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Tag: फायदेमंद

सिरदर्द, पीलिया और अंदरुनी चोट में फायदेमंद है बेल, जानें इसके अन्य फायदे

सिरदर्द, पीलिया और अंदरुनी चोट में फायदेमंद है बेल, जानें इसके अन्य फायदे

Health
बील या बेल अपने विशेष गुणों से शरीर की कई समस्याओं के लिए फायदेमंद होता है, आइये जानते हैं इसके गुणों के बारे में पीलिया में बील की कोपलों का 50 ग्राम रस में एक ग्राम पिसी काली मिर्च मिलाकर सुबह-शाम पिएं, इससे लाभ मिलता है।सौ ग्राम पानी में इसका थोड़ा गूदा उबालें, ठंडा होने पर कुल्ला करने से मुंह के छाले ठीक होते हैं। सिरदर्द में बील पत्र के रस से भीगी पट्टी माथे पर रखें। पुराना सिरदर्द होने पर कुछ पत्तों का रस निकाल कर पिएं। गर्मियों में इसमें थोड़ा पानी मिला लें।मोच या अंदरुनी चोट में बील के पत्तों को पीसकर थोड़े गुड़ में पकाएं। इसे पीड़ित अंग पर बांध दें। दिन में तीन-चार बार इसे बदलें, लाभ मिलता है।पके हुए बील में चिपचिपापन होता है इसलिए यह डायरिया रोग में काफी लाभप्रद है और शरीर में पानी की कमी को दूर करता है।पका बील खाने से वात और कफ रोग दूर होते हैं। गर्मी के मौसम में पेट के साथ दिमा
कोलेस्ट्रॉल और त्वचा संबंधी समस्याओं के लिए फायदेमंद है पिस्ता

कोलेस्ट्रॉल और त्वचा संबंधी समस्याओं के लिए फायदेमंद है पिस्ता

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पिस्ता इंसुलिन के लेवल और रक्त संचार को नियंत्रित करता है। ब्लड शुगर में बदलाव होने पर मुंहासे होते हैं जिसके लिए पिस्ता बेहद गुणकारी है। इसमें सेलेनियम तत्व प्रचुर मात्रा में होता है जो चमड़ी की जलन और दाग-धब्बों से बचाता है। पिस्ता में विटामिन-सी, ई होता है जो सूर्य की हानिकारक किरणों से बचाने में मददगार होता है।त्वचा की नमी बनाए रखने में यह उपयोगी होता है। पिस्ता में कारोटेनस अधिक मात्रा में होता है जो बॉडी को ऑक्सीडेटिव फ्री रेडिकल बदलाव होने से बचाता है।इसमें मौजूद फायटोस्ट्रॉल खाद्य पदार्थों से मिलने वाले कोलेस्ट्रॉल को घटाता है। यह ब्लड में बुरे कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को भी कम करता है।आंखों का भी दोस्त है पिस्ता। इसमें कारोटेनाइड्स होते हैं जो उम्र बढऩे से आंखों को होने वाली क्षति या मोतियाबिंद जैसे रोगों से बचाव करते हैं।पिस्ता में मौजूद विटामिन बी-6 इम्यून सिस्टम को स्वस्थ रखता है।
तमाम रोगों के लिए फायदेमंद है छोटी सी लौंग, जानें इसके फायदे

