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Tag: किडनी

किडनी को बीमार न कर दे डायबिटीज, उपचार से बेहतर बचाव

किडनी को बीमार न कर दे डायबिटीज, उपचार से बेहतर बचाव

Health
अस्वस्थ जीवनशैली तमाम बीमारियों को बढ़ावा दे रही है। ऐसे में क्रॉनिक किडनी डिजीज यानी सीकेडी एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या बनकर उभर रही है, जिसके लिए डायबिटीज को बड़ा कारण बताया जा रहा है। इसके कारण और बचाव... Live Hindustan Rss feed
किडनी को स्वस्थ रखते हैं गोखरू और पुनर्नवा

किडनी को स्वस्थ रखते हैं गोखरू और पुनर्नवा

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गोखरू और पुनर्नवा को किडनी के मरीज और सामान्य व्यक्ति दोनों ले सकते हैंएल्कोहल पीने की आदत और पथरी की शिकायत होने पर किडनी फेल होने का खतरा रहता है। ऐसी स्थिति में गोखरू और पुनर्नवा लाभकारी साबित होते हैं। इसे किडनी के मरीज और सामान्य व्यक्ति दोनों ले सकते हैं। गोखरू का चूर्ण एक-एक चम्मच सुबह, दोपहर, शाम गुनगुने दूध के साथ लिया जा सकता है।ये होते हैं लक्षण : चेहरे व पैरों में सूजन और आंखों में भारीपन रहना। थोड़ी दूर चलने पर सांस फूलना, थकान और बेचैनी महसूस होना। यह होता है उपाय : गोखरू और पुनर्नवा में किडनी को पुन: स्वस्थ करने की क्षमता होती है। इसके लिए 50 ग्राम गोखरू और 50 ग्राम पुनर्नवा को पांच लीटर पानी में डालकर चौथाई रहने तक उबालें। फिर इसकी 40 एम एल मात्रा सुबह, दोपहर और शाम को रोगी को पिलाएं। इससे किडनी को लाभ मिलेगा।डॉ. सीताराम गुप्ता, आयुर्वेद चिकित्सक Patrika : India's Leading
दूसरे ब्लड ग्रुप में भी किडनी ट्रांसप्लांट संभव

दूसरे ब्लड ग्रुप में भी किडनी ट्रांसप्लांट संभव

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तकनीक से दिक्कत हुई आसान अब तक किडनी ट्रांसप्लांटेशन (प्रत्यारोपण) के लिए मरीज और डोनर का ब्लड ग्रुप एक होना जरूरी था लेकिन एबीओ इनकंपैटिबल किडनी ट्रांसप्लांट तकनीक से यह दिक्कत आसान हुई है। देश में करीब 5 से 6 लाख ऐसे मरीज हैं जिन्हें किडनी ट्रांसप्लांट की तत्काल जरूरत है। इसके मुकाबले हर साल 3-4 हजार मामलों में ही किडनी ट्रांसप्लांटेशन हो पा रहे हैं। इसका बड़ा कारण है, जागरूकता की कमी और डोनर-मरीज का ब्लड ग्रुप न मिल पाना है। ऐसे में एबीओ इनकंपैटिबल विधि इस क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला रही है। जानते हैं इसके बारे में...यह है एबीओ तकनीकएबीओ इनकंपैटिबल विधि में ए-बी-ओ का मतलब ब्लड गुप से है। इस तकनीक से मरीज और डोनर के अलग-अलग ब्लड ग्रुप के होने पर भी किडनी ट्रांसप्लांट की जा सकती है। खास बात यह है कि किडनी ट्रांसप्लांट से पहले मरीज व डोनर के एंटीबॉडीज का लेवल मानक के अनुरूप होना चाहिए। इसे ड
यूरिन रोकने से होती है किडनी फेलियर, यूटीआई की समस्या

