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फैलोपियन ट्यूब खराब होने के बाद भी मां बनना है संभव, जानें इसके बारे में

फैलोपियन ट्यूब खराब होने के बाद भी मां बनना है संभव, जानें इसके बारे में

Health
अक्सर ऐसे मामले सामने आते हैं कि महिला में हर माह अंडे बनने की प्रक्रिया तो हो रही है लेकिन तब भी वह मां नहीं बन पाती। इसका कारण फैलोपियन ट्यूब का न होना या इसमें खराबी होना हो सकता है। इंफर्टिलिटी से पीड़ित 20 महिलाओं में से 10-12 में इस ट्यूब से जुड़ी परेशानी सामने आती है। चिकित्सा जगत में इलाज के कई नए तरीके ऐसे हैं जिनसे इस अवस्था के बावजूद महिला मां बन सकती है। इसलिए जरूरी ट्यूब : ओवरी से अंडा फैलोपियन ट्यूब (यहीं स्पर्म व अंडे का फर्टिलाइजेशन होता है) के बाद गर्भाशय में जाता है। यहां शिशु का विकास शुरू होता है। ट्यूब न होने पर: ज्यादातर मामलों में फैलोपियन ट्यूब के न होने पर अंडाशय व गर्भाशय में भी विकृति पाई जाती है। यह समस्या जन्मजात या फिर प्यूबर्टी के समय से उभरती है। इस कारण माहवारी के शुरू होने से लेकर इसके सुचारू बने रहने में भी दिक्कत आती है। ऐसे में 11-12 साल की उम्र के दौरा
Arun Jaitley passes away: BJP के ‘थिंक टैंक’ थे अरुण जेटली, जानें उनके बारे में 10 बातें

Arun Jaitley passes away: BJP के ‘थिंक टैंक’ थे अरुण जेटली, जानें उनके बारे में 10 बातें

India
भारतीय जनता पार्टी के 'थिंक टैंक' के रूप में मशहूर अरुण जेटली ने दिल्ली विश्विद्यालय के छात्र आंदोलन से अपनी राजनीतिक पहचान बनाई और करीब चार दशक तक भारतीय राजनीति में छाये रहे। इसके अलावा... Live Hindustan Rss feed
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बारे में अशोक गहलोत ने बोल दी दिल को छू लेने वाली ये बात

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बारे में अशोक गहलोत ने बोल दी दिल को छू लेने वाली ये बात

Rajasthan
जयपुर। राजस्थान से राज्यसभा सांसद निर्वाचित हुए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शुक्रवार को राज्यसभा सदस्य के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ग्रहण की। राज्यसभा सभापति एम. वैंकेया नायडू ने डॉ. मनमोहन सिंह को शपथ दिलवाई। संसद भवन में आयोजित इस शपथ ग्रहण समारोह में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी भाग लिया। राजस्थान सरकार इसी सत्र से देने जा रही है विद्यार्थियों को ये सबसे बड़ा तोहफा अशोक गहलोत ने राजस्थान से राज्यसभा सांसद निर्वाचित होने पर डॉ. मनमोहन सिंह को अपनी तथा प्रदेश की जनता की ओर से बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित की। गहलोत ने कहा कि राजस्थान के लिए यह गौरव का विषय है कि पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह राज्यसभा में प्रदेश का प्रतिनिधित्व करेंगे। खुशखबरी: राजस्थान में साथिन कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ा, इस तारीख से मिलेगा बढ़ा हुआ मानदेय उन्होंने कहा कि डॉ. मनमोहन सिं
प्री-डायबिटीज में नहीं दिखाई देते शुगर बढ़ने के लक्षण, जानें इसके बारे में

