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Tag: खानपान

बथुए को बनाएं अपने खानपान का हिस्सा

बथुए को बनाएं अपने खानपान का हिस्सा

Health
कई रोगों में कारगरबथुआ कई औषधीय गुणों से भरपूर होता है। डॉक्टरों के मुताबिक इसमें आयरन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। इसके साग को नियमित रूप से खाने से कई रोगों को जड़ से समाप्त किया जा सकता है। इससे गुर्दे में पथरी होने का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है। गैस, पेट में दर्द और कब्ज की समस्या भी दूर होती है।बथुए के बारे में आर्युवेदाचार्यों का मानना है कि कच्चे बथुआ के एक कप रस में थोड़ा सा नमक मिला कर रोजाना खाने से पेट के कीड़े मर जाते हैं। गुर्दा, मूत्राशय और पेशाब के रोगों में बथुए का रस पीने से काफी लाभ मिलता है। बथुए को उबालकर इसके रस में नींबू, नमक और जीरा मिला कर पीने से पेशाब में जलन और दर्द नहीं होता।सिर में अगर जुएं हों तो बथुए को उबालकर इसके पानी से सिर धोएं। जुएं मर जाएंगी और सिर भी साफ होगा। सफेद दाग, दाद, खुजली फोड़े और चर्म रोगों में बथुए को प्रतिदिन उबाल कर इसका रस पीना चाहि
Celebrity Tips : सेहत के लिए नियम से व्यायाम और खान-पान जरूरी : वरूण

Celebrity Tips : सेहत के लिए नियम से व्यायाम और खान-पान जरूरी : वरूण

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अभिनेता वरुण धवन की लोकप्रियता में उनकी फिटनेस का भी खूब योगदान है। वे अपनी फिटनेस का ध्यान कैसे रखते हैं और उसके लिए क्या-क्या करते हैं, उनसे बातचीत कर उनकी फिटनेस के राज साझा कर रही हैं साक्षी... Live Hindustan Rss feed
खानपान व जीवनशैली बदलकर बच सकते हैं बीमारियों से

खानपान व जीवनशैली बदलकर बच सकते हैं बीमारियों से

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समय से कदम उठाने से बचा जा सकता है। यदि हो जाती है तो दुष्प्रभाव कम किए जा सकते हैं। कैंसर, हृदय रोग के लक्षण अक्सर शुरुआती चरण में नहीं दिखते हैं। यदि फैमिली हिस्ट्री है तो जीवनशैली में बदलाव कर, संतुलित खानपान और योग-ध्यान व व्यायाम के जरिए बचाव संभव है। जंकफूड, नमक, चीनी और मैदे वाली चीजें लेने से बचेंसंतुलित आहार सही समय पर लेने से शरीर को पूरा पोषण मिलता है। ज्यादा नमक व चीनी वाली चीजें न लें। जंकफूड व पैक्ड चीजें ज्यादा न खाएं। इसमें कार्बोहाइड्रेट, वसा, नमक व चीनी निर्धारित मात्रा से कई गुना अधिक होती है। इस कारण में कैलोरी ज्यादा होती है। पोषक तत्वों की कमी होती है। इसे खाने से मोटापा बढ़ता है। शरीर में विषैले तत्व (टॉक्सिंस) बढ़ते हैं। 7-8 घंटे से कम नींद लेने से थकान, आलस्य, पाचन और हृदय संबंधी दिक्कतें हो सकती हैं। साफ-सफाई भी जरूरीहाइजीन का अर्थ है स्वस्थ रहने का तरीका। इसका अस
साफ-सुथरा खानपान बनता है टायफॉइड से दूरी

