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Tag: ख़याल

ऐसे रखें पैरों का खयाल

ऐसे रखें पैरों का खयाल

Health
एक आदमी रोज 3000 से 10,000 कदम चलता हैशरीर का भार उठाने वाले पैर अक्सर देखभाल से उपेक्षित रहते हैं। आमतौर पर एक आदमी रोज 3000 से 10,000 कदम चलता है और अपने जीवनकाल में 77,000 मील की यात्रा के बराबर है। इन दिनों बदलते मौसम के कारण ड्रायनेस बढ़ जाती है और पैरों में कई प्रकार की समस्याएं हो जाती हैं। समस्याओं का ऐसे करें निदानफटी एडिय़ां डेड सेल्स को प्यूमिक स्टोन से हटाएं तथा कैस्टर ऑयल से मालिश करें। नहाने के बाद एडिय़ों पर जैतून का तेल लगाएं। रात को सोते समय पैरों पर कोल्ड क्रीम लगाना न भूलें। रात के समय कॉटन के मोजे पहनकर भी सो सकते हैं।एथलीट फुटयह फंगल इंफेक्शन है, इसमें अंगुलियों के अंदरूनी तथा निचले हिस्से में फंगस पनप जाती है जो ज्यादा कोमल त्वचा को काट देती है। फलस्वरूप पैरों से दुर्गंध आनी शुरू हो जाती है। इसके लिए निम्न उपाय करें - पैरों की अंगुलियों को बीच से सुखाकर ही मोजे पहनें।
पढ़ाई में ध्यान लगाने के लिए एेसे रखें अपनी डाइट का खयाल

पढ़ाई में ध्यान लगाने के लिए एेसे रखें अपनी डाइट का खयाल

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परीक्षा (एग्जाम) के दिनों में आपको अपने खानपान पर पूरा ध्यान देना चाहिए। पढ़ाई के चक्कर में खानपान पर ध्यान नहीं देंगे तो कुछ भी याद नहीं रहेगा। एक साथ अधिक खाने के बजाय थोड़ा-थोड़ा कर खाएं। समय अंतराल पर खाने से शरीर में ऊर्जा बनी रहती है।बासा भोजन करने से बचना चाहिए।परीक्षा के दिनों में हरी पत्तेदार सब्जियां और फल भरपूर मात्रा में खाएं। इससे आपको पोषण मिलता है और आलस नहीं आता। एग्जाम टाइम में सेब, संतरा और केला जरूर खाना चाहिए। इनमें मौजूद विटामिन-बी व सी और पोटेशियम आदि पोषक तत्त्व दिमाग के लिए काफी फायदेमंद होते हैं। इस दौरान ज्यादा आलू खाने से बचना चाहिए क्योंकि इससे आलस आता है।बादाम व अखरोट खाएं। इनसे एकाग्रता बढ़ती है। तली-भुनी चीजों से परहेज करें क्योंकि इनसे सुस्ती आती है।माता-पिता बच्चों को लौकी, गाजर या मेथी जैसी सुपाच्य साग-सब्जियां खिलाएं।खूब पानी पीना चाहिए। इससे दिमाग सक्रिय
दांतों का एेसे रखें खयाल, जानें ये खास बातें

दांतों का एेसे रखें खयाल, जानें ये खास बातें

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दांतों को 'गेट वे ऑफ हैल्थ' कहा जाता है क्योंकि खाने की कोई भी चीज इनसे होकर शरीर में जाती है। ऐसे में दांतों की खास देखभाल के बारे में बता रहे हैं दंत रोग विशेषज्ञ... दांतों की अच्छे से सफाई नहीं करना इनकी बीमारियों का बड़ा कारण है। दरअसल दांतों में एक बारीक मुलायम सफेद रंग की झिल्ली (प्लाक) चढ़ी होती है। यदि दांत पूरी तरह से साफ नहीं होते हैं तो रोगाणु यहीं पर अपनी जगह बनाते हैं। सर्दी में ठंडी तासीर व खट्टे खाद्य पदार्थों से परहेज करना चाहिए। ऐसे में यदि पीने का पानी भी ज्यादा ठंडा है तो उसे गुनगुना करके पिएं। ज्यादा ठंडी चीजें नुकसानदेह हो सकती हैं। चॉकलेट, क्रीम बिस्किट, जैम आदि अधिक लेने से दांत कमजोर हो जाते हैं। साथ ही ज्यादा मीठा खाने से भी इनमें कैविटी का डर रहता है। अगर मीठा खाएं भी तो इसके बाद अच्छे से दांतों को साफ करें। ऐसे में फ्लोराइडयुक्त टूथपेस्ट का प्रयोग करना ठीक रहता ह
गर्मी के मौसम में एेसे रखें त्वचा का खयाल