प्री-डायबिटीज में नहीं दिखाई देते शुगर बढ़ने के लक्षण, जानें इसके बारे में

Health
मधुमेह की शुरुआती अवस्था है प्री- डायबिटीज। इसमेंं ब्लड में शुगर की मात्रा बढ़ती है लेकिन लक्षण नहीं दिखते। स्वस्थ व्यक्ति का ब्लड शुगर खाली पेट 100-126 व भोजन करने के बाद 140-200 हो तो वह प्री-डायबिटीज की श्रेणी में आता है। इन्हें खतरा-अधिक वजनी, गर्भवती, सिगरेट व शराब पीने वालों, ब्लड प्रेशर व तनाव के मरीजों में रोग की आशंका अधिक रहती है। घर में पहले से किसी को मधुमेह है तो ज्यादा सतर्क रहें। ब्लड शुगर की नियमित जांच से प्रारंभिक अवस्था में रोग की पहचान कर इलाज लें। प्रमुख लक्षण -प्री-डायबिटीज के अधिकतर मरीजों में लक्षण नहीं दिखते हैं। लेकिन कुछ मरीजों में बहुत ज्यादा प्यास लगना, अधिक यूरिन आना, धुंधला दिखाई देना या अचानक से बेहोशी छाना मुख्य लक्षण बनकर उभरते हैं। प्रमुख जांचें-फास्टिंग प्लाज्मा ग्लूकोज की जांच सुबह खाली पेट होती है। वहीं ओरल ग्लूकोज टॉलरेंस टैस्ट सुबह नाश्ते के दो घंटे
जानिए क्लब फुट के बारे में, क्यों होती है ये समस्या, क्या है इसका उपचार

जानिए क्लब फुट के बारे में, क्यों होती है ये समस्या, क्या है इसका उपचार

Health
मांसपेशियों को हड्डियों से जोड़ने वाले ऊतक छोटे हो जाते हैं। ऐसे में प्रभावित पैर टखने से अंदर की ओर मुड़ जाता है। क्लब फुट क्या है?क्लब फुट, एक या दोनों पैरों को प्रभावित करने वाली जन्मजात विकृति है। आमतौर पर पैर के पंजे 90 डिग्री पर होते हैं। लेकिन रोग के कारण मुड़ाव आने से पैरों का आकार या स्थिति असामान्य हो जाती है। मांसपेशियों को हड्डियों से जोड़कर रखने वाले ऊतक सामान्य से छोटे हो जाते हैं। इससे पैर टखने से अंदर मुड़ जाता है। इसके लक्षण क्या हैं?आमतौर पर पैर का अगला भाग नीचे-अंदर की ओर मुड़ा होता है, पैर इतने अधिक मुड़ जाते हैं कि ऐसे लगते हैं कि वो उल्टे हों। प्रभावित पैर दूसरे से लगभग एक सेमी.छोटा हो सकता है। पैर असामान्य दिखने के बावजूद इसमें कोई दर्द या परेशानी नहीं होती है। रिस्क फैक्टर क्या हैं?माता-पिता दोनों को या किसी एक को यह रोग है तो बच्चों में इसके होने की आशंका दोगुनी हो
सबसे ज्यादा खतरनाक है इस तरह का हेपेटाइटिस,जानें इसके बारे में

सबसे ज्यादा खतरनाक है इस तरह का हेपेटाइटिस,जानें इसके बारे में

Health
हेपेटाइटिस-सी से पीड़ित मरीजों का समय पर इलाज कर उनकी जान बचाई जा सकती है। भारत में इस रोग की जटिलता व बचाव के तरीके से अनजान लोगों में रोग की सही जानकारी न होने से ये गंभीर रूप ले लेती है। आइये जानते हैं हेपेटाइटिस के बारे में। लिवर में फैलता संक्रमण -हेपेटाइटिस लिवर में होने वाला संक्रमण है। इसका पता शुरुआती अवस्था में नहीं लगता। लेकिन आगे चलकर यह लिवर सिरोसिस व लिवर फेल्योर तक का रूप ले लेता है। भूख न लगना, त्वचा व आंखों में पीलापन, पेटदर्द, हल्का बुखार मुख्य लक्षण हैं। रोग के 5 प्रकार - हेपेटाइटिस के प्रमुख पांच प्रकार हैं- ए,बी,सी, डी व ई। हेपेटाइटिस-ए एक्यूट और बी, सी व डी क्रॉनिक स्थिति होती है। वहीं हेपेटाइटिस-ई भी एक्यूट अवस्था है जो गर्भवती महिला को ज्यादा प्रभावित करती है। रोग से बचाव के लिए उम्र के विभिन्न पड़ाव पर हेपेटाइटिस-ए, बी का टीका प्रमुख रूप से लगवाएं। इन्हें है खतरा-स
Oppo Reno 2 के बारे में मिली नई जानकारी, होंगे ये फीचर

