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Asthma: अस्थमा में राहत के लिए कारगर है ये थैरपी, जानें इसके बारे में

Asthma: अस्थमा में राहत के लिए कारगर है ये थैरपी, जानें इसके बारे में

Health
asthma : बच्चों व बड़ों के अस्थमा में फर्क होता है ? बच्चों व वयस्कों में अस्थमा एक जैसा ही होता है। दोनों में एलर्जंस (एलर्जी के कारक) के कारण सांस की नली सिकुड़ जाती है और सूजन आ जाती है। ऐसे में बलगम बनने और सांस लेने में दिक्कत होती है। अस्थमा से जुड़ी गलतफहमी क्या हैं ?ज्यादातर लोग सोचते हैं कि बच्चे के बड़े होने पर यह समस्या खत्म हो जाएगी। कुछ को लगता है कि एलर्जंस से दूर रहकर इससे बचा जा सकता है। साथ ही इंहेलर को आखिरी इलाज के तौर पर भी देखते हैं। स्टेरॉयड को लेकर लोगों में क्या भ्रम है ?लोगों को लगता है कि इंहेलर में पाए जाने वाले स्टेरॉयड से बच्चे का विकास रुक जाएगा जबकि ये सिर्फ भ्रम है। कॉर्टिकोस्टेरॉयड का बच्चे के विकास से कोई संबंध नहीं है। इंहेलर में मौजूद कॉर्टिकोस्टेरॉयड शरीर में प्राकृतिक रूप से भी बनता है जो सूजन को कम करता है। अस्थमा का समय रहते इलाज न हो तो बच्चे का व
हिन्दुस्तान विशेष: सफेद दाग की नई हर्बल दवा ज्यादा कारगर होगी

हिन्दुस्तान विशेष: सफेद दाग की नई हर्बल दवा ज्यादा कारगर होगी

India
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने सफेद दाग यानी ल्यूकोडर्मा के इलाज  की दवा का मार्क-2 संस्करण तैयार किया है। डीआरडीओ कुछ साल पहले भी इस रोग की हर्बल दवा बाजार में ला चुका है। अब इस... Live Hindustan Rss feed
कई बीमारियों में कारगर है कंकोड़ा

कई बीमारियों में कारगर है कंकोड़ा

Health
नरम बीजवाले कंकोड़ा का ही सब्जी के रूप में प्रयोग करना चाहिएबड़े बेर जैसे गोल एवं बेलनाकार, बारीक कांटेदार, हरे रंग के कंकोड़ा वर्षा ऋतु में मिलते हैं। ये प्रायः पथरीली जमीन पर उगते हैं एवं एक दो महीने के लिए ही आते हैं। अंदर से सफेद एवं नरम बीजवाले कंकोड़ा का ही सब्जी के रूप में प्रयोग करना चाहिए। इसका स्वाद में कड़वे कसैले, कफ एवं पित्तनाशक, रूचिकर्ता, शीतल, वायुदोषवर्धक, रूक्ष, मूत्रवर्धक, पचने में हलके जठराग्निवर्धक एवं शूल, खाँसी, श्वास, बुखार, कोढ़, प्रमेह, अरुचि पथरी तथा हृदयरोगनाशक है।पत्तों का लेप लाभप्रदकंकोड़ा की सब्जी बुखार, खांसी, श्वास, उदररोग, कोढ़, त्वचा रोग, सूजन एवं मधुमेह के रोगियों के लिए ज्यादा हितकारी है। श्लीपद (हाथीपैर) रोग में भी खेखसा का सेवन एवं उसके पत्तों का लेप लाभप्रद है। जो बच्चे दूध पीकर तुरन्त उलटी कर देते हैं, उनकी माताओं के लिए भी कंकोड़ा की सब्जी का सेव
पाचन व पेट संबंधी समस्याओं के लिए कारगर हैं ये घरेलू उपाय