यूरिन रोकने से होती है किडनी फेलियर, यूटीआई की समस्या

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यूरिन रिलीज करना शरीर की सामान्य प्रक्रिया है। ब्लैडर के भरने पर प्रतिक्रिया तंत्र ब्रेन को यूरिन रिलीज करने का संकेत भेजता है। यूरिन को रोकने की आदत जिनमें होती है उनमें यह प्रतिक्रिया धीरे-धीरे कम हो जाती है। यूरिन को रोकने की क्षमता यूरिन की उत्पादन मात्रा, हाइड्रेशन, तरल पदार्थ और ब्लैडर में जमा होने की कैपेसिटी पर निर्भर करती है। यूरिन रिलीज का संकेत मिलने के कुछ समय के अंदर हमारा नर्वस सिस्टम इसे कंट्रोल करने का भी संकेत देता है ताकि व्यक्ति उचित जगह देखकर इसे रिलीज कर सके। सामान्यतया हर एक मिनट में 1-2 एमएल यूरिन ब्लैडर में पहुंचता है। ब्लैडर को संकेत मिलने के बाद जल्द ही खाली कर देना चाहिए वर्ना ब्लैडर पर जोर पड़नें से किडनी पर भी दबाव पड़ता है। पेशाब में यूरिया व अमीनो एसिड जैसे टॉक्सिक तत्त्व होते हैं। यूरिन को रोकने से किडनी को नुकसान होने के साथ ब्लैडर में दर्द और संक्रमण हो सक
किडनी में पथरी के इलाज के लिए जानें घरेलू उपचार

किडनी में पथरी के इलाज के लिए जानें घरेलू उपचार

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किडनी में पथरी ऐसी स्थिति है जिसमें इस अंग में छोटे-छोटे कण बनने लगते हैं जो एक-दूसरे से जुड़कर पथरी का रूप ले लेते हैं। पथरी किडनी में एक या इससे ज्यादा संख्या में हो सकती हैं। सामान्यत: पथरी बेहद छोटे आकार की होती है जो यूरिन के रास्ते स्वत: निकल जाती है लेकिन यदि ये सामान्य आकार से बड़ी हो जाए तो मूत्रमार्ग में रुकावट आती है। जिससे तेज जलन, दर्द व रक्तस्त्राव हो सकता है। आयुर्वेद में इसे 'वृक्कअष्मरी' कहते हैं। कारण : खराब जीवनशैली, देर तक धूप में रहने पर शरीर में पानी की कमी, शारीरिक गतिविधियों का अभाव, अधिक चाय-कॉफी पीना, ज्यादा तली-भुनी/गरिष्ठ/मीठी चीजें खाना, कम पानी पीना और मल-मूत्र आदि वेगों को रोकना।लक्षण : चक्कर आना, उल्टी, मूत्र मार्ग के आसपास तेज असहनीय दर्द, कंपकपी के साथ बुखार, लगातार यूरिन आना या इसकी इच्छा महसूस होना, यूरिन के साथ रक्तस्त्राव या तेज जलन। आयुर्वेदिक चिकित्स
हाई बीपी है तो हो सकती है किडनी की समस्या, हर साल कराएं जांच

हाई बीपी है तो हो सकती है किडनी की समस्या, हर साल कराएं जांच

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किडनी रोग के लक्षण क्या हैं ? शरीर में सूजन खासतौर पर पैरों में, कमजोरी, भूख कम लगना, यूरिन कम आना और शरीर में खून की कमी इसके प्रमुख लक्षण हैं। इस अंग की बीमारियों का पता किन जांचों से चलता है ?किडनी खराब होने के ज्यादातर लक्षण इस अंग के खराब होने के बाद ही सामने आते हैं। हमारे देश में 75 प्रतिशत मरीजों को किडनी के खराब होने का पता रोग के काफी बढ़ जाने के बाद ही चल पाता है। किडनी रोगों के लिए ब्लड यूरिया, क्रिएटिनिन और यूरिन संबंधी जांचें की जाती हैं। डायबिटीज और किडनी रोगों में क्या संबंध है ?खराब जीवनशैली की वजह से कई रोग हो सकते हैं। इनमें डायबिटीज प्रमुख है। डायबिटीज शरीर के सभी अंगों पर बुरा असर डालती है। इनमें किडनी व हृदय प्रमुख हैं। लगभग 30-35 प्रतिशत डायबिटीज के मरीज खराब किडनी से प्रभावित होते हैं। किडनी को कैसे नुकसान पहुंचाती है डायबिटीज ?डायबिटीज के कारण धीरे-धीरे किडनी पर अस
ऐसे रखें अपनी किडनी का ख्याल, ये रहे 7 Tips

ऐसे रखें अपनी किडनी का ख्याल, ये रहे 7 Tips

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समय से पहले जन्मे शिशुओं में आगे चलकर क्रोनिक किडनी डिजीज (सीकेडी) विकसित होने का जोखिम बना रह सकता है। यह जानकारी बीएमजे में प्रकाशित एक अध्ययन में सामने आयी है। प्रीटर्म बर्थ यानी 37 सप्ताह की... Live Hindustan Rss feed
अधिक मोटापे के कारण भी होती हैं किडनी संबंधी समस्याएं