Oppo Reno 2 के बारे में मिली नई जानकारी, होंगे ये फीचर

Indian Technology
चीन की कंपनी ओप्पो अगले सप्ताह 28 को भारत में अपना नया स्मार्टपोन ओप्पो रेनो 2 लॉन्च करने जा रही है। कंपनी ने खुद सत्यापित कर दिया है कि वह उस फोन में स्नैपड्रैगन 730जी प्रोसेससर और 4000 एमएएच की... Live Hindustan Rss feed
इन योगासनों से मजबूत होंगे शरीर के जोड़, इनके बारे में जानें

इन योगासनों से मजबूत होंगे शरीर के जोड़, इनके बारे में जानें

Health
किसी रोग के कारण या फिर मौसम में होने वाले बदलाव से अक्सर लोगों को जोड़ों में दर्द की समस्या रहती है और वे दर्द निवारक ले लेते हैं। जिनसे शरीर को नुकसान पहुंचता है। इसके अलावा जोड़ों को आराम पहुंचाने के लिए कुछ योगासनों का अभ्यास कर सकते हैं। इनसे जोड़ों के दर्द में आराम मिलेगा। वीरासन-ऐसे करें : वज्रासन यानी घुटने के बल बैठने के बाद एड़ियों पर कूल्हों को टिकाकर बैठना। इसके बाद इस अवस्था में बैठे रहने के दौरान पहले दाहिने पैर को दाहिने कूल्हे से बाहर निकालकर दाहिनी जांघ के पास रखें। ऐसा बाएं पैर के साथ भी करें। इस दौरान कूल्हे जमीन को छूने चाहिए। हाथों को घुटनों पर रखें। क्षमतानुसार इस स्थिति में बैठकर सामान्य हो जाएं।ये न करें : हृदय संबंधी किसी प्रकार की समस्या होने या घुटने व टखने में चोट है तो इसे न करें।फायदे : यह जोड़ों में खिंचाव लाता है जिससे दर्द कम होता है। पाचन में सुधार होता है
मानसून में इन रोगों से एेसे करें बचाव, जानें इनके बारे में

मानसून में इन रोगों से एेसे करें बचाव, जानें इनके बारे में

Health
मानसून दस्तक दे चुका है। रुक-रुककर हो रही बारिश ने गर्मी से राहत दिलाई है लेकिन उमस बनी हुई है। ऋतु चक्र बदलने से मौसमी बीमारियों की आशंका भी बढ़ जाती है। बारिश के बाद ठहरे पानी में पनपने वाले मच्छर डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया जैसे रोगों का कारण बनते हैं। लक्षणों व रोगी की स्थिति के अनुसार दवाएं दी जाती हैं। मलेरिया - इस रोग में प्लाज्मोडियम परजीवी के संक्रमित मादा एनाफिलीज मच्छर के काटने से रोगाणु व्यक्ति के खून में फैलते हैं। लक्षण मच्छर काटने के 10वें दिन शुरू होकर 4सप्ताह तक रहते हैं।लक्षण: बुखार आना मुख्य लक्षण है। पेटदर्द, कंपकंपी, खांसी-जुकाम, उल्टी, हाइपोथर्मिया और तेज सांस चलना। चिकनगुनिया - चिकनगुनिया का अर्थ है 'हड्डी टूटने जैसा दर्द। यह वायरल बुखार एडीज मच्छर के काटने से होता है। इस रोग में मरीज के जोड़ों में असहनीय दर्द होता है। संक्रमित होने के एक हफ्ते में कमजोरी आने लगती है।
नशे के बुरे प्रभावों बारे सर्वहित्तकारी स्कूल के छात्रों को किया जागरूक

नशे के बुरे प्रभावों बारे सर्वहित्तकारी स्कूल के छात्रों को किया जागरूक

Punjabi Politics
सर्वहित्तकारी सीनियर सेकंडरी स्कूल तपा में स्कूल प्रिंसिपल राकेश गुप्ता के नेतृत्व में बड्डी प्रोग्राम के तहत नशे के बुरे प्रभावों संबंधित सेमिनार लगाया गया। जिसमें 9वीं से 12वीं क्लास तक के विद्यार्थियों ने भाग लिया। कैंप में स्कूल प्रिंसिपल ने बच्चों को नशों के बुरे प्रभावों संबंधित बताया। उन्होंने विद्यार्थियों को लोग भलाई के कामों में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेने की प्रेरणा दी। इस समय धरमिन्दर सिंह, राजेश जिन्दल, शबीना शर्मा, अनीता बांसल, रंजू बाला, बलजिन्दर सिंह, कृष्ण लाल आदि उपस्थित था। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today Dainik Bhaskar