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क्रोनिक किडनी रोगों काे बढ़ा रहा है वायु प्रदूषण

क्रोनिक किडनी रोगों काे बढ़ा रहा है वायु प्रदूषण

Health
बढ़ती जीवन प्रत्याशा व जीवनशैली की बीमारियों के प्रसार के साथ भारत में क्रोनिक किडनी रोग (सीकेडी) में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। चिकित्सकों का कहना है कि बढ़ता वायु प्रदूषण भी क्रोनिक किडनी रोगों के बढ़ते जोखिम का एक कारक है। विशेषज्ञों के मुताबिक, सीकेडी की बढ़ती घटनाओं के साथ भारत में डायलिसिस से गुजरने वाले रोगियों की संख्या में भी हर साल 10 से 15 प्रतिशत की वृद्धि हो रही है। इस प्रतिशत में कई बच्चे भी शामिल हैं।दुर्भाग्य से, लगातार बढ़ती घटनाओं के बावजूद, गुर्दे की बीमारी को अभी भी भारत में उच्च प्राथमिकता नहीं दी जाती है। सीकेडी के उपचार और प्रबंधन का आर्थिक कारक भी रोगियों और उनके परिवारों के लिए एक प्रमुख चिंता का विषय है। आकाश हेल्थकेयर में नेफ्रोलॉजी और रीनल प्रत्यारोपण के वरिष्ठ सलाहकार और निदेशक डॉ उमेश गुप्ता ने कहा, ''सीकेडी लाइलाज और बढ़ने वाली बीमारी है जो समय के साथ गुर्द
क्रोनिक किडनी डिजीज का होम्योपैथी व आयुर्वेद में भी है कारगर इलाज

क्रोनिक किडनी डिजीज का होम्योपैथी व आयुर्वेद में भी है कारगर इलाज

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किडनी बीमारियों की पहचान के लिए ब्लड यूरिया, सिरम क्रिएटिनिन, सिरम इलेक्ट्रोलाइट व किडनी फंक्शन टेस्ट कराते हैं। 40 की उम्र के बाद ब्लड प्रेशर, डायबिटीज के मरीजों को ब्लड प्रेशर, एचबीए1सी की जांच कराते हैं। परिवार में किसी को किडनी रोग है तो अन्य को खास खयाल रखना चाहिए। इसका इलाज होम्योपैथी व आयुर्वेद में भी किया जाता है। स्थिति अनुसार तय करते दवा की पोटेंसी होम्योपैथी में इलाज किया जाता है। सामान्य सावधानियां बरतनी होती हैं। एलोपैथी के साथ होम्योपैथी दवाएं ले सकते हैं। खट्टी चीजों से परहेज करें। बैक्टीरिया, फंगल से यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (यूटीआई) होता है। बुखार, कंपकंपी व पैरों में सूजन आती है। इसके लिए लाइकोपोडियम, कैन्थारिस, नैट्रमम्यूर दवाएं देते हैं। स्टोन यदि दाहिनी तरफ है तो लाइकोपोडियम व बर्बैरिस बल्गैरिस, हाइड्रेन्जिया जैसी दवाएं देते हैं। दवाओं की पोटेंसी व मात्रा चिकित्सक तय क