेपन का दूसरा सबसे बड़ा कारण है। यह आनुवांशिक रोग है लेकिन सावधानी रखकर इससे बचा जा सकता है। यह ऐसी बीमारी है जिसमें आंख की नस (ऑप्टिक नर्व) की कोशिकाएं धीरे-धीरे नष्ट होने लगती हैं। अधिकतर मरीजों में यह समस्या आंख के अंदर का प्रेशर (इंट्रा ऑकुलर प्रेशर) बढ़ने से होती है। वहीं कुछ मरीजों में नसों में रक्त का प्रवाह करने वाली छोटी-छोटी शिराओं के दबाव से या अन्य कारणों से भी ऑप्टिक नर्व को नुकसान हो सकता है। यदि इसका इलाज समय पर न हो तो ऑप्टिक नर्व प्रभावित हो सकती है। ग्लूकोमा के प्रकार - ओपन एंगल ग्लूकोमा : इसमें आंख का प्रेशर धीरे-धीरे बढ़ता है व मरीजों को अक्सर अपनी बीमारी का अहसास नहीं होता। इलाज न होने पर यह अंधेपन का कारण भी बन सकता है। इसमें एंटीग्लूकोमा आई ड्रॉप द्वारा ग्लूकोमा को नियंत्रित कर सर्जरी को टाला जा सकता है। लेकिन रोशनी चली गई हो तो
लेपर्ड जूलियट के पांव में लगी चोट, उपचार कर रखा गया निगरानी में

लेपर्ड जूलियट के पांव में लगी चोट, उपचार कर रखा गया निगरानी में

Rajasthan
इंटरनेट डेस्क। राजस्थान की राजधानी जयपुर के झालाना रिजर्व पार्क में ;लेपर्ड जूलियट कई दिनों से दिखाई नहीं दे रही थी, जिसके चलते वन्यजीव प्रेमियों सहित वन विभाग के अधिकारी चिंता में नजर आ रहे थे। ऐसे में अब वन्यजीव प्रेमियों और वन विभाग के अधिकारियों के लिए खुशी की बात सामने आई है और वो यह ही लेपर्ड जूलियट एक बार फिर वन्यजीव प्रेमियों की नजर के सामने आई। लेकिन अब जो चिंता की बात सामने आई है वो यह की लेपर्ड जूलियट के पांव में चोट लगी हुई और ऐसे में उसका उपचार किया जा रहा है। रेंजर जनेश्वर सिंह ने इस मामले में बताया कि फीमेल लेपर्ड के उपचार के लिए वन विभाग के कर्मचारियों ने बुधवार को पिंजरा लगाया था जिसके बाद जूलियट आधी रात बाद पिंजरे में कैद हुई। बाघ टी-98 रणथंभौर से 150 किलोमीटर का सफर तय कर पहुंचा मुकुंदरा उन्होंने आगे इस मामले में बताया कि लेपर्ड जूलियट के पिछले पैर मेंचोट लगी थ
आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए जान लें ये आयुर्वेदिक उपचार

आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए जान लें ये आयुर्वेदिक उपचार

Health
यूं तो शरीर का हर एक अंग महत्वपूर्ण होता है लेकिन आंखों के बिना जीवन अधूरा लगता है। आयुर्वेद के ग्रंथों में नेत्र रक्षा के विभिन्न उपायों का वर्णन किया गया है। आइए जानते हैं उनके बारे में। हरीतकी, बहेड़ा और आंवला का नियमित प्रयोग नेत्र ज्योति को बढ़ाता है। इन तीनों चूर्ण के मिश्रण की 3-6 ग्राम मात्रा रोजाना ली जा सकती है। त्रिफला के क्वाथ से रोजाना आंखों को धोने से नेत्र रोग दूर होते हैं। त्रिफला क्वाथ को शहद या घी के साथ लेने से भी नेत्र रोगों में लाभ होता है। त्रिफला चूर्ण को एक भाग घी व तीन भाग शहद के साथ लेने से लाभ होता है। रोजाना एक चम्मच शहद खाने से भी आंखों की रोशनी दुरुस्त रहती है। लेकिन ध्यान रहे कि शहद शुद्ध हो।सुश्रुत संहिता के अनुसार रतौंधी यानी रात के अंधेपन के लिए अगस्त्य वृक्ष के फूल उपयोगी होते हैं। इन फूलों को पानी में भिगो दें कुछ देर बाद इन्हें मसलकर बंद आंखों पर रखें।
बवासीर के उपचार के लिए कारगर है ये दवा