गर्मी के मौसम में एेसे रखें त्वचा का खयाल

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गर्मी के मौसम में शरीर में पानी की कमी से त्वचा की नमी प्रभावित होती है। ऐसे में यदि त्वचा का खयाल न रखा जाए तो खुश्की, जलन, त्वचा फटने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। तेल मालिश जरूरी : त्वचा का रूखापन दूर करने के लिए जैतून, नारियल या सरसों तेल से शरीर की मालिश करना फायदेमंद होता है। इसके अलावा मॉइश्चराइजर का भी प्रयोग कर सकते हैं। रात को सोते समय त्वचा पर हल्का मॉइश्चराइजर जरूर लगाएं। खूब पानी पिएं : गर्मी के मौसम में प्यास ज्यादा लगती है कम पानी पीने से शरीर में पानी की कमी हो जाती है जिससे त्वचा में रूखापन व फटने जैसी दिक्कतें होने लगती हैं। इसके लिए दिन में कम से कम 8 गिलास पानी पीना चाहिए। ज्यादा ठंडा पानी न पीएं। बालों की देखभाल : बालों को टूटने व झड़ने से रोकने के लिए पोषण की जरूरत होती है। इसके लिए समय-समय पर सिर की तेल से मसाज करें। पौष्टिक आहार जैसे अंकुरित अनाज, दूध, फल व हरी सब्जिया
होली के हुड़दंग में एेसे रखें अपने शरीर के अंगों का खयाल

होली के हुड़दंग में एेसे रखें अपने शरीर के अंगों का खयाल

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हाेली रंगाें से भरा मस्तीभरा त्याेहार है, हाेली के दिन जिसे देखाे वाे ही तरह-तरह के रंगाें में रंगा नजर आता है। लेकिन हाेली की मस्ती में सराबाेर हाेने के साथ ही हमें अपने शरीर का भी ध्यान रखना चाहिए। ताकि सेहत का रंग फीका ना हाे। आइए जानते हैं हाेली पर कैसें करें अपने अंगाें की देखभाल :- आंखेंज्यादातर रंग एसिडिक होते हैं। आंखों में जाते ही इनसे खुजली या जलन हो सकती है। आंखों में रंग चला जाए तो ठंडे पानी से धोएं। आराम ना मिले पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। नाखूनहोली बीतने के बाद भी नाखूनों के किनारों पर रंग कई दिनों तक लगे रहते हैं, जो बुरे लगते हैं। नाखूनों को सुरक्षा देने के लिए धुलंडी के दिन नेलपॉलिश की मोटी परत लगाएं। नाखून अगर लंबे हैं, तो अंदर की ओर भी हल्की परत लगा सकते हैं। होंठहोंठों की सुरक्षा के लिए लिपस्टिक जरूर लगाएं। हां, इससे पहले वैसलीन की हल्की परत लगा लें। बालहोली खेलने स
होली के जश्न में एेसे रखें अपनी त्वचा का खयाल

होली के जश्न में एेसे रखें अपनी त्वचा का खयाल

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होली सबको प्यारी है। सब इसके रंग में सराबोर होना चाहते हैं लेकिन इससे पहले अपनी त्वचा की सुरक्षा से जुड़े उपायों के बारे में जानना बहुत जरूरी है।होली के रंगों का कई बार त्वचा पर खराब असर होता है, खासकर चेहरे की त्वचा पर , जो कि काफी नाजुक होती है। ऐसे में किस तरह से अपनी त्वचा का ध्यान रखते हुए होली के हुड़दंग में शामिल हुआ जा सकता है।आइए जानते हैं रंगाें के इस त्याेहार पर कैंसे रखें अपना त्वचा खयाल :- बर्फ के टुकड़े रगड़ेंकुछ बर्फ के टुकड़े लें और उन्हें एक साफ सूती कपड़े में लपेटें। 10 से 15 मिनट के लिए उन्हें अपने चेहरे पर रगड़ें। यह सुनिश्चित करेगा कि आपके चेहरे पर जो छिद्र हैं वो बंद हैं और उन सभी से आपकी त्वचा में रासायनिक रंगों का प्रवेश नहीं होगा। अपनी त्वचा और बालों पर तेल लगाएंऑइलिंग केवल आपके बालों तक सीमित नहीं होना चाहिए। आपकी त्वचा को रसायनों से भी बचाना होगा। सुनिश्चित करें
परिवार में किसी को किडनी की दिक्कत तो रखें खास खयाल

परिवार में किसी को किडनी की दिक्कत तो रखें खास खयाल

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शरीर में दो किडनी (गुर्दे) होती है। किडनी लिवर के ठीक नीचे होती है। आंतरिक अंगों में सबसे बड़ी होती है। बाएं तरफ की किडनी दाहिनी की अपेक्षा छोटी होती है। किडनी खून में मौजूद टॉक्सिन्स (विषैले तत्वों) को छान कर साफ करती है जो यूरिन के जरिए बाहर निकलते हैं। इन लक्षणों पर ध्यान देंक्रॉनिक किडनी डिजीज में किडनी पहले फूलती है फिर सिकुड़कर छोटी हो जाती है। इसके लक्षण देर से दिखते हैं। रोगी के पैरों में सूजन, चेहरे पर सूजन, खून की कमी, भूख लगना बंद हो जाना, पेशाब की मात्रा में कमी, शरीर में खुजली, शरीर का रंग काला पडऩा प्रमुख लक्षण हैं। मरीजों में हृदय संबंधी समस्या भी होती है। महिलाओं को माहवारी में ज्यादा दर्द, संबंध के दौरान तकलीफ होती है। इन जांचों से करते बीमारी की पहचानकिडनी बीमारियों की पहचान के लिए ब्लड यूरिया, सिरम क्रिएटिनिन, सिरम इलेक्ट्रोलाइट व किडनी फंक्शन टेस्ट कराते हैं। 40 की उम्र
आंखों का एेसे रखें खयाल, जान लें ये खास बातें

