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Tag: जोड़ों

30-35 की उम्र के बाद बढ़ती जोड़ों की तकलीफ, जंकफूड और एसिडिक चीजों से बचें

30-35 की उम्र के बाद बढ़ती जोड़ों की तकलीफ, जंकफूड और एसिडिक चीजों से बचें

Health
जयपुर। उम्र कोई भी हो मजबूत हड्डियां स्वस्थ शरीर की जरूरत होती हैं। हड्डियां कैल्शियम के अलावा कई तरह के मिनरल्स से बनी हैं। 35 की उम्र के बाद हड्डियों की ग्रोथ प्रभावित होती है। हार्मोनल बैलेंस बिगडऩे से भी दिक्कत होती है। एक्सरसाइज से हड्डियां मजबूत एक हड्डी से दूसरी को जोडऩे के स्ट्रक्चर को जॉइंट कहते हैं। खानपान में लापरवाही और एक्सरसाइज न करने से जोड़ों में दिक्कत होती है। एक्सरसाइज करने से मांसपेशियां और जॉइंट्स मजबूत रहते हैं। कोई चीज ऊंचाई से उतारें तो एडिय़ों के बल ऊंचे होकर पकडऩे की कोशिश न करें। अचानक झुके भी नहीं। ऑपरेशन के तीसरे दिन घर भेज देते जोड़ों में कार्टिलेज खराब होने से दिक्कत होती है। एडवांस घुटना प्रत्यारोपण से उकडू़-मुकड़ू और आल्ती-पाल्ती कर बैठ सकते हैं। ऑपरेशन से एक दिन पहले भर्ती मरीज का दूसरे दिन ऑपरेशन व तीसरे दिन उसे घर भेज देते हैं। प्रोटीनयुक्त डाइट लें दैन
जोड़ों में दर्द से फेफड़ों और दिल को नुकसान

जोड़ों में दर्द से फेफड़ों और दिल को नुकसान

Health
कमर में अकड़न, पीठ और जोड़ों में दर्द की शिकायत को हल्के में न लें। आपको स्पांडिलाइटिस की शिकायत हो सकती है। स्पांडिलाइटिस से दिल, फेफड़े और आंत समेत शरीर के कई अंग प्रभावित हो सकते हैं। दिल्ली... Live Hindustan Rss feed
जोड़ों में दर्द से हृदय, फेफेड़ों को हो सकता है खतरा

जोड़ों में दर्द से हृदय, फेफेड़ों को हो सकता है खतरा

Health
क्या आपको कमर में अकडऩ, पीठ और जोड़ों में दर्द की शिकायत रहती है, जिसके कारण आप रात में ठीक से सो नहीं पाते हैं? अगर जोड़ों के दर्द के कारण रात में तीन-चार बजे आपकी नींद खुल जाती है और आप असहज महसूस करते हैं, तो जल्द डॉक्टर से सलाह लीजिए क्योंकि आपको स्पांडिलाइटिस की शिकायत हो सकती है। स्पांडिलाइटिस से हृदय, फेफड़े और आंत समेत शरीर के कई अंग प्रभावित हो सकते हैं। स्पांडिलाइटिस को नजरंदाज करने से गंभीर रोगों का खतरा पैदा हो सकता है। इससे बड़ी आंत में सूजन यानी कोलाइटिस हो सकता है और आंखों में संक्रमण हो सकता है। स्पांडिलाइटिस एक प्रकार का गठिया रोग है। इसमें कमर से दर्द शुरू होता है और पीठ और गर्दन में अकडऩ के अलावा शरीर के निचले हिस्से जांघ, घुटना व टखनों में दर्द होता है। रीढ़ की हड्डी में अकडऩ बनी रही है। स्पांडिलाइटिस में जोड़ों में इन्फ्लेमेशन यानी सूजन और प्रदाह के कारण असह्य पीड़ा
घिसे जोड़ों में रगड़ से होता है ओस्टियोआर्थराइटिस

घिसे जोड़ों में रगड़ से होता है ओस्टियोआर्थराइटिस

Health
ओस्टियोआर्थराइटिस जोड़ों में होने वाली एक समस्या है। जब हमारे जोड़ उम्र के साथ बूढ़े हो जाते हैं या घिस जाते हैं तो घुटनों में यह तकलीफ होने लगती है। दरअसल हमारे जोड़ों को चिकना बनाए रखने के लिए उनमें एक प्राकृतिक पदार्थ कार्टिलेज होता है, जो शॉक एब्जॉर्बर का काम करता है। जब यह कम होने लगता है या खत्म हो जाता है, तो हडिï्डयां आपस में रगड़ खाती हैं जिससे चलने, दौडऩे या बैठने में दर्द होता है। वजह : बढ़ती उम्र, फैमिली हिस्ट्री, मोटापा और युवावस्था में घुटनों में लगी कोई चोट। लक्षण : चलने-फिरने, घुटनों को मोडऩे, मौसम बदलने पर घुटनों में दर्द होना। इस बीमारी में दर्द शुरू-शुरू में आता-जाता रहता है, लेकिन धीरे-धीरे इसके अटैक जल्दी-जल्दी आने लगते हैं। स्थिति गंभीर होने पर दर्द स्थायी हो जाता है और कई बार घुटने अंदर की ओर मुडऩे लगते हैं। खतरा : भारी-भरकम एक्सरसाइज करने वाले लोगों को ओस्टियोआ
जोड़ों की अकडऩ दूर करती थैरेपी