तमाम रोगों के लिए फायदेमंद है छोटी सी लौंग, जानें इसके फायदे

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वैसे तो लौंग का इस्तेमाल मसाले आदि में किया जाता है। लेकिन लौंग एक बेहतरीन औषधि भी है। यह चरपरी, कड़वी और तासीर में ठंडी होती है। लौंग नेत्र रोगों, दांतों की समस्या, खांसी, अजीर्ण, गैस, भोजन में अरुचि, उल्टी और अधिक प्यास लगने की तकलीफ में उपयोगी है। लौंग को मिश्री के साथ पीसकर चाटने से गर्भावस्था में उल्टियां, जी घबराना और भोजन में अरुचि दूर होती है। खाने के बाद दो लौंग मुंह में रखकर चूसते रहने से पेट का तनाव कम होता है, आंतों में भोजन की पाचन गति बढ़ती है और अफरा, डकारें व गैस की समस्या दूर होती है। इसका तेल गठिया, सिरदर्द में लाभदायक होता है। कैविटी होने पर रुई की फुरेरी बनाकर रखने से दांतदर्द में आराम मिलता है।लौंग खाने से दांतों की बदबू, सांस की दुर्गंध और पायरिया रोग में राहत मिलती है। खांसी, जुकाम, सिरदर्द में लौंग, तुलसी के पत्ते और अदरक वाली चाय फायदा करती है। लौंग को मुंह में रखक
मन की शांति के लिए फायदेमंद है शिरोधारा, जानें इसके बारे में

मन की शांति के लिए फायदेमंद है शिरोधारा, जानें इसके बारे में

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शिरोधारा दो शब्दों से बना है शिरो (सिर), धारा (प्रवाह) यानी भू्र के मध्य स्थान से थोड़ा ऊपर ललाट पर किसी तरल पदार्थ को जब धारा के रूप में कुछ समय तक बिना रुके गिराया जाता है तो इसे शिरोधारा कहते हैं। शिरोधारा के लिए रोगी एवं रोग की प्रकृति के अनुसार औषधीय तेल, दूध या केवल पानी की धार का प्रयोग किया जाता है। शिरोधरा प्राकृतिक चिकित्सा विधि है। प्रमुख लाभ : तनाव, अनिद्रा, बेचैनी, चिड़चिड़ापन, मूड स्विंग होने जैसी तकलीफों में शिरोधारा बहुत लाभकारी है। इससे मन को शांति मिलती है। स्नायु से संबंधित रोग : कमजोर याददाश्त, चेहरे का लकवा, पुराना सिरदर्द, माइग्रेन, गहरी नींद न आना जैसी परेशानियों में यह बहुत फायदेमंद है। इससे मस्तिष्क की कार्यक्षमता में सुधार होकर रूसी, बाल झड़ना या जल्दी सफेद होना, सिर की त्वचा का संक्रमण आदि में आराम मिलता है। लेकिन इस प्रक्रिया को विशेषज्ञ की सलाह के बाद ही करें।
लोहे के बर्तनों में खाना बनाना सेहत के लिए फायदेमंद, जानें इसके बारे में

लोहे के बर्तनों में खाना बनाना सेहत के लिए फायदेमंद, जानें इसके बारे में

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लोहे की कढ़ाई में खाना बनाना सेहत के लिए फायदेमंद होता है। पुराने समय में लोहे की कढ़ाई व लोहे के अन्य बर्तनों का इस्तेमाल भोजन बनाने में किया जाता था, लेकिन अब बाजार में कई अन्य धातुओं से बनी कढ़ाईयां आ गई हैं, लेकिन सेहत के नजरिये देखा जाए तो लोहे की कढ़ाई में बना भोजन अच्छा माना जाता है। आइये जानते हैं इससे जुड़ी बातें- एनीमिया में उपयोगी - जब हम लोहे के बर्तन में खाना बनाते हैं तो इसके अंश भोजन में मिलकर शरीर में पहुंचते हैं जो रक्त में हीमोग्लोबिन की मात्रा को बढ़ाते हैं और इससे एनीमिया (खून की कमी) जैसी समस्या दूर होती है। इन सब्जियों को पकाएं - पालक, आंवला, टमाटर जैसी आयरन वाली चीजों को जब इनमें पकाया जाता है तो इस पोषक तत्व में और भी इजाफा होता है। सावधानी बरतें - आजकल लोग रंगत और खाने को अच्छा दिखाने के लिए एल्युमीनियम के बर्तनों का इस्तेमाल करने लगे हैं। लेकिन लंबे समय तक इन बर्त
पेट के संक्रमण, अनिद्रा और कोलेस्ट्रोल के लिए फायदेमंद है तेजपत्ता