आंखों का एेसे रखें खयाल, जान लें ये खास बातें

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बढ़ते प्रदूषण के स्तर के व कई अन्य कारणों के चलते आंखों में कुछ विशेष प्रकार के रोगों की आशंका बढ़ रही है जिसमें कंजंक्टिवाइटिस समस्या है। इस रोग में आंखों में लालिमा, खुजली, जलन, आंखें चिपकना व धुंधला दिखाई देना जैसे लक्षण हो सकते हैं। जानते हैं इस रोग से बचाव के बारे में। एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस : इस रोग में पीड़ित व्यक्ति की आंखों में तेज खुजली, लालिमा, सूजन, जलन व भारीपन जैसे लक्षण हो सकते हैं। बैक्टीरियल कंजंक्टिवाइटिस : आंखों में चुभन, लालिमा व पानी आना जैसे लक्षण इस रोग में होने लगते हैं। पीड़ित व्यक्ति को इस दौरान अपना तौलिया/रुमाल/कपड़े आदि अलग रखने चाहिए ताकि संक्रमण दूसरे व्यक्तियों में न फैले। वायरल कंजंक्टिवाइटिस : इससे आंखों में लालिमा व धुंधला दिखाई देने जैसे लक्षण हो सकते हैं। यह वायरल आई फ्लू एडीनोवायरस (टाईप 8 व 19) से होता है। इसमें कभी-कभी कानों के पास कनपटी पर सूजन भी ह
40 के पार जब अक्सर हो तकरार, एेसे रखें अपना खयाल

40 के पार जब अक्सर हो तकरार, एेसे रखें अपना खयाल

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चालीस साल की उम्र के बाद ज्यादातर महिलाओं के स्वभाव में बदलाव आने लगता है। चिड़चिड़ापन, गुस्सा, तनाव व असंतोष बढ़ने लगता है। नतीजन आए दिन पति या बच्चों के साथ तकरार होने लगती है। इस स्थिति से परिजन ही नहीं खुद महिलाएं भी परेशान रहती हैं। हार्मोनल बदलावयह प्रीमेनोपॉज पीरियड होता है जिसमें मूड स्विंग होने लगते हैं। इससे स्वभाव में बदलाव के साथ-साथ मासिक चक्र में गड़बड़ी, हार्मोन असंतुलन, हॉट फ्लश, एकाग्रता में कमी, नींद न आने की समस्या होने लगती हैं। ऐसा एस्ट्रोजन हार्मोन में गिरावट की कमी से होता है। सामाजिक बदलावबच्चे बड़े हो जाते हैं और पढ़ाई या करियर की वजह से बाहर रहने लगते हैं। वे मां से ज्यादा बातचीत नहीं कर पाते। जिससे मां उपेक्षित महसूस करने लगती है। ऐसे में परिवार के लोगों को महिला को सपोर्ट कर उनकी भावनाओं को समझना चाहिए। एेसें रखें अपना खयाल - चालीस की उम्र के बाद अक्सर छोटी- छोट
स्पॉन्डिलाइटिस के मरीज इन बातों का रखें खयाल

स्पॉन्डिलाइटिस के मरीज इन बातों का रखें खयाल

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स्पॉन्डिलाइटिस एक प्रकार की सूजन है, जो हमारी रीढ़ के जोड़ों में होती है। रीढ़ कई जटिल जोड़ों से बनी होती है। यदि किसी भी जोड़ में सूजन आ जाए तो हमें दर्द होने लगता है, जिसे स्पॉन्डिलाइटिस कहते हैं। ऐसा ही एक खास जोड़ है 'इंटरवर्टेब्रल डिस्क' जिसमें एक मुलायम जैल होता है। यह 'शॉक एब्जॉर्बर' का काम करता है और झटके लगने पर रीढ़ को नुकसान होने से बचाता है। लेकिन कई बार जब यह जैल कम हो जाता है तो जोड़ों में अकड़न और दर्द होने लगता है। बढ़ती उम्र, बैठने का गलत तरीका, व्यायाम न करना, खराब जीवनशैली, मोटापा, धूम्रपान, शराब का सेवन, अनियंत्रित डायबिटीज, थायरॉइड, बढ़ा हुआ यूरिक एसिड और कोलेस्ट्रॉल, स्पॉन्डिलाइटिस के प्रमुख कारण हैं। जिसमें पीठ और गर्दन में तेज दर्द होता है। ध्यान रखें - कुछ बातों का ध्यान रखकर हम स्वयं को इस बीमारी से बचा सकते हैं जैसे कि सही ढंग से बैठना, नियमित व्यायाम और सेहतमंद