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Hair Transplant tips: जानिए हेयर ट्रांसप्लांट से जुड़ी ये खास बातें

Hair Transplant tips: जानिए हेयर ट्रांसप्लांट से जुड़ी ये खास बातें

Health
hair transplant tips: गंजेपन के इलाज के लिए लोग हेयर ट्रांसप्लांट करा रहे हैं। अक्सर ट्रीटमेंट के बाद बालों का गिरना, संक्रमण, स्कैल्प पर सूजन या कई बार पस निकलने जैसी परेशानियां बढ़ जाती हैं। इसका कारण सही तरह से बालों की देखभाल और डॉक्टरी सलाह फॉलो न करना है। इस ट्रीटमेंट के सकारात्मक परिणाम पाने के लिए कुछ बातों को ध्यान में रखना जरूरी है। जानते हैं हेयर ट्रांसप्लांट के बाद कौन-कौनसी सावधानी बरतनी चाहिए - सर्जरी के बाद प्रभावित हिस्से की रिकवरी : ट्रांसप्लांट के बाद अगले दो दिन तक प्रभावित हिस्से को छुएं नहीं और न ही कैप या कुछ भी सिर पर पहनें ताकि घाव भर सके। साथ ही एक हफ्ते तक हेलमेट पहनने की मनाही होती है। ताकि निशान न रहें : ट्रीटमेंट के बाद ग्राफ्टेड स्किन की देखभाल न हो तो निशान पड़ने की आशंका रहती है। ऐसे में कुछ हफ्तों तक मरीज को स्कैल्प पर ऑइंटमेंट या लोशन लगाने के लिए देते ह
अगर आप भी करते हैं ज्यादा चीनी का सेवन, तो जानें इससे जुड़ी खास बातें

अगर आप भी करते हैं ज्यादा चीनी का सेवन, तो जानें इससे जुड़ी खास बातें

Health
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार लोगों को अपने खाने में मीठे की मात्रा कुल कैलोरी के दस फीसदी से अधिक नहीं रखनी चाहिए व बढ़ती उम्र के साथ इसे पांच प्रतिशत तक कर देना चाहिए। वर्तमान में मिठास के तौर पर हम पहले की तुलना में कई गुना ज्यादा चीनी यानी शर्करा खा रहे हैं। मीठे के नाम पर चीनी सेहत बिगाड़ती है, क्योंकि यह प्राकृतिक न होकर कृत्रिम होती है। अधिक चीनी से होने वाले नुकसान को जानने से पहले यह समझना जरूरी है कि आखिर शक्कर है क्या- क्या है शक्कर -चीनी एक तरह की कार्बोहाइड्रेट है, जो कई रूप में होती है। यह मुख्यतः दो तरह की होती है। पहली प्राकृतिक जिसे मोनोसैक्कैराइड भी कहते हैं। इसमें ग्लूकोज, फ्रक्टोज, गैलेक्टोज होता है। दूसरी डाईसैक्कैराइड है जिसे रिफाइंड शुगर भी कहते हैं। यह कंपाउंड शुगर भी कहलाती है। इसमें लैक्टोज, माल्टोज और सुक्रोज जैसे तत्त्व होते हैं। ये अलग-अलग चीजों से प्राप्त कि
जानिए भोजन के सेवन से जुड़ी ये खास बातें, जो आपकी सेहत के लिए होंगी फायदेमंद