पेट के संक्रमण, अनिद्रा और कोलेस्ट्रोल के लिए फायदेमंद है तेजपत्ता

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तेजपत्ता भारतीय मसालों का अहम हिस्सा है। यह भोजन में न सिर्फ स्वाद बढ़ाता है बल्कि सेहत भी संवारता है। आइए जानते हैं इसके फायदों के बारे में। तेजपत्ते के 2-3 पत्तों को आधा कप पानी या चाय में उबालकर पीने से जुकाम व खांसी में आराम मिलता है।डायबिटीज रोग में इसकी पत्तियों का पाउडर एक महीने तक प्रयोग करने से रक्त में ग्लूकोज और कोलेस्ट्रोल के स्तर में कमी आती है। इस पाउडर से हफ्ते में दो बार मंजन करने से दांतों की चमक व सफेदी बनी रहती है। अनिद्रा की समस्या में तेजपत्ते के थोड़े से पाउडर को पानी में मिलाकर रात को सोने से पहले लें। इसके 1-2 पत्तों को एक कप पानी में उबाल लें। आधा होने के बाद ठंडा होने पर पीने से कोलेस्ट्रॉल के स्तर में कमी आती है लेकिन इसके प्रयोग के दौरान तली-भुनी चीजें न खाएं।पेट में इंफेक्शन होने पर तेजपत्ते को सब्जी में प्रयोग करें।कफ के लिए इसके दो पत्तों को कूटकर चाय या दूध
सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है आयरन से भरपूर सरसों का साग

सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है आयरन से भरपूर सरसों का साग

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सरसों के साग में कैलोरी, फैट्स, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, शुगर, पोटेशियम, विटामिन ए, सी, डी, बी 12, मैग्नीशियम, आयरन और कैल्शियम होता है।इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं जो न सिर्फ शरीर से विषैले पदार्थों को दूर करते हैं बल्कि रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाते हैं। अाइए जानते हैं सरसाें का साग खाने के फायदाें के बारे में :- - सरसों का साग खाने से कोलेस्ट्रॉल लेवल, ब्लैडर, पेट, फेफड़े, प्रोस्टेट और ओवरी के कैंसर का खतरा कम होता है।इसमें पर्याप्त मात्रा में फाइबर होता है जो शरीर की मेटाबॉलिक क्रियाओं को नियंत्रित रखने में मदद करता है। - साग में कैलोरी कम होती है जिससे वजन नियंत्रित रहता है। इसमें मौजूद कैल्शियम और पोटेशियम हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। यह हड्डियों से जुड़े रोगों के उपचार में भी फायदेमंद माना जाता है। - सरसों के साग में विटामिन ए होता है जो आंखों
अल्सर, पीलिया, कब्ज और बवासीर में फायदेमंद है पपीता, एेसे करें सेवन

