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Tag: दस्त

अस्पतालों में दस्त के कारण भर्ती होने वाले 40% बच्चे रोटा वायरस से पीड़ित

अस्पतालों में दस्त के कारण भर्ती होने वाले 40% बच्चे रोटा वायरस से पीड़ित

Punjab
सिविल सर्जन डॉ. राजकुमार की ओर से जिला संगरूर में बच्चों को रोटा वायरस वैक्सीन की बूंद पिलाने की शुरूआत करवाई गई। डॉ. राजकुमार ने कहा कि रूटीन टीकाकरण के साथ-साथ 6वें, 10वें और 14वें सप्ताह के हर बच्चे को इस वैक्सीन की पांच पांच बूंदें दी जाएगी। यह वैक्सीन बच्चों को रोटावायरस से होने वाले दस्त से बचाने में सहायक सिद्ध होगी। उन्होंने कहा कि भारत में जो बच्चे दस्त के कारण अस्पताल में भर्ती होते है, उनमें से 40 प्रतिशत रोटा वायरस से पीड़ित होते हैं। उन्होंने बताया कि भारत में हर वर्ष 32 लाख के करीब बच्चे दस्त के दौरान अस्पताल की ओपीडी में आते हैं, जिसमें से करीब 8 लाख बच्चों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ता है। यदि रोटावायरस की वैक्सीन बच्चों को समय पर पिलाई जाए तो बच्चों को जानी नुकसान से बचाया जा सकता है क्योंकि हर वर्ष करीब 78 हजार बच्चे इस बीमारी के कारण मौत के मुंह में
ज्यादा दस्त हो रहे हों तो जान लें ये खास बातें

ज्यादा दस्त हो रहे हों तो जान लें ये खास बातें

Health
बच्चे को बार-बार लूज मोशन हो रहे हैं तो यह डायरिया भी हो सकता है। अगर दिन में तीन या उससे ज्यादा बार दस्त होते हैं तो डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। लक्षण : डायरिया आमतौर पर 2-5 दिन में ठीक हो जाता है जो कि अधिकतर वायरल इन्फेक्शन से होता है। कई बार यह दो सप्ताह में भी ठीक नहीं हो पाता है जिससे बच्चा कमजोर हो जाता है और उसके शरीर में पानी की कमी होने लगती है। समय पर इलाज न होने से स्थिति गंभीर हो सकती है। प्रमुख कारण-खानपान की लापरवाही व वायरल इन्फेक्शन इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं। बचाव : डायरिया होने पर शरीर से पानी, अन्य तरल और मिनरल्स बाहर निकलते हैं। इनकी कमी को पूरा करने के लिए ओआरएस का घोल पिलाया जाता है। ओआरएस घोल साफ पानी में ही बनाएं। पूरे पैकेट को एकसाथ 1 लीटर पानी में मिलाएं। घोल का इस्तेमाल 24 घंटे के अंदर ही करना होता है, अगले दिन नया घोल बनाएं। भोजन बंद न करें-अगर घर में ओआरएस नह
भूख कम लगना, दस्त व बुखार रहे तो हो सकती है आंतों मेंं टीबी

भूख कम लगना, दस्त व बुखार रहे तो हो सकती है आंतों मेंं टीबी

Health
आंतों में टीबी की समस्या एक संक्रामक रोग है, जो टीबी के बैक्टीरिया (माइकोबैक्टीरियम ट्यूबर-कुलोसिस) से फैलता है। लेकिन कुछ मरीजों में इसका कारण माइकोबैक्टीरियम बोविस भी होता है। यह रोग सामान्यत: टीबी के बैक्टीरिया से संक्रमित खाना खाने या फेफड़ों के टीबी की अवस्था मेंं मरीज द्वारा खुद का संक्रमित बलगम निगलने से होता है। एड्स व कैंसर के मरीज और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले व्यक्तियों में इसके मामले अधिक पाए जाते हैं। जानते हैं इसके बारे में - रोग के तीन प्रकार - वैसे तो यह बीमारी आंत के किसी भी हिस्से को प्रभावित कर सकती है। लेकिन 75 प्रतिशत लोगों में यह छोटी आंत के अंतिम छोर और सीकम (अंधान्त्र) में खासतौर पर होती है। इस रोग के लक्षण क्रोंस डिजीज (आंतों की सूजन) जैसे होते हैं। प्रारंभिक अवस्था में इसका इलाज न होने पर यह जानलेवा भी हो सकती है। आंतों में टीबी तीन प्रकार से होती है- अल्सरेट
बच्चे को दस्त होने पर तुरंत अस्पताल में दाखिल करवाएं : सुखविंदर