पाचन व पेट संबंधी समस्याओं के लिए कारगर हैं ये घरेलू उपाय

Health
अपच, कब्ज और गैस बनने जैसे पेट के रोगों को आसानी से दूर किया जा सकता है, जानें कैसे- एलोवेरा : इसका नियमित सेवन करने से पेट से जुड़ी बीमारियां दूर होती हैं। खाली पेट एलोवेरा का जूस पीने से पेट की कई बीमारियां खत्म हो जाती हैं। यह शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालकर इम्युनिटी बढ़ाता है। एलोवेरा के गूदे में सेंधा नमक मिलाकर लेने से खाना न पचने की समस्या से निजात मिलती है। सौंफ : भुनी हुई व बिना भुनी सौंफ रोजाना खाने से पेट में गैस नहीं बनती। साथ ही बदहजमी की समस्या भी दूर होती है। अदरक : अदरक को छीलकर इसका रस निकालें। इसमें नींबू की कुछ बूंदें डालकर रोजाना पीने से फायदा होता है। अदरक के टुकड़ों पर काला नमक लगाकर चूसने से भी अपच की शिकायत दूर होती है। दालचीनी : एक कप पानी में आधा चम्मच दालचीनी डालकर उबालें। पानी आधा रह जाने पर इसे ठंडा कर पी लें, हाजमा दुरुस्त रहेगा। Patrika : India's Le
एलर्जी व मुंहासे में कारगर हरिद्रा खण्ड

एलर्जी व मुंहासे में कारगर हरिद्रा खण्ड

Health
एंटी एलर्जिक व एंटी माइक्रोबियल गुणों से भरपूर है उपयोग : हरिद्रा खण्ड त्वचा पर पित्ती (अर्टिकेरिया) की कारगर दवा है। यह एलर्जिक चर्म रोग व जुकाम, खुजली, एक्जिमा, मुंहासे घटाकर त्वचा पर चमक लाता है। सामग्री : हरिद्रा खण्ड घर पर आसानी से बना सकते है। मुख्य द्रव्य : हल्दी पाउडर 400 ग्राम, गाय-घी 300 ग्राम, गाय-दूध 3 लीटर, मिश्री 2.5 किग्रा। प्रक्षेप द्रव्य : सोंठ, काली-मिर्च, पिप्पली, तेज पत्र, छोटी इलायची, दालचीनी, वायविडंग, निशोथ, नागकेशर, नागर मोथा, हरड़, बहेड़ा व आंवला (सभी प्रत्येक 48 ग्राम)। विधि : एक पात्र में घी गर्म कर हल्दी पाउडर को 2-3 मिनट धीमी आंच पर भूनें। एक अन्य बर्तन में उबले दूध में मिस्री मिला लें। दूध में भुनी हल्दी डालें व धीमी आंच पर इसे गाढ़ा होने दें। जब मिश्रण गिलास में डालने पर पेंदे में जम जाए तथा सुगंध आए तो उतारें। अब इसमें सभी प्रक्षेप डालें और मिलाएं। इसे 3-6 ग
कैंसर के इलाज में कारगर है स्टीरियोटैक्टिक रेडियोसर्जरी, जानें इसके बारे में

कैंसर के इलाज में कारगर है स्टीरियोटैक्टिक रेडियोसर्जरी, जानें इसके बारे में

Health
क्या है स्टीरियोटैक्टिक रेडियो सर्जरी इसमें इलाज से पूर्व एवं उसके दौरान कम्प्यूटर पर जीपीएस तकनीक की मदद से कैंसरग्रस्त कोशिकाओं एवं ट्यूमर की सही स्थिति का पता लगाकर सिर्फ प्रभावित हिस्से पर ही शक्तिशाली एक्स-रे से हाई डोज रेडिएशन देते हैं। सामान्य रेडियो सर्जरी में आधे से एक घंटे का समय लगता है जबकि इस तकनीक में रेडिएशन का एक सेशन 15 से 30 मिनट में पूरा हो जाता है। मरीज की स्थिति व कैंसर के फैलाव के अनुसार सेशन की संख्या (लगभग 1 से 5) व अवधि में बदलाव संभव। इसमें किसी तरह की चीर-फाड़ न होने से मरीज जल्द ही सामान्य दिनचर्या शुरू कर सकता है। इलाज का असर जांचने के लिए ट्रीटमेंट के तीन महीने बाद सीटी, एमआरआइ व पैट स्कैन करवाकर देखते हैं कि कैंसर कहां तक खत्म हुआ है। साइड इफेक्ट कब साइडइफेक्ट की आशंका तभी रहती है जब रेडिएशन की हाई डोज किन्हीं कारणों से सही हिस्से के अलावा दूसरी जगह पर भी दे
कई समस्याओं में कारगर हैं अजवाइन