जानिए भोजन के सेवन से जुड़ी ये खास बातें, जो आपकी सेहत के लिए होंगी फायदेमंद

Health
पाचनतंत्र से जुड़े जितने भी रोग हैं, सभी आहार-विहार की गड़बड़ी से जन्म लेते हैं। जिसमें अनियमित भोजन करना, पूरी नींद न लेना, पानी कम पीना, तनाव लेना, अधिक तली-भुनी, मसालेदार व गरिष्ठ चीजें खाना, निश्चित भूख से ज्यादा या कम लेना, बिना चबाए खाना, नियमित रूप से शारीरिक व्यायाम न करना रोगों की वजह बनते हैं। इनमें कब्ज की समस्या बेहद आम है। जानते हैं कब्ज की स्थिति क्यों व कब बनती है- शरीर क्रिया विज्ञान (फिजियोलॉजी) के अनुसार आंतों में खाद्य पदार्थों के रस के अवशोषण का कार्य लगातार चलता है। लेकिन जब इसमेेंं मल जमा होकर सडऩे लगता है तो आंतों की कार्यप्रणाली प्रभावित होने के साथ मल में उपस्थित अपशिष्ट व विषैले पदार्थ कब्ज का कारण बनते हैं। कुछ योग जैसे ताड़ासन, हलासन, मंडूकासन, कटिचक्रासन आदि भी इस रोग में फायदा पहुंचाते हैं। लक्षण -कब्ज की समस्या से अपच, भूख कम लगना, एसिडिटी, कोलाइटिस, पेटदर्द,
TV GOSSIP: पढ़ें टीवी से जुड़ी 10 बड़ी खबरें और गॉसिप

TV GOSSIP: पढ़ें टीवी से जुड़ी 10 बड़ी खबरें और गॉसिप

Entertainment
कोलाकाता में एक बंगाली टीवी एक्ट्रेस स्वास्तिका दत्ता ने आरोप लगाया है कि उन्हें बुधवार को उबर ड्राइवर ने कैब से नीचे उतार दिया और धमकी दी। स्वास्तिका दत्ता बंगाली सीरियल्स की पॉपुलर एक्ट्रेस... Live Hindustan Rss feed

बजट पेश कर रही हैं निर्मला सीतारमण, जानें उनकी शिक्षा और जिंदगी से जुड़ी हर अहम बात

Indian Education
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट शुक्रवार यानी आज बजट पेश करने जा रही हैं। बता दें कि यह मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला बजट है। Latest And Breaking Hindi News Headlines, News In Hindi | अमर उजाला हिंदी न्यूज़ | - Amar Ujala

Realme X इसी महीने हो रहा है भारत में लॉन्च, जानें इस स्मार्टफोन से जुड़ी हर बात

Indian Technology
Realme इसी महीने अपने अगले स्मार्टफोन Realme X को लॉन्च कर सकता है। इस स्मार्टफोन को कंपनी के आधिकारिक ट्विटर हैंडल के जरिए टीज किया गया है। Jagran Hindi News - technology:tech-news
Thoracoscopy: जानिए फेफड़ों में पानी भरने और इसकी जांच से जुड़ी ये बातें

Thoracoscopy: जानिए फेफड़ों में पानी भरने और इसकी जांच से जुड़ी ये बातें

Health
थोरेकोस्कोपी क्या है ? Thoracoscopy: फेफड़ों के विभिन्न हिस्सों में होने वाली बीमारियों के इलाज में ब्रोंकोस्कोपी तकनीक उपलब्ध होने से काफी सुविधा हो गई है। लेकिन फेफड़ों के बाहर की झिल्ली (प्लयूरा) से जुड़े रोगों का पता लगाना कठिन होता है। थोरेकोस्कोपी तकनीक में एक विशेष लचीली ट्यूब को सीने में छोटे चीरे के जरिए डालकर फेफड़ों की झिल्ली और आसपास के अंगों से जुड़े रोगों का इलाज आसान हो गया है। इसमें फेफड़ों की झिल्ली में पानी भरना आम बीमारी है। थोरेकोस्कोपी यंत्र की मदद से प्लयूरल केविटी का पूरा दृश्य कैमरे में दिखता है। थोरेकोस्कोपी से लिए गए बायोप्सी के नमूने से ऐसी बीमारी का सही पता लग जाता है। कई बार प्लयूरल केविटी में भरे पानी में जाले बन जाते हैं जिससे पानी पूर्णतया निकाला नहीं जा सकता। ऐसी स्थिति में थोरेकोस्कोपी से जाले तोड़े जाते हैं। क्या इसमें दर्द होता है?छाती में छोटा सुराख कर
प्लाईवुड एसोसिएशन की डिमांड थी कि आईटीआई में हो प्लाई इंडस्ट्री से जुड़ी ट्रेड्स, 1-1 साल की 6 नई ट्रेड्स प्रस्तावित