जोड़ों की अकडऩ दूर करती थैरेपी

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आयुर्वेद चिकित्सा में अग्निकर्म थैरेपी काफी कारगर मानी जाती है। इसका इस्तेमाल ज्यादातर उस अवस्था या बीमारी में किया जाता जिसमें औषधि से न के बराबर असर हो। आधुनिक चिकित्सा में भी इस थैरेपी को प्रयोग में लिया जा रहा है। जिसे काटरी यानी जलाना कहते हैं। ऐसे करते प्रयोग जोड़, कमर व घुटने के दर्द, कंधे की जकडऩ, गठिया, सियाटिका आदि रोगों में पांच तरह की मेडिकेटेड सलाकों (सोना, चांदी, तांबा, वंग और लोहा) से प्रभावित हिस्से की सिंकाई की जाती है। इसमें सलाका के केवल आगे के भाग को (चने की दाल जितना हिस्सा) लाल होने तक गर्म करके प्रभावित हिस्से की बेहद थोड़ी सी जगह की सिंकाई करते हैं। गर्म सलाका एंटीसेप्टिक की तरह काम करती है। इसमें रोग के अनुसार त्वचा की मोटाई को भी ध्यान में रखते हैं। रोग की गंभीरता और अवस्था के अनुसार हिस्से को दागने के बाद उस स्थान पर ग्वारपाठा लगा देते हैं ताकि जलन और दर्द खत्म ह
जोड़ों में दर्द व जकडऩ हो सकता है आर्थराइटिस

जोड़ों में दर्द व जकडऩ हो सकता है आर्थराइटिस

Health
बढ़ती उम्र के साथ-साथ शरीर के किसी भी जोड़ में सूजन, दर्द और जकडऩ को आर्थराइटिस कहते हैं। इस रोग के कई प्रकार होते हैं जिनमें ओस्टियो, रुमेटॉइड, जुवेनाइल, सोराइटिक आर्थराइटिस बेहद आम हैं। अधिकांश मामलों में इसका कारण बढ़ता वजन और डाइट में पोषक तत्त्वों की कमी सामने आती है। जानते हैं इनके बारे में- ओस्टियो आर्थराइटिस : यह आमतौर पर होने वाला आर्थराइटिस का प्रकार है। इससे शरीर के छोटे से लेकर बड़े जोड़ भी प्रभावित हो सकते हैं जिसमें हाथ, पैर, कूल्हे, पीठ और घुटने शामिल हैं। अधिकतर महिलाओं में ६५ वर्ष की उम्र के बाद इस रोग की आशंका रहती है। लक्षण : जोड़ों की मांसपेशियों के टूटने व मुलायम हड्डियों के घिसने से सूजन, दर्द और जकडऩ होने लगती है। कारण : बढ़ती उम्र, मोटापा या किसी प्रकार की चोट प्रमुख हैं। जुवेनाइल रुमेटॉइड आर्थराइटिस: आमतौर पर १६ या इससे कम उम्र की आयु के बच्चों में ज्यादा होता है।
जोड़ों को जकड़ता है रुमेटाइड आर्थराइटिस

जोड़ों को जकड़ता है रुमेटाइड आर्थराइटिस

Health
रुमेटाइड आर्थराइटिस एक ऐसी बीमारी है, जो व्यक्ति के जोड़ों में विकृति व विकलांगता पैदा कर सकती है। इसमें जोड़ों में दर्द व सूजन आ जाती है जिससे इनका मूवमेंट कम हो जाता है। वैसे इस बीमारी से शरीर का कोई भी जोड़ प्रभावित हो सकता है, लेकिन ज्यादातर यह समस्या हाथों व पैरों के जोड़ों में देखने को मिलती है। यह परेशानी किसी भी आयुवर्ग के लोगों को हो सकती है। पर आमतौर पर इसके लक्षण 40-६० की उम्र के बीच सामने आते हैं साथ ही पुरुषों की तुलना में महिलाएं इस रोग से अधिक ग्रसित होती हैं। ये हैं लक्षण यह ऑटोइम्यून बीमारी है जिसमें रोग प्रतिरोधक तंत्र की कुछ कोशिकाएं सही तरीके से काम नहीं कर पातीं और हमारे स्वस्थ ऊत्तकों पर हमला करना शुरू कर देती हंै। जोड़ों में जकडऩ, वजन कम होना, बुखार बने रहना, भूख कम लगना आदि इसके प्रारंभिक लक्षण हैं। जोड़ों में जकडऩ की समस्या सुबह के समय एक-दो घंटे या फिर दिनभर भी
हरियाणा: सामूहिक विवाह में सात जोड़ों ने हेलमेट पहनकर लिया आठवां फेरा

हरियाणा: सामूहिक विवाह में सात जोड़ों ने हेलमेट पहनकर लिया आठवां फेरा

Delhi
हरियाणा: सामूहिक विवाह में सात जोड़ों ने हेलमेट पहनकर लिया आठवां फेराकैथल| हरियाणा के कैथल में रविवार को सामूहिक विवाह सम्मेलन में अलग ही नजारा देखने को मिला। यहां सात जोड़ों ने सात... आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें दैनिक भास्कर
बेऔलाद जोड़ों के लिए वरदान बना लुधियाना बच्चों का अस्पताल

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Punjabi Politics
बेऔलाद जोड़ों के लिए वरदान बना लुधियाना बच्चों का अस्पतालमुक्तसर|कोटकपूरा रोड स्थित लुधियाना बच्चों का अस्पताल एवं नर्सिंग होम बेऔलाद जोड़ों के लिए वरदान साबित हो रहा... आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें दैनिक भास्कर