अल्सर, पीलिया, कब्ज और बवासीर में फायदेमंद है पपीता, एेसे करें सेवन

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पपीता एक संपूर्ण फल है। पके हुए पपीते में मौजूद कैरोटीन शरीर में विटामिन 'ए' बनाता है। इसमें विटामिन 'सी', कैल्शियम, फॉस्फोरस, आयरन, प्रोटीन, कार्बोहाईड्रेट, टारटरिक व साइट्रिक एसिड जैसे कई पोषक तत्व मौजूद होते हैं। पपीते में पाए जाने वाले पपेन की मात्रा लगभग 20 प्रतिशत तक होती है जो हमारे शरीर में प्रोटीन को पचाता है।टूथपेस्ट बनाने और त्वचा के दाग मिटाने की दवा बनाने में भी पपेन का उपयोग होता है। पपीता पाचनक्रिया को दुरुस्त रखता है।बवासीर और कब्ज जैसे पुराने रोगों में भी पपीता लाभकारी है।कच्चा पपीता खाने से पीलिया रोग में आराम मिलता है।पेट में कीड़े हो गए हों तो पपीते के दस बीज पानी में पीस लें। अब इसे एक चौथाई कप पानी में मिलाकर रोजाना सात दिनों तक लें। पपीता अल्सर रोग में भी फायदेमंद होता है।पके हुए पपीते के गूदे को उबटन की तरह चेहरे पर लगाएं। जब यह सूख जाए तो गुनगुने पानी से चेहरा धो ल
मोटापा, डायबिटीज, जोड़ों के दर्द और किडनी के लिए फायदेमंद है ये औषधि, जानें इसके बारे में

मोटापा, डायबिटीज, जोड़ों के दर्द और किडनी के लिए फायदेमंद है ये औषधि, जानें इसके बारे में

Health
गिलोय को आयुर्वेद में बेहतरीन एंटीबायोटिक माना गया है। वैज्ञानिकों के अनुसार इसमें वसा, एल्कोहल, ग्लिसरोल, अम्ल व उडऩशील तेल होते हैं। इसकी पत्तियों में कैल्शियम, फॉस्फोरस और तने में स्टार्च पाया जाता है। वायरस की दुश्मन गिलोय संक्रमण रोकने में सक्षम होती है। रोजाना गिलोय की 20 ग्राम मात्रा ली जा सकती है। गिलोय का नियमित प्रयोग सभी प्रकार के बुखार, फ्लू, पेट के कीड़ों, एनीमिया, निम्न रक्तचाप, हृदय रोग व टीबी, एलर्जी, डायबिटीज आदि से बचाता है। गिलोय के दो पत्तों को ज्वार के साथ पीसकर पानी में मिला लें और छानकर इस रस को सुबह व शाम को लेने से कैंसर के मरीजों को लाभ होता है। साथ ही जिन लोगों को सूजन की समस्या हो वे भी इस रस का प्रयोग कर सकते हैं। इसकी चार इंच टहनी को अदरक की तरह कूटकर एक गिलास पानी में रात को भिगो दें। सुबह इस पानी को छानकर पी लें। बची हुई गिलोय को फिर से एक गिलास पानी में डाल
अनियमित मासिक चक्र, बालों की मजबूत और दस्त के लिए फायदेमंद है तुलसी

अनियमित मासिक चक्र, बालों की मजबूत और दस्त के लिए फायदेमंद है तुलसी

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तुलसी की पत्तियां कई बीमारियों का इलाज करती हैं। कैंसर जैसे लाइलाज रोग में तुलसी असरकारक है। यह जुकाम, खांसी व सांस की तकलीफ में भी फायदेमंद होती है। तुलसी के तेल से सिर में मालिश करने से रक्त का संचार दुरुस्त होता है। महिलाओं में मासिक चक्र की अनियमितता को दूर करने के लिए तुलसी के पत्तों का रस लाभदायक होता है। बालों की मजबूती के लिए गर्म जैतून के तेल में तुलसी का तेल मिला लें और सिर में मालिश करें। तुलसी व आंवला पीसकर सिर पर लगाने से रूसी की समस्या भी खत्म होती है। मुंहासे होने पर तुलसी की पत्तियों को पीसकर लेप बना लें। 20-25 मिनट तक लगा रहने दें और बाद में चेहरा धो लें। सर्दी या फिर हल्का बुखार है तो मिश्री, काली मिर्च और तुलसी के पत्ते का काढ़ा पीना फायदेमंद होता है। तुलसी के पत्तों को जीरे के साथ मिलाकर पीसकर चटनी बनाकर दिन में 3-4 बार चाटने से दस्त रुक जाते हैं। Patrika : India's Lea