अधिक मोटापे के कारण भी होती हैं किडनी संबंधी समस्याएं

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मोटापा केवल डायबिटीज और हाइपर टेंशन का कारण ही नहीं बनता बल्कि किडनी को भी नुकसान पहुंचाता है। इससे किडनी में फोकल सेगमेंटल ग्लोमेरूलोस्क्लेरोसिस (एफएसजीएस) बढ़ जाता है जिससे नेफ्रोटिक सिंड्रोम रोग होता है। डायबिटीज और ब्लड प्रेशर होने की स्थिति में क्रॉॅनिक किडनी डिजीज की आशंका रहती है जिसमें किडनी फेल हो सकती है। जब बढ़ता है खतरा - किडनी में छोटे-छोटे छिद्र होते हैं जो फिल्टर का काम करते हैं। एफएसजीएस बढ़ने से इन छिद्रों का आकार बढ़ जाता है। ऐसे में फिल्टर का काम ठीक से नहीं होता और शरीर के अन्य हिस्सों में जाने वाला प्रोटीन यूरिन से बाहर निकल जाता है। इन्हें है अधिक खतरा - अधिक वजन वाले लोग, ब्लड प्रेशर और डायबिटीज के मरीज, मेडिकल हिस्ट्री व धूम्रपान करने वाले लोगों को इसका खतरा अधिक रहता है। जरूरी जांचें - सबसे पहले विशेषज्ञ यूरिन की रुटीन जांच कराते हैं। जरूरत पडऩे पर किडनी फंक्शन टैस
किडनी में स्टोन होने पर घबराएं नहीं, होम्यापैथी है कारगर

किडनी में स्टोन होने पर घबराएं नहीं, होम्यापैथी है कारगर

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क्रिस्टल्स स्टोन्स बनाते हैंरीनल स्टोन्स जो किडनी में क्रिस्टल्स के बनने के कारण होती हैं। ये क्रिस्टल्स कैल्शियम ऑक्सलेट या फॉस्फेट के बने होते हैं। आमतौर पर क्रिस्टल्स यूरिन के साथ निकल जाते हैं, लेकिन कभी-कभी ये किडनी में रह जाते हैं और वहां अन्य कणों के साथ मिलकर स्टोन्स बनाते हैं। किडनी मेें स्टोन के कारण यूरिन का रंग बदल जाता है। ये धीरे—धीरे बढ़ता जाता है। इससे यूरिन करते समय दर्द भी हो सकता है। लक्षण: पेट में दर्द जो दाईं या बाईं तरफ हो। इसके कारण उल्टी का मन होना। यूरिन करने में दिक्कत व जलन, बुखार आना व दर्द के साथ यूरिन में खून आ सकता है।कारण: यूरिन में ऑक्सलेट्स, कैल्शियम, यूरिक एसिड अधिक होना। संक्रमण व यूरिन रोकना।दवा: सोलिडेगो क्यू, बर्बेरिस वलगरिस क्यू, लाइकोपोडियम, रिबिन्थिना, हाइड्रेंजिया क्यू यूरिन, कैंथरिस लाभदायक है। इसे डॉक्टरी सलाह पर लें। डॉ. मुकेश गुप्ता, होम
किडनी, थायरायड के इलाज के लिए फायदेमंद है होम्योपैथी चिकित्सा

किडनी, थायरायड के इलाज के लिए फायदेमंद है होम्योपैथी चिकित्सा

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गुर्दा व गलग्रंथि (थायरायड) संबंधी रोग के उपचार के लिए होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति फायदेमंद है, यह बात एक अध्ययन में सामने आई है। गुर्दे की खराबी की जानकारी शुरुआत में होने और होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति से मरीजों का इलाज समय से शुरू होने से 50 फीसदी मरीजों का सफल इलाज हो सकता है और गुर्दा संबंधी तकलीफ से उनको निजात मिल सकती है। अध्ययन की रिपोर्ट के अनुसार, गुर्दे की खराबी के गंभीर रोग का इलाज आरंभ होने के बाद तीसरी बार क्लीनिक आने वाले गुर्दा के 50-58.3 फीसदी मरीजों में उनके सीरम यूरिया और क्रिएटिनिन के स्तर में सुधार पाया गया। वहीं, हाइपोथायरायडिज्म पर किए गए अध्ययन में पाया गया कि इलाज आरंभ होने के बाद चौथी बार क्लीनिक आने वाले 35 फीसदी रोगियों में उनके सीरम थायराइड उत्तेजक हार्मोन की रीडिंग में सुधार देखा गया। हाइपोथायरायडिज्म पर यह अध्ययन 2011-2015 के दौरान क्लीनिक में आए 2,083 मरीजों क