बवासीर के उपचार के लिए कारगर है ये दवा

Health
अगर पाइल्स होने की वजह कब्ज है तो रोगी को उठने-बैठने में तकलीफ, दर्द और रक्तस्राव होता है। इसके लिए पेट साफ करने के लिए एस्क्यूलस दवा और ओइंटमेंट प्रयोग करने के लिए दिया जाता है। लगातार कब्ज रहने की वजह से पाइल्स (बवासीर) की समस्या होती है। इस रोग में मलद्वार के आंतरिक और बाहरी हिस्से पर सूजन व फुंसियां हो जाती हैं जो कई बार गंभीर रूप ले लेती हैं। आइए जानते हैं इसकी प्रमुख वजहों और होम्योपैथिक इलाज के बारे में। वजह : अनियमित दिनचर्या, लंबे समय से कब्ज रहना, दवाओं के दुष्प्रभाव, हाई ब्लड प्रेशर, तनाव और जंकफूड की अधिकता से पाइल्स की समस्या होती है। स्टेज : इस बीमारी की चार स्टेज होती हैं। पहली में इसका पता नहीं चलता। दूसरी स्टेज में थोड़ा रक्तस्राव होता है। इसकी पहली और दूसरी स्टेज का इलाज दवाओं से किया जाता है। तीसरी स्थिति में पाइल्स बढऩे लगती है और रक्तस्राव अधिक होता है। चौथी स्थिति मे
कम्प्यूटर विजन सिंड्रोम में डॉक्टर की सलाह से लें उपचार

कम्प्यूटर विजन सिंड्रोम में डॉक्टर की सलाह से लें उपचार

Health
कम्प्यूटर विजन सिंड्रोम आंखों से जुड़ी एक ऐसी समस्या है जो कि घंटों लगातार लैपटॉप या कम्प्यूटर के सामने बैठने से होती है। इसका समय पर इलाज न हो तो दृष्टि दोष की समस्या हो सकती है। कारण :कम्प्यूटर रूम में सुनियोजित प्रकाश की व्यवस्था न होना, स्क्रीन के ज्यादा नजदीक बैठना, कम्प्यूटर के सामने अत्यधिक प्रकाश वाले बल्ब का उपयोग करना या लैपटॉप पर काम करते समय फोंट काफी छोटा रखने की वजह से कम्प्यूटर विजन सिंड्रोम की समस्या हो सकती है। लक्षण :आंखों में दर्द के साथ लालिमा, सूखापन, आंखों के नीचे घेरे बनना, दोहरा दिखाई देना, विभिन्न रंगों में फर्क न कर पाना, सामान्य और तेज प्रकाश के सामने आंखों का चौंध जाना, गर्दन में दर्द, सिरदर्द और असमय कमरदर्द होना। होम्योपैथी चिकित्सा कम्प्यूटर विजन सिंड्रोम और इससे होने वाली अन्य समस्याओं से निजात पाने के लिए प्रभावी हो सकती है। आइए जानते हैं इसमें प्रयोग होने
सही समय पर उपचार से ठीक हाे सकता है कुष्ठ राेग

सही समय पर उपचार से ठीक हाे सकता है कुष्ठ राेग

Health
लेप्रेसी या कुष्ठ रोग (कोढ़) के शिकार अधिकतर वे लोग होते हैं जो सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं। यह एक संक्रामक रोग है जो एक व्यक्ति से दूसरे में फैलता है। जानते हैं इसके प्रमुख कारणों के बारे में। प्रमुख कारणयह बीमारी माइक्रोबैक्टीरियम लेप्रई के कारण होती है जो सबसे पहले तंत्रिका तंत्र पर आक्रमण करता है। इससे त्वचा और पैरों में स्थित तंत्रिकाएं विशेष रूप से प्रभावित होती हैं और इनमें सूजन आ जाती है। तंत्रिकाएं अक्रियाशील हो जाती हैं जिसके परिणामस्वरूप उस क्षेत्र की त्वचा की संवेदनशीलता समाप्त हो जाती है। जिन क्षेत्रों की तंत्रिकाएं प्रभावित होती हैं, वहां की मांसपेशियों की शक्ति भी धीरे-धीरे कम होने लगती है। अधिक भीड़-भाड़ और गंदगी वाले इलाकों में यह रोग तेजी से फैलता है। जिन लोगों का रोग-प्रतिरोधक तंत्र बेहतर होता है उनमें इस रोग की तीव्रता कम होती है या उनके शरीर के कम क्षेत्रों
अब उपचार में तंग गलियां नहीं बनेंगी बाधा, जल्द से जल्द लोगों तक पहुंचेंगी बाइक एंबुलेंस