प्लाईवुड एसोसिएशन की डिमांड थी कि आईटीआई में हो प्लाई इंडस्ट्री से जुड़ी ट्रेड्स, 1-1 साल की 6 नई ट्रेड्स प्रस्तावित

Haryana
जिले में 327 प्लाईवुड इंडस्ट्री हैं। जिनमें 30 हजार युवा काम कर रहे हैं। इनमें 1500 युवा ही टेक्निकल ट्रेड हैं, वे भी ज्यादातर दूसरे शहरों के हैं। अभी भी कुल इंडस्ट्री पर करीब दो हजार टेक्निकल ट्रेंड ऑपरेटर्स की डिमांड हैं। लेकिन प्लाईवुड एसोसिएशन का कहना है कि सरकारी स्तर पर चल रही आईटीआई में प्लाई उद्योग से जुड़ी कोई ऐसी ट्रेड नहीं है, जिसे करने के बाद यहां के युवाओं को वे अपने जिले की प्लाईवुड इंडस्ट्री में ही रोजगार दे पाएं। मजबूरन कुछ बाहर के युवा रखने पड़ते हैं। इसी के साथ 2017 से हो रही मांग पर यमुनानगर आईटीआई में प्लाई उद्योग से जुड़ी 6 नई ट्रेड्स प्रपोस्ड कर दी गईं हैं। ये ट्रेड्स शॉट टर्म यानि 1-1 साल की होंगी, जिसे करने के बाद युवाओं को प्लाई इंडस्ट्री में रोजगार मिल सकेगा। इंडस्ट्री की टेक्निकल ट्रेंड की मांग पूरी होने से काम में गुणवत्ता आएगी। उनके मुनाफे
प्लाईवुड एसोसिएशन की डिमांड थी कि आईटीआई में हो प्लाई इंडस्ट्री से जुड़ी ट्रेड्स, 1-1 साल की 6 नई ट्रेड्स प्रस्तावित

प्लाईवुड एसोसिएशन की डिमांड थी कि आईटीआई में हो प्लाई इंडस्ट्री से जुड़ी ट्रेड्स, 1-1 साल की 6 नई ट्रेड्स प्रस्तावित

Haryana
जिले में 327 प्लाईवुड इंडस्ट्री हैं। जिनमें 30 हजार युवा काम कर रहे हैं। इनमें 1500 युवा ही टेक्निकल ट्रेड हैं, वे भी ज्यादातर दूसरे शहरों के हैं। अभी भी कुल इंडस्ट्री पर करीब दो हजार टेक्निकल ट्रेंड ऑपरेटर्स की डिमांड हैं। लेकिन प्लाईवुड एसोसिएशन का कहना है कि सरकारी स्तर पर चल रही आईटीआई में प्लाई उद्योग से जुड़ी कोई ऐसी ट्रेड नहीं है, जिसे करने के बाद यहां के युवाओं को वे अपने जिले की प्लाईवुड इंडस्ट्री में ही रोजगार दे पाएं। मजबूरन कुछ बाहर के युवा रखने पड़ते हैं। इसी के साथ 2017 से हो रही मांग पर यमुनानगर आईटीआई में प्लाई उद्योग से जुड़ी 6 नई ट्रेड्स प्रपोस्ड कर दी गईं हैं। ये ट्रेड्स शॉट टर्म यानि 1-1 साल की होंगी, जिसे करने के बाद युवाओं को प्लाई इंडस्ट्री में रोजगार मिल सकेगा। इंडस्ट्री की टेक्निकल ट्रेंड की मांग पूरी होने से काम में गुणवत्ता आएगी। उनके मुनाफे