बच्चे को दस्त होने पर तुरंत अस्पताल में दाखिल करवाएं : सुखविंदर

Punjab
सेहत विभाग की ओर से जिले भर में 23 जुलाई तक तीव्र दस्त रोक पखवाड़ा मनाया जा रहा है। जिसके तहत सब सेंटर भड़ो द्वारा गांव डेहलेवाल व बीबड़ी में लोगों को दस्त के बचाव संबंधी जागरूक किया गया। लोगों को संबोधित करते कम्यूनिटी हैल्थ अधिकारी सुखविंदर कौर ने कहा कि खाना खाने से पहले व बाद में हाथों को अच्छी तरह से धोना चाहिए। मानसून व गर्मी के समय लोगों को ज्यादा दस्त होते हैं। जिस कारण हमें ऐसे मौसम में खान-पान का ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि बच्चा दो माह का पतले दस्त करता है व 5 वर्ष का बच्चा 24 घंटे में 3 बार या उससे ज्यादा बार पतले दस्त करता है तो दस्त के लक्ष्ण है। इस दौरान अस्पताल में जाकर माहिर डॉक्टरों की सलाह लेनी बहुत जरूरी है। मल्टीपर्पज हैल्थ वर्कर मेल विपिन कुमार व एएनएस बलवीर कौर ने कहा कि बच्चे को दस्त होने पर उसे तुरंत पास के सिविल अस्पताल में दाखिल करवा
दस्त रोकू पंद्रवाड़े को लेकर बच्चों क‌ो बांटे अोअारएस के पैकेट

दस्त रोकू पंद्रवाड़े को लेकर बच्चों क‌ो बांटे अोअारएस के पैकेट

Punjab
सनौर | प्राथमिक स्वास्थ केंद्र दूधनसांधा में सीनियर मेडहकल अफसर डा. भूपिंदर कौर की देखरेख में दस्त रोकू पंद्रवाड़ा मनाया गया। बच्चों को अोअारएस के पैकेट बांटे गए। बीएई गुरविंदर िसंह ने बताया िक स्वास्थ व परिवार भलाई विभाग 23 जुलाई तक दस्त रोकू पंद्रवाडा मना रहा है। गरमी के कारण दस्त से बच्चाें के शरीर में पानी की कमी हो जाती है। यहां डा. हरनीत इंदर कौर, डा. साैम्या, कमलजीत कौर, परमजीत कौर, अनुपम माैजूद रहीं। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today Dainik Bhaskar
दस्त व डायरिया कंट्रोल करने को चलेगी मुहिम : डॉ. नरेश

दस्त व डायरिया कंट्रोल करने को चलेगी मुहिम : डॉ. नरेश

Punjabi Politics
फगवाड़ा | सिविल सर्जन कपूरथला डॉ. जसमीत कौर बावा के दिशा निर्देशों के तहत सिविल अस्पताल फगवाड़ा में एसएमओ डॉ. कमल किशोर के नेतृत्व में डायरिया की रोकथाम पखवाड़ा तहत आशा वर्करों की ट्रेनिंग करवाई गई। इसमें सिविल अस्पताल फगवाड़ा किया कि आशा वर्करों ने डायरिया के बारे में जानकारी हासिल की। मौके पर बच्चों के रोगों के माहिर डॉ. नरेश कुंद्रा ने ट्रेनिंग के दौरान बताया कि सरकार की ओर से जिले में 0 से 5 साल के बच्चों की मौत दर कम करने के लिए दस्त तथा डायरिया को कंट्रोल करने के लिए एक मुहिम 8 जुलाई से 23 जुलाई तक चलाई जाएगी। उन्होंने कहा कि इस मुहिम के तहत आशा वर्कर घर-घर जाकर ओआरएस के पैकेट तथा जिंक की टेबलेट बांटेगी तथा दस्त से पीड़ित बच्चों को सिविल अस्पताल में दाखिल करवाया जाएगा। इस संबंधी लोगों को जागरूक भी किया जाएगा। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi
उल्टी व दस्त होने पर ओआरएस का घोल पीएं

उल्टी व दस्त होने पर ओआरएस का घोल पीएं

Punjabi Politics
भास्कर संवाददाता|तलवाड़ा टाउनशिप गांव भटोंली मे लोगों को डेंगू व मलेरिया के प्रति जागरूक करने के लिए सेमिनार करवाया गया। जिसमें स्वास्थ वर्कर पवन कुमार ने लोगों इस बीमारी से बचाव के टिप्स दिए। राकेश कुमार ने मलेरिया के लक्षणों की जानकारी देते हुए बताया कि अगर किसी को तेज बुखार, सिर दर्द ,थकावट, कमजोरी हो तो वह व्यक्ति मलेरिया की बीमारी से ग्रस्त हो सकता है। अगर किसी व्यक्ति को उलटी दस्त हो तो उस व्यक्ति को ओआरएस का घोल देना चाहिए। यहां पवन कुमार, स्वर्ण सिंह, अनु कुमारी ,विमला देवी, रेशम कौर, रूपा देवी, राज कुमारी हाजिर थे। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today Talwara News - drink vomiting and ors solution on diarrhea Dainik Bhaskar
दांत निकलते समय इंफेक्शन भी हाेता है दस्त की वजह

