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Tag: फेफड़ों

B Alert – घर के अंदर वायु प्रदूषण से फेफड़ों को खतरा

B Alert – घर के अंदर वायु प्रदूषण से फेफड़ों को खतरा

Health
घर के अंदर का वायु प्रदूषण दीर्घकाल में फेफड़े को नुकसान पहुंचाता है और यह सीओपीडी के जोखिम का एक कारक है। यह कहना है हर्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया (एचसीएफआई) का। संस्था ने 25वें एमएनटीएल परफेक्ट हैल्थ मेला 2018 के हिस्से के रूप में इस मूक हत्यारे के खिलाफ एक अभियान शुरू किया है, जो 23 से 27 अक्टूबर के बीच यहां तालकटोरा इनडोर स्टेडियम में आयोजित किया जाएगा। प्रोटीन की कमीसंस्था के अध्यक्ष, डॉ. के. के. अग्रवाल ने मंगलवार को जारी एक बयान में कहा है, ''सीओपीडी एक ऐसी बीमारी है, जो समय के साथ विकसित होती है, और इसके पीछे धूम्रपान और केमिकल्स का विशेष योगदान होता है। कुछ लोगों को आनुवंशिक रूप से सीओपीडी हो जाता है। इस स्थिति से पीडि़त पांच प्रतिशत लोगों में अल्फा-1-एंटीट्रिप्सिन नामक एक प्रोटीन की कमी होती है, जो फेफड़ों को खराब कर देता है और यकृत को भी प्रभावित कर सकता है।' सीओपीडी के कुछ सामान
जोड़ों में दर्द से फेफड़ों और दिल को नुकसान

जोड़ों में दर्द से फेफड़ों और दिल को नुकसान

Health
कमर में अकड़न, पीठ और जोड़ों में दर्द की शिकायत को हल्के में न लें। आपको स्पांडिलाइटिस की शिकायत हो सकती है। स्पांडिलाइटिस से दिल, फेफड़े और आंत समेत शरीर के कई अंग प्रभावित हो सकते हैं। दिल्ली... Live Hindustan Rss feed
महिलाओं में फेफडों के कैंसर के मामले 2015 से 2030 के बीच 43 फीसदी बढ़ेंगे

महिलाओं में फेफडों के कैंसर के मामले 2015 से 2030 के बीच 43 फीसदी बढ़ेंगे

Health
महिलाओं में फेफड़े के कैंसर की मृत्यु दर 2015 से 2030 के बीच 43 फीसदी तक बढ़ने की उम्मीद है। ऐसा 52 देशों के आंकड़ों के विश्लेषण में सामने आया है।जर्नल कैंसर रिसर्च में प्रकाशित शोध के अनुसार, सबसे... Live Hindustan Rss feed
वर्ल्ड लंग कैंसर डेः धूम्रपान न करने वालों को भी फेफड़ों का कैंसर

वर्ल्ड लंग कैंसर डेः धूम्रपान न करने वालों को भी फेफड़ों का कैंसर

Health
हवा में फैलता प्रदूषण अब फेफड़ों के कैंसर का कारण बन रहा है। इस कारण वे लोग भी इस जानलेवा बीमारी का शिकार बन रहे हैं जोकि धूम्रपान नहीं करते। वर्ल्ड लंग कैंसर डे के मौके पर सर गंगाराम अस्पताल ने इसे... Live Hindustan Rss feed
फेफड़ों के सिकुडऩे की बीमारी

फेफड़ों के सिकुडऩे की बीमारी

Health
अगर आपको लंबे समय से सांस फूलने के साथ बलगम आने की समस्या है तो लापरवाही न करें। यह फेफड़ों के सिकुडऩे की बीमारी आईएलडी (इंटरस्टीशियल लंग डिजीज) हो सकती है। इसमें फेफड़े धीरे-धीरे सिकुडऩे के बाद खोखले हो जाते हैं। यह बीमारी इसलिए गंभीर मानी जाती है क्योंकि अभी तक न तो इसके कारणों का पता चला है और न ही इलाज के लिए कारगर दवा बनी है। शुरुआती चरण में इसके लक्षणों के आधार पर इलाज करके मरीज को राहत देने की कोशिश की जाती है। जरूरी जांचें एक्स-रे सबसे पहले डॉक्टर मरीज का एक्स-रे करवाकर स्थिति का पता लगाते हैं। अगर डॉक्टर को लगता है कि फेफड़े में आईएलडी के लक्षण है तो वे आगे की जांच करवाते हैं। सीटी स्कैन आईएलडी की पहचान के लिए सीटी स्कैन सबसे उपयोगी जांच है। इसमें फेफड़ों के लगभग सभी हिस्सों की स्पष्ट इमेज आ जाती है, लेकिन कई बार जरूरत पडऩे पर विशेषज्ञ फेफड़ों की बॉयोप्सी भी कराते हैं। बायोप्सी इस
टूथपेस्ट से दांत साफ करें और फेफड़ों की बीमारी भी दूर भगाएं

टूथपेस्ट से दांत साफ करें और फेफड़ों की बीमारी भी दूर भगाएं

Health
टूथपेस्ट में पाया जाने वाला एक आम जीवाणुरोधी तत्व दवा के साथ मिलने पर सिस्टिक फाइब्रोसिस (सीएफ) जैसी खतरनाक बीमारियों से लड़ सकता है। यह शोध एंटीमाइक्रोबियल एजेंट्स व कीमोथेरेपी पत्रिका में प्रकाशित... Live Hindustan Rss feed
टूथपेस्ट का जीवाणुरोधी तत्व फेफड़ों की गंभीर बीमारी से लडऩे में सहायक

टूथपेस्ट का जीवाणुरोधी तत्व फेफड़ों की गंभीर बीमारी से लडऩे में सहायक

Health
टूथपेस्ट में पाया जाने वाला एक आम जीवाणुरोधी तत्व दवा के साथ मिलने पर सिस्टिक फाइब्रोसिस (सीएफ) जैसी खतरनाक बीमारियों से लड़ सकता है। इस शोध का प्रकाशन एंटीमाइक्रोबियल एजेंट्स व कीमोथेरेपी नामक पत्रिका में किया गया है। शोध में पाया गया कि ट्राइक्लोसन जब एक जैव प्रतिरोधी से मिल जाता है तो इसे टोब्रामाइसिन कहा जाता है। ट्राइक्लोसन एक तत्व है, जो जीवाणु को बढऩे से रोकता या घटाता है। टोब्रामाइसिन सीएफ जीवाणु की रक्षा करने वाली कोशिकाओं को 99.9 फीसदी तक मारती है। सीएफ जीवाणु को स्यूडोमोनानास एरुजिनोसा के नाम से जानते हैं। सीएफ एक आम आनुवांशिक बीमारी है, जो हर 2,500 से 3,500 लोगों में एक को होती है। इसकी पहचान शुरुआती अवस्था में हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप फेफड़ों में म्यूकस की एक मोटी परत बन जाती है, जो जीवाणुओं के लिए चुंबक का काम करती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि इन जीवाणुओं को मारना बेहद म