साफ-सुथरा खानपान बनता है टायफॉइड से दूरी

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दूषित खानपान से होने वाली एक खतरनाक संक्रामक बीमारी है टायफॉइड। यह सेलमोनैला टाइफी नाम के बैक्टीरिया से होती है।आइए जानते हैं इसके लक्षण के बारे में - तेज बुखार:टायफॉइड के बैक्टीरिया शरीर में जाने के बाद अपनी संख्या को बढ़ाते हैं। ऐसे में शरीर उन्हें नष्ट करने के लिए तापमान बढ़ा लेता है। इससे पीड़ित को बुखार महसूस होता है। पहले ठंड लगती है फिर तापमान बढ़ना शुरू होता है। ये तापमान 103-104 डिग्री फारेनहाइट तक पहुंच जाता है। शरीर का तापमान बढऩे से पाचन संंबंधी एंजाइम्स निष्क्रिय होने लगते हैं। सिरदर्द:ऐसे में पीड़ित को दिनभर बुखार चढ़ने के साथ-साथ तेज सिरदर्द की शिकायत होती है। लिवर का आकार बढ़ना :करीबन एक हफ्ता टायफॉइड रहने के बाद लिवर का आकार बढ़ जाता है। यह खासतौर पर बच्चों में देखने को मिलता है। इस बीमारी में सीने और पेट पर लाल चकते दिखाई देने लगते हैं। दस्त:टायफॉइड के अधिकतर मरीजों को दस
खानपान व बदलती जीवनशैली के कारण गर्भवती महिलाओं में बढ़ रही दिक्कत

खानपान व बदलती जीवनशैली के कारण गर्भवती महिलाओं में बढ़ रही दिक्कत

Health
प्रेग्नेंसी केयरअनियमित जीवनशैली व गलत खानपान के कारण गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को ब्लडप्रेशर, डायबिटीज व थायरॉयड की दिक्कत होती है। इसका शिशु के स्वास्थ्य पर भी गलत असर पड़ता है। गर्भावस्था के शुरुआती तीन माह में मधुमेह का स्तर 80/100-110 मि.ग्रा. से ज्यादा हो तो डॉक्टर की सलाह लें। इसे जैस्टेशनल डायबिटीज कहते हैं। गर्भवती का ब्लड शुगर ज्यादा रहने से शिशु का लिवर ठीक से विकसित नहीं होता है। शिशु का वजन ज्यादा हो सकता है। डिलीवरी के बाद मधुमेह की समस्या खत्म हो जाती है। गर्भावस्था में शुगर लेवल अनियंत्रित होने से गर्भपात, समय से पहले बच्चे का जन्म, प्रसव में दिक्कत होती है। गर्भावस्था में हाइपोथायराडिज्म होने से बच्चे का ठीक से विकास नहीं होता है। डायबिटीज व हाइपरथायराडिज्म की वहज से गर्भवती में रेटिनोपैथी (आंख की बीमारी) और नेफ्रोपैथी (किडनी की बीमारी) होने का खतरा बढ़ जाता है। थायरॉयड
सही खानपान से करें बढ़ते वजन पर नियंत्रण

सही खानपान से करें बढ़ते वजन पर नियंत्रण

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अक्सर लोग अपने खानपान के दौरान ऐसी गड़बडिय़ां कर देते हैं जिससे वे न चाहते हुए भी मोटापे का शिकार हो जाते हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में। भोजन भूख से थोड़ा कम ही लेना चाहिए। पेट में गैस न बने इसका खयाल रखें। इसके लिए जरूरी है कि आप डिनर जल्दी कर लें और देर रात तक कुछ भी खाने से बचें। इसके अलावा तले-भुने व मसालेदार भोजन से परहेज करें। खाने में सब्जी, सलाद की मात्रा अधिक और चपाती, चावल व आलू की मात्रा कम ही रखें। सप्ताह में एक दिन उपवास या एक बार भोजन करने के नियम का पालन करें। उपवास के दिन सिर्फ फल व दूध लें। रोग आदि हो तो विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। रोजाना 2-3 किमी टहलें। प्रात : एक गिलास ठंडे पानी में 2 चम्मच शहद घोलकर पीने से भी मोटापा कम होता है। दूध व शुद्ध घी का सेवन करें वर्ना शरीर में कमजोरी, रूखापन और वात विकार हो सकते हैं। इसके अलावा नियमित व्यायाम से सक्रियता बनी रहती है। Patri
विशेष खानपान से कम हो सकता है डिमेंशिया का जोखिम

विशेष खानपान से कम हो सकता है डिमेंशिया का जोखिम

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एक खास तरह का खानपान भूलने से संबंधित बीमारियों अल्जाइमर और डिमेंशिया के बढ़ने की रोकथाम में सहायक हो सकता है। एक शोध में यह जानकारी सामने आई है। यह शोध अल्जाइमर्स एडं डिमेंशिया जर्नल में... Live Hindustan Rss feed
वर्कप्लेस पर काम के साथ खानपान पर दें ध्यान, वर्ना हो जाएंगे बीमार