अब उपचार में तंग गलियां नहीं बनेंगी बाधा, जल्द से जल्द लोगों तक पहुंचेंगी बाइक एंबुलेंस

Delhi
अब राजधानी की तंग गलियां लोगों को जल्द उपचार मिलने में बाधा नहीं बनेंगी। इसके लिए बाइक एंबुलेंस की शुरुआत की गई है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 16 बाइक एंबुलेंस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस मौके पर स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन भी मौजूद थे। बाइक एंबुलेंस एक साल के पायलट प्रोजेक्ट के तहत शुरू की गई हैं और अभी ईस्ट दिल्ली के इलाकों में चलेंगी। एंबुलेंस को हरी झंडी दिखाते हुए मुख्यमंत्री केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली सरकार स्वास्थ्य और चिकित्सा सेवाओं के क्षेत्र में लगातार और तेजी से काम कर रही है। अब तक बड़ी एंबुलेंस मेडिकल सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए जाती थीं। कैट्स के अधिकारी लक्ष्मण सिंह ने कहा कि बाइक एंबुलेंस होने से तंग गलियों में रहने वाले लाेगों का रिस्क कम होगा। कई बार बड़ी एंबुलेंस तंग गली में मौजूद घर तक नहीं पहुंच पाने की वजह से मरीज की हालत ज्यादा बिगड़ जात
जानें साइनस के लक्षण और आयुर्वेदिक उपचार

जानें साइनस के लक्षण और आयुर्वेदिक उपचार

Health
कुछ बीमारियां ऐसी होती हैं, जिनके लक्षण बेहद मामूली होते हैं। साइनोसाइटिस यानी साइनस ऐसी ही बीमारी है। थोड़ी सी सावधानी इसके लक्षण पहचानने और इसके इलाज में भरपूर मदद करेगी। आयुर्वेद में क्या-क्या हैं... Live Hindustan Rss feed
अगर हो जाए स्लिप डिस्क, एेसे करें उपचार, बरतें ये सावधानियां

अगर हो जाए स्लिप डिस्क, एेसे करें उपचार, बरतें ये सावधानियां

Health
हमारी रीढ़ करीब 34 छोटी-छोटी हड्डियों (वर्टिब्रा) से मिलकर बनती है। दो वर्टिब्रा के बीच एक गद्देदार उत्तक होता है जिसे इन्टरवर्टिब्रलडिस्क कहते हैं। डिस्कदो वर्टिब्रा को आपस में रगड़ खाने से रोकती है। बढ़ती उम्र और गलत तरीके से उठने-बैठने से डिस्कमें बदलाव आते हैं, उसे स्लिपडिस्क कहा जाता है। कहते हैं कि डिस्कखिसक गई है। डिस्कके खिसक जाने से आस-पास निकलने वाली नर्वस पर दबाव पड़ता है, इससे निम्न परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं- कमर से लेकर एक पंजे तक करंट जैसा दर्द, पैर में सूनापन, पंजे या पैर के अंगूठे में कमजोरी आना, गंभीर परिस्थितियों में पेशाब में रुकावट। उपचार - साधारणत : स्लिपडिस्क का दर्द आराम करने, व्यायाम और दर्द निवारक दवा से ठीक हो जाता है। 6 हफ्ते में दर्द ठीक न हो तो कमर में एक छोटे से चीरे से डिस्कके नस को दबाने वाले हिस्से को निकाल दिया जाता है। ध्यान रखें समय पर ऑपरेशन से पैरो