कई समस्याओं में कारगर हैं अजवाइन

Health
पाचन प्रक्रिया को रखता सुचारूपाचन प्रक्रिया को ठीक रखने के लिए अजवाइन और हरड़ को बराबर मात्रा में पीस लें। हींग और सेंधा नमक स्वादानुसार मिलाकर चूर्ण बना कर किसी बोतल में भर लें। इस चूर्ण का एक चम्मच गर्म पानी के साथ लें। 10 ग्राम पुदीने का चूर्ण, 10 ग्राम अजवाइन और 10 ग्राम कपूर एक साफ बोतल में डालकर धूप में रखें। तीनों चीजें गलकर पानी बन जाएंगी। इसकी 5-7 बूंदें बताशे के साथ खाने से मरोड़, पेट दर्द, जी मिचलाने जैसी समस्या में लाभ होगा।पेटदर्द : अजवाइन, छोटी हरड़, सेंधा नमक व सोंठ को मिलाकर चूर्ण बना लें। 2-3 ग्राम की मात्रा में छाछ या गर्म पानी के साथ लें। गैस बने तो भोजन के बाद 125 ग्राम दही में 3 ग्राम अजवाइन, 2 ग्राम सोंठ व आधा ग्राम काला नमक मिलाकर ले सकते हैं।खांसी : अजवाइन 1 ग्राम, मुलेठी 2 ग्राम व काली मिर्च 2 ग्राम का काढ़ा बनाकर रात में सोने से पहले लें। कफ वाली पुरानी खांसी में अज
कई रोगों में कारगर है जीरा

कई रोगों में कारगर है जीरा

Health
बवासीर में मिलता लाभ मट्ठे में पिसी हींग, जीरा और सेंधा नमक डालकर पीने से गैस और बवासीर में लाभ होता है। जीरा पानी में पीसकर बवासीर के मस्सों पर लगाएं तो और शीघ्र लाभ होगा।जीरा रसोई के अहम मसालों के साथ आयुर्वेदिक दवा भी है। यह भूख घटना और पाचन सम्बंधी समस्या दूर करता है। साथ ही यह कई बीमारियों से निजात दिलाता है। मट्ठे में पिसी हींग, जीरा और सेंधा नमक डालकर पीने से गैस और बवासीर में लाभ होता है। जीरा पानी में पीसकर बवासीर के मस्सों पर लगाएं तो और शीघ्र लाभ होगा।काला नमक 1 ग्राम, अजवायन चूर्ण 1 ग्राम, चीनी 5 ग्राम व नींबू का रस मिलाकर लेने से रुका हुआ यूरिन खुल जाता है। इसे दिन में तीन बार लें।हिस्टीरिया के रोगी को गुनगुने पानी में नींबू, नमक, जीरा, भुनी हुई हींग और पुदीना मिलाकर पिलाने से लाभ मिलता है। ऐसा दो-तीन माह तक करना पड़ता है।जीरा चूर्ण, पिसी हींग और सेंधा नमक एक चुटकी भर मिलाकर ल

खर्राटों में छुपे हो सकते हैं गंभीर बीमारियों के लक्षण, जानें बचने के कारगर उपाय

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खर्राटे चाहे हल्के आते हों या बहुत तेज उनकी अनदेखी नहीं करनी चाहिए। समय रहते जांच कराने से गंभीर समस्याओं से बचना संभव हो सकता है। Jagran Hindi News - news:national
लो डोज से ब्रेन स्ट्रोक के क्लॉट का कारगर इलाज

लो डोज से ब्रेन स्ट्रोक के क्लॉट का कारगर इलाज

Health
3 हजार मरीजों पर हुआ ट्रायलब्रेन स्ट्रोक में दी जाने वाली दवा की लो (कम) डोज ज्यादा असरदार हो सकती है। यह बात 'द जॉर्ज इंस्टीट्यूट ऑफ ग्लोबल हैल्थ' के एक शोध में निकलकर आई है। यह रिसर्च विश्व के 100 अस्पतालों के 3 हजार से अधिक स्ट्रोक के मरीजों पर की गई है। तीन महीने तक मरीजों को आरटीपीए की लो डोज देकर असर देखा गया। यह काफी हद तक ब्रेन हैमरेज का खतरा भी कम करती है।आरटीपीए की देते हैं डोजविश्व में ब्रेन स्ट्रोक (स्केमिक स्ट्रोक) के दौरान आरटीपीए इंट्रावीनस इंजेक्शन लगाया जाता है। यह क्लॉटिंग (थक्का) को खत्म कर ऑक्सीजन फ्लो को सुचारू करता है। एक तिहाई कम डोज असरदारब्रेन स्ट्रोक में आरटीपीए की स्टैंडर्ड डोज 0.9 मिग्रा. प्रति किग्रा. (शरीर के वजन के अनुसार) दी जाती है। जबकि शोध में एक तिहाई कम डोज यानी 0.6 मिलिग्राम प्रति किग्रा. के हिसाब से देकर परीक्षण किया गया। परिणाम अच्छे रहे। लो डोज वाले