वर्कप्लेस पर काम के साथ खानपान पर दें ध्यान, वर्ना हो जाएंगे बीमार

Health
वर्कप्लेस पर सबसे आगे रहने की चाह में युवा एक्जिक्यूटिव्स को न खाने की सुध है, न सोने की। खाली पेट भागते-दौड़ते दफ्तर पहुंचते हैं और चाय-कॉफी व चिप्स से दिन गुजार देते हैं। खाने-पीने में लापरवाही से एसिडिटी होने लगती है। स्थिति यही बनी रहे तो धीरे-धीरे लिवर प्रभावित होने लगता है और वजन व कोलेस्ट्राल बढ़ सकता है। यही रोग धमनियों में रुकावट का कारण बनते हैं। 35 की उम्र के बाद इन रोगों के लक्षण दिखने लगते हैं और 45 की उम्र के बाद शिकायत व बीमारियों का दौर शुरू हो जाता है। जानते हैं इन रोगों से बचाव के उपायों के बारे में। खाली पेट नारियल पानी से दिन की शुरुआत करें। लौकी, ककड़ी जैसी सब्जियों का जूस आदि भी ले सकते हैं।मेवे, फल, दूध और दूध से बनी चीजों को नाश्ते में शामिल करना चाहिए।लंच करना न भूलें। लंच में साबुत अनाज व हरी सब्जियों को महत्व दें। डिनर हल्का लें।3 कप से ज्यादा चाय-कॉफी का सेवन न
गलत खानपान कहीं आपकी नींद न उड़ा दे

गलत खानपान कहीं आपकी नींद न उड़ा दे

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कई डॉक्टरों और शोधकर्ताओं का मानना है कि हम भोजन में कुछ ऐसी चीजों को शामिल कर देते हैं जिन्हें खाने से पहले समय को ध्यान में रखना बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं ऐसी ही कुछ चीजों के बारे में :- चाय या कॉफी:सोने से पहले पीने से इनमें मौजूद कैफीन दिमाग को सक्रिय कर नींद लाने की प्रक्रिया को धीमा कर देता है। चॉकलेट:इसमें फैट व कैफीन अधिक मात्रा में होते हैं जो अनिद्रा की समस्या के साथ दांतों पर भी बुरा असर डालते हैं। आइसक्रीम:इसमें मौजूद चीनी की अधिक मात्रा शुगर का स्तर बढ़ा देती है जिससे नींद के लिए जरूरी आलस का भाव गायब हो जाता है। ये भी रखें ध्यानशराब : यूनिवर्सिटी ऑफ मेलबर्न के अनुसार लोग सोचते हैं कि इसे पीने से अच्छी नींद आती है लेकिन असल में यह सुकून भरी नींद में खलल डालने का काम करती है। मसालेदार भोजन : इससे पेट में एसिड बनता है जो सोते समय गले तक आकर जलन व बेचैनी का कारण बनता है और व्य
जानें हमारे खानपान से जुड़ी कुछ भ्रांतियां और सच्चाइयां

जानें हमारे खानपान से जुड़ी कुछ भ्रांतियां और सच्चाइयां

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हमारी शारीरिक फिटनेस खानपान और रहन-सहन की आदतों पर निर्भर करती है। क्या खाते हैं, क्या पीते हैं, जीवनशैली और दिनचर्या क्या है, इसका असर हमारी सेहत पर पड़ता है। लेकिन खानपान से जुड़ी इतनी भ्रांतियां हैं कि हम कई बीमारियों को जानबूझकर गले लगा रहे हैं। आयुर्वेद के माध्यम से जानें इससे जुड़ी सच्चाई - शेक में दूध का उपयोग - हम अक्सर आम या केले से बना शेक पीना पसंद करते हैं। लेकिन आयुर्वेद के अनुसार दूध के साथ आम, केला, नारियल, बेर, अखरोट, अनार, कटहल व आंवले का प्रयोग नहीं करना चाहिए। आयुर्वेद के ग्रंथों में इसे विरुद्ध आहार कहा गया है। इन्हें खाने से बेहोशी, आफरा, जलोदर यानी पेट में पानी भर जाना, खून की कमी (एनीमिया), कुष्ठ, बुखार, कमजोरी, पुराना जुकाम, नपुंसकता व अंधापन जैसी समस्या हो सकती हैं। ज्यादा पानी पीने से शरीर की सफाई - आयुर्वेद के अनुसार केवल गर्मी का मौसम ही एक ऐसा मौसम है, जिसमें इ