दांत निकलते समय इंफेक्शन भी हाेता है दस्त की वजह

Health
छह माह की उम्र के बाद बच्चों को बुखार, दस्त लगने व चिड़चिड़ेपन जैसी दिक्कतें होती हैं। ज्यादातर माता-पिता या घर के बड़े इन लक्षणों को दांत निकलने से होने वाली दिक्कतें समझ बैठते हैं। दरअसल दांत निकलना एक सामान्य प्रक्रिया है। इस दौरान सामने आने वाले लक्षणों का मुख्य कारण संक्रमण है जो बार-बार बच्चे के कुछ-न-कुछ मुंह में रखने से होता है।ऐसा दांत निकलने के दौरान होने वाली खुजली को मिटाने के लिए वह करता है। साफ-सफाई का रखें खास खयाल छह माह बाद बच्चे घुटनों के बल चलने लगते हैं व सामने आने वाली हर वस्तु को पकड़कर खाने की कोशिश करते हैं जिससे संक्रमण होता है। ऐसे में सफाई का ध्यान रखें। अच्छा हो खानपानमां का दूध जारी रखने के साथ बच्चे को नियमित रूप से दलिया, खिचड़ी, केला, आलू जैसी चीजेेंं को खिलाते रहें। इनसे मसूढ़ों में मजबूती आने के साथ उसे पोषण भी मिलता रहेगा। दवाएं न देंदांत निकलने की प्रक्र
बड़ी आंत में सूजन, छाले और खूनी दस्त इस बीमारी के है लक्षण

बड़ी आंत में सूजन, छाले और खूनी दस्त इस बीमारी के है लक्षण

Health
अल्सरेटिव कोलाइटिस बड़ी आंत से जुड़ी बीमारी हैअल्सरेटिव कोलाइटिस बड़ी आंत से जुड़ी बीमारी है। आमतौर पर पेटदर्द के साथ खूनी दस्त इसके शुरुआती लक्षण होते हैं। कई बार लोग इन लक्षणों को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं जो आगे चलकर गंभीर रूप ले सकते हैं। इसमें बड़ी आंत की आंतरिक सतह में सूजन आ जाती है और उसमें छाले या घाव (अल्सर) होने लगते हैं। इस बीमारी की शुरुआत बड़ी आंत के अंतिम हिस्से यानी मलद्वार से होती है और धीरे-धीरे पूरी आंत प्रभावित होने लगती है। अल्सरेटिव कोलाइटिस आमतौर पर छोटी आंत में नहीं होती है लेकिन गंभीर स्थिति में जब बीमारी पूरी बड़ी आंत तक फैल जाती है तब छोटी आंत का अंतिम भाग भी प्रभावित हो सकता है। यह समस्या किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है। लेकिन इसके ज्यादातर मामले 15-30 वर्ष की उम्र में देखे गए हैं। जानते हैं बीमारी से जुड़े तथ्यों के बारे में। लक्षण स्टूल के साथ ख
ब्लड प्रेशर, दस्त, अल्सर और हिचकी के लिए फायदेमंद है मीठी तुलसी

ब्लड प्रेशर, दस्त, अल्सर और हिचकी के लिए फायदेमंद है मीठी तुलसी

Health
मीठी तुलसी को वन तुलसी (तुलसा) या नियाजबो भी कहते हैं। यह हरे रंग का पौधा होता है और इसकी पत्तियां आकार में अन्य तुलसी की पत्तियों से काफी बड़ी व हरे रंग की होती हैं। इसके फूल गुच्छों में लगते हैं जो सुगंधित व हरे बैंगनी रंग के होते हैं। यह एंटीबायोटिक और एंटीवायरल होती है। इसकी 4-5 पत्तियां खाने से ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने, गठिया, पेशाब में जलन, हेपेटाइटिस, पेट का अल्सर, थकान, तनाव, उल्टी, दस्त, भोजन में अरुचि, हिचकी, सर्दी-जुकाम, पेट संबंधी रोग और डायबिटीज में लाभ होता है। इसे प्रयोग करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। यह भी जानें - इसकी सुगंध से डेंगू के मच्छर दूर भागते हैं। ज्यादा सर्दी के मौसम में तुलसी की पत्तियां सूखकर झड़ जाती हैं और बसंत का मौसम आने पर नई आती हैं। इसलिए मीठी तुलसी की ताजी पत्तियों को सुखाकर रख लें। सर्दियों में इनके इस्तेमाल से सेहत में लाभ होता है। पत्ति